The New Testament of our Lord and Saviour Jesus Christ

Matthew 1

1 यीशु मसीहक वंशावली एहि तरहेँ अछि। ओ दाऊदक वंशज छलाह, आ दाऊद अब्राहमक वंशज । 2 अब्राहम सँ इसहाकक जन्‍म भेलनि। इसहाक सँ याकूबक, आ याकूब सँ यहूदा और हुनकर भाय सभक जन्‍म भेलनि। 3 यहूदा सँ पेरस और जेरहक जन्‍म भेलनि, जिनकर सभक मायक नाम तामार छलनि। पेरस सँ हेस्रोनक आ हेस्रोन सँ अरामक जन्‍म भेलनि। 4 अराम सँ अमीनादाबक, अमीनादाब सँ नहशोनक आ नहशोन सँ सलमोनक जन्‍म भेलनि। 5 सलमोन सँ बोअजक जन्‍म भेलनि, जिनकर माय राहाब छलीह। बोअज सँ ओबेदक जन्‍म भेलनि, जिनकर माय रूथ छलीह। ओबेद सँ यिशयक जन्‍म भेलनि। 6 यिशय सँ राजा दाऊदक जन्‍म भेलनि। दाऊद सँ सुलेमानक जन्‍म भेलनि। सुलेमानक माय पहिने उरियाहक स्‍त्री भेल छलीह। 7 सुलेमान सँ रेहोबामक, रेहोबाम सँ अबियाहक, और अबियाह सँ आसाक जन्‍म भेलनि। 8 आसा सँ यहोशाफातक, यहोशाफात सँ योरामक, आ योराम सँ उजियाहक जन्‍म भेलनि। 9 उजियाह सँ योतामक, योताम सँ आहाजक, और आहाज सँ हिजकियाहक जन्‍म भेलनि। 10 हिजकियाह सँ मनश्‍शेक, मनश्‍शे सँ आमोनक, और आमोन सँ योशियाहक जन्‍म भेलनि। 11 जाहि समय मे इस्राएली सभ बन्‍दीक रूप मे बेबिलोन देश लऽ जायल गेलाह, ताहि समय मे योशियाह सँ यकोन्‍याह आ हुनकर भाय सभक जन्‍म भेलनि। 12 इस्राएली सभ केँ बेबिलोन मे लऽ जायल गेलाक बाद यकोन्‍याह सँ शालतिएलक, आ शालतिएल सँ जरुब्‍बाबेलक जन्‍म भेलनि। 13 जरुब्‍बाबेल सँ अबीहूदक, अबीहूद सँ एलयाकीमक, और एलयाकीम सँ अजोरक जन्‍म भेलनि। 14 अजोर सँ सदोकक, सदोक सँ अखीमक, और अखीम सँ एलिहूदक जन्‍म भेलनि। 15 एलिहूद सँ एलिआजरक, एलिआजर सँ मत्तानक, और मत्तान सँ याकूबक जन्‍म भेलनि। 16 याकूब सँ यूसुफक जन्‍म भेलनि, जे मरियमक पति भेलाह, आ मरियम सँ यीशुक जन्‍म भेलनि जे “मसीह” कहबैत छथि। 17 एहि तरहेँ गनला सँ अब्राहम सँ दाऊद धरि चौदह पीढ़ी, दाऊद सँ बेबिलोनक बन्‍दी जीवन धरि चौदह पीढ़ी आ बेबिलोनक बन्‍दी जीवन सँ उद्धारकर्ता-मसीह धरि चौदह पीढ़ी होइत अछि। 18 यीशु मसीहक जन्‍मक वृत्तान्‍त एना अछि—हुनकर माय मरियमक विवाह यूसुफ सँ होयब निश्‍चित भेल रहनि। मुदा हुनका सभक वैवाहिक जीवनक सम्‍पर्क होयबा सँ पहिनहि मरियम परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍मा द्वारा गर्भवती भऽ गेलीह। 19 हुनकर वर यूसुफ धार्मिक विचारक लोक होयबाक कारणेँ, मरियमक कोनो तरहक बदनामी नहि होनि, से सोचि, हुनका चुप-चाप त्‍यागि देबाक विचार कयलनि। 20 ओ ई बात मोने-मोन सोचिए रहल छलाह कि परमेश्‍वरक एकटा स्‍वर्गदूत सपना मे दर्शन दऽ कऽ हुनका कहलथिन जे, “हौ दाऊदक वंशज यूसुफ, तोँ मरियम केँ अपन स्‍त्री मानि अपना लग आनऽ सँ नहि डेराह! कारण, जे हुनका गर्भ मे छनि से परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक दिस सँ छनि। 21 ओ एकटा पुत्र केँ जन्‍म देतीह, आ तोँ हुनकर नाम यीशु रखिहह, किएक तँ ओ अपन लोक सभ केँ ओकरा सभक पाप सँ मुक्‍ति देथिन।” 22 ई सभ एहि लेल भेल जे, परमेश्‍वरक बात पूरा होअय जे ओ अपन प्रवक्‍ताक माध्‍यम सँ कहने छलाह— 23 “देखह, एक कुमारि कन्‍या गर्भवती होयतीह, ओ एक पुत्र केँ जन्‍म देतीह आ हुनकर नाम ‘इम्‍मानुएल’ राखल जयतनि,” जकर अर्थ अछि, “परमेश्‍वर हमरा सभक संग छथि।” 24 तखन यूसुफ निन्‍द सँ जागि गेलाह आ परमेश्‍वरक स्‍वर्गदूतक आज्ञानुसार मरियम केँ अपना पत्‍नीक रूप मे अपना ओहिठाम लऽ अनलथिन। 25 ओ मरियमक संग वैवाहिक जीवनक सम्‍बन्‍ध ताबत धरि स्‍थापित नहि कयलनि जाबत धरि मरियम पुत्र केँ जन्‍म नहि दऽ देलथिन। पुत्रक जन्‍म भेला पर यूसुफ हुनकर नाम यीशु रखलथिन।

Matthew 2

1 राजा हेरोदक समय मे जहिया यहूदिया प्रदेशक बेतलेहम गाम मे यीशुक जन्‍म भेलनि, तहिया पूब देशक ज्‍योतिषी सभ यरूशलेम नगर मे अयलाह। 2 ओ सभ लोक सभ सँ पुछलथिन जे, “यहूदी सभक नवजन्‍मल राजा कतऽ छथि? कारण, हम सभ पूब मे हुनकर तारा देखलहुँ आ हुनकर दर्शन करबाक लेल आयल छी।” 3 जखन राजा हेरोद ई समाचार सुनलनि तँ ओ अपने, आ यरूशलेमक सभ निवासी सेहो, घबड़ा गेलाह। 4 राजा हेरोद यहूदी सभक मुख्‍यपुरोहित लोकनि आ धर्मशिक्षक सभ केँ जमा कऽ कऽ पुछलथिन जे, “आबऽ वला उद्धारकर्ता-मसीहक जन्‍म कतऽ होयबाक चाहियनि?” 5 एहि पर ओ सभ कहलथिन जे, “यहूदिया प्रदेशक बेतलेहम गाम मे, कारण, धर्मशास्‍त्र मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता ई लिखने छथि जे, 6 ‘हे बेतलेहम, यहूदिया प्रदेशक गाम! तोँ यहूदिया प्रदेशक मुख्‍य नगर सभ मे सँ ककरो सँ कम नहि छह। कारण, तोरा मे सँ एक शासन करऽ वलाक जन्‍म होयतनि, जे हमर प्रजा इस्राएलक रखबार आ बाट देखौनिहार होयताह।’” 7 तखन राजा हेरोद ज्‍योतिषी सभ केँ बजा कऽ एकान्‍त मे पूछ-ताछ कऽ एहि बातक पता लगा लेलनि जे तारा हुनका सभ केँ ठीक कोन समय मे देखाइ देने छलनि। 8 ओ हुनका सभ केँ ई कहि कऽ बेतलेहम पठौलथिन जे, “जाउ आ बालकक सम्‍बन्‍ध मे ठीक-ठीक पता लगाउ, और जखन ओ भेटि जाथि तँ हमरा खबरि करू, जाहि सँ हमहूँ जा कऽ हुनकर दर्शन करियनि।” 9 राजाक बात सुनि ओ सभ विदा भऽ गेलाह। जे तारा हुनका सभ केँ पूब मे देखाइ देने छलनि से हुनका सभक आगाँ-आगाँ बढ़ैत जाइत फेर देखाइ देलक, और जाहि घर मे ओ बालक छलाह ताहि सँ उपर पहुँचि रूकि गेल। 10 ओ सभ तारा केँ देखि अति आनन्‍दित भेलाह। 11 घर मे प्रवेश कऽ ओ सभ बालक केँ हुनकर माय मरियमक संग देखलथिन। ओ सभ निहुड़ि कऽ बालक केँ प्रणाम कयलथिन और अपन-अपन बाकस खोलि सोन, धूप आ सुगन्‍धित तेलक चढ़ौना सभ बालक केँ चढ़ौलथिन। 12 तकरबाद सपना मे परमेश्‍वरक ई आदेश पाबि जे, राजा हेरोद लग घूमि कऽ नहि जाउ, ओ सभ दोसर रस्‍ता सँ अपन देश घूमि गेलाह। 13 ज्‍योतिषी सभक चल गेलाक बाद परमेश्‍वरक एक स्‍वर्गदूत सपना मे यूसुफ केँ दर्शन देलथिन आ कहलथिन, “उठह, बालक आ हुनकर माय केँ लऽ कऽ एतऽ सँ भागह आ मिस्र देश मे चल जाह। जाबत तक हम घूमि अयबाक लेल नहि कहिअह ताबत ओतहि रहिहह। कारण, हेरोद एहि बालकक हत्‍या करबाक लेल हिनकर खोज कराबऽ वला अछि।” 14 यूसुफ उठलाह और रातिए मे बालक आ हुनकर माय केँ लऽ कऽ मिस्र देशक लेल विदा भऽ गेलाह। 15 ओ राजा हेरोदक मृत्‍यु तक ओतहि रहलाह। एहि तरहेँ परमेश्‍वर जे बात अपन प्रवक्‍ताक माध्‍यम सँ कहने छलाह से पूरा भेल जे, “हम मिस्र देश सँ अपना पुत्र केँ बजौलहुँ।” 16 जखन राजा हेरोद देखलनि जे ज्‍योतिषी सभ हुनका धोखा दऽ देलकनि तखन ओ क्रोध सँ भरि गेलाह। ओ ज्‍योतिषी सभक देल गेल सूचनाक आधार पर हिसाब लगौलनि जे बालक दू वर्षक वा ओहि सँ छोट होयबाक चाही, तेँ ओ अपना सैनिक सभ केँ पठा कऽ बेतलेहम आ ओकर लग-पास वला गाम सभक ओहि सभ बालक केँ मरबा देलनि जे सभ दू वर्षक और ओहि सँ छोट छल। 17 एहि तरहेँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यर्मियाहक माध्‍यम सँ कहल ई बात पूरा भेल जे, 18 “रामाह मे एक चीत्‍कार उठल, कन्‍ना-रोहटि और बड़का विलाप, राहेल अपन बालक सभक लेल कानि रहल अछि। ओ सान्‍त्‍वनाक बोल नहि सुनऽ चाहैत अछि, किएक तँ आब ओकर बेटा सभ जीवित नहि रहलैक।” 19 राजा हेरोदक मृत्‍युक बाद परमेश्‍वरक एकटा स्‍वर्गदूत मिस्र देश मे यूसुफ केँ सपना मे दर्शन दऽ कहलथिन, 20 “उठह, बालक आ हुनकर माय केँ लऽ कऽ इस्राएल देश चल जाह, किएक तँ जे सभ बालक केँ जान सँ मारऽ चाहैत छल से सभ आब मरि गेल अछि।” 21 यूसुफ उठलाह और बालक आ हुनकर माय केँ लऽ कऽ इस्राएल देश चल अयलाह। 22 मुदा जखन ओ सुनलनि जे अरखिलाउस अपन पिता हेरोदक मृत्‍युक बाद यहूदिया प्रदेश मे राज्‍य कऽ रहल छथि तखन ओ ओतऽ जयबा सँ डेरयलाह। ओ फेर सपना मे परमेश्‍वरक आदेश पाबि गलील प्रदेश चल गेलाह। 23 ओतऽ ओ नासरत नामक नगर मे रहऽ लगलाह। एहि तरहेँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनिक माध्‍यम सँ कहल ई बात पूरा भेल जे, “ओ नासरी कहौताह।”

Matthew 3

1 ओहि समय मे बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना यहूदिया प्रदेशक निर्जन क्षेत्र मे आबि प्रचार करऽ लगलाह जे, 2 “अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू, कारण, स्‍वर्गक राज्‍य लग आबि गेल अछि।” 3 यूहन्‍ना वैह व्‍यक्‍ति छथि जिनका सम्‍बन्‍ध मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाह कहने छलाह, “निर्जन क्षेत्र मे केओ जोर सँ आवाज दऽ रहल अछि— ‘प्रभुक लेल मार्ग तैयार करू, हुनका लेल सोझ बाट बनाउ।’” 4 यूहन्‍ना ऊँटक रोंइयाँ सँ बनल वस्‍त्र पहिरैत छलाह। ओ डाँड़ मे चमड़ाक पट्टी बन्‍हने रहैत छलाह। फनिगा आ वन वला मधु हुनकर भोजन छलनि। 5 यरूशलेम, सम्‍पूर्ण यहूदिया प्रदेश, आ यरदन नदीक लग-पास मे पड़ऽ वला सम्‍पूर्ण क्षेत्रक लोक सभ हुनका लग आयल, 6 और अपन पाप स्‍वीकार करैत यरदन नदी मे हुनका सँ बपतिस्‍मा लेलक। 7 मुदा जखन यूहन्‍ना बहुतो फरिसी आ सदुकी पंथक लोक सभ केँ बपतिस्‍मा लेबाक लेल अपना लग अबैत देखलनि तँ ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हे साँपक सन्‍तान सभ, तोरा सभ केँ परमेश्‍वरक आबऽ वला क्रोध सँ बचबाक लेल के सिखौलकह? 8 तोँ सभ जँ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयने छह, तँ तकर प्रमाण अपना व्‍यवहार द्वारा देखाबह। 9 और अपना मोन मे एना सोचि निश्‍चिन्‍त नहि रहह जे, हमर सभक कुल-पिता अब्राहम छथि, कारण, हम तोरा सभ केँ कहि दैत छिअह जे, परमेश्‍वर एहि पाथर सभ मे सँ अब्राहमक लेल सन्‍तान उत्‍पन्‍न कऽ सकैत छथि। 10 गाछक जड़ि पर कुड़हरि रखा गेल अछि। प्रत्‍येक गाछ जे नीक फल नहि दैत अछि से काटल आ आगि मे फेकल जायत। 11 “तोँ सभ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयने छह, तकर चिन्‍ह स्‍वरूप हम तोरा सभ केँ पानि सँ बपतिस्‍मा दैत छिअह, मुदा हमरा बाद मे एक गोटे आबि रहल छथि जे हमरा सँ शक्‍तिशाली छथि। हम हुनकर जुत्तो उठाबऽ जोगरक नहि छियनि। ओ तोरा सभ केँ पवित्र आत्‍मा और आगि सँ बपतिस्‍मा देथुन। 12 हुनका हाथ मे सूप छनि। ओ अपन खरिहानक अन्‍न साफ करताह और गहुम केँ बखारी मे जमा करताह, मुदा भुस्‍सा केँ ओ ओहि आगि मे जरौताह जे कहियो नहि मिझायत।” 13 तखन यीशु यूहन्‍ना सँ बपतिस्‍मा लेबाक लेल गलील सँ यरदन नदी लग अयलाह। 14 मुदा यूहन्‍ना ई कहि कऽ हुनका रोकलथिन जे, “हमरा अहीं सँ बपतिस्‍मा लेबाक आवश्‍यकता अछि, और की, अहाँ हमरा सँ लेबाक लेल आयल छी?” 15 यीशु उत्तर देलथिन, “एखन एहिना होमऽ दिअ, कारण, अपना सभक लेल यैह उचित अछि जे एही तरहेँ धार्मिकताक सभ माँग केँ पूरा करी।” तखन यूहन्‍ना हुनकर बात मानि लेलथिन। 16 बपतिस्‍मा लेलाक बाद यीशु तुरत पानि सँ बाहर अयलाह। ओही क्षण मे आकाश खुजल और ओ परमेश्‍वरक आत्‍मा केँ परबाक रूप मे अपना पर उतरैत देखलनि। 17 तखने स्‍वर्ग सँ ई आवाज सुनाइ पड़ल, “ई हमर प्रिय पुत्र छथि, हिनका सँ हम बहुत प्रसन्‍न छी।”

Matthew 4

1 तकरबाद पवित्र आत्‍मा यीशु केँ निर्जन क्षेत्र मे लऽ गेलथिन जाहि सँ शैतान द्वारा हुनका सँ पाप करयबाक कोशिश कयल जानि। 2 ओहिठाम चालिस दिन आ चालिस राति उपास कयलाक बाद यीशु भुखायल छलाह। 3 जाँचऽ वला शैतान हुनका लग अयलनि आ कहलकनि, “जँ तोँ परमेश्‍वरक पुत्र छह तँ एहि पाथर सभ केँ रोटी बनि जयबाक आज्ञा दहक।” 4 यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, ‘मनुष्‍य मात्र रोटी सँ नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक मुँह सँ निकलल प्रत्‍येक वचन सँ जीवित रहत।’” 5 तखन शैतान यीशु केँ पवित्र नगर मे लऽ गेलनि और मन्‍दिरक सभ सँ ऊँ‍च स्‍थान पर ठाढ़ कऽ कऽ कहलकनि, 6 “जँ तोँ परमेश्‍वरक पुत्र छह तँ एतऽ सँ नीचाँ कुदि जाह। कारण, धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘परमेश्‍वर तोरा लेल स्‍वर्गदूत सभ केँ आज्ञा देथिन और ओ सभ अपना कोरा मे तोरा लोकि लेथुन, जाहि सँ पयर मे पाथर सँ चोट नहि लगतह।’” 7 यीशु ओकरा कहलथिन, “इहो लिखल अछि जे, ‘अपन प्रभु-परमेश्‍वरक जाँच नहि करहुन।’” 8 तखन शैतान हुनका बहुत ऊँच पहाड़ पर लऽ गेलनि और ओतऽ सँ संसारक सभ राज्‍य आ ओकर वैभव देखबैत 9 हुनका कहलकनि, “जँ तोँ हमरा सामने निहुरबह आ हमर उपासना करबह तँ हम ई सभ तोरा दऽ देबह।” 10 यीशु ओकरा कहलथिन, “हे शैतान, हमरा सोझाँ सँ दूर हो! कारण, धर्मशास्‍त्र मे ई लिखल अछि जे, ‘अपना प्रभु-परमेश्‍वरक उपासना करहुन, और मात्र हुनके सेवा करहुन।’” 11 तकरबाद शैतान यीशु लग सँ चल गेल, और स्‍वर्गदूत सभ आबि कऽ हुनकर सेवा करऽ लगलथिन। 12 जखन यीशु सुनलनि जे बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना जहल मे बन्‍दी बना लेल गेल छथि तखन ओ गलील प्रदेश मे घूमि कऽ चल अयलाह। 13 ओ नासरत नगर केँ छोड़ि कऽ कफरनहूम नगर मे रहऽ लगलाह। ई नगर जबूलून आ नप्‍ताली कुलक भूमि-क्षेत्र मे झीलक कछेर पर अछि। 14 एहि तरहेँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक ई वचन पूरा भेल जे, 15 “हे जबूलून आ नप्‍ताली कुलक भूमि-क्षेत्र! 2 समुद्र दिस जाय वला रस्‍ता मे पड़ऽ वला यरदन नदीक ओहि पारक क्षेत्र, 2 गैर-यहूदी जाति सभक गलील प्रदेश! 16 जे सभ अन्‍हार मे बसल छल, 2 से सभ पैघ प्रकाश केँ देखलक अछि। जकरा सभ केँ मृत्‍युक अन्‍हार झँपने छलैक, 2 तकरा सभ पर इजोत चमकल अछि।” 17 ओही समय सँ यीशु प्रचार करऽ लगलाह जे, “अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू, कारण, स्‍वर्गक राज्‍य लग मे आबि गेल अछि।” 18 जखन यीशु गलील झीलक कछेर पर टहलैत छलाह तखन ओ दू भाइ केँ झील मे माछ पकड़बाक लेल जाल फेकैत देखलनि। ओ सभ मछबार छल। एकटाक नाम सिमोन, जकर दोसर नाम पत्रुस छलैक आ ओकर भायक नाम अन्‍द्रेयास छल। 19 यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ। हम अहाँ सभ केँ मनुष्‍य केँ पकड़ऽ वला मछबार बना देब।” 20 ओ सभ तुरत अपन जाल छोड़ि कऽ हुनका संग भऽ गेलनि। 21 ओतऽ सँ कनेक आगाँ बढ़लाक बाद यीशु अन्‍य दू भाय केँ देखलनि—याकूब आ यूहन्‍ना। ओ सभ जबदी नामक व्‍यक्‍तिक बेटा छल आ अपना बाबूक संग नाव मे जाल सरिअबैत छल। यीशु ओकरा सभ केँ अपना संग अयबाक लेल कहलथिन। 22 ओहो सभ तुरत नाव आ अपन बाबू केँ छोड़ि कऽ यीशुक संग भऽ गेलनि। 23 यीशु सम्‍पूर्ण गलील प्रदेश मे घूमि-घूमि कऽ यहूदी सभक सभाघर सभ मे शिक्षा देबऽ लगलाह, परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार सुनाबऽ लगलाह, आ लोक सभ केँ सभ तरहक बिमारी सँ छुटकारा देबऽ लगलाह। 24 एहि तरहेँ हुनकर यश सम्‍पूर्ण सीरिया प्रदेश मे पसरि गेलनि। लोक बिमार सभ केँ जे विभिन्‍न प्रकारक रोग वा कष्‍ट सँ पीड़ित छल, वा जकरा सभ मे दुष्‍टात्‍मा छलैक, मिर्गी सँ पीड़ित छल वा लकवा मारल छल—सभ केँ यीशु लग अनैत छल, और यीशु ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कऽ दैत छलथिन। 25 गलील प्रदेश, “दस नगर” क्षेत्र, यरूशलेम नगर, यहूदिया प्रदेश और यरदन नदीक ओहि पारक क्षेत्र सँ लोकक विशाल भीड़ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि।

Matthew 5

1 लोकक भीड़ केँ देखि कऽ यीशु पहाड़ पर चढ़ि गेलाह। ओ जखन बैसलाह तँ शिष्‍य सभ हुनका लग अयलथिन। 2 यीशु एहि तरहेँ हुनका सभ केँ उपदेश देबऽ लगलथिन— 3 “धन्‍य अछि ओ सभ जे अपना केँ आत्‍मिक रूप सँ असहाय बुझैत अछि, 2 किएक तँ स्‍वर्गक राज्‍य ओकरे सभक छैक। 4 धन्‍य अछि ओ सभ जे शोक करैत अछि, 2 किएक तँ ओ सभ सान्‍त्‍वना पाओत। 5 धन्‍य अछि ओ सभ जे नम्र अछि, 2 किएक तँ ओ सभ पृथ्‍वीक उत्तराधिकारी होयत। 6 धन्‍य अछि ओ सभ जे धार्मिकताक भूखल-पियासल अछि, 2 किएक तँ ओ सभ तृप्‍त कयल जायत। 7 धन्‍य अछि ओ सभ जे दयावान अछि, 2 किएक तँ ओकरा सभ पर दया कयल जयतैक। 8 धन्‍य अछि ओ सभ जकर हृदय शुद्ध छैक, 2 किएक तँ ओ सभ परमेश्‍वर केँ देखत। 9 धन्‍य अछि ओ सभ जे मेल-मिलाप करबैत अछि, 2 किएक तँ ओ सभ परमेश्‍वरक पुत्र कहाओत। 10 धन्‍य अछि ओ सभ जे धार्मिक रहबाक कारणेँ सताओल जाइत अछि, 2 किएक तँ स्‍वर्गक राज्‍य ओकरे सभक छैक। 11 “धन्‍य छी अहाँ सभ, जखन लोक सभ हमरा कारणेँ अहाँ सभ केँ अपमानित करत, सताओत और झूठ बाजि-बाजि कऽ अहाँ सभक विरोध मे लोक केँ सभ तरहक अधलाह बात कहतैक। 12 तखन खुशी होउ और आनन्‍द मनाउ, किएक तँ अहाँ सभक लेल स्‍वर्ग मे बड़का इनाम राखल अछि। एही तरहेँ लोक परमेश्‍वरक ओहि प्रवक्‍ता सभ केँ सेहो सतौने छलनि, जे सभ अहाँ सभ सँ पहिने प्राचीन समय मे छलाह। 13 “अहाँ सभ पृथ्‍वीक नून छी। मुदा जँ नून मे नूनक स्‍वाद समाप्‍त भऽ जाइक तँ ओ कोन वस्‍तु सँ फेर नूनगर बनाओल जा सकत? ओकरा फेकि देल जाय, आ लोक ओकरा पयर सँ धाँगय, से छोड़ि ओ दोसर कोन काजक रहि जायत? 14 “अहाँ सभ संसारक प्रकाश छी। पहाड़ परक नगर नुकायल नहि रहि सकैत अछि। 15 लोक डिबिया लेसि कऽ पथिया सँ नहि झँपैत अछि, बल्‍कि लाबनि पर रखैत अछि, और ओ डिबिया घर मे सभक लेल प्रकाश दैत छैक। 16 एहि तरहेँ अहूँ सभ अपन प्रकाश लोकक बीच चमकाउ, जाहि सँ लोक अहाँ सभक नीक काज देखि कऽ, अहाँक पिताक, जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनकर स्‍तुति करनि। 17 “ई नहि सोचू जे हम मूसा द्वारा देल धर्म-नियम अथवा परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख सभ केँ रद्द करबाक लेल आयल छी। हम ओहि सभ केँ रद्द नहि, बल्‍कि पूरा करबाक लेल आयल छी। 18 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, जाबत तक आकाश आ पृथ्‍वी समाप्‍त नहि होयत, ताबत तक धर्म-नियम मे लिखल सभ बात बिनु पूरा भेने ओकर एक मात्रा वा एक बिन्‍दुओ नहि मेटायत। 19 जे केओ एहि आज्ञा मे सँ छोटो सँ छोट आज्ञाक उल्‍लंघन करत और दोसरो लोक केँ तहिना करऽ लेल सिखाओत, से स्‍वर्गक राज्‍य मे सभ सँ छोट कहाओत। मुदा जे केओ एहि आज्ञा सभक पालन करत आ दोसरो लोक केँ तहिना करऽ लेल सिखाओत, से स्‍वर्गक राज्‍य मे पैघ कहाओत। 20 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, परमेश्‍वरक नजरि मे धार्मिक ठहरबाक लेल जे बात आवश्‍यक अछि, से जँ अहाँ सभ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ सँ बढ़ि कऽ पूरा नहि करब, तँ अहाँ सभ स्‍वर्गक राज्‍य मे किन्‍नहुँ नहि प्रवेश करब। 21 “अहाँ सभ सुनने छी जे प्राचीन काल मे पुरखा सभ केँ कहल गेल छलनि, ‘हत्‍या नहि करह, और जे केओ हत्‍या करत तकरा कचहरी मे दण्‍डक योग्‍य ठहराओल जयतैक।’ 22 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ अपना भाय पर क्रोधो करत तकरा कचहरी मे दण्‍डक योग्‍य ठहराओल जयतैक। जे अपन भाय केँ ‘रे मूर्ख’ कहत, तकरा धर्म-महासभा मे ठाढ़ होमऽ पड़तैक, और जे केओ अपना भाय केँ सराप देत, से नरकक आगि मे खसयबा जोगरक अछि। 23 “तेँ जँ अहाँ अपन चढ़ौना प्रभुक वेदी पर अर्पण कऽ रहल छी आ ओतहि अहाँ केँ मोन पड़ल जे अहाँक भाय केँ अहाँ सँ कोनो सिकायत छैक, 24 तँ अपन चढ़ौना वेदीक कात मे राखि दिअ आ पहिने जा कऽ अपना भाय सँ मेल करू और तकरबाद आबि कऽ अपन चढ़ौना चढ़ाउ। 25 “जखन अहाँक विरोधी अहाँ केँ कचहरी मे लऽ जा रहल अछि, तँ रस्‍ते मे ओकरा संग जल्‍दी सँ मेल-मिलाप कऽ लिअ। एना नहि होअय जे विरोधी अहाँ केँ न्‍यायाधीशक जिम्‍मा मे लगा दय आ न्‍यायाधीश सिपाहीक जिम्‍मा मे, और अहाँ केँ जहल मे राखि देल जाय। 26 हम अहाँ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जाबत तक अहाँ पाइ-पाइ कऽ सधा नहि देबैक, ताबत तक अहाँ ओतऽ सँ नहि छुटब। 27 “अहाँ सभ सुनने छी जे कहल गेल, ‘परस्‍त्रीगमन नहि करह।’ 28 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे कोनो पुरुष कोनो स्‍त्री केँ अधलाह इच्‍छा सँ देखैत अछि, से तखने अपना मोन मे ओकरा संग परस्‍त्रीगमन कऽ लेलक। 29 जँ अहाँक दहिना आँखि अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा निकालि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय। 30 जँ अहाँक दहिना हाथ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय। 31 “कहल गेल अछि जे, ‘जे पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, से तलाकनामा लिखि कऽ दैक।’ 32 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्‍त्री केँ दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखबाक कारण केँ छोड़ि कऽ जँ कोनो दोसर कारण सँ कोनो पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, तँ ओ अपना स्‍त्री केँ परपुरुषगमन करऽ वाली बनबाक लेल विवश करैत अछि, और जे केओ ओहि तलाक देल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि। 33 “अहाँ सभ इहो सुनने छी जे प्राचीन समयक पुरखा सभ केँ कहल गेल छलनि जे, ‘सपत खा कऽ जे वचन देलह तकरा नहि तोड़िहह, बल्‍कि प्रभु सँ खायल अपन सपत केँ पूरा करिहह।’ 34 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे सपत खयबे नहि करू—ने स्‍वर्गक नाम लऽ कऽ, कारण ओ परमेश्‍वरक सिंहासन छनि, 35 ने पृथ्‍वीक नाम लऽ कऽ, कारण ओ परमेश्‍वरक पयर तरक चौकी छनि, ने यरूशलेमक, कारण ओ महान् राजाक नगर छनि, 36 और ने अपन माथक, कारण अहाँ अपन एकोटा केश केँ ने तँ उज्‍जर आ ने कारी कऽ सकैत छी। 37 अहाँ सभ जखन ‘हँ’ कहऽ चाहैत छी, तँ बस, ‘हँ’ए कहू, जखन ‘नहि’ कहऽ चाहैत छी, तँ ‘नहि’ए कहू। एहि सँ बेसी जे किछु बजैत छी से शैतान सँ प्रेरित बात अछि। 38 “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘केओ जँ ककरो आँखि फोड़य तँ ओकरो आँखि फोड़ल जाय, आ केओ जँ ककरो दाँत तोड़य तँ ओकरो दाँत तोड़ल जाय।’ 39 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जँ कोनो दुष्‍ट लोक अहाँ केँ किछु करओ, तँ ओकर विरोध नहि करू। केओ जँ अहाँक दहिना गाल पर थप्‍पड़ मारय तँ ओकरा सामने दोसरो गाल कऽ दिऔक। 40 केओ जँ अहाँ पर मोकदमा कऽ अहाँक कुर्ता लेबऽ चाहय तँ ओकरा ओढ़नो लेबऽ दिऔक। 41 जँ केओ अहाँ सँ कोनो वस्‍तु जबरदस्‍ती एक कोस उघबाबय तँ अहाँ दू कोस उघि दिऔक। 42 जे केओ अहाँ सँ किछु मँगैत अछि तकरा दिऔक, आ जे केओ अहाँ सँ पैंच लेबऽ चाहैत अछि तकरा सँ मुँह नहि घुमाउ। 43 “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘अपना पड़ोसी सँ प्रेम करह आ अपन शत्रु सँ दुश्‍मनी राखह।’ 44 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू आ अहाँ केँ जे सभ सतबैत अछि तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू। 45 तखने अहाँ स्‍वर्ग मे रहऽ वला अपन पिताक सन्‍तान बनब। कारण, ओ दुष्‍ट आ सज्‍जन दूनू पर अपन सूर्यक प्रकाश दैत छथि, आ धर्मी और अधर्मी दूनू पर वर्षा करबैत छथि। 46 “जँ अहाँ मात्र ओकरे सभ सँ प्रेम करी जे अहाँ सँ प्रेम करैत अछि तँ अहाँ केँ परमेश्‍वर सँ की इनाम भेटत? की कर असूल कयनिहार ठकहारो सभ एहिना नहि करैत अछि? 47 आ जँ अहाँ मात्र अपने लोक सभक कुशल-मङलक पुछारी करैत छी तँ अहाँ कोन बड़का काज करैत छी? की परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ सेहो एहिना नहि करैत अछि? 48 तेँ अहाँ सभ सिद्ध बनू जेना स्‍वर्ग मे रहऽ वला अहाँ सभक पिता परमेश्‍वर सिद्ध छथि।

Matthew 6

1 “होसियार रहू, लोक केँ देखयबाक लेल अपन ‘धर्म-कर्म’ नहि करू, नहि तँ अहाँ केँ अपन पिता सँ, जे स्‍वर्ग मे छथि, कोनो फल नहि भेटत। 2 “अहाँ जखन गरीब सभ केँ दान दैत छी तखन तकर ढोल नहि पिटू, जेना पाखण्‍डी लोक सभाघर मे और रस्‍ता सभ मे करैत रहैत अछि, जाहि सँ लोक ओकर प्रशंसा करैक। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, लोकक प्रशंसा पाबि ओ सभ ओहि सँ बेसी कोनो इनामक बाट बेकार ताकत। 3 “मुदा अहाँ जखन दान करी तखन अहाँक ई काज एतेक गुप्‍त होअय जे अहाँक बामा हाथ सेहो नहि जानय जे अहाँक दहिना हाथ की कऽ रहल अछि। तखन अहाँक पिता जे गुप्‍त काज केँ सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ तकर प्रतिफल देताह। 5 “जखन परमेश्‍वर सँ प्रार्थना करी, तँ पाखण्‍डी जकाँ नहि बनू, किएक तँ ओ सभ सभाघर सभ मे आ चौक सभ पर ठाढ़ भऽ कऽ प्रार्थना कयनाइ बहुत पसन्‍द करैत अछि, जाहि सँ लोक ओकरा सभ केँ देखैक। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, लोक ओकरा सभ केँ देखलक, ओहि सँ बेसी ओ सभ कोनो इनामक बाट बेकार ताकत। 6 “मुदा अहाँ जखन प्रार्थना करी, तँ अपना कोठरी मे जाउ, केबाड़ बन्‍द करू आ अपना पिता, जिनका केओ नहि देखि सकैत छनि, तिनका सँ प्रार्थना करू। अहाँक पिता जे गुप्‍त काज सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ तकर प्रतिफल देताह। 7 प्रार्थना करैत अहाँ सभ ओहि जाति सभक लोक जकाँ जे सभ जीवित परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि रट लगा कऽ बात नहि दोहरबैत रहू। ओ सभ तँ सोचैत अछि जे बहुत बजला सँ ओकर प्रार्थना सुनल जयतैक। 8 अहाँ सभ ओकरा सभ जकाँ नहि बनू। अहाँ सभक पिता तँ अहाँ सभक मँगनाइ सँ पहिनहि बुझैत रहैत छथि जे अहाँ सभ केँ कोन वस्‍तुक आवश्‍यकता अछि। 9 तेँ एहि तरहेँ प्रार्थना करू— ‘हे हमर सभक पिता, अहाँ जे स्‍वर्ग मे विराजमान छी, अहाँक नाम पवित्र मानल जाय, 10 अहाँक राज्‍य आबय, अहाँक इच्‍छा जहिना स्‍वर्ग मे पूरा होइत अछि, तहिना पृथ्‍वी पर सेहो पूरा होअय। 11 हमरा सभ केँ आइ भोजन दिअ, जे दिन प्रति दिन हमरा सभक लेल आवश्‍यक अछि। 12 हमर सभक अपराध क्षमा करू, जहिना हमहूँ सभ अपन अपराधी सभ केँ क्षमा कयने छिऐक। 13 हमरा सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सँ दूर राखू, और दुष्‍ट सँ हमरा सभक रक्षा करू। [किएक तँ राज्‍य, शक्‍ति आ महिमा युगानुयुग अहींक अछि, आमीन।] ‘ 14 अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा करब तँ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि सेहो अहूँ सभक अपराध क्षमा करताह। 15 मुदा अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा नहि करबैक, तँ अहाँ सभक पिता सेहो अहाँ सभक अपराध क्षमा नहि करताह। 16 “अहाँ सभ जखन उपास करी तखन पाखण्‍डी सभ जकाँ मुँह लटकौने नहि रहू। कारण, ओ सभ अपन मुँह म्‍लान कयने रहैत अछि जाहि सँ लोक सभ बुझैक जे ओ उपास कयने अछि। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, लोक बुझलक, ओहि सँ बेसी ओ सभ कोनो इनामक बाट बेकार ताकत। 17 मुदा अहाँ जखन उपास करी तँ तेल-कुड़ लिअ आ अपन मुँह-हाथ धोउ, 18 जाहि सँ लोक नहि बुझय जे अहाँ उपास कयने छी, बल्‍कि मात्र अहाँक पिता, जिनका केओ नहि देखि सकैत छनि, से बुझथि। एहि सँ अहाँक पिता जे गुप्‍त काज केँ सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ प्रतिफल देताह। 19 “पृथ्‍वी पर अपना लेल धन जमा नहि करू जतऽ कीड़ा आ बीझ ओकरा नष्‍ट कऽ दैत अछि, और चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी कऽ लैत अछि। 20 बल्‍कि अपना लेल स्‍वर्ग मे धन जमा करू, जतऽ ने कीड़ा आ ने बीझ ओकरा नष्‍ट करैत अछि, आ ने चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी करैत अछि। 21 कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत। 22 “शरीरक डिबिया आँखि अछि! जँ अहाँक आँखि ठीक अछि तँ अहाँक सम्‍पूर्ण शरीर इजोत मे रहत। 23 मुदा जँ अहाँक आँखि खराब भऽ जाय तँ अहाँक सम्‍पूर्ण शरीर अन्‍हार मे भऽ जायत, आ जँ अहाँक भितरी प्रकाश अन्‍हार बनि जाय तँ ई अन्‍हार कतेक भयंकर होयत! 24 “कोनो खबास दूटा मालिकक सेवा एक संग नहि कऽ सकैत अछि। कारण, ओ एकटा सँ घृणा करत आ दोसर सँ प्रेम, अथवा पहिल केँ खूब मानत और दोसर केँ तुच्‍छ बुझत। अहाँ सभ परमेश्‍वर आ धन-सम्‍पत्ति दूनूक सेवा नहि कऽ सकैत छी। 25 “एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना प्राणक लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम की खायब वा की पीब, आ ने शरीरक लेल चिन्‍ता करू जे की पहिरब। की भोजन सँ प्राण, आ वस्‍त्र सँ शरीर बेसी मूल्‍यवान नहि अछि? 26 आकाशक चिड़ै सभ केँ देखू—ओ सभ ने बाउग करैत अछि, ने कटनी करैत अछि आ ने कोठी मे अन्‍न रखैत अछि, मुदा तैयो अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि से ओकर सभक पालन करैत छथिन। की अहाँ सभ चिड़ै सभ सँ बहुत मूल्‍यवान नहि छी? 27 चिन्‍ता कऽ कऽ अहाँ सभ मे सँ के अपना उमेर केँ एको घड़ी बढ़ा सकैत छी? 28 “वस्‍त्रक लेल अहाँ चिन्‍ता किएक करैत छी? जंगलक फूल सभ केँ देखू जे ओ सभ कोन तरहेँ फुलाइत अछि। ओ सभ ने खटैत अछि, आ ने चर्खा कटैत अछि। 29 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, राजा सुलेमान सेहो अपन राजसी वस्‍त्र पहिरि कऽ एहि फूल सन सुन्‍दर नहि लगैत छलाह। 30 जँ परमेश्‍वर मैदानक घास, जे आइ अछि आ काल्‍हि आगि मे जराओल जायत, तकरा एहि तरहेँ हरियरी सँ भरल रखैत छथि, तँ ओ अहाँ सभ केँ आओर किएक नहि पहिरौताह-ओढ़ौताह? अहाँ सभ केँ कतेक कम विश्‍वास अछि! 31 “एहि लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम सभ की खायब, की पीब वा की पहिरब। 32 कारण, एहि सभ बातक पाछाँ तँ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ पड़ल रहैत अछि। अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि से जनैत छथि जे अहाँ सभ केँ एहि बात सभक आवश्‍यकता अछि। 33 बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत। 34 “तेँ काल्‍हि की होयत तकर चिन्‍ता नहि करू, किएक तँ काल्‍हि अपन चिन्‍ता अपने कऽ लेत। आजुक लेल तँ अजुके दुःख बहुत अछि।

Matthew 7

1 “ककरो दोषी नहि ठहराउ जाहि सँ अहूँ सभ दोषी नहि ठहराओल जाइ। 2 जाहि तरहेँ अहाँ दोषी ठहरायब ताहि तरहेँ अहूँ दोषी ठहराओल जायब, आ जाहि नाप सँ अहाँ नापब, सैह नाप अहूँ पर लागू होयत। 3 “अहाँ अपन भायक आँखि मेहक काठक कुन्‍नी किएक देखैत छी? की अपना आँखि मेहक ढेंग नहि सुझाइत अछि? 4 अहाँ अपना भाय केँ कोना कहैत छी जे, ‘आउ, हम अहाँक आँखि मे सँ कुन्‍नी निकालि दैत छी,’ जखन कि अहाँक अपने आँखि मे ढेंग अछि? 5 हे पाखण्‍डी, पहिने अपना आँखि मेहक ढेंग निकालि लिअ, तखने अपन भायक आँखि मेहक कुन्‍नी निकालबाक लेल अहाँ ठीक सँ देखि सकब। 6 “पवित्र वस्‍तु कुकुर सभ केँ नहि दिअ, आ ने अपन हीरा-मोती सुगरक आगाँ फेकू, नहि तँ एना नहि होअय जे ओ सभ पयर सँ ओकरा धाँगि दय आ घूमि कऽ अहाँ सभ केँ चीरि-फाड़ि दय। 7 “माँगू तँ अहाँ सभ केँ देल जायत। ताकू तँ अहाँ सभ केँ भेटत। ढकढकाउ तँ अहाँ सभक लेल खोलल जायत। 8 कारण, जे केओ मँगैत अछि, से प्राप्‍त करैत अछि; जे केओ तकैत अछि, तकरा भेटैत छैक, और जे केओ ढकढकबैत अछि, तकरा लेल खोलल जाइत छैक। 9 “की अहाँ सभ मे सँ केओ एहन लोक छी जे जँ अहाँक बेटा अहाँ सँ रोटी माँगय तँ ओकरा पाथर दिऐक? 10 वा माछ माँगय तँ साँप दिऐक? 11 जखन अहाँ सभ पापी होइतो अपना बच्‍चा सभ केँ नीक वस्‍तु सभ देनाइ जनैत छी, तँ अहाँ सभ सँ बढ़ि कऽ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, से मँगनिहार सभ केँ नीक वस्‍तु सभ किएक नहि देथिन? 12 “जेहन व्‍यवहार अहाँ चाहैत छी जे लोक अहाँक संग करय, तेहने व्‍यवहार अहूँ लोकक संग करू, किएक तँ धर्म-नियमक आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक शिक्षाक निचोड़ यैह अछि। 13 “छोट द्वारि सँ प्रवेश करू, कारण नमहर अछि ओ द्वारि आ चौरगर अछि ओ बाट जे विनाश मे लऽ जाइत अछि, और बहुतो लोक ओहि द्वारि सँ प्रवेश करैत अछि। 14 मुदा छोट अछि ओ द्वारि आ कम चौड़ा अछि ओ बाट जे जीवन मे लऽ जाइत अछि। और थोड़बे लोक ओहि द्वारि केँ ताकि पबैत अछि। 15 “ओहन लोक सँ सावधान रहू जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत अछि। ओ सभ अहाँ सभक बीच भेँड़ाक वेष मे अबैत अछि, मुदा भीतर मे ओ सभ चीरि-फाड़ि देबऽ वला जंगली जानबर अछि। 16 ओकर सभक काज सभ सँ अहाँ सभ ओकरा चिन्‍हि जायब। की काँटक गाछ सँ अंगूर तोड़ल जा सकैत अछि, वा कबछुआक लत्ती सँ अंजीर-फल? 17 एहि तरहेँ प्रत्‍येक नीक गाछ मे नीक फल आ खराब गाछ मे खराब फल फड़ैत अछि। 18 ई तँ भइए नहि सकैत अछि जे नीक गाछ मे खराब फल फड़ैक आ खराब गाछ मे नीक फल। 19 जे गाछ नीक फल नहि दैत अछि से काटि कऽ आगि मे फेकल जाइत अछि। 20 तहिना एहन लोक सभ केँ अहाँ सभ ओकर सभक काज सभ सँ चिन्‍हि जायब। 21 “ई बात नहि अछि जे, जतेक लोक हमरा ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहैत अछि, ताहि मे सँ सभ केओ स्‍वर्गक राज्‍य मे प्रवेश करत, बल्‍कि मात्र वैह सभ प्रवेश करत जे सभ हमर पिता जे स्‍वर्ग मे छथि तिनकर इच्‍छानुरूप चलैत अछि। 22 न्‍यायक दिन बहुतो लोक हमरा कहत, ‘हे प्रभु! हे प्रभु! की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ भविष्‍यवाणी नहि कयलहुँ? की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ नहि निकाललहुँ? की हम सभ अहाँक नाम लऽ कऽ अनेको चमत्‍कार नहि कयलहुँ?’ 23 तखन हम ओकरा सभ केँ स्‍पष्‍ट कहबैक, ‘हम तोरा सभ केँ कहियो नहि चिन्‍हलिऔ। है कुकर्मी सभ, भाग हमरा लग सँ!’ 24 “जे केओ हमर एहि उपदेश सभ केँ सुनैत अछि आ ओकर पालन करैत अछि, से ओहि बुद्धिमान मनुष्‍य जकाँ अछि जे अपन घर पाथर पर बनौलक। 25 बहुत जोरक वर्षा भेल, बाढ़ि आयल, अन्‍हड़-बिहारि चलल और ओहि घर सँ टकरायल, तैयो ओ घर नहि खसल, कारण ओकर न्‍यो पाथर पर राखल गेल छल। 26 मुदा जे केओ हमर एहि उपदेश सभ केँ सुनैत अछि आ ओकर पालन नहि करैत अछि, से ओहि मूर्ख मनुष्‍य जकाँ अछि, जे अपन घर बालु पर बनौलक। 27 जखन बहुत जोरक वर्षा भेल, बाढ़ि आयल, अन्‍हड़-बिहारि चलल आ ओहि घर सँ टकरायल तँ ओ घर खसि पड़ल आ पूरा नष्‍ट भऽ गेल।” 28 जखन यीशु ई उपदेशक बात सभ कहब समाप्‍त कयलनि तखन लोकक भीड़ हुनकर शिक्षा सँ चकित भेल, 29 कारण ओ धर्मशिक्षक सभ जकाँ नहि, बल्‍कि अधिकारपूर्बक उपदेश दैत छलाह।

Matthew 8

1 यीशु जखन पहाड़ पर सँ नीचाँ उतरलाह तँ लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि। 2 एक कुष्‍ठ-रोगी हुनका लग अयलनि आ निंघुड़ि कऽ प्रणाम करैत कहलकनि, “यौ प्रभु, अहाँ जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।” 3 यीशु हाथ बढ़ा कऽ ओकरा छुबैत कहलथिन, “हम अवश्‍य चाहैत छिअह, तोँ शुद्ध भऽ जाह।” और ओ तुरत अपन रोग सँ शुद्ध भऽ गेल। 4 यीशु ओकरा कहलथिन, “सुनह, ककरो किछु कहिअहक नहि। जाह, अपना केँ पुरोहित केँ देखाबह, आ धर्म-नियम मे लिखल मूसाक आदेश अनुसार जे चढ़ौना चढ़यबाक अछि, से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।” 5 यीशु जखन कफरनहूम नगर मे प्रवेश कयलनि तँ रोमी सेनाक एकटा कप्‍तान आबि हुनका सँ विनती कयलथिन, 6 “हे प्रभु, हमर नोकर लकवा सँ पीड़ित भऽ घर मे पड़ल अछि आ महा कष्‍ट मे अछि।” 7 यीशु हुनका कहलथिन, “हम आबि ओकरा स्‍वस्‍थ कऽ देबैक।” 8 सेनाक कप्‍तान उत्तर देलथिन, “यौ प्रभु, हम एहि जोगरक नहि छी जे अपने हमरा घर पर आबी। अपने मात्र कहि देल जाओ आ हमर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ जायत। 9 कारण हमहूँ शासनक अधीन मे छी, और हमरा अधीन मे सैनिक सभ अछि। हम एकटा केँ कहैत छिऐक, ‘जाह’ तँ ओ जाइत अछि आ दोसर केँ कहैत छिऐक, ‘आबह’ तँ ओ अबैत अछि। हम अपना नोकर केँ कहैत छिऐक, ‘ई काज करह’ तँ ओ करैत अछि।” 10 हुनकर बात सुनि यीशु केँ आश्‍चर्य भेलनि आ ओ अपना पाछाँ चलऽ वला लोक सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, हम इस्राएली सभ मे एहन विश्‍वास ककरो मे नहि देखलहुँ। 11 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, पूब आ पश्‍चिम सँ बहुत लोक आओत और अब्राहम, इसहाक आ याकूबक संग स्‍वर्गक राज्‍य मे भोज खयबाक लेल बैसत, 12 मुदा जे सभ ⌞अब्राहमक वंशज होयबाक कारणेँ⌟ राज्‍यक उत्तराधिकारी होयबाक चाही, से सभ बाहर अन्‍हार मे भगाओल जायत, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।” 13 तकरबाद यीशु सेनाक कप्‍तान केँ कहलथिन, “जाउ, जेहन विश्‍वास अहाँ कयलहुँ अछि, अहाँक लेल ओहिना होयत।” ओही घड़ी हुनकर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ गेलनि। 14 यीशु जखन पत्रुसक घर मे अयलाह तँ देखैत छथि जे पत्रुसक सासु बोखार सँ पीड़ित भऽ ओछायन पर पड़ल छथि। 15 यीशु हुनकर हाथ केँ छुबि देलथिन आ हुनकर बोखार उतरि गेलनि। ओ उठि कऽ हिनकर सेवा-सत्‍कार करऽ लगलीह। 16 साँझ पड़ला पर लोक सभ बहुतो लोक केँ जकरा मे दुष्‍टात्‍मा छलैक यीशु लग अनलकनि। यीशु आज्ञा दऽ कऽ ओकरा सभ मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालि देलथिन और सभ रोगी केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन, 17 जाहि सँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक ई वचन पूरा होअय जे, “ओ हमर सभक रोग-बिमारी अपना पर लऽ हमरा सभ सँ दूर हटा देलनि।” 18 जखन यीशु अपना चारू कात लोकक बड़का भीड़ देखलनि तँ अपना शिष्‍य सभ केँ झीलक ओहि पार चलबाक आदेश देलथिन। 19 तखन एकटा धर्मशिक्षक हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, जतऽ कतौ अपने जायब, ततऽ हमहूँ अपनेक संग चलब।” 20 यीशु हुनका उत्तर देलथिन, “नढ़िया केँ सोन्‍हि छैक और आकाशक चिड़ै केँ खोंता, मुदा मनुष्‍य-पुत्र केँ मूड़िओ नुकयबाक जगह नहि छैक।” 21 केओ दोसर, हुनकर एकटा शिष्‍य, हुनका कहलकनि, “प्रभु, हमरा पहिने जा कऽ अपना बाबूक लास केँ गाड़ि आबऽ दिअ।” 22 यीशु ओकरा कहलथिन, “अहाँ हमरा पाछाँ आउ, आ मुरदा सभ केँ अपन मुरदा गाड़ऽ दिऔक।” 23 यीशु नाव पर चढ़लाह तँ शिष्‍य सभ सेहो हुनका संग विदा भेलथिन। 24 एकाएक झील मे बहुत बड़का अन्‍हड़-बिहारि उठल आ नाव लहरिक पानि सँ भरऽ लागल। मुदा यीशु सुतल छलाह। 25 शिष्‍य सभ आबि कऽ हुनका जगबैत कहलथिन, “प्रभु, हमरा सभ केँ बचाउ! हम सभ डुबऽ-डुबऽ पर छी!” 26 यीशु शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक विश्‍वास एतेक कम किएक अछि? अहाँ सभ एतेक डेरायल किएक छी?” तकरबाद यीशु उठि कऽ अन्‍हड़-बिहारि आ लहरि केँ डँटलथिन। अन्‍हड़-बिहारि थम्‍हि गेल आ सभ किछु एकदम शान्‍त भऽ गेल। 27 शिष्‍य सभ आश्‍चर्यित भऽ कहऽ लगलाह, “ई केहन मनुष्‍य छथि? अन्‍हड़-बिहारि आ लहरिओ हिनकर आदेश मानैत छनि!” 28 जखन यीशु झीलक ओहि पार गदरेनी सभक इलाका मे पहुँचलाह तँ दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित दू व्‍यक्‍ति कबरिस्‍तान वला क्षेत्र सँ बहरा कऽ हुनका भेटलनि। ओ दूनू व्‍यक्‍ति एतेक उग्र छल जे लोक सभ डरेँ ओहि बाटे चलनाइ छोड़ि देने छल। 29 ओ दूनू चिचिया उठल, “यौ परमेश्‍वरक पुत्र, हमरा सभ सँ अपने केँ कोन काज? की समय सँ पहिनहि अपने हमरा सभ केँ सतयबाक लेल एतऽ आयल छी?” 30 ओहिठाम सँ कनेक दूर पर सुगरक बड़का झुण्‍ड चरि रहल छल। 31 दुष्‍टात्‍मा सभ यीशु सँ विनती कयलकनि, “जँ अहाँ हमरा सभ केँ भगाइए रहल छी तँ हमरा सभ केँ ओहि सुगरक झुण्‍ड मे पठा दिअ।” 32 यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जो!” दुष्‍टात्‍मा सभ दूनू व्‍यक्‍ति मे सँ निकलि कऽ सुगरक झुण्‍ड मे प्रवेश कऽ गेल। सुगरक पूरा झुण्‍ड दौड़ि कऽ पहाड़ पर सँ झील मे खसल और डुबि कऽ मरि गेल। 33 तखन सुगर चराबऽ वला सभ भागल आ ई सभ समाचार नगर मे जा कऽ सुनाबऽ लागल। ओहि दूनू दुष्‍टात्‍मा लागल व्‍यक्‍ति केँ की भेलैक, सेहो सुनौलकैक। 34 एहि पर नगरक सभ लोक यीशु सँ भेँट करबाक लेल नगर सँ बाहर आबि गेल। यीशु केँ देखि ओ सभ हुनका सँ विनती करऽ लगलनि जे, “अहाँ हमरा सभक इलाका सँ चल जाउ।”

Matthew 9

1 तखन यीशु नाव मे चढ़ि कऽ झील पार कयलनि आ फेर अपना नगर मे चल अयलाह। 2 किछु लोक सभ एकटा लकवा मारल आदमी केँ खाट पर लदने यीशु लग अनलकनि। यीशु ओकरा सभक विश्‍वास देखि लकवा मारल आदमी केँ कहलथिन, “हौ बेटा, साहस राखह, तोहर पाप माफ भेलह।” 3 ई सुनि किछु धर्मशिक्षक सभ अपना मोन मे सोचऽ लगलाह, “ई व्‍यक्‍ति तँ अपना केँ परमेश्‍वरक तुल्‍य बुझि हुनकर निन्‍दा करैत अछि!” 4 यीशु हुनकर सभक मोनक बात जानि कहलथिन, “अहाँ सभ अपना मोन मे अधलाह बात किएक सोचैत छी? 5 आसान की अछि—ई कहब जे, ‘तोहर पाप क्षमा भेलह’, वा ई कहब जे, ‘उठि कऽ चलह-फिरह’? 6 मुदा जाहि सँ अहाँ सभ ई बात बुझि जाइ जे मनुष्‍य-पुत्र केँ पृथ्‍वी पर पाप माफ करबाक अधिकार छनि, हम एकरा कहैत छी...” तखन ओ लकवाक रोगी केँ कहलथिन, “उठह, अपन खाट उठाबह आ घर चल जाह!” 7 ओ उठल आ घर चल गेल। 8 लोक सभ ई देखि भयभीत भेल आ एहि लेल परमेश्‍वरक प्रशंसा करऽ लागल जे ओ मनुष्‍य केँ एहन अधिकार देने छथिन। 9 ओहिठाम सँ आगाँ बढ़ला पर यीशु मत्ती नामक एक आदमी केँ कर असूल करऽ वला स्‍थान मे बैसल देखलथिन। यीशु हुनका कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” ओ उठि कऽ यीशुक संग चलऽ लगलथिन। 10 जखन यीशु मत्तीक घर मे भोजन करबाक लेल बैसलाह तँ बहुतो कर असूल कयनिहार आ “पापी” सभ आबि हुनका और हुनकर शिष्‍य सभक संग भोजन करबाक लेल बैसल। 11 ई देखि फरिसी सभ यीशुक शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक गुरु कर असूल कयनिहार और पापी सभक संग किएक खाइत-पिबैत छथि?” 12 यीशु हुनकर सभक बात सुनि कहलथिन, “वैद्यक आवश्‍यकता स्‍वस्‍थ लोक केँ नहि होइत छैक, बल्‍कि बिमार सभ केँ! 13 अहाँ सभ जा कऽ प्रभुक कहल एहि वचनक अर्थ सिखू जे, ‘अहाँ सभक द्वारा अर्पित चढ़ौना वा बलि-प्रदान हम नहि चाहैत छी, बल्‍कि अहाँ सभ दयालु बनू, से।’ हम धार्मिक सभ केँ नहि, बल्‍कि पापी सभ केँ बजयबाक लेल आयल छी।” 14 बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “की कारण अछि जे हम सभ आ फरिसी सभ तँ उपास करैत रहैत छी, मुदा अहाँक शिष्‍य सभ उपास नहि करैत छथि?” 15 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “जाबत तक वरियातीक संग वर अछि ताबत तक की वरियाती शोक मनाओत? नहि! मुदा ओ समय आओत जहिया वर ओकरा सभक बीच सँ हटा लेल जायत। ओ सभ तहिये उपास करत। 16 केओ पुरान कपड़ा पर नयाँ कपड़ाक चेफरी नहि लगबैत अछि, कारण, ओ चेफरी घोकचि कऽ पुरान कपड़ा केँ खिचत और ओ कपड़ा पहिनहु सँ बेसी फाटि जायत। 17 एहि तरहेँ लोक नव दारू पुरान चमड़ाक थैली मे नहि रखैत अछि। कारण, एना जँ करत तँ चमड़ाक थैली फाटि जयतैक; दारू बहि जयतैक, आ थैलिओ नष्‍ट भऽ जयतैक। नहि! नव दारू नये थैली मे राखल जाइत अछि। एहि तरहेँ दारू आ थैली दूनू सुरक्षित रहैत अछि।” 18 यीशु हुनका सभ केँ ई बात सभ कहिए रहल छलाह कि सभाघरक एक अधिकारी अयलथिन आ हुनका सामने ठेहुन रोपि कऽ कहलथिन, “हमर बेटी एखने तुरत मरि गेलि अछि, मुदा तैयो अपने चलि कऽ अपन हाथ ओकरा पर राखि देल जाओ—तँ ओ जीबि जायत।” 19 यीशु उठि कऽ अपना शिष्‍य सभक संग हुनका पाछाँ विदा भऽ गेलाह। 20 तखने एक स्‍त्री जकरा बारह वर्ष सँ खून खसऽ वला बिमारी छलैक, से पाछाँ सँ आयल आ यीशुक कपड़ाक कोर छुबि लेलक। 21 ओ अपना मोन मे सोचि रहल छलि जे, “हम जँ हुनकर कपड़ो केँ छुबि लेब तँ स्‍वस्‍थ भऽ जायब।” 22 यीशु पाछाँ घूमि कऽ ओकरा देखलनि आ कहलथिन, “बेटी, साहस राखह, तोहर विश्‍वास तोरा स्‍वस्‍थ कऽ देलकह।” ओ स्‍त्री ओही घड़ी स्‍वस्‍थ भऽ गेलि। 23 यीशु सभाघरक अधिकारीक ओहिठाम पहुँचलाह तँ ओतऽ शोक मे बाँसुरी बजौनिहार सभ आ आरो लोक सभ केँ हल्‍ला-गुल्‍ला करैत देखलथिन। 24 ओ कहलथिन, “हटै जाइ जाउ, बच्‍ची मरल नहि अछि; सुतल अछि।” एहि पर लोक सभ हुनका पर हँसऽ लागल। 25 लोकक भीड़ जखन बाहर कयल गेल तँ यीशु घरक भीतर गेलाह। ओ बच्‍चीक हाथ पकड़ि कऽ उठौलथिन और बच्‍ची उठि बैसलि। 26 ई समाचार ओहि प्रान्‍तक कोना-कोना मे पसरि गेल। 27 यीशु ओतऽ सँ आगाँ बढ़लाह तँ दू आन्‍हर व्‍यक्‍ति एहि तरहेँ सोर पारैत हुनका पाछाँ-पाछाँ चलऽ लगलनि जे, “यौ दाऊदक पुत्र, हमरा सभ पर दया करू!” 28 यीशु जखन घर मे गेलाह तँ ओ आन्‍हर व्‍यक्‍ति सभ हुनका लग अयलनि। यीशु ओकरा सभ सँ पुछलथिन, “की तोरा सभ केँ विश्‍वास छह जे हम ई काज कऽ सकैत छी?” ओ सभ कहलकनि, “हँ, प्रभु।” 29 तखन यीशु ओकर सभक आँखि केँ छुबैत कहलथिन, “जेहन तोहर सभक विश्‍वास छह तहिना तोरा सभक लेल होअह।” 30 एतबा कहैत देरी ओकर सभक आँखि ठीक भऽ गेलैक। यीशु ओकरा सभ केँ चेतावनी देलथिन जे, “सुनह, ई बात ककरो नहि कहिअहक।” 31 मुदा ओ सभ घर सँ निकलि कऽ सम्‍पूर्ण जिला मे हुनकर कीर्ति सुना देलकनि। 32 ओ दूनू व्‍यक्‍ति केँ घर सँ निकलिते किछु लोक दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित एक बौक आदमी केँ यीशु लग अनलकनि। 33 दुष्‍टात्‍मा केँ ओकरा मे सँ निकालि देल गेलाक बाद ओ बौक आदमी बाजऽ लागल। ई देखि भीड़क लोक सभ आश्‍चर्यित भऽ कहऽ लागल जे, “इस्राएल मे एहन बात कहियो नहि भेल छल।” 34 मुदा फरिसी सभ कहऽ लगलाह जे, “ई दुष्‍टात्‍मा सभक मुखियाक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत अछि।” 35 यीशु नगर-नगर, गाम-गाम घुमऽ लगलाह। ओ यहूदी सभक सभाघर सभ मे उपदेश दैत छलाह, परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार सुनबैत छलाह आ लोक सभ केँ सभ तरहक कष्‍ट-बिमारी सँ मुक्‍त करैत छलाह। 36 लोकक भीड़ केँ देखि कऽ हुनका दया होइत छलनि, कारण ओ सभ पीड़ित आ असहाय छल—ओहि भेँड़ी सभ जकाँ जकर केओ चरबाह नहि होइक। 37 तखन ओ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “पाकल फसिल तँ बहुत अछि, मुदा काटऽ वला मजदूर कम अछि। 38 तेँ खेतक मालिक सँ प्रार्थना करिऔन जे ओ अपना खेत मे आरो मजदूर पठबथि।”

Matthew 10

1 तखन यीशु अपन बारहो शिष्‍य केँ बजा कऽ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालबाक और सभ तरहक रोग-बिमारी केँ ठीक करबाक अधिकार देलथिन। 2 एहि बारह मसीह-दूतक नाम एहि तरहेँ अछि—पहिल सिमोन, जिनकर पत्रुस नाम सेहो छनि, और हुनकर भाय अन्‍द्रेयास; जबदीक बेटा याकूब आ हुनकर भाय यूहन्‍ना; 3 फिलिपुस और बरतुल्‍मै; थोमा आ कर असूल कयनिहार मत्ती; अल्‍फेयासक बेटा याकूब आ तद्दै; 4 “देश-भक्‍त” सिमोन आ यहूदा इस्‍करियोती जे बाद मे यीशुक संग विश्‍वासघात कयलकनि। 5 एहि बारह गोटे केँ यीशु ई आज्ञा दऽ कऽ पठौलथिन जे, “गैर-यहूदी सभक बीच नहि जाउ आ सामरी सभक कोनो नगर मे प्रवेश नहि करू, 6 बल्‍कि इस्राएल वंशक हेरायल भेँड़ा सभ लग जाउ। 7 “जाइत-जाइत ई प्रचार करैत जाउ जे, ‘स्‍वर्गक राज्‍य लग आबि गेल अछि।’ 8 रोगी सभ केँ स्‍वस्‍थ करू, मुइल सभ केँ जिआउ, कुष्‍ठ-रोगी सभ केँ शुद्ध करू, लोक सभ मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालू। अहाँ सभ केँ जे किछु भेटल अछि से अहाँ सभ बिना मूल्‍य पौलहुँ, तँ अहूँ सभ बिना मूल्‍य दिअ। 9 अपना बटुआ मे सोन, चानी वा तामक पाइ-कौड़ी किछु नहि राखू। 10 बाटक लेल ने झोरी-झण्‍टा, ने दोसर अंगा, ने चप्‍पल आ ने लाठी, किछु नहि संग लिअ; कारण, मजदूर केँ भोजन पयबाक अधिकार छैक। 11 जाहि कोनो नगर वा गाम मे जायब, तँ एहन लोकक पता लगाउ जे शुभ समाचार सुनबाक लेल तैयार होअय, आ ताबत धरि ओही व्‍यक्‍तिक ओतऽ रहू जाबत धरि ओहि गाम सँ विदा नहि भऽ जायब। 12 घर मे पहुँचि कऽ सभ सँ पहिने शान्‍तिक आशीर्वाद दिअ। 13 ओ घर जँ योग्‍य होअय तँ अपन शान्‍ति ओकरा पर रहऽ दिऔक, और जँ योग्‍य नहि होअय तँ अपन शान्‍ति घुमा लिअ। 14 जँ केओ अहाँ सभक स्‍वागत नहि करय आ अहाँ सभ जे कहऽ चाहैत छी, से नहि सुनय, तँ ओहि घर वा ओहि नगर सँ बहरयबा काल मे अपन पयरक गर्दा झाड़ि लेब। 15 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, न्‍यायक दिन ओहि नगरक दशा सँ सदोम आ गमोरा नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक। 16 “देखू, हम अहाँ सभ केँ भेँड़ी जकाँ जंगली जानबर सभक बीच मे पठा रहल छी, तेँ अहाँ सभ साँप जकाँ होसियार आ परबा जकाँ निष्‍कपट बनू। 17 “लोक सभ सँ सावधान रहू। कारण, ओ सभ अहाँ सभ केँ पकड़ि कऽ पंचायत मे पंच सभक समक्ष लऽ जायत आ अपना सभाघर सभ मे अहाँ सभ केँ कोड़ा सँ पिटबाओत। 18 हमरा कारणेँ राज्‍यपाल आ राजा सभक समक्ष अहाँ सभ केँ ठाढ़ कयल जायत और अहाँ सभ हुनका सभक सामने आ गैर-यहूदी सभक सामने हमरा बारे मे गवाही देब। 19 मुदा जखन ओ सभ अहाँ सभ केँ पकड़बाओत तँ अहाँ सभ चिन्‍ता नहि करू जे हम सभ कोना बाजब वा की बाजब। जे किछु अहाँ सभ केँ बजबाक होयत, से ओही क्षण अहाँ सभ केँ मोन मे दऽ देल जायत; 20 कारण, बाजऽ वला अहाँ सभ नहि, बल्‍कि अहाँ सभक पिता-परमेश्‍वरक आत्‍मा होयताह। ओ अहाँ सभक द्वारा बजताह। 21 “भाय भाय केँ, बाबू अपना बेटा केँ मृत्‍युदण्‍डक लेल पकड़बाओत, आ बेटा-बेटी अपन माय-बाबूक विरोध मे ठाढ़ भऽ कऽ मरबाओत। 22 “अहाँ सभ सँ सभ केओ घृणा करत, एहि लेल जे अहाँ सभ हमर लोक छी। मुदा जे व्‍यक्‍ति अन्‍त तक अपना विश्‍वास मे स्‍थिर रहत से उद्धार पाओत। 23 “जखन लोक सभ अहाँ सभ केँ कोनो नगर मे सताबऽ लागत तखन अहाँ सभ भागि कऽ दोसर नगर चल जाउ। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, अहाँ सभ इस्राएल देशक सभ नगर मे अपन काज समाप्‍तो नहि कयने रहब, ताबत मनुष्‍य-पुत्र फेर आबि जयताह। 24 “चेला अपना गुरु सँ पैघ नहि होइत अछि आ ने दास अपना मालिक सँ। 25 चेला केँ अपन गुरुक बराबरि होयब आ दास केँ अपन मालिकक बराबरि होयब, एतबे बहुत अछि। जँ ओ सभ घरक मालिक केँ ‘दुष्‍टात्‍मा सभक मुखिया’ कहैत अछि तँ मालिकक परिवारक लोक केँ की की नहि कहतैक! 26 “एहि लेल ओकरा सभ सँ डेराउ नहि। एहन किछु नहि अछि जे झाँपल होअय आ उघारल नहि जायत, वा जे नुकाओल होअय आ प्रगट नहि कयल जायत। 27 जे किछु हम अहाँ सभ केँ अन्‍हार मे कहैत छी से अहाँ सभ इजोत मे कहू; जे किछु एकान्‍ती कऽ कऽ सुनने छी तकरा छत पर सँ घोषणा करू। 28 ओकरा सभ सँ नहि डेराउ जे शरीर केँ मारि दैत अछि, मुदा आत्‍मा केँ नहि मारि सकैत अछि, बल्‍कि तिनका सँ डेराउ जे आत्‍मा आ शरीर, दूनू केँ नरक मे नष्‍ट कऽ सकैत छथि। 29 बगेड़ी कतेक मे भेटैत अछि?—एक पाइ मे दूटा! तैयो एकोटा बगेड़ी सेहो अहाँ सभक पिताक इच्‍छाक बिना जमीन पर नहि खसैत अछि। 30 अहाँ सभक माथक एक-एकटा केशो गनल अछि। 31 तेँ अहाँ सभ डेराउ नहि। अहाँ सभ बहुतो बगेड़ी सँ मूल्‍यवान छी! 32 “जे केओ लोकक समक्ष हमरा अपन प्रभु मानि लेत, तकरा हमहूँ अपन स्‍वर्गीय पिताक समक्ष अपन लोक मानि लेबैक। 33 मुदा जे केओ लोकक समक्ष हमरा अस्‍वीकार करत, तकरा हमहूँ अपन स्‍वर्गीय पिताक समक्ष अस्‍वीकार करबैक। 34 “ई नहि बुझू जे हम पृथ्‍वी पर मेल-मिलाप करयबाक लेल आयल छी। नहि! मेल करयबाक लेल नहि, बल्‍कि तरुआरि चलबयबाक लेल हम आयल छी। 35 हम तँ एहि लेल आयल छी जे ‘बेटा केँ ओकर बाबूक, बेटी केँ ओकर मायक, आ पुतोहु केँ ओकर सासुक विरोधी बना दिऐक। 36 लोकक दुश्‍मन ओकर अपने घरक लोक होयतैक।’ 37 “जे केओ हमरा सँ बेसी अपन माय-बाबू सँ प्रेम करैत अछि, से हमर शिष्‍य बनबाक योग्‍य नहि अछि। जे केओ हमरा सँ बेसी अपन धिआ-पुता सँ प्रेम करैत अछि, से हमर शिष्‍य बनबाक योग्‍य नहि अछि। 38 आ जे केओ हमरा कारणेँ दुःख उठयबाक आ प्राणो देबाक लेल तैयार भऽ हमरा पाछाँ नहि चलैत अछि, से हमर शिष्‍य बनबाक योग्‍य नहि अछि। 39 जे केओ अपन जीवन सुरक्षित रखैत अछि, से ओकरा गमाओत, आ जे अपन जीवन हमरा लेल गमबैत अछि, से ओकरा सुरक्षित राखत। 40 “जे केओ अहाँ सभ केँ स्‍वीकार करैत अछि, से हमरा स्‍वीकार करैत अछि, आ जे हमरा स्‍वीकार करैत अछि, से तिनका स्‍वीकार करैत छनि जे हमरा पठौने छथि। 41 जे केओ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता केँ एहि लेल स्‍वागत करत जे ओ व्‍यक्‍ति परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता छथि, से प्रवक्‍ताक प्रतिफल पाओत; आ जे केओ धार्मिक व्‍यक्‍ति केँ एहि लेल स्‍वागत करत जे ओ धार्मिक व्‍यक्‍ति छथि, से धार्मिकक प्रतिफल पाओत। 42 जे केओ हमरा छोटो सँ छोट शिष्‍य सभ मे सँ ककरो एहि लेल एक लोटा ठण्‍ढा पानिओ पिआओत जे ओ हमर शिष्‍य अछि, हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, ओ अपना एहि सेवाक प्रतिफल अवश्‍य पाओत।”

Matthew 11

1 यीशु अपन बारहो शिष्‍य केँ एहि तरहेँ आज्ञा सभ दऽ कऽ ओतऽ सँ चल गेलाह आ लग-पासक नगर सभ मे शिक्षा देबऽ लगलाह आ शुभ समाचार सुनाबऽ लगलाह। 2 जखन बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना जहल मे मसीहक काजक चर्चा सुनलनि तँ ओ अपन शिष्‍य सभ केँ यीशु लग ई पुछबाक लेल पठौलथिन जे, 3 “ओ जे आबऽ वला छलाह, से की अहीं छी वा हम सभ दोसराक बाट ताकू?” 4 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “जे किछु अहाँ सभ सुनैत छी आ देखैत छी, से सभ बात यूहन्‍ना केँ जा कऽ सुना दिऔन— 5 आन्‍हर सभ देखि रहल अछि, नाङड़ सभ चलि-फिरि रहल अछि, कुष्‍ठ-रोगी सभ स्‍वस्‍थ कयल जा रहल अछि, बहीर सभ सुनि रहल अछि, मुइल सभ जिआओल जा रहल अछि आ असहाय सभ केँ शुभ समाचार सुनाओल जा रहल छैक। 6 धन्‍य अछि ओ जे हमरा कारणेँ अपना विश्‍वास केँ नहि छोड़ैत अछि।” 7 यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ जखन घूमि कऽ जा रहल छलाह तँ यीशु यूहन्‍नाक बारे मे भीड़क संग बात करैत पुछलथिन, “अहाँ सभ निर्जन क्षेत्र मे की देखबाक लेल गेल छलहुँ? हवा मे हिलैत खड़ही केँ? 8 तखन की देखऽ लेल निकलल छलहुँ? बढ़ियाँ-बढ़ियाँ वस्‍त्र पहिरने कोनो मनुष्‍य केँ? बढ़ियाँ वस्‍त्र पहिरऽ वला सभ तँ राजभवन मे भेटैत अछि। 9 तखन फेर, अहाँ सभ की देखबाक लेल गेल छलहुँ? की परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता केँ? हँ, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे प्रवक्‍तो सँ पैघ व्‍यक्‍ति केँ देखलहुँ। 10 “ई वैह दूत छथि जिनका सम्‍बन्‍ध मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, प्रभु कहैत छथि, ‘देखू, अहाँ सँ पहिने हम अपन दूत पठायब, जे अहाँक आगाँ-आगाँ अहाँक बाट तैयार करत।’ 11 “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे मनुष्‍य सभ मे बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना सँ पैघ केओ कहियो जन्‍म नहि लेने अछि, तैयो स्‍वर्गक राज्‍य मे जे सभ सँ छोट अछि से हुनका सँ पैघ अछि। 12 यूहन्‍नाक समय सँ लऽ कऽ आइ धरि स्‍वर्गक राज्‍य जोर-तोड़ सँ आगाँ बढ़ि रहल अछि; लोक सभ रेड़म-रेड़ा कऽ कऽ स्‍वर्गक राज्‍य पर अधिकार कऽ रहल अछि। 13 किएक तँ परमेश्‍वरक सभ प्रवक्‍ता लोकनिक लेख आ धर्म-नियम सेहो यूहन्‍नाक समय धरि स्‍वर्गक राज्‍यक भविष्‍यवाणी कयने अछि। 14 आ जँ अहाँ सभ ई बात स्‍वीकार करबाक लेल तैयार छी, तँ सुनू, यूहन्‍ना ओ एलियाह छथि, जे फेर आबऽ वला छलाह। 15 जकरा कान छैक, से सुनओ। 16 “हम एहि पीढ़ीक लोकक तुलना कोन बात सँ करू? ई सभ तँ चौक-चौराहा पर खेलनिहार बच्‍चा सभ जकाँ अछि, जे एक-दोसर केँ सोर पारि कऽ कहैत अछि जे, 17 ‘हम सभ तँ तोरा सभक लेल बाँसुरी बजौलिऔ, मुदा तोँ सभ नचलें नहि। हम सभ विलाप कयलिऔ, मुदा तोँ सभ छाती पिटलें नहि।’ 18 “यूहन्‍ना लोक सभ जकाँ खाइत-पिबैत नहि अयलाह तँ अहाँ सभ कहैत छी जे, ओकरा मे दुष्‍टात्‍मा छैक। 19 मनुष्‍य-पुत्र खाइत-पिबैत आयल तँ अहाँ सभ कहैत छी जे, ‘यैह देखू, पेटू आ पिअक्‍कड़, कर असूल करऽ वला और पापी सभक संगी!’ मुदा परमेश्‍वरक बुद्धि ठीक अछि, से बात ओहि बुद्धिक काजे सभ सँ प्रमाणित होइत अछि।” 20 तकरबाद यीशु ओहि नगर सभ केँ, जाहि मे ओ सभ सँ बेसी चमत्‍कार वला काज सभ कयने छलाह, तकरा सभ केँ धिक्‍कारऽ लगलथिन, कारण, ओहि नगरक निवासी सभ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन नहि कयने छल। 21 “है खुराजीन नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! है बेतसैदा नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! किएक तँ जे चमत्‍कार सभ तोरा सभक बीच कयल गेल, से जँ सूर आ सीदोन नगर मे कयल गेल रहैत तँ ओ सभ बहुत पहिनहि चट्टी ओढ़ि छाउर पर बैसि कऽ हृदय-परिवर्तन कऽ लेने रहैत। 22 हम तोरा सभ केँ कहैत छिऔक जे, न्‍यायक दिन मे तोरा सभक अपेक्षा सूर आ सीदोन नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक। 23 आ तोँ, है कफरनहूम नगर! की तोँ स्‍वर्ग तक उठाओल जयबेँ? नहि, तोँ तँ पाताल मे खसाओल जयबेँ। कारण, जे चमत्‍कार सभ तोरा सभक बीच कयल गेल, से जँ सदोम नगर मे कयल गेल रहैत तँ ओ आइ धरि कायम रहैत। 24 तैयो हम तोरा कहैत छिऔक जे न्‍यायक दिन मे तोहर दशाक अपेक्षा सदोमक दशा सहबा जोगरक रहतैक।” 25 यीशु ओही समय मे कहलनि, “हे पिता, स्‍वर्ग आ पृथ्‍वीक मालिक, हम अहाँ केँ एहि लेल धन्‍यवाद दैत छी जे अहाँ ई बात सभ बुद्धिमान और विद्वान सभ सँ नुका कऽ रखलहुँ, मुदा बच्‍चा सभ पर प्रगट कयलहुँ। 26 हँ पिता, कारण, अहाँ केँ एही बात सँ प्रसन्‍नता भेल। 27 “हमरा पिता द्वारा सभ किछु हमरा हाथ मे सौंपल गेल अछि। पिता केँ छोड़ि पुत्र केँ आओर केओ नहि चिन्‍हैत अछि, आ तहिना पुत्र केँ छोड़ि पिता केँ आओर केओ नहि चिन्‍हैत छनि; हँ, मात्र पुत्र और जकरा सभ पर पुत्र हुनका प्रगट करऽ चाहय, से चिन्‍हैत छनि। 28 “हे थाकल आ बोझ सँ पिचायल लोक सभ, हमरा लग आउ। हम अहाँ सभ केँ विश्राम देब। 29 हमर जुआ अपना उपर उठा लिअ आ हमरा सँ सिखू, किएक तँ हम स्‍वभाव सँ नम्र आ दयालु छी। अहाँ सभ अपना आत्‍माक लेल विश्राम पायब। 30 कारण, हमर जुआ आसान अछि आ हमर भार हल्‍लुक।”

Matthew 12

1 करीब ओही समय मे यीशु विश्राम-दिन कऽ अपन शिष्‍य सभक संग खेत दऽ कऽ जा रहल छलाह। हुनका शिष्‍य सभ केँ भूख लगलनि तँ ओ सभ अन्‍नक बालि तोड़ि-तोड़ि कऽ खाय लगलाह। 2 ई देखि फरिसी सभ यीशु केँ कहलथिन, “देखू, अहाँक शिष्‍य सभ ओ काज कऽ रहल अछि जे विश्राम-दिन मे करब धर्म-नियमक अनुसार मना अछि।” 3 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “की अहाँ सभ नहि पढ़ने छी जे दाऊद आ हुनकर संगी सभ जखन भुखायल छलाह तँ ओ की कयलनि? 4 ओ परमेश्‍वरक भवन मे प्रवेश कयलनि आ अपना संगी सभक संग परमेश्‍वर केँ चढ़ाओल रोटी खयलनि, जकरा खायब हुनका सभक लेल मना छल, कारण खयबाक अधिकार मात्र पुरोहिते केँ छलनि। 5 अथवा की अहाँ सभ धर्म-नियम मे नहि पढ़ने छी जे पुरोहित मन्‍दिर मे विश्राम-दिन कऽ मन्‍दिरक काज सभ कऽ कऽ विश्राम-दिनक आज्ञा केँ तोड़ैत छथि आ तैयो निर्दोष रहैत छथि? 6 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे एतऽ केओ एहन अछि जे मन्‍दिरो सँ पैघ अछि। 7 की अहाँ सभ धर्मशास्‍त्र मे लिखल परमेश्‍वरक बात नहि बुझैत छी जतऽ कहैत छथि जे, ‘हम अहाँ सभक द्वारा अर्पित चढ़ौना वा बलि-प्रदान नहि चाहैत छी, बल्‍कि अहाँ सभ दयालु बनू, से चाहैत छी।’ ? ई जँ बुझितहुँ तँ निर्दोष केँ दोषी नहि कहने रहितहुँ। 8 किएक तँ मनुष्‍य-पुत्र विश्रामो-दिनक मालिक छथि।” 9 ओतऽ सँ आगाँ बढ़ि यीशु हुनका सभक सभाघर मे गेलाह। 10 ओहिठाम एक व्‍यक्‍ति छल, जकर एकटा हाथ सुखायल छलैक। फरिसी सभ यीशु पर दोष लगयबाक उद्देश्‍य राखि हुनका सँ प्रश्‍न कयलनि जे, “की विश्राम-दिन मे रोगी केँ स्‍वस्‍थ करब धर्म-नियमक अनुसार उचित अछि?” 11 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ मे एहन के छी, जकरा लग एकटा भेँड़ा होइक आ ओ विश्राम-दिन कऽ जँ खधिया मे खसि पड़ैक तँ ओकरा पकड़ि कऽ बाहर नहि निकालब? 12 आ भेँड़ा सँ मनुष्‍य कतेक मूल्‍यवान अछि! तेँ विश्राम-दिन मे भलाइक काज करब उचित अछि।” 13 तकरबाद यीशु ओहि व्‍यक्‍ति केँ कहलथिन, “अपन हाथ बढ़ाबह।” ओ हाथ बढ़ौलक आ ओकर हाथ दोसर हाथ जकाँ एकदम ठीक भऽ गेलैक। 14 एहि पर फरिसी सभ बाहर चल गेलाह आ यीशु केँ कोना मारल जाय, तकर षड्‌यन्‍त्र रचऽ लगलाह। 15 मुदा यीशु से बात बुझि ओतऽ सँ चल गेलाह। बहुतो लोक हुनका पाछाँ भऽ गेलनि आ यीशु सभ रोगी केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन। 16 ओ ओकरा सभ केँ कड़गर आदेश देलथिन जे, “हमरा बारे मे प्रचार नहि करिहह।” 17 ई एहि लेल भेल जे परमेश्‍वरक ई वचन पूर्ण होअय जे ओ अपन प्रवक्‍ता यशायाहक माध्‍यम सँ कहने छलाह— 18 “हमर सेवक केँ देखू, जिनका हम चुनने छी, हमरा लेल अति प्रिय, जिनका सँ हमर मोन प्रसन्‍न अछि। हम हुनका अपन आत्‍मा देबनि, आ ओ सभ जातिक लोकक लेल न्‍यायसंगत फैसला सुनौताह। 19 ने ओ कोनो तरहक विवाद करताह आ ने चिचिअयताह, आ ने हुनकर जोर सँ बजबाक आवाज रस्‍ता पर ककरो सुनाइ देतैक। 20 ओ थुरायल खड़ही केँ नहि तोड़ताह, आ ने झपलाइत दीप केँ मिझौताह, जाबत तक न्‍याय केँ विजयी नहि कऽ देताह। 21 पृथ्‍वीक सभ जातिक लोक हुनके पर आशा राखत।” 22 तखन लोक सभ दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित एक आदमी केँ, जे आन्‍हर आ बौक छल, तकरा यीशु लग अनलकनि। यीशु ओकरा स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन और ओ तखने बाजऽ आ देखऽ लागल। 23 एहि पर ओतऽ जमा भेल लोकक भीड़ आश्‍चर्यित भऽ कहऽ लागल जे, “कतौ ई दाऊदक पुत्र तँ नहि छथि?!” 24 मुदा फरिसी सभ जखन लोकक ई बात सुनलनि तँ ओ सभ कहऽ लगलाह, “ओ तँ मात्र दुष्‍टात्‍मा सभक मुखिया बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत अछि।” 25 यीशु हुनकर सभक मोनक विचार जानि कहलथिन, “जाहि राज्‍य मे फूट पड़ि जाय से नष्‍ट भऽ जायत, आ जाहि नगर वा घर मे फूट भऽ जाय से नहि टिकत। 26 जँ शैताने शैतान केँ निकालऽ लागत तँ मतलब भेल जे ओकरा मे फूट भऽ गेलैक, तखन ओकर राज्‍य कोना टिकल रहतैक? 27 ठीक अछि, जँ हम बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत छी तँ अहाँ सभक लोक ककरा शक्‍ति सँ निकालैत अछि? वैह सभ अहाँ सभक फैसला करत। 28 मुदा जँ हम परमेश्‍वरक आत्‍माक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत छी तँ परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभक बीच आबि गेल अछि, से जानि लिअ। 29 “वा कोनो डकैत, बलगर आदमीक घर मे पैसि कऽ जाबत तक ओ ओकरा बान्‍हि कऽ काबू मे नहि कऽ लेत, की ताबत तक ओकर सम्‍पत्ति लुटि कऽ लऽ जा सकत? बान्‍हि कऽ काबू मे कयलाक बादे ओकरा लुटि सकैत अछि। 30 “जे केओ हमरा संग नहि अछि, से हमरा विरोध मे अछि। आ जे केओ हमरा संग जमा नहि करैत अछि, से छिड़िअबैत अछि। 31 तेँ हम अहाँ सभ केँ कहि दैत छी जे मनुष्‍यक सभ तरहक पाप आ निन्‍दाक बात क्षमा कयल जयतैक मुदा पवित्र आत्‍माक विरोध मे कयल निन्‍दाक बात क्षमा नहि कयल जयतैक। 32 मनुष्‍य-पुत्रक विरोध मे जँ केओ किछु बाजत, तँ ओकरा क्षमा कयल जयतैक। मुदा जँ केओ पवित्र आत्‍माक विरोध मे बाजत, तँ ओकरा ने एहि युग मे आ ने आबऽ वला युग मे क्षमा भेटतैक। 33 “कोनो गाछ केँ नीक बुझैत छी तँ ओकर फल केँ सेहो नीक बुझू, अथवा ओकरा खराब बुझैत छी तँ ओकर फल केँ सेहो खराब बुझू, किएक तँ गाछ अपन फले सँ चिन्‍हल जाइत अछि। 34 “है साँपक सन्‍तान सभ, अहाँ सभ दुष्‍ट भऽ नीक बात बाजि कोना सकैत छी? कारण, जे किछु ककरो हृदय मे भरल अछि, सैह मुँह सँ बहराइत छैक। 35 नीक मनुष्‍यक मोन मे नीके बातक भण्‍डार रहैत छैक आ ओ अपन भण्‍डार मे सँ नीक वस्‍तु सभ बाहर करैत अछि। अधलाह मनुष्‍यक मोन मे अधलाहे बातक भण्‍डार रहैत छैक आ ओ अपन भण्‍डार मे सँ अधलाह वस्‍तु सभ बाहर करैत अछि। 36 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, मनुष्‍य जे कोनो व्‍यर्थक बात बाजत, न्‍यायक दिन मे ओकरा तकर हिसाब देबऽ पड़तैक, 37 किएक तँ अहाँ अपन कहल बातक द्वारा निर्दोष और अपन कहल बातक द्वारा दोषी ठहराओल जायब।” 38 एहि पर किछु धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ यीशु केँ कहलथिन, “यौ गुरुजी, हम सभ अहाँ सँ कोनो चमत्‍कार वला चिन्‍ह देखऽ चाहैत छी।” 39 यीशु उत्तर देलथिन, “एहि पीढ़ीक लोक सभ कतेक दुष्‍ट आ विश्‍वासघाती अछि जे चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह मँगैत अछि! मुदा जे घटना परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता योनाक संग भेल छलनि, से चिन्‍ह छोड़ि एकरा सभ केँ आओर कोनो चिन्‍ह नहि देखाओल जयतैक। 40 जाहि तरहेँ योना तीन दिन आ तीन राति विशाल माछक पेट मे रहलाह, तहिना मनुष्‍य-पुत्र तीन दिन आ तीन राति पृथ्‍वीक पेट मे रहत। 41 निनवे नगरक लोक सभ न्‍यायक दिन मे एहि पीढ़ीक लोकक संग ठाढ़ भऽ एकरा सभ केँ दोषी ठहराओत, किएक तँ निनवे नगरक लोक सभ योनाक प्रचारक बात सुनि अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयलक, आ देखू, एतऽ एखन केओ एहन अछि जे योनो सँ महान्‌ अछि। 42 न्‍यायक दिन मे दक्षिण देशक रानी एहि पीढ़ीक लोकक संग ठाढ़ भऽ एकरा सभ केँ दोषी ठहरौतीह, किएक तँ ओ सुलेमान राजाक बुद्धिक बात सुनबाक लेल पृथ्‍वीक दोसर कात सँ अयलीह, आ देखू, एतऽ एखन केओ अछि जे सुलेमानो सँ महान्‌ अछि। 43 “दुष्‍टात्‍मा जखन कोनो मनुष्‍य मे सँ बहरा जाइत अछि तँ ओ निर्जन-स्‍थान मे आराम करबाक स्‍थानक खोज मे घुमैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भेटैत नहि छैक। 44 तखन ओ कहैत अछि जे, ‘हम अपन पहिलुके घर मे, जतऽ सँ बहरा कऽ आयल छलहुँ, ततहि फेर जायब।’ तँ ओ जखन ओहिठाम पहुँचैत अछि तँ देखैत अछि जे ओहि घर मे केओ नहि अछि, घर झाड़ल-बहारल अछि, आ सभ वस्‍तु ढंग सँ राखल अछि। 45 तखन ओ जा कऽ अपनो सँ दुष्‍टाह सातटा आरो दुष्‍टात्‍मा केँ अपना संग लऽ अनैत अछि आ ओहि घर मे अपन डेरा खसा लैत अछि। एहि तरहेँ ओहि मनुष्‍यक ई दशा पहिलुको दशा सँ खराब भऽ जाइत छैक। एहि भ्रष्‍ट पीढ़ीक लोकक संग सेहो तहिना होयतैक।” 46 यीशु लोकक भीड़ सँ बात करिते छलाह कि हुनकर माय आ भाय सभ ओतऽ पहुँचलाह आ हुनका सँ गप्‍प करबाक लेल बाहर ठाढ़ रहलाह। 47 केओ यीशु केँ कहलकनि जे, “देखू, अहाँक माय आ भाय सभ बाहर ठाढ़ छथि आ अहाँ सँ बात करऽ चाहैत छथि।” 48 यीशु ओकरा उत्तर देलथिन, “के छथि हमर माय? के सभ छथि हमर भाय?” 49 तखन अपना शिष्‍य सभक दिस हाथ सँ इसारा करैत कहलनि, “देखू, यैह सभ हमर माय आ हमर भाय सभ छथि। 50 जे केओ हमर पिता, जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनकर इच्‍छाक अनुसार चलैत छथि, वैह हमर भाय, हमर बहिन, हमर माय छथि।”

Matthew 13

1 ओही दिन यीशु घर सँ बहरा कऽ झीलक कछेर पर जा कऽ बैसलाह। 2 हुनका लग लोकक एतेक विशाल भीड़ आबि कऽ जमा भऽ गेल जे ओ नाव पर चढ़ि कऽ बैसलाह आ लोकक भीड़ झीलक कछेर पर ठाढ़ रहल। 3 यीशु विभिन्‍न तरहक दृष्‍टान्‍त सभक द्वारा लोक सभ केँ बहुतो बात सभ कहलथिन। ओ कहलथिन, “एक किसान बीया बाउग करबाक लेल गेल। 4 बीया बाउग करैत काल किछु बीया रस्‍ताक कात मे खसल आ चिड़ै सभ आबि ओकरा खा लेलकैक। 5 किछु बीया पथराह जमीन पर खसल जतऽ बेसी माटि नहि होयबाक कारणेँ ओ जल्‍दी जनमि गेल। 6 मुदा रौद लगिते ओ झरकि गेल आ जड़ि नहि पकड़ि सकबाक कारणेँ सुखा गेल। 7 फेर दोसर बीया काँट-कुशक बीच मे खसल मुदा काँट-कुश बढ़ि कऽ ओकरा दबा देलकैक। 8 किछु बीया नीक जमीन पर पड़ल आ फड़ल-फुलायल, कोनो सय गुना फसिल देलक, कोनो साठि गुना आ कोनो तीस गुना। 9 जकरा कान होइक, से सुनओ।” 10 यीशुक शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ पुछलथिन, “अहाँ लोक सभ सँ दृष्‍टान्‍त सभ मे किएक बात करैत छी?” 11 यीशु उत्तर देलथिन, “स्‍वर्गक राज्‍य जे अछि तकर रहस्‍यक ज्ञान तँ अहाँ सभ केँ देल गेल अछि, मुदा एकरा सभ केँ नहि देल गेल छैक। 12 तेँ जकरा छैक तकरा आओर देल जयतैक आ ओकरा लग बहुते भऽ जयतैक। मुदा जकरा नहि छैक तकरा सँ जेहो छैक सेहो लऽ लेल जयतैक। 13 हम एकरा सभ सँ दृष्‍टान्‍त सभ मे एहि लेल बात करैत छी जे, ‘ई सभ तकितो देखैत नहि अछि; आ सुनितो ने सुनैत अछि आ ने बुझैत अछि।’ 14 एकरा सभ मे यशायाहक ई भविष्‍यवाणी पूरा होइत अछि जे, ‘तोँ सभ सुनैत तँ रहबह मुदा बुझबह नहि, तोँ सभ देखैत तँ रहबह मुदा देखाइ देतह नहि।’ 15 ‘कारण, एहि लोक सभक मोन मे ठेला पड़ि गेल छैक, ई सभ कान सँ उच्‍च सुनैत अछि, ई सभ अपन आँखि मुनि लेने अछि, जाहि सँ कतौ एना नहि होअय जे 2 आँखि सँ देखय, 2 कान सँ सुनय, 2 मोन सँ बुझय, 2 आ घूमि कऽ हमरा लग आबय, 2 आ हम ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कऽ दिऐक।’ 16 “मुदा धन्‍य छी अहाँ सभ जे आँखि सँ देखैत छी आ कान सँ सुनैत छी। 17 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, अपना समय मे परमेश्‍वरक एहन बहुतो प्रवक्‍ता आ धार्मिक लोक सभ रहथि जे सभ चाहलनि जे, जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ देखि रहल छी, तकरा देखी, मुदा नहि देखलनि; और जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ सुनि रहल छी, से सुनी, मुदा नहि सुनलनि। 18 “आब अहाँ सभ बाउग कयनिहार वला दृष्‍टान्‍तक अर्थ सुनू। 19 जखन केओ परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार सुनैत अछि मुदा बुझैत नहि अछि, तखन शैतान आबि कऽ जे किछु ओकरा हृदय मे बाउग कयल गेल रहैत अछि से ओकरा सँ छिनि कऽ लऽ लैत अछि। ई वैह बीया भेल जे रस्‍ताक कात मे बाउग कयल गेल छल। 20 पथराह जमीन पर बाउग कयल बीया ओ व्‍यक्‍ति भेल जे परमेश्‍वरक शुभ समाचार सुनि कऽ तुरत आनन्‍दपूर्बक ओकरा ग्रहण कऽ लैत अछि, 21 मुदा ओ वचन ओकरा मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक आ ओ कनेके काल स्‍थिर रहैत अछि। जखन शुभ समाचारक कारणेँ ओकरा कष्‍ट सहऽ पड़ैत छैक वा ओकरा संग अत्‍याचार होमऽ लगैत छैक तँ ओ तुरत विश्‍वास केँ छोड़ि दैत अछि। 22 काँट-कुशक बीच खसल बीया ओ मनुष्‍य भेल जे शुभ समाचार केँ सुनैत अछि मुदा सांसारिक चिन्‍ता आ धन-सम्‍पत्तिक मोह-माया ओहि शुभ समाचार केँ दबा दैत छैक और ओ वचन ओकरा जीवन मे कोनो फल नहि दैत अछि। 23 नीक जमीन मे बाउग कयल बीया ओ सभ अछि जे सभ शुभ समाचार सुनैत अछि और बुझैत अछि। ओ फड़ि-फुला कऽ फसिल दैत अछि, केओ सय गुना, केओ साठि गुना आ केओ तीस गुना।” 24 यीशु लोक सभक समक्ष दोसर दृष्‍टान्‍त रखलनि जे, “स्‍वर्गक राज्‍यक तुलना ओहि मनुष्‍य सँ कयल जा सकैत अछि जे अपना खेत मे नीक बीया बाउग कयलनि। 25 मुदा जखन सभ केओ सुति रहल छल तखन हुनकर दुश्‍मन अयलनि आ ओहि बाउग कयल गहुमक खेत मे जंगली बीया बाउग कऽ चल गेल। 26 जखन बाउग कयल गहुमक बीया जनमल आ ओहि मे बालि निकलल तखन जंगलिआ घास सेहो देखाइ देलक। 27 ई देखि नोकर सभ मालिक केँ कहलकनि, ‘मालिक, की अपने अपना खेत मे बढ़ियाँ बीया बाउग नहि कयने छलहुँ? तँ एहि मे जंगलिआ घास कतऽ सँ आबि गेल?’ 28 मालिक कहलथिन, ‘ई कोनो दुश्‍मनक काज अछि!’ नोकर सभ कहलकनि, ‘तँ की, ओकरा उखाड़ि दिऐक?’ 29 ओ कहलथिन, ‘नहि। कतौ एना नहि भऽ जाओ जे जंगलिआ घास उखाड़ैत काल तोँ सभ गहुमोक गाछ सभ केँ उखाड़ि दहक। 30 गहुम कटयबाक समय तक दूनू केँ संग-संग बढ़ऽ दहक। कटनी करयबाक समय मे हम कटनिहार सभ केँ कहबैक जे, पहिने जंगलिआ घासक गाछ सभ केँ जमा कऽ कऽ जरयबाक लेल बोझ बान्‍हि लैह, तखन गहुम केँ हमरा बखारी मे जमा करह।’” 31 यीशु लोक सभ केँ एक आओर दृष्‍टान्‍त दैत कहलथिन, “स्‍वर्गक राज्‍य सरिसोक दाना जकाँ अछि, जकरा केओ लेलक आ अपना खेत मे बाउग कऽ देलक। 32 दाना सभ मे सरिसोक दाना सभ सँ छोट होइत अछि मुदा जनमि कऽ बढ़लाक बाद सभ साग-पात सँ पैघ भऽ तेहन गाछ भऽ जाइत अछि जे आकाशक चिड़ै सभ आबि कऽ ओकरा ठाढ़ि-पात मे अपन खोंता बना लैत अछि।” 33 यीशु एकटा आओर दृष्‍टान्‍त ओकरा सभ केँ देलथिन— “स्‍वर्गक राज्‍य रोटी फुलाबऽ वला खमीर जकाँ अछि, जकरा एक स्‍त्री तीन पसेरी आँटा मे मिला कऽ सनलक; बाद मे खमीरक शक्‍ति सँ पूरा आँटा फुलि गेलैक।” 34 यीशु अपना लग जमा भेल लोकक भीड़ केँ ई सभ बात दृष्‍टान्‍त दऽ-दऽ कऽ कहलथिन। बिनु दृष्‍टान्‍त देने ओ ओकरा सभ केँ किछु नहि कहलथिन। 35 ओ एहि लेल एना बात कयलनि जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता द्वारा कहल वचन पूरा होअय— “हम दृष्‍टान्‍त सभ दऽ-दऽ कऽ बाजब, सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ जे बात सभ झाँपल छल से हम कहब।” 36 तकरबाद यीशु लोकक भीड़ केँ छोड़ि कऽ घर मे चल अयलाह। शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, “खेत मे बाउग कयल जंगलिआ बीयाक दृष्‍टान्‍त वला बात केँ हमरा सभ केँ बुझा दिअ।” 37 ओ हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “नीक बीया बाउग कयनिहार छथि मनुष्‍य-पुत्र। 38 खेत अछि संसार, आ नीक बीया अछि परमेश्‍वरक राज्‍यक सन्‍तान सभ। जंगलिआ बीया अछि दुष्‍ट शैतानक सन्‍तान सभ। 39 जंगलिआ बीया बाउग करऽ वला दुश्‍मन अछि शैतान। कटनीक समय अछि संसारक अन्‍त आ कटनी कयनिहार सभ छथि स्‍वर्गदूत सभ। 40 “जाहि तरहेँ जंगलिआ घास केँ जमा कऽ कऽ आगि मे जराओल जाइत अछि तहिना संसारक अन्‍त मे सेहो कयल जायत। 41 मनुष्‍य-पुत्र अपना स्‍वर्गदूत सभ केँ पठौताह आ ओ सभ हुनका राज्‍य मे सँ सभ प्रकारक पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ केँ उखाड़ि कऽ आ कुकर्मी सभ केँ जमा कऽ कऽ 42 आगिक भट्ठी मे फेकि देताह, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत। 43 तखन धर्मी सभ अपना पिताक राज्‍य मे सूर्य जकाँ चमकताह। जकरा कान होइक, से सुनओ। 44 “स्‍वर्गक राज्‍य खेत मे गाड़ल धन जकाँ अछि, जकरा कोनो मनुष्‍य पौलक आ फेर माटि सँ झाँपि देलक। ओ एतेक खुश भेल जे ओ अपन सभ धन-सम्‍पत्ति बेचि कऽ ओहि खेत केँ किनि लेलक। 45 “फेर, स्‍वर्गक राज्‍य ओहि व्‍यापारी सन अछि जे नीक मोतीक खोज मे छल। 46 जखन ओकरा एक बहुत बहुमूल्‍य मोती भेटलैक तँ जा कऽ अपन सभ किछु बेचि देलक आ ओहि मोती केँ किनि लेलक। 47 “फेर दोसर दृष्‍टिएँ स्‍वर्गक राज्‍य ओहि महाजाल सन अछि जे समुद्र मे खसाओल गेल आ सभ प्रकारक माछ ओहि मे घेरायल। 48 जखन जाल भरि गेल तँ लोक सभ ओकरा कछेर पर अनलक आ बैसि कऽ नीक माछ सभ केँ डाली मे जमा कयलक मुदा खराब माछ सभ केँ फेकि देलक। 49 एहि संसारक अन्‍त मे सेहो एहिना होयतैक। स्‍वर्गदूत सभ आबि कऽ दुष्‍ट सभ केँ धर्मी सभ सँ अलग करताह 50 आ आगिक भट्ठी मे फेकि देताह, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।” 51 तखन यीशु शिष्‍य सभ सँ पुछलथिन, “की अहाँ सभ ई बात सभ बुझलहुँ?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “हँ।” 52 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “तेँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जे धर्मशास्‍त्र केँ बुझैत अछि आ जे स्‍वर्गक राज्‍यक शिष्‍य बनल अछि, से ओहि गृहस्‍थ जकाँ अछि जे अपन भण्‍डार घर मे सँ नव आ पुरान दूनू तरहक किमती वस्‍तु सभ निकालि सकैत अछि।” 53 यीशु ई दृष्‍टान्‍त सभ देलाक बाद ओतऽ सँ चल गेलाह। 54 ओ अपना गाम मे आबि कऽ सभाघर मे लोक सभ केँ उपदेश देबऽ लगलाह। लोक सभ हुनकर उपदेशक बात सभ सुनि आश्‍चर्यित भऽ गेल आ बाजल जे, “एकरा एहि तरहक बुद्धि आ चमत्‍कार करबाक सामर्थ्‍य कतऽ सँ भेटलैक? 55 की ई लकड़ी मिस्‍तिरीक बेटा नहि अछि? की एकर मायक नाम मरियम नहि छैक? आ एकर भाय सभ याकूब, यूसुफ, सिमोन, आ यहूदा नहि अछि? 56 की एकर बहिन सभ अपना सभक बीच नहि रहैत अछि? तखन एकरा ई बात सभ भेटलैक कतऽ सँ?” 57 एहि तरहेँ लोक यीशु सँ डाह करऽ लागल। तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “मात्र अपने गाम आ अपने घर मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ताक अनादर होइत छैक।” 58 और ओकरा सभक अविश्‍वासक कारणेँ यीशु ओतऽ बहुत कम चमत्‍कार वला काज सभ कयलनि।

Matthew 14

1 ओहि समय मे ओहि प्रदेशक शासक हेरोद यीशुक काज सभक चर्चा सुनलनि। 2 ओ अपन दरबारी सभ केँ कहलनि, “ई तँ बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना अछि! ओ मुइल सभ मे सँ जीबि उठल अछि, आ तेँ चमत्‍कार करबाक एहन सामर्थ्‍य ओकरा मे क्रियाशील अछि।” 3 यूहन्‍ना हेरोद द्वारा कोना मरबाओल गेल छलाह से घटना एहि प्रकारेँ अछि—हेरोद अपन भाय फिलिपुसक स्‍त्री हेरोदियासक कारणेँ यूहन्‍ना केँ पकड़बा कऽ बन्‍हबौने छलथिन आ जहल मे राखि देने छलथिन, 4 किएक तँ यूहन्‍ना हेरोद केँ बेर-बेर कहने छलथिन जे, “अहाँ भायक स्‍त्री केँ राखि कऽ धर्म-नियमक आज्ञाक उल्‍लंघन कऽ रहल छी।” 5 हेरोद यूहन्‍ना केँ मारि देबऽ चाहैत छलाह, मुदा ओ लोक सभ सँ डेराइत छलाह, किएक तँ लोक सभ यूहन्‍ना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता मानैत छलनि। 6 मुदा जखन हेरोदक जन्‍म-दिन अयलनि तँ हेरोदियासक बेटी अतिथि सभक सामने नाँचि कऽ हेरोद केँ ततेक ने प्रसन्‍न कऽ देलकनि 7 जे ओ सपत खाइत ओकरा वचन देलथिन जे, “तोँ जे किछु हमरा सँ मँगबह, से हम तोरा देबह।” 8 बच्‍चीक माय ओकरा सिखा-पढ़ा कऽ कहबौलकैक जे, “हमरा बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍नाक मूड़ी एखने थारी मे अनबा दिअ।” 9 ई सुनि राजा उदास भऽ गेलाह, मुदा तैयो अपन सपत आ उपस्‍थित आमन्‍त्रित सभक कारणेँ ओ आज्ञा देलनि जे ओकर माँग पूरा कयल जाय। 10 ओ सिपाही केँ पठा कऽ जहल मे यूहन्‍नाक मूड़ी कटबा देलथिन। 11 यूहन्‍नाक मूड़ी एकटा थारी मे आनल गेल आ बच्‍ची केँ दऽ देल गेलैक। ओ लऽ कऽ चलि गेल और अपना माय केँ दऽ देलकैक। 12 यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ अयलाह आ अपन गुरुक लास लऽ जा कऽ कबर मे राखि देलथिन। तकरबाद जा कऽ ई समाचार यीशु केँ सुनौलथिन। 13 यीशु ई समाचार सुनि एकटा नाव पर बैसि कऽ चुप-चाप कोनो एकान्‍त स्‍थानक लेल विदा भऽ गेलाह। लोक सभ जखन ई बात बुझलक तँ नगर-नगर सँ बहुतो लोक पैदले हुनका पाछाँ विदा भऽ गेल। 14 यीशु जखन नाव सँ उतरलाह आ लोकक बड़का भीड़ केँ जमा देखलनि तँ हुनका ओहि लोक सभ पर दया आबि गेलनि और ओकरा सभ मे जे रोगी-बिमार सभ छलैक तकरा सभ केँ ओ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन। 15 जखन साँझ पड़ऽ लागल तँ यीशुक शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कहलथिन, “ई जगह बस्‍ती सँ दूर अछि आ साँझ पड़ऽ वला अछि, तेँ एकरा सभ केँ विदा कऽ दिऔक जाहि सँ ई सभ लग-पासक गाम सभ मे जा कऽ अपना लेल किछु खयबाक वस्‍तु किनि सकत।” 16 मुदा यीशु शिष्‍य सभ केँ उत्तर देलथिन, “एकरा सभ केँ एतऽ सँ पठयबाक कोनो आवश्‍यकता नहि अछि। अहीं सभ एकरा सभ केँ भोजन करबिऔक।” 17 शिष्‍य सभ कहलथिन, “हमरा सभ लग, बस, पाँचेटा रोटी आ दुइएटा माछ अछि।” 18 यीशु कहलथिन, “ओ सभ हमरा लग आनू।” 19 तकरबाद ओ लोक सभ केँ घास पर बैसि जयबाक आज्ञा देलथिन। ओहि पाँचटा रोटी आ दूटा माछ केँ ओ हाथ मे लेलनि और स्‍वर्ग दिस तकैत परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। तखन ओ रोटी केँ तोड़ि-तोड़ि कऽ शिष्‍य सभ केँ देलथिन आ शिष्‍य सभ लोक सभ मे परसि देलनि। 20 सभ केओ भरि इच्‍छा भोजन कयलक और शिष्‍य सभ जखन उबरल टुकड़ा सभ बिछलनि तँ ओ बारह पथिया भेल। 21 भोजन करऽ वला मे स्‍त्रीगण आ बच्‍चा सभ केँ छोड़ि पुरुषक संख्‍या लगभग पाँच हजार छल। 22 तकरबाद यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ तुरत नाव पर चढ़ि कऽ अपना सँ पहिने झीलक ओहि पार चल जयबाक लेल आज्ञा देलथिन आ अपने ओतहि रहि कऽ भीड़क लोक सभ केँ विदा करऽ लगलाह। 23 लोक सभ केँ विदा कयलाक बाद ओ एकान्‍त मे प्रार्थना करऽ लेल पहाड़ पर चल गेलाह। साँझ पड़ि गेल छल आ ओ ओतऽ एसगरे छलाह। 24 शिष्‍य सभ जाहि नाव पर गेल छलाह से कछेर सँ दूर पहुँचि लहरि मे डगमग कऽ रहल छल, किएक तँ हवा विपरीत दिस सँ बहि रहल छलैक। 25 यीशु रातिक चारिम पहर मे झीलक पानि पर चलैत शिष्‍य सभक दिस गेलाह। 26 मुदा शिष्‍य सभ हुनका पानि पर चलैत देखि घबड़ा गेलाह आ कहलनि जे, “भूत अछि!” और डरक मारे चिचियाय लगलाह। 27 एहि पर यीशु हुनका सभ केँ तुरत कहलथिन, “साहस राखू! हम छी, नहि डेराउ।” 28 तखन पत्रुस हुनका कहलथिन, “यौ प्रभु, जँ अहीं छी तँ हमरा पानि पर चलैत अपना लग अयबाक आज्ञा दिअ।” 29 यीशु कहलथिन, “आउ।” तखन पत्रुस नाव सँ उतरि कऽ पानि पर चलैत यीशुक दिस बढ़लाह। 30 मुदा जखन देखलनि जे हवा कतेक जोर सँ बहि रहल अछि तँ डेरा गेलाह आ डुबऽ लगलाह। ओ चिचियाइत बजलाह जे, “यौ प्रभु, हमरा बचाउ!” 31 यीशु तुरत हाथ बढ़ा कऽ हुनका पकड़ि लेलथिन आ कहलथिन, “अहाँक विश्‍वास एतेक कम किएक भऽ गेल! अहाँ सन्‍देह किएक कयलहुँ?” 32 तकरबाद जखन ओ सभ नाव पर चढ़ि गेलाह तँ हवाक बहनाइ शान्‍त भऽ गेल। 33 जे सभ नाव पर छलाह, से सभ हुनका पयर पर खसैत कहलथिन, “निश्‍चय अहाँ परमेश्‍वरक पुत्र छी।” 34 झील केँ पार कऽ कऽ ओ सभ गन्‍नेसरत क्षेत्र मे पहुँचलाह। 35 ओहिठामक लोक सभ जखन हुनका चिन्‍हि लेलकनि तँ अपना लग-पासक इलाका मे यीशुक पहुँचबाक समाचार पसारि देलक। लोक सभ अपन सभ रोगी-बिमार केँ हुनका लग आनऽ लगलनि 36 और हुनका सँ नेहोरा करऽ लगलनि जे, “एकरा सभ केँ अहाँ अपन कपड़ाक खूटो छुबऽ दिऔक।” जे-जे रोगी-बिमार सभ यीशुक कपड़ा छुबि लेलक से सभ स्‍वस्‍थ भऽ गेल।

Matthew 15

1 तकरबाद यरूशलेम सँ किछु फरिसी आओर धर्मशिक्षक सभ यीशु लग अयलाह आ कहलथिन, 2 “अहाँक शिष्‍य सभ पुरखाक चलन सभ केँ किएक तोड़ैत अछि? ओ सभ भोजन करऽ सँ पहिने विधिवत हाथ नहि धोइत अछि।” 3 यीशु उत्तर देलथिन, “और अहाँ सभ अपन चलन सभक पालन करबाक लेल परमेश्‍वरक आज्ञा केँ किएक तोड़ैत छी? 4 देखू, परमेश्‍वर कहने छथि जे, ‘अपन माय-बाबूक आदर करह,’ आ ‘जे केओ अपन माय-बाबूक निन्‍दा करय तकरा मृत्‍युदण्‍ड देल जाय।’ 5 मुदा अहाँ सभ कहैत छी जे, जँ केओ अपन बाबू वा माय सँ कहत, ‘हम अहाँ सभ केँ जे किछु सहायता कऽ सकैत छलहुँ से हम परमेश्‍वर केँ अर्पण कऽ देने छी,’ 6 तँ ओकरा अपन माय-बाबूक सहायता कऽ कऽ आदर करबाक कोनो आवश्‍यकता नहि छैक। एहि तरहेँ अहाँ सभ अपन चलन केँ चलयबाक लेल परमेश्‍वरक आज्ञा केँ निरर्थक ठहरबैत छी। 7 हे पाखण्‍डी सभ! यशायाह अहाँ सभक सम्‍बन्‍ध मे एकदम ठीक भविष्‍यवाणी कयलनि जे, 8 ‘ई सभ मुँह सँ हमर आदर करैत अछि, मुदा एकर सभक हृदय हमरा सँ दूर छैक। 9 ई सभ बेकार हमर उपासना करैत अछि। ई सभ जे शिक्षा दैत अछि, से मात्र मनुष्‍यक बनाओल नियम सभ अछि।’” 10 यीशु भीड़क लोक केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ सुनू आ बुझू। 11 जे कोनो वस्‍तु मुँह मे जाइत अछि, से मनुष्‍य केँ अशुद्ध नहि करैत अछि, बल्‍कि जे मुँह सँ बहराइत अछि से ओकरा अशुद्ध करैत अछि।” 12 एहि पर हुनकर शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कहलथिन, “अहाँ जे कहलहुँ से फरिसी सभ केँ बड्ड खराब लगलनि, से अहाँ केँ बुझल अछि?” 13 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “प्रत्‍येक गाछ जे हमर स्‍वर्गीय पिता नहि लगौने छथि, से जड़ि सँ उखाड़ल जायत। 14 छोड़ू ओकर सभक बात! ओ सभ तँ अपने आन्‍हर अछि आ आन्‍हर सभ केँ बाट देखबैत अछि। आन्‍हरे जँ आन्‍हर केँ बाट देखाओत तँ दूनू अवश्‍य खधिया मे खसत।” 15 एहि पर पत्रुस कहलथिन, “एहि दृष्‍टान्‍तक अर्थ हमरा सभ केँ बुझा दिअ।” 16 यीशु कहलथिन, “की अहूँ सभ एखन तक नहि बुझलहुँ? 17 की अहाँ सभ नहि बुझैत छी जे, जे किछु मुँह मे जाइत अछि से पेट मे जा कऽ देह सँ बाहर भऽ जाइत अछि? 18 मुदा जे बात मुँह सँ बहराइत अछि से हृदय सँ निकलि कऽ अबैत अछि आ से मनुष्‍य केँ अशुद्ध बनबैत अछि। 19 कारण, हृदय सँ निकलैत अछि विभिन्‍न तरहक गलत विचार, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, झूठ गवाही, निन्‍दाक बात, 20 आ यैह बात सभ मनुष्‍य केँ अशुद्ध करैत अछि, नहि कि बिनु हाथ धोने भोजन करब, से।” 21 ओतऽ सँ आगाँ बढ़ि यीशु सूर आ सीदोन नगरक इलाका मे गेलाह। 22 ओहिठामक एक कनानी स्‍त्री हुनका लग आबि चिचियाय लगलनि जे, “हे प्रभु, दाऊदक पुत्र, हमरा पर दया करू! हमरा बेटी केँ दुष्‍टात्‍मा लागल छै। ओ ओकरा बड्ड कष्‍ट दैत छैक।” 23 मुदा यीशु ओकरा कोनो उत्तर नहि देलथिन। तखन हुनकर शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ विनती कयलथिन जे, “एकरा विदा कऽ दिऔक, ई तँ चिचियाइत-चिचियाइत अपना सभक पाछाँ लागल अछि।” 24 यीशु कहलथिन, “हम तँ मात्र इस्राएल वंशक हेरायल भेँड़ा सभक लेल पठाओल गेल छी।” 25 मुदा ओ स्‍त्री यीशु लग आबि हुनका पयर पर खसि पड़लनि आ कहलकनि, “प्रभु, हमरा पर दया करू!” 26 ओ उत्तर देलथिन, “बच्‍चा सभक लेल जे रोटी अछि तकरा कुकुरक आगाँ फेकि देब से ठीक बात नहि।” 27 एहि पर स्‍त्री बाजल, “ठीक कहैत छी प्रभु, मुदा कुकुरो सभ तँ मालिकक टेबुल सँ खसल चुर-चार खाइते अछि।” 28 तखन यीशु ओकरा कहलथिन, “हे दाइ, तोहर विश्‍वास बड्ड पैघ छह! जहिना तोँ चाहैत छह, तहिना तोरा लेल होअह।” ओकर बच्‍ची तखने स्‍वस्‍थ भऽ गेलैक। 29 यीशु ओतऽ सँ विदा भऽ कऽ गलील झीलक काते-कात चललाह। तखन एक पहाड़ पर चढ़ि कऽ बैसि रहलाह। 30 झुण्‍डक-झुण्‍ड लोक हुनका लग अयलनि। ओ सभ अपना संग लुल्‍ह, आन्‍हर, नाङड़, बौक और बहुतो दोसर तरहक बिमार लोक सभ केँ लऽ कऽ आयल आ यीशुक चरण मे राखि देलकनि। यीशु ओहि सभ बिमार केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन। 31 जमा भेल लोक सभ जखन देखलक जे बौक सभ बाजि रहल अछि, लुल्‍ह सभ स्‍वस्‍थ भऽ गेल अछि, नाङड़ सभ चलि रहल अछि आ आन्‍हर सभ देखि रहल अछि तखन ओ सभ आश्‍चर्यित भऽ इस्राएलक परमेश्‍वर केँ स्‍तुति करऽ लगलनि। 32 यीशु अपन शिष्‍य सभ केँ बजा कऽ कहलथिन, “हमरा एहि लोक सभ पर दया अबैत अछि। ई सभ तीन दिन सँ हमरा संग अछि आ एकरा सभ लग भोजन करबाक लेल किछु नहि छैक। हम एकरा सभ केँ भूखले घर नहि पठाबऽ चाहैत छी। कतौ एना नहि भऽ जाइक जे ई सभ रस्‍ते मे भूखक मारे मुर्छित भऽ जाय।” 33 शिष्‍य सभ कहलथिन, “एहि निर्जन स्‍थान मे अपना सभ केँ एतेक भोजनक वस्‍तु कतऽ सँ भेटत जे अपना सभ एतेकटा भीड़ केँ भोजन करा सकबैक?” 34 यीशु हुनका सभ सँ पुछलथिन, “अहाँ सभ लग कयटा रोटी अछि?” ओ सभ कहलथिन, “सातटा, आ किछु छोटकी माछ।” 35 यीशु लोक सभ केँ जमीन पर बैसि जयबाक लेल आदेश देलथिन। 36 तकरबाद यीशु ओ सातो रोटी आ माछ सभ लऽ कऽ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि, तखन तोड़ि-तोड़ि कऽ शिष्‍य सभ केँ परसबाक लेल देलथिन। शिष्‍य सभ ओकरा लोक सभ मे बाँटि देलथिन। 37 सभ केओ भरि पेट भोजन कयलक। भोजनक बाद शिष्‍य सभ उबरल टुकड़ा सभ सात टोकरी मे भरि कऽ जमा कयलनि। 38 भोजन करऽ वला लोक मे स्‍त्रीगण आ बच्‍चा सभ केँ छोड़ि पुरुषक संख्‍या चारि हजार छल। 39 भोजन करौलाक बाद लोकक भीड़ केँ विदा कऽ कऽ यीशु नाव पर चढ़ि कऽ मगदन क्षेत्र चल गेलाह।

Matthew 16

1 फरिसी आ सदुकी सभ यीशु लग आबि कऽ आग्रह कयलथिन जे, “हमरा सभ केँ स्‍वर्ग सँ कोनो चमत्‍कार वला चिन्‍ह देखाउ।” ई बात ओ सभ हुनका जाँच करबाक लेल कहलथिन। 2 ताहि पर यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “साँझ पड़ला पर आकाश केँ लाल देखि अहाँ सभ कहैत छी, ‘काल्‍हिक मौसम नीक रहत,’ 3 और भोरखन कऽ आकाश केँ लाल आ झँपौन सन देखि कहैत छी जे, ‘आइ अन्‍हड़-बिहारि आओत।’ अहाँ सभ आकाश मे मौसमक लक्षण केँ चिन्‍हऽ जनैत छी, मुदा आइ-काल्‍हिक समय मे अहाँ सभक सामने की भऽ रहल अछि, से कोन बातक लक्षण अछि, तकरा नहि चिन्‍हैत छी। 4 एहि पीढ़ीक लोक सभ कतेक दुष्‍ट आ विश्‍वासघाती अछि जे चमत्‍कार वला चिन्‍ह मँगैत अछि! मुदा जे घटना परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता योनाक संग भेल छलनि, से चिन्‍ह छोड़ि एकरा सभ केँ आओर कोनो चिन्‍ह नहि देखाओल जयतैक।” एतेक बात कहि यीशु हुनका सभ केँ छोड़ि कऽ आगाँ बढ़ि गेलाह। 5 यीशुक शिष्‍य सभ जखन झील केँ पार कयलनि, तँ ओ सभ रोटी अननाइ बिसरि गेल छलाह। 6 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “सावधान, फरिसी आ सदुकी सभक रोटी फुलाबऽ वला खमीर सँ होसियार रहू।” 7 शिष्‍य सभ एक-दोसर सँ बात करऽ लगलाह जे, “अपना सभ रोटी आनब बिसरि गेलहुँ, तेँ एना कहि रहल छथि।” 8 यीशु हुनकर सभक बात बुझि कहलथिन, “अहाँ सभक विश्‍वास एतेक कमजोर किएक अछि? अहाँ सभ आपस मे एहि पर बात किएक कऽ रहल छी जे अपना सभ लग रोटी नहि अछि? 9 की अहाँ सभ एखनो नहि बुझैत छी? की ओ पाँच हजार लोक आ पाँच रोटी वला बात, और ओहि दिन अहाँ सभ उबरल टुकड़ा कतेक पथिया जमा कऽ कऽ उठौने छलहुँ, से अहाँ सभ केँ स्‍मरण नहि अछि? 10 वा चारि हजार लोकक लेल ओ सातटा रोटी, आ कतेक टोकरी जमा कयलहुँ, से? 11 अहाँ सभ हमर एहि बात केँ बुझि किएक नहि रहल छी जे, ‘फरिसी आ सदुकी सभक रोटी फुलाबऽ वला खमीर सँ होसियार रहू,’ से बात हम रोटीक सम्‍बन्‍ध मे नहि कहने छलहुँ?” 12 तखन शिष्‍य सभ केँ बुझऽ मे अयलनि जे यीशु रोटी फुलयबाक लेल प्रयोग होमऽ वला खमीरक सम्‍बन्‍ध मे नहि, बल्‍कि फरिसी आ सदुकी सभक शिक्षा सँ होसियार रहबाक लेल कहने छलाह। 13 कैसरिया-फिलिप्‍पी क्षेत्र मे आबि कऽ यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ पुछलथिन, “मनुष्‍य-पुत्र के अछि, एहि सम्‍बन्‍ध मे लोक सभ की कहैत अछि?” 14 ओ सभ उत्तर देलथिन, “किछु लोक कहैत अछि जे अहाँ बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना छी, किछु लोक जे एलियाह छी, दोसर लोक सभ जे यर्मियाह वा प्राचीन कालक परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ मे सँ आओर केओ छी, से कहैत अछि।” 15 यीशु शिष्‍य सभ सँ पुछलथिन, “आ अहाँ सभ? अहाँ सभ की कहैत छी जे हम के छी?” 16 सिमोन पत्रुस उत्तर देलथिन, “अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह छी, जीवित परमेश्‍वरक पुत्र छी।” 17 यीशु हुनका कहलथिन, “हे सिमोन, योनाक पुत्र, अहाँ धन्‍य छी! कारण, एहि बातक ज्ञान अहाँ केँ कोनो मनुष्‍य सँ नहि, बल्‍कि हमर पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनका सँ भेटल। 18 हम अहाँ केँ कहैत छी जे, अहाँ ‘पत्रुस’ छी। हम एहि चट्टान पर अपन मण्‍डलीक स्‍थापना करब आ मृत्‍युक सामर्थ्‍य एहि पर विजयी नहि होयत। 19 हम अहाँ केँ स्‍वर्गक राज्‍यक कुंजी देब। जे किछु अहाँ पृथ्‍वी पर बान्‍हब से स्‍वर्ग मे बान्‍हल गेल रहत आ जे किछु अहाँ पृथ्‍वी पर खोलब से स्‍वर्ग मे खोलल गेल रहत।” 20 तकरबाद यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ दृढ़तापूर्बक आदेश देलथिन जे, “ई बात ककरो नहि कहिऔक जे हम उद्धारकर्ता-मसीह छी।” 21 ओही दिन सँ यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ स्‍पष्‍ट जानकारी देबऽ लगलथिन जे, “ई आवश्‍यक अछि जे हम यरूशलेम जाइ, ओतऽ बूढ़-प्रतिष्‍ठित, मुख्‍यपुरोहित आ धर्मशिक्षक सभ सँ हमरा बहुत कष्‍ट देल जाय, हम जान सँ मारल जाइ, आ तेसर दिन हम फेर जिआओल जाइ।” 22 ई बात सुनि पत्रुस हुनका अलग बजा कऽ डँटैत कहलथिन, “यौ प्रभु, परमेश्‍वर एना नहि करथि! अहाँक संग एहन बात कहियो नहि होयत!” 23 ताहि पर यीशु पत्रुस केँ कहलथिन, “है शैतान, तोँ हमरा सोझाँ सँ दूर होअह! हमरा लेल तोँ ठेस लगबाक कारण छह। तोँ परमेश्‍वरक विचार नहि, बल्‍कि मनुष्‍यक विचार मोन मे रखैत छह।” 24 तकरबाद यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “जँ केओ हमर शिष्‍य बनऽ चाहैत अछि, तँ ओ अपना केँ त्‍यागि हमरा कारणेँ दुःख उठयबाक आ प्राणो देबाक लेल तैयार रहओ आ हमरा पाछाँ चलओ। 25 कारण, जे केओ अपन जीवन बचाबऽ चाहैत अछि, से ओकरा गमाओत, मुदा जे केओ हमरा लेल अपन जीवन गमबैत अछि, से ओकरा पाओत। 26 जँ कोनो मनुष्‍य सम्‍पूर्ण संसार केँ पाबि लय और अपन आत्‍मा गमा लय, तँ ओकरा की लाभ भेलैक? अथवा मनुष्‍य अपन आत्‍माक बदला मे की दऽ सकत? 27 किएक तँ मनुष्‍य-पुत्र अपन स्‍वर्गदूत सभक संग अपना पिताक महिमा मे आओत, तखन ओ प्रत्‍येक मनुष्‍य केँ ओकर काजक अनुसार प्रतिफल देतैक। 28 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, एतऽ किछु एहनो लोक सभ ठाढ़ अछि जे जाबत तक मनुष्‍य-पुत्र केँ अपना राज्‍य मे अबैत नहि देखि लेत ताबत तक नहि मरत।”

Matthew 17

1 छओ दिनक बाद यीशु अपना संग पत्रुस, याकूब आ हुनकर भाय यूहन्‍ना केँ लऽ कऽ एक ऊँच पहाड़ पर एकान्‍त मे गेलाह। 2 हुनका सभक सामने मे यीशुक रूप बदलि गेलनि। हुनकर मुँह सूर्य जकाँ चमकऽ लगलनि आ हुनकर वस्‍त्र इजोत सन उज्‍जर भऽ गेलनि। 3 एकाएक शिष्‍य सभ केँ मूसा आ एलियाह यीशु सँ बात-चीत करैत देखाइ देलथिन। 4 एहि पर पत्रुस यीशु केँ कहलथिन, “यौ प्रभु, हमरा सभक लेल ई कतेक नीक बात अछि जे हम सभ एतऽ छी! जँ अपनेक आज्ञा होअय तँ हम एहिठाम तीनटा मण्‍डप बनायब—एकटा अपनेक लेल, एकटा मूसाक लेल आ एकटा एलियाहक लेल।” 5 पत्रुस ई सभ बाजिए रहल छलाह, तखने एकटा चमकैत मेघ आबि हुनका सभ केँ झाँपि देलकनि आ मेघ मे सँ ई आवाज आयल जे, “ई हमर प्रिय पुत्र छथि। हिनका सँ हम अति प्रसन्‍न छी, हिनका बात पर ध्‍यान दिअ!” 6 ई सुनि शिष्‍य सभ अति भयभीत भऽ कऽ मुँहे भरेँ खसलाह। 7 तखन लग आबि यीशु हुनका सभ केँ छुबि कऽ कहलथिन, “उठू, नहि डेराउ।” 8 ओ सभ जखन अपन नजरि ऊपर उठौलनि तँ ओतऽ यीशु केँ छोड़ि आओर किनको नहि देखलनि। 9 पहाड़ पर सँ नीचाँ उतरैत समय मे यीशु शिष्‍य सभ केँ आज्ञा देलथिन जे, “जाबत तक मनुष्‍य-पुत्र मृत्‍यु सँ फेर जीबि कऽ नहि उठत ताबत तक जे बात अहाँ सभ देखलहुँ से ककरो नहि कहिऔक।” 10 एहि पर हुनकर शिष्‍य सभ हुनका सँ पुछलथिन, “धर्मशिक्षक सभ किएक कहैत छथि जे पहिने एलियाह केँ अयनाइ आवश्‍यक अछि?” 11 यीशु उत्तर देलथिन, “ई बात एकदम ठीक अछि। एलियाहक अयनाइ आवश्‍यक अछि, और ओ सभ बातक सुधार करताह। 12 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे एलियाह तँ आबि गेल छथि। लोक सभ हुनका चिन्‍हि नहि सकलनि और ओकरा सभ केँ जे मोन भेलैक, से हुनका संग कयलकनि। एहि तरहेँ मनुष्‍य-पुत्र केँ सेहो ओकरा सभक हाथेँ कष्‍ट भोगऽ पड़तनि।” 13 तखन शिष्‍य सभ केँ बुझऽ मे अयलनि जे यीशु हमरा सभ केँ बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍नाक सम्‍बन्‍ध मे कहि रहल छथि। 14 ओ सभ जखन लोकक भीड़ जतऽ जमा छल ततऽ पहुँचलाह तँ एक गोटे यीशु लग आबि ठेहुनिया दऽ कऽ कहऽ लगलनि, 15 “यौ प्रभु, हमरा बेटा पर दया कयल जाओ, एकरा मिर्गी अबैत छैक आ बहुत कष्‍ट होइत छैक। ई कखनो आगि मे खसि पड़ैत अछि तँ कखनो पानि मे। 16 हम एकरा अपनेक शिष्‍य सभ लग अनने छलहुँ, लेकिन ओ सभ एकरा ठीक नहि कऽ सकलथिन।” 17 यीशु उत्तर देलथिन, “है अविश्‍वासी आ भ्रष्‍ट पीढ़ीक लोक सभ, हम कहिया तक तोरा सभक संग रहिअह? हम कहिया तक तोरा सभ केँ सहैत रहिअह? आनह लड़का केँ हमरा लग।” 18 जे दुष्‍टात्‍मा ओकरा मे पैसि गेल छल, तकरा यीशु फटकारलथिन। दुष्‍टात्‍मा ओकरा मे सँ निकलि गेलैक, आ ओ तखने ठीक भऽ गेल। 19 बाद मे शिष्‍य सभ एकान्‍त मे यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “हम सभ ओहि दुष्‍टात्‍मा केँ किएक नहि निकालि सकलहुँ?” 20 ओ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ मे विश्‍वासक कमी अछि, तेँ। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जँ अहाँ सभ मे सरिसोक दानो बराबरि विश्‍वास रहत आ एहि पहाड़ केँ कहब जे, ‘एहिठाम सँ हटि कऽ ओतऽ जो’ तँ हटि जायत। एहन कोनो बात नहि अछि जे अहाँ सभक लेल असम्‍भव होयत। 21 [मुदा एहि तरहक दुष्‍टात्‍मा प्रार्थना आ उपास केँ छोड़ि आओर कोनो दोसर उपाय सँ नहि निकालल जा सकैत अछि।] “ 22 एक दिन यीशु आ शिष्‍य सभ जखन गलील मे एक संग छलाह, तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “मनुष्‍य-पुत्र पकड़बा कऽ लोकक हाथ मे सौंपल जायत। 23 ओ सभ ओकरा मारि देतैक, मुदा तेसर दिन ओ जिआओल जायत।” ई बात सुनि शिष्‍य सभ बहुत उदास भऽ गेलाह। 24 तकरबाद यीशु आ हुनकर शिष्‍य सभ जखन कफरनहूम नगर मे पहुँचलाह, तखन मन्‍दिरक कर असूल कयनिहार सभ पत्रुस लग आबि कऽ पुछलकनि, “की अहाँ सभक गुरुजी मन्‍दिरक कर नहि चुकबैत छथि?” 25 पत्रुस कहलथिन, “हँ, चुकबैत छथि।” तकरबाद पत्रुस जखन घर मे अयलाह तँ यीशुए हुनका सँ पुछलथिन, “यौ सिमोन, अहाँक की विचार अछि? संसारक राजा सभ सीमा-शुल्‍क वा व्‍यक्‍ति-कर ककरा सभ सँ लैत अछि? अपन पुत्र सभ सँ वा आन लोक सभ सँ?” 26 पत्रुस कहलथिन, “आन लोक सँ।” तखन यीशु कहलथिन, “एकर मतलब, पुत्र कर-मुक्‍त अछि। 27 मुदा एक बात, अपना सभ ओकरा सभ केँ सिकायत करबाक अवसर नहि दी, तेँ अहाँ झील पर जा कऽ बंसी थापू। जे माछ पहिने फँसत तकरा निकालू। ओकरा मुँह मे अहाँ केँ एकटा चानीक सिक्‍का भेटत। अहाँ ओ सिक्‍का लऽ कऽ अपना दूनू गोटेक कर ओकरा सभ केँ दऽ कऽ चुका दिऔक।”

Matthew 18

1 ओही समय मे शिष्‍य सभ आबि कऽ यीशु सँ पुछलथिन, “स्‍वर्गक राज्‍य मे सभ सँ पैघ के अछि?” 2 यीशु एक छोट बच्‍चा केँ अपना लग बजा कऽ हुनका सभक बीच ठाढ़ करैत कहलथिन, 3 “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जाबत तक अहाँ सभ बदलि कऽ बच्‍चा सभ जकाँ नहि बनि जायब ताबत तक स्‍वर्गक राज्‍य मे कहियो नहि प्रवेश करब। 4 तेँ, जे केओ नम्र बनि अपना केँ एहि बच्‍चा जकाँ छोट बुझैत अछि, से स्‍वर्गक राज्‍य मे सभ सँ पैघ अछि। 5 जे केओ हमरा नाम सँ एहन छोट बच्‍चा केँ स्‍वीकार करैत अछि से हमरा स्‍वीकार करैत अछि। 6 मुदा ई बच्‍चा सभ जे हमरा पर विश्‍वास करैत अछि, ताहि मे सँ जँ एकोटा केँ केओ पाप मे फँसाओत, तँ ओहि फँसौनिहारक गरदनि मे जाँतक पाट बान्‍हि कऽ अथाह समुद्र मे डुबा देल जाइक, से ओकरा लेल नीक होइत। 7 “पाप मे फँसाबऽ वला बात सभक कारणेँ संसार पर कतेक कष्‍ट औतैक! पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ तँ रहबे करत, मुदा धिक्‍कार ताहि मनुष्‍य केँ जकरा द्वारा ओ बात सभ अबैत अछि! 8 “जँ अहाँक हाथ वा पयर अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। दूनू हाथ-पयरक संग अनन्‍त समय तक जरैत रहऽ वला आगिक कुण्‍ड मे फेकि देल जायब, अहाँक लेल ताहि सँ नीक ई जे लुल्‍ह-नाङड़ भऽ कऽ जीवन मे प्रवेश करू। 9 आ जँ अहाँक आँखि अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा निकालि कऽ फेकि दिअ। दूनू आँखिक संग नरकक आगि मे फेकि देल जायब, अहाँक लेल ताहि सँ नीक ई जे कनाह भऽ कऽ जीवन मे प्रवेश करू। 10 “अहाँ सभ एहि पर ध्‍यान राखू जे एहि बच्‍चा सभ मे सँ एकोटा केँ तुच्‍छ नहि बुझब। हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्‍वर्ग मे एकर सभक रक्षा कयनिहार दूत सभ सदिखन हमर स्‍वर्गीय पिताक मुँह दिस तकैत रहैत छथि। 11 [मनुष्‍य-पुत्र हेरायल सभ केँ बचयबाक लेल आयल छथि।] 12 “अहाँ सभ की सोचैत छी? जँ ककरो लग एक सय भेँड़ा छैक आ ओहि मे सँ एकटा भेँड़ा भटकि जाइक, तँ की ओ अपन निनान्‍नबे भेँड़ा केँ पहाड़ पर छोड़ि कऽ ओहि भटकल भेँड़ा केँ खोजबाक लेल नहि जायत? 13 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जँ ओ ओकरा भेटि जयतैक, तँ ओहि निनान्‍नबे भेँड़ाक कारणेँ, जे नहि भटकल छलैक, ताहि सँ बेसी आनन्‍द ओकरा एही भेँड़ाक कारणेँ होयतैक। 14 एही तरहेँ स्‍वर्ग मे रहऽ वला अहाँ सभक पिताक इच्‍छा ई छनि जे एहि बच्‍चा सभ मे सँ एकोटा नष्‍ट नहि होनि। 15 “अहाँक भाय जँ अहाँक संग अपराध करय तँ असगरे ओकरा लग जाउ आ एकान्‍त मे ओकर दोष ओकरा बुझा दिऔक। ओ जँ अहाँक बात सुनलक, तँ एकटा भाय अहाँ केँ फेर भेटि गेल से बुझू। 16 मुदा जँ ओ अहाँक बात नहि सुनैत अछि तँ अपना संग एक-दू आदमी केँ लऽ कऽ जाउ आ ओकरा बुझबिऔक, जाहि सँ, जहिना धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, ‘हर बात दू वा तीन साक्षीक गवाही पर आधारित रहय’। 17 मुदा ओ जँ ओकरो सभक बात सुनबाक लेल तैयार नहि भेल, तँ तकर जानकारी विश्‍वासी मण्‍डली केँ दिऔक। आ जँ ओ विश्‍वासी मण्‍डलीक बात सेहो नहि सुनत, तँ ओकरा संग एहन व्‍यवहार करू जेना ओ अविश्‍वासी वा कर असूल कयनिहार ठकहारा होअय। 18 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, अहाँ सभ जे किछु पृथ्‍वी पर बान्‍हब, से स्‍वर्ग मे बान्‍हल गेल रहत, आ जे किछु अहाँ सभ पृथ्‍वी पर खोलब से स्‍वर्ग मे खोलल गेल रहत। 19 “हम अहाँ सभ केँ एकटा इहो बात कहैत छी जे, एहि पृथ्‍वी पर जँ अहाँ सभ मे सँ केओ दू गोटे कोनो बातक लेल एक विचारक भऽ कऽ विनती करब, तँ हमर पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनका द्वारा ओ बात अहाँ सभक लेल पूरा कयल जायत। 20 किएक तँ जतऽ दू वा तीन व्‍यक्‍ति हमरा नाम सँ एक ठाम जमा होइत अछि, ततऽ हम ओकरा सभक बीच उपस्‍थित छी।” 21 तकरबाद पत्रुस यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “यौ प्रभु, हमर भाय जँ हमरा संग अपराध करय तँ कतेक बेर हम ओकरा क्षमा करैत रहिऐक? की सात बेर तक?” 22 यीशु कहलथिन, “हम तँ कहैत छी, सात बेर नहि, बल्‍कि सात सँ सत्तरिक जे गुणनफल होयत ततेक बेर। 23 “कारण, स्‍वर्गक राज्‍यक तुलना एहन राजा सँ कयल जा सकैत अछि जे अपन राज्‍यक कर्मचारी सभ सँ हिसाब-किताब लेबऽ चाहलनि। 24 जखन ओ हिसाब-किताब लेबऽ लगलाह तँ हुनका लग एक कर्मचारी केँ लाओल गेल, जकरा पर दस हजार सोनक रुपैया ऋण छलनि। 25 ओहि कर्मचारी लग ऋण सधयबाक लेल किछु नहि छलैक तेँ ओकर मालिक आज्ञा दऽ देलथिन जे, एकरा, एकर स्‍त्री आ बाल-बच्‍चा केँ और एकर सभ सामान बेचि कऽ एकरा सँ ऋण असूल कयल जाय। 26 ई सुनि ओ कर्मचारी अपना मालिकक पयर पर खसि कऽ विनती करऽ लागल जे, ‘यौ सरकार, धैर्य राखल जाओ, हम अपनेक सम्‍पूर्ण ऋण सधा देब।’ 27 मालिक ओकरा पर दया कऽ कऽ ओकरा छोड़ि देलथिन आ ओकर सम्‍पूर्ण ऋण माफ कऽ देलथिन। 28 मुदा ओ कर्मचारी जखन ओतऽ सँ बाहर भेल तँ ओकरा संग काज करऽ वला एक दोसर कर्मचारी भेटलैक जे ओकरा सँ एक सय तामक रुपैया ऋण लेने छलैक। ओ ओकरा पकड़ि कऽ गरदनि चभैत कहलकैक, ‘जे किछु तोरा पर हमर ऋण अछि, से तुरत ला!’ 29 ओ कर्मचारी ओकरा पयर पर खसि कऽ विनती करऽ लागल, ‘धैर्य राखू, हम अहाँक ऋण सधा देब।’ 30 मुदा ओ नहि मानलक आ जा कऽ ओकरा जहल मे रखबा देलकैक जे जाबत तक ऋण नहि सधाओत ताबत तक जहल मे रहओ। 31 ई देखि दोसर कर्मचारी सभ केँ बहुत दुःख भेलैक आ ओ सभ जा कऽ सम्‍पूर्ण घटना मालिक केँ कहि सुनौलकनि। 32 तकरबाद मालिक ओहि कर्मचारी केँ बजबा कऽ कहलथिन, ‘है दुष्‍ट नोकर, तोँ हमरा सँ विनती कयलेँ तँ हम तोहर सम्‍पूर्ण ऋण माफ कऽ देलिऔक। 33 तँ की ई उचित नहि छल जे जहिना हम तोरा संग दया कयलिऔ, तहिना तोहूँ अपन संगी-कर्मचारीक संग दया करिते?’ 34 मालिक केँ ओहि कर्मचारी पर बहुत क्रोध भऽ गेलनि आ ओ ओकरा दण्‍ड देबाक लेल जहल मे पठबा देलथिन जे जाबत तक ओ पूरा ऋण सधा नहि दय ताबत तक जहल मे रहओ। 35 तेँ जँ अहूँ सभ अपना भाय केँ हृदय सँ क्षमा नहि करबैक तँ हमर स्‍वर्गीय पिता अहूँ सभक संग ओहने व्‍यवहार करताह।”

Matthew 19

1 ई सभ बात जखन कहल भऽ गेलनि तँ यीशु गलील प्रदेश सँ विदा भऽ कऽ यरदन नदीक दोसर कात यहूदिया प्रदेश मे गेलाह। 2 लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ आबि गेलनि। यीशु ओहिठाम ओकरा सभक रोग-बिमारी सभ केँ ठीक कऽ देलनि। 3 ओहिठाम किछु फरिसी सभ यीशु लग अयलाह आ हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन, “की धर्म-नियमक अनुसार पुरुष केँ केहनो कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक देनाइ उचित अछि?” 4 यीशु उत्तर देलथिन, “की अहाँ सभ नहि पढ़ने छी जे, सृष्‍टि कयनिहार शुरुए सँ मनुष्‍य केँ ‘पुरुष आ स्‍त्री बनौलनि, 5 और कहलनि, ‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्‍त्रीक संग रहत, आ दूनू एक शरीर भऽ जायत।’ ? 6 एहि तरहेँ ओ सभ आब दू नहि अछि, एके भऽ गेल। तेँ जकरा परमेश्‍वर जोड़ि देलथिन, तकरा मनुष्‍य अलग नहि करओ।” 7 फरिसी सभ पुछलथिन, “तखन तलाकनामा दऽ कऽ तलाक देबाक आज्ञा मूसा किएक देलनि?” 8 यीशु कहलथिन, “अहाँ सभक मोनक कठोरताक कारणेँ मूसा अहाँ सभ केँ स्‍त्री केँ तलाक देबाक अनुमति देलनि, मुदा शुरू सँ एहन नहि छल। 9 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ एहि कारण केँ छोड़ि जे ओकर स्‍त्री दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखने अछि, कोनो आन कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि।” 10 यीशुक शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन, “जँ स्‍त्री-पुरुषक सम्‍बन्‍ध एहन अछि, तँ विवाह नहिए कयनाइ नीक बात।” 11 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “सभ केओ एहि बात केँ स्‍वीकार नहि कऽ सकैत अछि, मात्र ओ सभ जकरा एहि बातक लेल वरदान भेटल छैक। 12 किएक तँ किछु लोक मे जन्‍मे सँ विवाह करबाक योग्‍यता नहि अछि, किछु लोक केँ दोसर मनुष्‍य अयोग्‍य बनबैत अछि, और किछु लोक एहनो अछि जे स्‍वर्गक राज्‍यक लेल विवाह कयनाइ त्‍यागि देने अछि। जे केओ एहि बात केँ स्‍वीकार कऽ सकैत अछि से एकरा स्‍वीकार करओ।” 13 तकरबाद किछु गोटे बच्‍चा सभ केँ यीशु लग अनलकनि जाहि सँ ओ ओकरा सभ पर हाथ राखि कऽ ओकरा सभक लेल प्रार्थना कऽ देथिन, मुदा हुनकर शिष्‍य सभ ओकरा सभ केँ डाँटि देलथिन। 14 यीशु कहलथिन, “बच्‍चा सभ केँ हमरा लग आबऽ दिऔक, ओकरा सभ केँ नहि रोकिऔक, किएक तँ स्‍वर्गक राज्‍य एहने सभक अछि।” 15 यीशु ओहि बच्‍चा सभक माथ पर हाथ राखि कऽ आशीर्वाद देलथिन आ ओतऽ सँ विदा भऽ गेलाह। 16 यीशु लग एक युवक अयलनि आ कहलकनि, “यौ गुरुजी, हम कोन उत्तम काज करू, जाहि सँ हमरा अनन्‍त जीवन भेटत?” 17 यीशु कहलथिन, “अहाँ हमरा सँ उत्तमक विषय मे किएक पुछैत छी? उत्तम तँ मात्र एकेटा छथि। जँ अहाँ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करऽ चाहैत छी तँ परमेश्‍वरक आज्ञा सभक पालन करू।” 18 ओ पुछलकनि, “कोन आज्ञा सभ?” एहि पर यीशु कहलथिन, “ ‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, 19 अपन माय-बाबूक आदर करह’ आ ‘अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।’” 20 ओ युवक उत्तर देलकनि, “एहि सभ आज्ञाक पालन तँ हम कऽ रहल छी, तखन फेर हमरा मे कोन बातक कमी रहि गेल?” 21 यीशु ओकरा कहलथिन, “अहाँ जँ पूर्ण सिद्ध बनऽ चाहैत छी, तँ अपन धन-सम्‍पत्ति बेचि कऽ ओकरा गरीब सभ मे बाँटि दिअ; अहाँ केँ स्‍वर्ग मे धन भेटत। तकरबाद आउ आ हमरा पाछाँ चलू।” 22 ई बात सुनि युवक उदास भऽ ओतऽ सँ चल गेल, कारण, ओकरा बहुत धन-सम्‍पत्ति छलैक। 23 एहि पर यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, धनिक सभक लेल स्‍वर्गक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ कठिन अछि। 24 हम अहाँ सभ केँ फेर कहैत छी जे, धनिक केँ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ सँ ऊँट केँ सुइक भूर दऽ कऽ निकलनाइ आसान अछि।” 25 ई सुनि हुनकर शिष्‍य सभ अवाक भऽ कऽ कहलथिन, “तखन उद्धार ककर भऽ सकैत छैक?!” 26 यीशु हुनका सभक दिस एकटक देखैत कहलथिन, “मनुष्‍यक लेल तँ ई असम्‍भव अछि, मुदा परमेश्‍वरक लेल सभ किछु सम्‍भव अछि।” 27 एहि पर पत्रुस कहलथिन, “देखू, हम सभ तँ सभ किछु त्‍यागि कऽ अहाँक पाछाँ आयल छी। हमरा सभ केँ की भेटत?” 28 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, नव सृष्‍टि मे, जहिया मनुष्‍य-पुत्र अपन महिमामय सिंहासन पर विराजमान होयत, तहिया अहूँ सभ, जे सभ हमरा पाछाँ आयल छी, बारहटा सिंहासन पर बैसब आ इस्राएलक बारहो कुलक न्‍याय करब। 29 जे केओ हमरा कारणेँ अपन घर, भाय, बहिन, माय-बाबू, बाल-बच्‍चा वा जमीन-जालक त्‍याग कयने अछि, से तकर सय गुना पाओत और अनन्‍त जीवनक अधिकारी होयत। 30 मुदा बहुतो लोक जे एखन आगाँ अछि से पाछाँ भऽ जायत, आ जे एखन पाछाँ अछि से आगाँ भऽ जायत।

Matthew 20

1 “स्‍वर्गक राज्‍य एहन एक गृहस्‍थ जकाँ अछि जे अपन अंगूरक बगान मे काज करयबाक लेल भोरे-भोर मजदूर तकबाक लेल गेलाह। 2 ओ मजदूर सभक संग एक दिनक चानीक एक रुपैया मजदूरी देबाक व्‍यवस्‍था कऽ ओकरा सभ केँ अपन अंगूरक बगान मे काज करबाक लेल पठौलनि। 3 ओ फेर नौ बजे बाहर गेलाह तँ आरो मजदूर सभ केँ बजार मे निरर्थक ठाढ़ देखलनि। 4 ओ ओकरा सभ केँ कहलथिन, ‘तोहूँ सभ हमर अंगूरक बगान मे जा कऽ काज करह। जे उचित होयतह से हम तोरो सभ केँ देबह।’ 5 मजदूर सभ जा कऽ काज करऽ लागल। मालिक फेर बारह बजे आ तीन बजे बाहर जा-जा कऽ ओहिना कयलनि। 6 साँझ पाँच बजे फेर ओ बहरयलाह। ओ किछु आओर मजदूर सभ केँ ओहिना ठाढ़ देखि पुछलथिन, ‘तोँ सभ एतऽ दिन भरि किएक निरर्थक ठाढ़ रहलह?’ 7 ओ सभ कहलकनि, ‘हमरा सभ केँ केओ नहि काजक लेल अढ़ौलक।’ मालिक ओकरा सभ केँ कहलथिन, ‘तोहूँ सभ हमर बगान मे जा कऽ काज करह।’ 8 “साँझ भऽ गेला पर अंगूर-बगानक मालिक अपन मुख्‍य नोकर केँ बजा कऽ कहलथिन, ‘मजदूर सभ केँ बजाबह आ सभ सँ अन्‍तिम पहर मे जे सभ आयल तकरा सभ सँ शुरू कऽ कऽ सभ सँ पहिल पहर मे आबऽ वला धरि, सभ केँ मजदूरी दऽ दहक।’ 9 जखन ओ सभ, जे साँझ लगभग पाँच बजे सँ काज शुरू कयने छल, से सभ आयल तँ ओकरा सभ केँ चानीक एक-एक रुपैया देल गेलैक। 10 जे मजदूर सभ भोरे सँ काज कयने छल जखन ई बात देखलक, तँ ओ सभ बुझलक जे हमरा सभ केँ बेसी मजदूरी भेटत। मुदा ओकरो सभ केँ चानीक एक-एक रुपैया मजदूरी भेटलैक। 11 ओ सभ अपन मजदूरी पाबि मालिक पर कुड़बुड़ाय लागल। 12 ओ सभ बाजल, ‘सभ सँ पाछाँ आबऽ वला ई मजदूर सभ, जे सभ एके घण्‍टा काज कयलक, तकरो अहाँ हमरा सभक बराबरि बुझलहुँ। हम सभ तँ घाम-पसिना सहि दिन भरि खटलहुँ!’ 13 “मालिक ओहि मे सँ एक गोटे केँ उत्तर देलथिन, ‘हौ मित्र, हम तोरा संग कोनो तरहक अन्‍याय तँ नहि कऽ रहल छिअह। की तोँ हमरा संग चानीक एक रुपैया मजदूरी लेबाक व्‍यवस्‍था नहि कयने छलह? 14 अपन पाइ लैह आ जाह। ई तँ हमर इच्‍छाक बात अछि जे जतबा तोरा देलिअह ततेक पछो सँ आबऽ वला मजदूर सभ केँ सेहो दिऐक। 15 की हमर ई अधिकार नहि अछि जे, जे हमर वस्‍तु अछि तकरा हम जेना चाही, तेना प्रयोग कऽ सकी? हम जँ अपना खुशी सँ ककरो बेसिओ दैत छी तँ की से तोरा अखड़ैत छह?’” 16 तखन यीशु आगाँ कहलनि, “एहि तरहेँ जे अन्‍तिम अछि से पहिल होयत, आ जे पहिल अछि से अन्‍तिम।” 17 यीशु यरूशलेम नगर दिस आगाँ बढ़ि रहल छलाह। ओ अपन बारहो शिष्‍य केँ एक कात लऽ जा कऽ कहलथिन, 18 “सुनू, अपना सभ यरूशलेम जा रहल छी। ओतऽ मनुष्‍य-पुत्र मुख्‍यपुरोहित आ धर्मशिक्षक सभक हाथ मे पकड़ाओल जायत। ओ सभ ओकरा मृत्‍युदण्‍डक जोगरक ठहरा देतैक 19 आ ओकरा गैर-यहूदी सभक हाथ मे सौंपि देतैक जाहि सँ ओ सभ ओकर हँसी उड़बैक, कोड़ा सँ पिटैक आ क्रूस पर टाँगि कऽ मारि दैक। मुदा तेसर दिन ओ फेर जिआओल जायत।” 20 तकरबाद जबदीक स्‍त्री, याकूब आ यूहन्‍नाक माय, अपन पुत्र सभक संग यीशु लग अयलनि आ हुनका आगाँ ठेहुनिया दऽ कऽ किछु माँगऽ चाहलकनि। 21 यीशु पुछलथिन, “अहाँ की चाहैत छी?” ओ कहलकनि, “अहाँ एहि बातक आज्ञा दिअ जे अहाँक राज्‍य मे हमर ई दूनू बेटा, एक अहाँक दहिना कात आ दोसर अहाँक बामा कात बैसत।” 22 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ की माँगि रहल छी, से अहाँ सभ नहि बुझैत छी। की दुःखक बाटी सँ जे हमरा पिबाक अछि से अहाँ सभ पिबि सकैत छी?” ओ सभ कहलकनि, “हँ, पिबि सकैत छी।” 23 यीशु कहलथिन, “हमर बाटी तँ अहाँ सभ पीब, मुदा किनको अपना दहिना कात वा बामा कात बैसायब, तकर अधिकार हमर नहि अछि। ई स्‍थान सभ तिनका सभक लेल छनि, जिनका सभक लेल हमर पिता तैयार कयने छथि।” 24 जखन बाँकी दस शिष्‍य एहि बातक बारे मे सुनलनि तँ ओ सभ ओहि दूनू भाइ पर खिसिआय लगलाह। 25 एहि पर यीशु शिष्‍य सभ केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ जनैत छी जे एहि संसारक शासक सभ जनता पर हुकुम चलबैत रहैत छथि और जनता मे जे पैघ लोक सभ छथि से जनता पर अधिकार जमबैत छथि। 26 मुदा अहाँ सभ मे एना नहि होअय। बल्‍कि, अहाँ सभ मे जे पैघ होमऽ चाहय, से अहाँ सभक सेवक बनय, 27 आ जे केओ अहाँ सभ मे प्रमुख व्‍यक्‍ति बनऽ चाहय, से टहलू बनय। 28 तहिना मनुष्‍य-पुत्र सेहो एहि लेल नहि आयल अछि जे ओ अपन सेवा कराबय, बल्‍कि एहि लेल जे ओ सेवा करय और बहुतो लोकक छुटकाराक मूल्‍य मे अपन प्राण देअय।” 29 यीशु आ हुनकर शिष्‍य सभ जखन यरीहो नगर सँ बहरयलाह तँ लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ आबि रहल छलनि। 30 रस्‍ताक कात मे बैसल दू आन्‍हर व्‍यक्‍ति जखन सुनलक जे एहि बाटे यीशु जा रहल छथि, तँ ओ सभ सोर पारि कऽ कहऽ लागल जे, “हे प्रभु, दाऊदक पुत्र, हमरा सभ पर दया करू!” 31 भीड़क लोक सभ ओकरा दूनू केँ डाँटि देलकैक जे, “चुप होइ जाइ जो,” मुदा ओ सभ आओर जोर सँ हल्‍ला कऽ कऽ कहऽ लागल, “यौ प्रभु, दाऊदक पुत्र, हमरा सभ पर दया करू!” 32 यीशु ठाढ़ भऽ गेलाह आ ओकरा सभ केँ बजा कऽ पुछलथिन, “तोँ सभ की चाहैत छह, हम तोरा सभक लेल की करिअह?” 33 ओ सभ बाजल, “हे प्रभु, हम सभ देखऽ चाहैत छी।” 34 यीशु केँ ओकरा सभ पर दया आबि गेलनि, आ ओकरा सभक आँखि केँ छुबि देलथिन। तखने सँ ओकरा सभ केँ देखाइ देबऽ लगलैक और ओ सभ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि।

Matthew 21

1 यीशु आ हुनकर शिष्‍य सभ जखन यरूशलेम नगरक लग मे जैतून पहाड़ पर बेतफगे गाम मे पहुँचलाह तखन यीशु दूटा शिष्‍य केँ ई कहि कऽ पठौलथिन जे, 2 “सामने मे जे गाम अछि, ताहि मे जाउ। ओतऽ पहुँचिते एक गदही अपन बच्‍चाक संग बान्‍हल भेटत। ओकरा सभ केँ खोलि कऽ हमरा लग नेने आउ। 3 जँ केओ अहाँ सभ केँ किछु कहय तँ कहबैक जे, ‘प्रभु केँ एकर आवश्‍यकता छनि।’ ई सुनैत देरी ओ अहाँ सभ केँ आनऽ देत।” 4 ई एहि लेल भेल जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ताक कहल ई वचन पूरा होअय जे, 5 “सियोन नगर केँ कहक, ‘देखह, तोहर राजा तोरा लग आबि रहल छथुन, ओ विनम्र छथि, ओ गदहा पर, गदहीक बच्‍चा पर बैसल आबि रहल छथुन।’” 6 शिष्‍य सभ जा कऽ यीशुक कहल अनुसार कयलनि। 7 ओ सभ गदही आ ओकर बच्‍चा केँ लऽ आनि ओकरा पीठ पर अपन कपड़ा सभ राखि देलनि। यीशु ओहि पर बैसि गेलाह। 8 भीड़ मे सँ बहुतो लोक सभ सेहो अपन-अपन वस्‍त्र आ ओढ़नी सभ बाट पर ओछौलक। दोसर लोक सभ गाछ-वृक्षक ठाढ़ि-पात काटि-काटि कऽ ओछौलक। 9 यीशुक आगाँ-पाछाँ चलऽ वला लोकक भीड़ एहि तरहेँ जयजयकार करऽ लागल जे, “दाऊदक पुत्र केँ जय! धन्‍य छथि ओ जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि! सर्वोच्‍च स्‍वर्ग मे प्रभुक जयजयकार!” 10 जखन यीशु यरूशलेम मे प्रवेश कयलनि तँ सम्‍पूर्ण नगर मे हलचल सन होमऽ लागल। सभ पुछैत छल, “ई के छथि?” 11 आगाँ-पाछाँ चलऽ वला भीड़क लोक सभ ओकरा सभ केँ कहलकैक, “ई गलील प्रदेशक नासरत-निवासी परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यीशु छथि।” 12 यीशु मन्‍दिरक आङन मे अयलाह आ बेचऽ वला और किनऽ वला सभ केँ ओतऽ सँ बाहर भगाबऽ लगलाह। ओ पाइ भजौनिहार सभक टेबुल आ परबा-पेउरकी बेचनिहार सभक पीढ़ी-बैसकी सभ केँ उनटा-पुनटा देलथिन। 13 ओ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘हमर घर प्रार्थनाक घर कहाओत’ मुदा तोँ सभ एकरा ‘चोर-डाकूक अड्डा’ बना देने छह।” 14 मन्‍दिर मे यीशु लग आन्‍हर आ नाङड़ व्‍यक्‍ति सभ अयलनि आ यीशु ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन। 15 यीशुक चमत्‍कार वला काज सभ देखि आ मन्‍दिर मे बच्‍चा सभक द्वारा जे “दाऊदक पुत्र” क जयजयकार भऽ रहल छल, तकरा सुनि मुख्‍यपुरोहित आ धर्मशिक्षक सभ बहुत खिसिआ गेलाह। 16 ओ सभ यीशु केँ कहलथिन, “की अहाँ नहि सुनैत छी जे ई सभ की कहि रहल अछि?” यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हँ, और की अहाँ सभ नहि पढ़ने छी जे, ‘हे प्रभु, अहाँ धिआ-पुता आ कोरा मेहक बच्‍चा सभक मुँह सँ अपन स्‍तुति करबौलहुँ’ ?” 17 एतेक कहि यीशु हुनका सभ केँ ओतहि छोड़ि नगर सँ बहरा गेलाह आ बेतनिया गाम मे जा कऽ राति भरि ओतऽ रहलाह। 18 भोर मे फेर नगर दिस अबैत समय मे यीशु केँ भूख लगलनि। 19 रस्‍ताक कात मे एक अंजीरक गाछ देखि ओ गाछ लग गेलाह। मुदा ओहि पर पात छोड़ि आओर किछु नहि भेटलनि। यीशु ओहि गाछ केँ कहलथिन, “जो, आब कहियो तोरा पर फल नहि लटकतौ!” गाछ ओही क्षण सुखा गेल। 20 ई देखि शिष्‍य सभ आश्‍चर्यित भऽ कहलथिन, “ई अंजीरक गाछ तुरत कोना सुखा गेल?” 21 एहि पर यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जँ अहाँ सभ बिनु सन्‍देह कऽ विश्‍वास करब, तँ अहाँ सभ मात्र एतबे नहि करब जे एहि अंजीरक गाछक संग भेल, बल्‍कि जँ अहाँ सभ एहि पहाड़ केँ आज्ञा देबैक जे, ‘एतऽ सँ हट आ समुद्र मे जो,’ तँ सेहो भऽ जायत। 22 अहाँ सभ जे किछु प्रार्थना मे विश्‍वासक संग माँगब, से अहाँ सभ केँ प्राप्‍त होयत।” 23 यीशु जखन मन्‍दिर मे जा कऽ उपदेश दऽ रहल छलाह तखन मुख्‍यपुरोहित आ समाजक बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “अहाँ कोन अधिकार सँ ई सभ बात कऽ रहल छी? अहाँ केँ ई अधिकार के देलनि?” 24 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “हमहूँ अहाँ सभ सँ एकटा बात पुछैत छी। जँ अहाँ सभ हमरा तकर जबाब देब तँ हमहूँ अहाँ सभ केँ कहब जे कोन अधिकार सँ हम ई सभ बात कऽ रहल छी। 25 यूहन्‍ना केँ बपतिस्‍मा देबाक अधिकार कतऽ सँ भेटल छलनि? परमेश्‍वर सँ वा मनुष्‍य सँ?” ई सुनि ओ सभ अपना मे तर्क-वितर्क करऽ लगलाह जे, “जँ अपना सभ कहबैक जे ‘परमेश्‍वर सँ’, तँ ओ पुछत जे, तखन अहाँ सभ हुनकर बातक विश्‍वास किएक नहि कयलहुँ? 26 मुदा जँ कहबैक जे, ‘मनुष्‍य सँ’ तँ अपना सभ केँ जनता सँ डर अछि, कारण सभ लोक यूहन्‍ना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता मानैत अछि।” 27 तेँ ओ सभ यीशु केँ उत्तर देलथिन जे, “हम सभ नहि जनैत छी।” एहि पर यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “तखन हमहूँ अहाँ सभ केँ नहि कहब जे कोन अधिकार सँ हम ई काज कऽ रहल छी। 28 “अच्‍छा, अहाँ सभक की विचार अछि? एक गोटे केँ दूटा बेटा छलनि। ओ जेठका केँ कहलथिन, ‘बौआ, आइ अंगूरक बाड़ी मे काज करऽ जाह।’ 29 बेटा कहलकनि, ‘हम नहि जायब,’ मुदा बाद मे ओकरा पछतावा भेलैक आ ओ काज करबाक लेल गेल। 30 तखन बाबू दोसरो बेटा लग जा कऽ यैह बात कहलथिन। ओ उत्तर देलकनि, ‘ठीक अछि, बाबूजी, हम जाइत छी।’ मुदा ओ नहि गेल। 31 आब कहू, एकरा सभ मे सँ के अपन बाबूक इच्‍छानुरूप कयलक?” ओ सभ कहलथिन, “पहिल वला।” यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, कर असूल कयनिहार आ वेश्‍या सभ परमेश्‍वरक राज्‍य मे अहाँ सभ सँ आगाँ प्रवेश कऽ रहल अछि। 32 यूहन्‍ना धार्मिकताक बाट देखबैत अहाँ सभ लग अयलाह और अहाँ सभ हुनकर बातक विश्‍वास नहि कयलहुँ, मुदा कर असूल कयनिहार आ वेश्‍या सभ विश्‍वास कयलक। अहाँ सभ ई बात देखलाक बादो अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप और हृदय-परिवर्तन कऽ कऽ हुनकर बातक विश्‍वास नहि कयलहुँ। 33 “एक आओर दृष्‍टान्‍त सुनू। एक गृहस्‍थ लोक छलाह। ओ एक अंगूरक बगान लगौलनि आ चारू कात सँ ओकरा घेरि देलनि। अंगूरक रस जमा करबाक लेल ओ एक रसकुण्‍ड बनौलनि आ रखबारीक लेल मचान बनौलनि। तकरबाद किसान सभ केँ बटाइ पर दऽ कऽ परदेश चल गेलाह। 34 फलक समय अयला पर ओ अपन हिस्‍सा लेबाक लेल नोकर सभ केँ बटाइदार सभ लग पठौलथिन। 35 मुदा बटाइदार सभ हुनकर नोकर सभ केँ पकड़ि, एकटा केँ पिटलक, एकटाक हत्‍या कऽ देलक और एकटा केँ पथरबाहि कयलक। 36 तखन मालिक पहिल बेर सँ बेसी, आरो नोकर सभ केँ पठौलथिन। मुदा बटाइदार सभ ओकरो सभक संग वैह व्‍यवहार कयलक। 37 अन्‍त मे मालिक अपना बेटा केँ ओकरा सभ लग पठौलथिन, ई सोचि जे, ओ सभ हमरा बेटाक आदर करत। 38 “मुदा बटाइदार सभ जखन मालिकक बेटा केँ देखलक तँ ओ सभ अपना मे कहऽ लागल जे, ‘ई अपन बापक उत्तराधिकारी अछि। चलू एकरा मारि कऽ समाप्‍त कऽ दी, और ई सम्‍पत्ति जे एकरा भेटऽ वला छैक ताहि पर अधिकार कऽ ली।’ 39 एना सोचि ओ सभ हुनका पकड़ि लेलकनि आ बगान सँ बाहर लऽ जा कऽ जान सँ मारि देलकनि। 40 “आब कहू, बगानक मालिक जहिया औताह तँ ओ एहि बटाइदार सभ केँ की करथिन?” 41 ओ सभ उत्तर देलथिन, “ओ ओहि दुष्‍ट बटाइदार सभक सर्वनाश करताह आ अंगूरक बगान ओहन बटाइदार सभ केँ दऽ देथिन जे फलक समय अयला पर हुनकर हिस्‍सा देतनि।” 42 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ धर्मशास्‍त्र मे ई कहियो नहि पढ़ने छी?— ‘जाहि पाथर केँ राजमिस्‍तिरी सभ बेकार बुझि कऽ फेकि देलक, वैह पाथर मकानक प्रमुख पाथर भऽ गेल। ई काज प्रभु-परमेश्‍वर कयलनि, और ई हमरा सभक नजरि मे अद्‌भुत बात अछि!’ 43 एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, परमेश्‍वरक राज्‍यक अधिकार अहाँ सभ सँ छिनि लेल जायत आ ताहि समूहक लोक सभक जिम्‍मा मे देल जयतैक जे एकर उचित फल लाओत। 44 [जे केओ एहि पाथर पर खसत से चकना-चूर भऽ जायत, और जकरा पर ई पाथर खसतैक से थकुचा-थकुचा भऽ जायत।]” 45 मुख्‍यपुरोहित आ फरिसी सभ हुनकर दृष्‍टान्‍त सभ सुनि कऽ बुझि गेलाह जे, ई हमरे सभक सम्‍बन्‍ध मे ई सभ बात कहि रहल अछि। 46 ओ सभ यीशु केँ बन्‍दी कोना बनाओल जाय तकर उपाय सोचऽ लगलाह। मुदा हुनका सभ केँ डर होइत छलनि, कारण जनता यीशु केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता मानैत छलनि।

Matthew 22

1 यीशु फेर दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, 2 “स्‍वर्गक राज्‍यक तुलना एक एहन राजा सँ कयल जा सकैत अछि जे अपन पुत्रक विवाहक उत्‍सव पर भोजक आयोजन कयलनि। 3 ओ अपन नोकर सभ केँ पठौलनि जे उत्‍सव मे निमन्‍त्रित लोक सभ केँ बिझो करा लाबय। मुदा निमन्‍त्रित लोक सभ नहि आबऽ चाहलक। 4 राजा फेर दोसरो नोकर सभ केँ ई कहि कऽ पठौलनि जे, ‘आमन्‍त्रित लोक सभ केँ ई कहि दिऔन जे, देखू, भोजक लेल सभ वस्‍तु तैयार भऽ गेल अछि, हमर पालल-मोटायल पशु सभक वध कऽ सभ किछु बना लेल गेल अछि, तेँ भोज खयबाक लेल चलै जाइ जाउ।’ 5 मुदा नोतल लोक सभ राजाक आग्रह पर कोनो ध्‍यान नहि देलक। ओकरा सभ मे सँ केओ अपन खेतक काजक लेल तँ केओ अपन व्‍यापारक काजक लेल चल गेल। 6 बाँकी लोक राजाक नोकर सभ केँ पकड़ि कऽ ओकरा सभक संग दुर्व्‍यवहार कयलक आ जान सँ मारि देलक। 7 “एहि पर राजा क्रोधित भऽ अपन सैनिक सभ केँ पठा कऽ ओहि हत्‍यारा सभ केँ मरबा देलथिन आ ओकरा सभक नगर केँ जरबा देलथिन। 8 तकरबाद ओ अपन नोकर सभ केँ कहलथिन, ‘विवाहक भोज तँ तैयार अछि, मुदा निमन्‍त्रित लोक सभ एहि भोज मे खाय ताहि जोगरक नहि छल। 9 तेँ तोँ सभ चौबट्टिआ सभ पर जाह आ जे केओ भेटह, तकरा सभ केँ भोज मे बजा आनह।’ 10 नोकर सभ चौबट्टिआ आ सड़क सभ पर गेल आ नीक-अधलाह जे केओ भेटलैक, सभ केँ बजा अनलक। एतेक लोक आयल जे विवाह-भोजक घर ओकरा सभ सँ भरि गेलैक। 11 “राजा उपस्‍थित लोक सभ केँ देखबाक लेल भीतर अयलाह तँ हुनकर नजरि एक एहन व्‍यक्‍ति पर पड़लनि जे विवाह-उत्‍सवक लेल अनुकूल वस्‍त्र नहि पहिरने छल। 12 राजा ओकरा पुछलथिन, ‘यौ मित्र, अहाँ बिनु विवाह-उत्‍सवक वस्‍त्र पहिरने भीतर कोना आबि गेलहुँ?’ ओ व्‍यक्‍ति राजा केँ कोनो उत्तर नहि दऽ सकलनि। 13 एहि पर राजा अपन सेवक सभ केँ कहलथिन, ‘एकरा हाथ-पयर बान्‍हि कऽ बाहर अन्‍हार मे फेकि दैह जतऽ लोक कनैत आ दाँत कटकटबैत रहैत अछि।’” 14 तकरबाद यीशु कहलथिन, “बजाओल लोक तँ बहुत अछि, मुदा ओहि मे चुनल लोक किछुए अछि।” 15 तखन फरिसी सभ जा कऽ विचार-विमर्श करऽ लगलाह जे कोन तरहेँ यीशु केँ अपन कहल बातक जाल मे फँसाओल जाय। 16 ओ सभ यीशु लग हेरोद-दलक सदस्‍य सभ और अपन किछु चेला सभ केँ पठौलथिन। ओ सभ आबि कऽ यीशु केँ कहलकनि, “गुरुजी, हम सभ जनैत छी जे अपने सत्‍यवादी छी, सत्‍यक अनुसार परमेश्‍वरक बाटक शिक्षा दैत छी आ केओ की सोचैत अछि, तकर अपने केँ कोनो चिन्‍ता नहि। कारण, अपने मुँह-देखी बात नहि करैत छी। 17 आब हमरा सभ केँ एकटा बात कहल जाओ—एहि बातक सम्‍बन्‍ध मे अपनेक की विचार अछि? रोमी सम्राट-कैसर केँ कर देब धर्म-नियमक अनुसार उचित अछि वा नहि?” 18 यीशु ओकरा सभक दुष्‍ट उद्देश्‍य बुझि कहलथिन, “हे पाखण्‍डी सभ, अहाँ सभ हमरा किएक फँसाबऽ चाहैत छी? 19 अहाँ सभ कोन सिक्‍का लऽ कऽ कर चुकबैत छी?—देखाउ!” ओ सभ यीशु केँ एक दिनारक सिक्‍का देलकनि। 20 यीशु सिक्‍का लऽ प्रश्‍न कयलथिन, “ई किनकर चित्र छनि? आ एहि पर किनकर नाम लिखल छनि?” 21 ओ सभ उत्तर देलकनि, “सम्राट-कैसरक।” तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जे सम्राटक छनि से सम्राट केँ दिऔन, आ जे परमेश्‍वरक छनि से परमेश्‍वर केँ दिऔन।” 22 यीशुक जबाब सुनि ओ सभ गुम्‍म भऽ गेल आ हुनका लग सँ चल गेल। 23 ओही दिन सदुकी पंथक लोक, जे सभ एहि बात केँ नहि मानैत अछि जे मृत्‍यु मे सँ मनुष्‍य फेर जिआओल जायत, से सभ एकटा प्रश्‍न लऽ कऽ यीशु लग आयल। 24 ओ सभ कहलकनि, “गुरुजी, धर्मशास्‍त्र मे मूसा कहने छथि जे, जँ कोनो पुरुष निःसन्‍तान मरि जाय तँ ओकरा भाय केँ ओकर विधवा स्‍त्री सँ विवाह कऽ अपना भायक लेल सन्‍तान केँ उत्‍पन्‍न करबाक चाही। 25 हमरा सभक ओहिठाम सात भाय छल। जेठ भाय विवाह कयलक आ मरि गेल। ओकरा कोनो सन्‍तान नहि होयबाक कारणेँ ओकर भाय ओकर स्‍त्री सँ विवाह कयलक। 26 एही तरहेँ दोसर आ तेसरो भायक संग, आ होइत-होइत सातो भायक संग यैह बात भेल। 27 अन्‍त मे जा कऽ ओ स्‍त्री सेहो मरि गेलि। 28 आब कहल जाओ, ओहि समय मे जहिया मुइल सभ केँ जिआओल जयतैक, तँ ओ स्‍त्री एहि सातो भाय मे सँ ककर स्‍त्री होयतैक? किएक तँ ओ सभक स्‍त्री बनल छलि।” 29 यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ ने धर्मशास्‍त्र आ ने परमेश्‍वरक सामर्थ्‍य केँ जनैत छी, तेँ अहाँ सभ केँ एहि तरहेँ धोखा भऽ रहल अछि। 30 जीबि उठाओल गेला पर लोक सभ ने विवाह करत आ ने विवाह मे देल जायत, बल्‍कि ओ सभ स्‍वर्गदूत सभ जकाँ होयत। 31 तखन मुइल सभ केँ जिआओल जयबाक जे बात अछि, ताहि सम्‍बन्‍ध मे की अहाँ सभ ई वचन नहि पढ़ने छी जे परमेश्‍वर ⌞एहि पूर्वज सभक मृत्‍युक बादो⌟ अहाँ सभ केँ कहने छलाह जे, 32 ‘हम अब्राहमक परमेश्‍वर, इसहाकक परमेश्‍वर आ याकूबक परमेश्‍वर छी।’ ? ओ मरल सभक नहि, बल्‍कि जीवित सभक परमेश्‍वर छथि।” 33 ई उत्तर सुनि भीड़क लोक सभ हुनकर उपदेश सँ चकित रहि गेल। 34 फरिसी सभ जखन सुनलनि जे यीशु सदुकी पंथक लोक सभ केँ निरुत्तर कऽ देलथिन तँ ओ सभ जमा भऽ कऽ एक संग यीशु लग अयलाह। 35 हुनका सभ मे सँ एक गोटे जे धर्म-नियमक पंडित छलाह से हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन, 36 “यौ गुरुजी, धर्म-नियमक सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?” 37 यीशु उत्तर देलथिन, “‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ आ अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह।’ 38 यैह पहिल आ सभ सँ पैघ आज्ञा अछि। 39 आ दोसर सेहो ओही जकाँ अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ 40 सम्‍पूर्ण धर्म-नियम आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख एही दू आज्ञा पर केन्‍द्रित अछि।” 41 ओतऽ जमा भेल फरिसी सभ सँ यीशु पुछलथिन, 42 “ ‘उद्धारकर्ता-मसीह’क विषय मे अहाँ सभक की विचार अछि? ओ किनकर वंशज छथि?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “दाऊदक।” 43 एहि पर यीशु पुछि देलथिन, “तखन पवित्र आत्‍माक प्रेरणा सँ दाऊद किएक हुनका ‘प्रभु’ कहने छथिन? कारण, दाऊद धर्मशास्‍त्र मे एहि तरहेँ लिखने छथि, 44 ‘प्रभु-परमेश्‍वर हमरा प्रभु केँ कहलथिन, अहाँ हमर दहिना कात बैसू और हम अहाँक शत्रु सभ केँ अहाँक पयरक तर मे कऽ देब।’ 45 जखन दाऊद उद्धारकर्ता-मसीह केँ ‘प्रभु’ कहैत छथिन तँ ओ फेर हुनकर वंशज कोना भेलाह?” 46 एहि बातक उत्तर मे केओ यीशु केँ एको शब्‍द नहि कहि सकल आ ने ओहि दिन सँ ककरो हुनका सँ आरो कोनो प्रश्‍न पुछबाक साहस भेलैक।

Matthew 23

1 तकरबाद यीशु जमा भेल लोकक भीड़ केँ आ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, 2 “मूसाक धर्म-नियमक बात सिखयबाक अधिकार धर्मशिक्षक आ फरिसी सभक हाथ मे छनि। 3 तेँ ओ सभ जे किछु कहैत छथि, तकरा मानू आ करू, मुदा जे ओ सभ करैत छथि से नहि करू, कारण ओ सभ लोक सभ केँ जे सिखबैत छथि से अपने नहि करैत छथि। 4 ओ सभ भारी बोझ बान्‍हि कऽ लोकक कान्‍ह पर लादि दैत छथि मुदा तकरा उठयबाक लेल ओ सभ स्‍वयं अपन आङुरो नहि भिड़बऽ चाहैत छथि। 5 ओ लोकनि सभ काज मात्र लोकक ध्‍यान आकर्षित करबाक लेल करैत छथि। अपन तावीज सभ नमहर आकारक बनबबैत छथि आ पहिरऽ वला वस्‍त्र सभ मे लम्‍बा-लम्‍बा झालैर सभ लगबबैत छथि। 6 भोज-काज मे सम्‍मानित स्‍थान आ सभाघर सभ मे प्रमुख आसन पसन्‍द करैत छथि। 7 हाट-बजार मे लोक सभ हुनका सभ केँ प्रणाम-पात करैत रहनि आ ‘गुरुजी’ कहि कऽ सम्‍बोधन करैत रहनि, से बात सभ हुनका सभ केँ बहुत नीक लगैत छनि। 8 “मुदा अहाँ सभ ‘गुरु’ नहि कहाउ, कारण अहाँ सभक गुरु एकेटा छथि आ अहाँ सभ आपस मे भाइ-भाइ छी। 9 पृथ्‍वी पर किनको अपन धर्म-पिता नहि मानू, कारण अहाँ सभक एकेटा पिता छथि जे स्‍वर्ग मे रहैत छथि। 10 आ अहाँ सभ ‘आचार्य’ नहि कहाउ, कारण अहाँ सभक आचार्य सेहो एके गोटे छथि, अर्थात् उद्धारकर्ता-मसीह। 11 अहाँ सभ मे जे सभ सँ पैघ होइ से सभक सेवक बनू। 12 कारण, जे केओ अपना केँ पैघ बुझत से छोट बनाओल जायत, मुदा जे केओ अपना केँ छोट बुझत से पैघ बनाओल जायत। 13 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ स्‍वर्गक राज्‍यक द्वारि लोक सभक लेल बन्‍द कऽ दैत छी। ने अपने ओहि मे प्रवेश करैत छी आ ने तकरा सभ केँ प्रवेश करऽ दैत छिऐक जे सभ प्रवेश करऽ चाहैत अछि। 14 [“यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ विधवा सभक घर-द्वारि सभ हड़पि लैत छिऐक। लोक सभ केँ देखयबाक लेल लम्‍बा-लम्‍बा प्रार्थना करैत छी। तेँ अहाँ सभ केँ बेसी दण्‍ड भेटत।] 15 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ एक गोटे केँ अपना धर्म मे अनबाक लेल पृथ्‍वी आ आकाश एकटार कऽ दैत छी, मुदा जखन ओ आबि जाइत अछि तँ ओकरा अपनो सँ दोबर नरक जयबाक जोगरक बना दैत छिऐक। 16 “यौ आन्‍हर पथ-प्रदर्शक सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ लोक सभ केँ सिखबैत छी जे, ‘जँ केओ मन्‍दिरक नाम लऽ कऽ सपत खायत, तँ तकर कोनो महत्‍व नहि अछि, मुदा जँ मन्‍दिर मे लगाओल सोनक नाम लऽ कऽ सपत खायत, तँ ओकरा अपन सपत केँ पूरा करऽ पड़तैक।’ 17 अहाँ सभ आन्‍हर छी! मूर्ख छी! कोन बात पैघ अछि, लगाओल सोन वा ओ मन्‍दिर, जकरा सँ ओ सोन पवित्र भेल अछि? 18 अहाँ सभ सिखबैत छी जे, ‘जँ केओ बलि-वेदीक नाम लऽ कऽ सपत खयलक तँ से कोनो बात नहि, मुदा वेदी पर चढ़ाओल चढ़ौनाक नाम लऽ कऽ सपत खयलक तँ से पकिया बात भेल।’ 19 यौ आन्‍हर सभ! कोन बात पैघ अछि, चढ़ौना वा ओ वेदी, जाहि पर अर्पण कयला सँ ओ चढ़ौना पवित्र भेल अछि? 20 तेँ, जे केओ वेदीक सपत खाइत अछि से ओहि वेदी आ ओहि पर जे किछु अछि, सभक सपत खाइत अछि। 21 तहिना, जे केओ मन्‍दिरक सपत खाइत अछि से मन्‍दिर आ ओहि मे जे वास करैत छथि, दूनूक सपत खाइत अछि, 22 और जे केओ स्‍वर्गक सपत खाइत अछि, से परमेश्‍वरक सिंहासन आ ओहि पर जे विराजमान छथि तिनको सपत खाइत अछि। 23 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी! अहाँ सभ पुदीना, सोंफ आ जीरक दसम भाग तँ परमेश्‍वर केँ अर्पण करैत छी, मुदा धर्म-नियमक मुख्‍य बात सभ, जेना न्‍याय, करुणा आ विश्‍वसनियता सँ कोनो मतलब नहि रखैत छी। होयबाक तँ ई चाहैत छल जे अहाँ सभ बिनु ओ बात सभ छोड़ने इहो बात सभ करितहुँ। 24 यौ आन्‍हर पथ-प्रदर्शक सभ, अहाँ सभ तँ मच्‍छर केँ छानि कऽ फेकि दैत छी, मुदा ऊँट केँ घोँटि लैत छी। 25 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ थारी-बाटी सभ केँ बाहर सँ तँ मँजैत छी, मुदा ओहि मे लूट-पाट आ स्‍वार्थ द्वारा प्राप्‍त कयल वस्‍तु सभ रखैत छी। 26 यौ आन्‍हर फरिसी, थारी-बाटी केँ पहिने भीतर सँ साफ करू, तखन ओ बाहर सँ सेहो साफ रहत। 27 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ चून सँ पोतल कबरक चबुतरा जकाँ छी, जे बाहर सँ तँ सुन्‍दर देखाइ दैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भीतर मे लासक हाड़ आ सभ तरहक सड़ल वस्‍तु भरल रहैत छैक। 28 तहिना अहूँ सभ बाहर सँ लोक सभ केँ धार्मिक बुझाइत छिऐक, मुदा भीतर मे पाखण्‍ड आ अधर्म सँ भरल छी। 29 “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक कबर पर चबुतराक निर्माण करैत छी, धर्मी लोकक स्‍मारक केँ सजबैत छी, 30 और कहैत छी जे, ‘हम सभ जँ अपना पुरखा सभक समय मे रहल रहितहुँ तँ हम सभ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक हत्‍या मे ओकरा सभ केँ साथ नहि देने रहितहुँ।’ 31 एहि तरहेँ अहाँ सभ अपने साक्षी दऽ रहल छी जे अहाँ सभ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक हत्‍या कयनिहारक सन्‍तान छी। 32 तँ पूरा करू अपन पुरखाक काज! पापक घैल केँ भरि दिअ! 33 “है साँप सभ! है बिषधर साँपक सन्‍तान सभ! अहाँ सभ नरकक दण्‍ड सँ कोना बाँचब? 34 एहि कारणेँ, सुनू अहाँ सभ, हम अहाँ सभ लग अपन प्रवक्‍ता, बुद्धिमान लोकनि आ शिक्षक सभ केँ पठा रहल छी। अहाँ सभ ओहि मे सँ कतेक गोटे केँ जान सँ मारि देबनि, क्रूस पर लटका देबनि, कतेक गोटे केँ अपन सभाघर सभ मे कोड़ा सँ मारबनि आ एक नगर सँ दोसर नगर तक खिहारैत रहबनि। 35 एहि तरहेँ पृथ्‍वी पर धर्मी लोकक जतेक खून बहाओल गेल—धर्मी हाबिलक खून सँ लऽ कऽ बिरिकयाहक पुत्र जकरयाहक खून धरि, जिनका अहाँ सभ मन्‍दिरक ‘पवित्र स्‍थान’ आ बलि-वेदीक बीच हत्‍या कऽ देलियनि, तकर भार अहाँ सभक मूड़ी पर पड़त। 36 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, ई सभ बातक लेखा-जोखा एही पीढ़ीक लोक सभ सँ लेल जायत। 37 “हे यरूशलेम! हे यरूशलेम! तोँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक हत्‍या करैत छह आ जिनका परमेश्‍वर तोरा लग पठबैत छथुन, तिनका सभ केँ तोँ पथरबाहि कऽ कऽ मारि दैत छहुन। हम कतेको बेर चाहलिअह जे जहिना मुर्गी अपना बच्‍चा सभ केँ अपन पाँखिक तर मे नुकबैत अछि, तहिना हमहूँ तोहर सन्‍तान सभ केँ जमा कऽ लिअह। मुदा तोँ ई नहि चाहलह! 38 देखह, आब तोहर घर उजड़ल पड़ल छह। 39 हम तोरा कहैत छिअह, तोँ हमरा फेर ताबत तक नहि देखबह जाबत तक ओ समय नहि आओत जहिया तोँ ई कहबह जे, ‘धन्‍य छथि ओ जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि!’”

Matthew 24

1 यीशु जखन मन्‍दिर सँ निकलि कऽ चल जा रहल छलाह तँ हुनकर शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ मन्‍दिरक मकान सभ देखाबऽ लगलथिन। 2 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “ई सभ चीज देखैत छी? हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एतऽ एकोटा पाथर एक-दोसर पर नहि रहत। सभ ढाहल जायत।” 3 जैतून पहाड़ पर यीशु जखन बैसल छलाह तँ शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ एकान्‍त मे हुनका सँ पुछलथिन, “हमरा सभ केँ कहू जे ई घटना कहिया होयत? अहाँ आब फेर आबऽ पर छी आ संसारक अन्‍त होमऽ पर अछि, ताहि समय केँ हम सभ कोन बात सँ चिन्‍हब?” 4 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “होसियार रहू जे अहाँ सभ केँ केओ बहकाबऽ नहि पाबय। 5 बहुतो लोक हमर नाम लऽ कऽ आओत आ कहत जे, ‘हमहीं उद्धारकर्ता-मसीह छी,’ आ बहुतो लोक केँ बहका देत। 6 अहाँ सभ लड़ाइक समाचार आ लड़ाइक हल्‍ला सभ सुनब। मुदा देखू, ताहि सँ घबड़ायब नहि। ई सभ होयब आवश्‍यक अछि, मुदा संसारक अन्‍त तहियो नहि होयत। 7 एक देश दोसर देश सँ लड़ाइ करत, और एक राज्‍य दोसर राज्‍य सँ। बहुतो ठाम मे अकाल पड़त आ भूकम्‍‍प होयत। 8 ई सभ बात तँ कष्‍टक शुरुआते होयत। 9 “ओहि समय मे लोक सभ अहाँ सभ पर अत्‍याचार करयबाक लेल अहाँ सभ केँ अधिकारी सभक जिम्‍मा मे लगा देत आ मरबा देत। अहाँ सभ सँ सभ देशक लोक सभ एहि लेल घृणा करत जे अहाँ सभ हमर लोक छी। 10 ओहि समय मे बहुतो लोक अपन विश्‍वास छोड़ि देत। ओ सभ एक-दोसर केँ पकड़बाओत आ एक-दोसर सँ घृणा करत। 11 एहन बहुतो लोक सभ प्रगट भऽ जायत जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहत आ बहुतो लोक केँ बहका देत। 12 अधर्मक वृद्धि भेला सँ अनेक लोकक आपसी प्रेम मन्‍द पड़ि जायत। 13 मुदा जे केओ अन्‍त धरि स्‍थिर रहत से उद्धार पाओत। 14 परमेश्‍वरक राज्‍यक ई शुभ समाचारक प्रचार सम्‍पूर्ण संसार मे कयल जायत जाहि सँ एकरा सम्‍बन्‍ध मे सभ जातिक लोक गवाही सुनय; तखन अन्‍तक समय आबि जायत। 15 “तेँ जखन अहाँ सभ ‘विनाश करऽ वला घृणित वस्‍तु’ केँ पवित्र स्‍थान मे ठाढ़ देखब, जकरा विषय मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता दानिएल कहने छथि—पढ़ऽ वला ई बात ध्‍यान दऽ कऽ बुझू!— 16 तखन जे सभ यहूदिया प्रदेश मे होअय से सभ पहाड़ पर भागि जाय। 17 जे घरक छत पर होअय से उतरि कऽ घर मे सँ कोनो वस्‍तु लेबऽ नहि लागओ। 18 आ जे खेत मे होअय से घर मे सँ अपन ओढ़ना लेबाक लेल घूमि कऽ नहि आबओ। 19 ओहि समय मे जे स्‍त्रीगण सभ गर्भवती होयत वा जकरा दूधपीबा बच्‍चा होयतैक, तकरा सभ केँ कतेक कष्‍ट होयतैक! 20 प्रार्थना करू जे जाड़क समय वा विश्राम-दिन कऽ अहाँ सभ केँ भागऽ-पड़ाय नहि पड़य। 21 ओहि समय मे एहन कष्‍ट होयत जे सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ आइ तक कहियो नहि भेल अछि आ ने फेर कहियो होयत। 22 जँ ओहि समय केँ घटा नहि देल जाइत तँ कोनो मनुष्‍य नहि बचैत, मुदा परमेश्‍वर अपन चुनल लोक सभक कारणेँ ओहि समय केँ घटा देताह। 23 “ओहि समय मे जँ केओ अहाँ सभ केँ कहत जे, ‘देखू, मसीह एतऽ छथि!’ वा ‘ओतऽ छथि!’ तँ ओहि बात पर विश्‍वास नहि करू। 24 कारण, ओहि समय मे झुट्ठा मसीह आ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहऽ वला सभ प्रगट होयत, और एहन अजगूत बात आ चमत्‍कार सभ देखाओत जे, जँ सम्‍भव रहैत, तँ परमेश्‍वरक चुनल लोक सभ केँ सेहो बहका दैत। 25 देखू, हम अहाँ सभ केँ पहिनहि कहि देलहुँ। 26 “तेँ जँ केओ अहाँ सभ केँ कहत जे, ‘चलू, देखू, ओ निर्जन स्‍थान मे छथि,’ तँ ओकरा संग बाहर नहि जाउ। अथवा जँ कहत जे, ‘देखू, ओ एतऽ कोठरी मे छथि,’ तँ विश्‍वास नहि करू। 27 किएक तँ जहिना बिजलोकाक चमक पूब सँ निकलि कऽ पश्‍चिम तक देखाइ दैत अछि, तहिना जखन मनुष्‍य-पुत्र फेर औताह तँ एहने होयत। 28 जतऽ कतौ लास रहैत अछि ततऽ गिद्ध सभ जुटैत अछि। 29 “ओहि समयक कष्‍टक ठीक बाद, ‘सूर्य अन्‍हार भऽ जायत, चन्‍द्रमा इजोत नहि देत, आकाश सँ तारा सभ खसत, और आकाशक शक्‍ति सभ हिलि जायत।’ 30 तकरबाद मनुष्‍य-पुत्रक अयबाक चिन्‍ह आकाश मे देखाइ देत। पृथ्‍वी परक सभ जातिक लोक सभ कन्‍ना-रोहटि करत और मनुष्‍य-पुत्र केँ सामर्थ्‍य आ अपार महिमाक संग आकाशक मेघ मे अबैत देखत। 31 धुतहूक पैघ आवाजक संग ओ अपन स्‍वर्गदूत सभ केँ चारू दिस पठौताह आ ओ सभ आकाश आ पृथ्‍वीक अन्‍तिम सीमा तक जा कऽ हुनकर चुनल लोक सभ केँ जमा करताह। 32 “आब अंजीरक गाछ सँ एकटा बात सिखू। जखन ओकर ठाढ़ि कोमल होमऽ लगैत छैक आ ओहि मे नव पात निकलऽ लगैत छैक तँ अहाँ सभ बुझि जाइत छी जे गर्मीक समय आबि रहल अछि। 33 तहिना जखन अहाँ सभ ई सभ बात होइत देखब तँ बुझि लिअ जे समय लगचिआ गेल, हँ, ई बुझू जे ओ घरक मुँह पर आबि गेल अछि। 34 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एहि पीढ़ी केँ समाप्‍त होमऽ सँ पहिने ई सभ घटना निश्‍चित घटत। 35 आकाश और पृथ्‍वी समाप्‍त भऽ जायत, मुदा हमर वचन अनन्‍त काल तक रहत। 36 “मुदा एहि घटना सभक दिन वा समय केओ नहि जनैत अछि, स्‍वर्गदूतो सभ नहि आ पुत्रो नहि —मात्र पिता जनैत छथि। 37 जहिना नूहक समय मे भेल तहिना ओहि समय मे होयत जहिया मनुष्‍य-पुत्र फेर औताह। 38 जल-प्रलय होमऽ सँ पहिने लोक सभ खाय-पिबऽ मे आ विवाह करऽ-कराबऽ मे लागल छल। नूह जाहि दिन जहाज मे चढ़ि गेलाह ताहि दिन तक लोक सभ एहि सभ काज मे मस्‍त रहल। 39 ओकरा सभ केँ किछु बुझऽ मे नहि अयलैक जे कोन बात सभ होमऽ वला अछि, ताबत जल-प्रलयक बाढ़ि आबि कऽ ओकरा सभ केँ बहा कऽ लऽ गेलैक। मनुष्‍य-पुत्र जहिया फेर औताह, तहिया ओहिना होयत। 40 ओहि समय मे दू गोटे खेत मे रहत; ओहि मे सँ एकटा लऽ लेल जायत आ दोसर ओतहि छोड़ि देल जायत। 41 दूटा स्‍त्रीगण जाँत पिसैत रहत, एकटा लऽ लेल जायत आ दोसर छोड़ि देल जायत। 42 “तेँ अहाँ सभ चौकस रहू, कारण अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक प्रभु कोन दिन आबि जयताह। 43 मुदा ई बात ठीक सँ बुझि लिअ जे, जँ घरक मालिक केँ बुझल रहितैक जे चोर रातिक कोन पहर मे आओत तँ ओ जागल रहैत आ अपना घर मे सेन्‍ह नहि काटऽ दैत। 44 तेँ अहूँ सभ सदिखन तैयार रहू, कारण मनुष्‍य-पुत्र एहने समय मे आबि जयताह जाहि समयक लेल अहाँ सभ सोचबो नहि करब जे ओ एखन औताह। 45 “के अछि ओहन विश्‍वासपात्र आ बुद्धिमान सेवक जकरा मालिक अपन घरक आरो सेवक सभक मुखिया बनौथिन जे ओ ठीक सँ ओकरा सभक देख-रेख करैक आ समय पर भोजन-भातक व्‍यवस्‍था करैक? 46 ओहि सेवकक लेल कतेक नीक होयत, जकरा मालिक आबि कऽ ओहिना करैत पौताह। 47 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, मालिक अपन सम्‍पूर्ण सम्‍पत्तिक जबाबदेही ओकरा जिम्‍मा मे दऽ देथिन। 48 मुदा ओ सेवक जँ दुष्‍ट अछि आ एना सोचय जे, ‘हमर मालिक आबऽ मे बहुत देरी कऽ रहल अछि,’ 49 आ ई सोचि ओ मालिकक आरो सेवक सभ केँ मारय-पिटय आ स्‍वयं पिअक्‍कड़ सभक संग खाय-पिबऽ लागय, 50 तँ ओहि सेवकक मालिक एहन दिन मे घूमि औताह जहिया ओ अपन मालिकक बाट नहि तकैत रहत आ एहन समय मे औताह जकरा ओ नहि जानत। 51 मालिक आबि कऽ ओकरा खण्‍ड-खण्‍ड कटबा देथिन आ ओकरा ताहि ठाम राखि देथिन जतऽ पाखण्‍डी लोक अपन दण्‍ड भोगैत अछि। ओतऽ लोक कनैत आ दाँत कटकटबैत रहैत अछि।

Matthew 25

1 “ओहि समय मे स्‍वर्गक राज्‍य ओहि दस कुमारि कन्‍याक घटना वला बात जकाँ होयत जे सभ अपन-अपन दीप लऽ कऽ वरक स्‍वागत करबाक लेल निकलल। 2 ओहि मे पाँचटा मूर्ख आ पाँचटा बुद्धिआरि छलि। 3 मूर्ख कन्‍या सभ दीप तँ लेलक मुदा फाजिल तेल अपना संग नहि रखलक। 4 मुदा बुद्धिआरि कन्‍या सभ अपन दीप आ अलग बर्तन मे तेल सेहो लऽ गेलि। 5 वर केँ आबऽ मे जखन देरी भेलनि तँ सभ औँघाय लागलि आ सुति रहलि। 6 “आधा राति बितला पर हो-हल्‍ला होमऽ लागल जे, ‘चलू, चलू, वर आबि गेलाह! हुनका सँ भेँट करऽ चलू!’ 7 ई सुनि सभ कुमारि कन्‍या उठलि आ अपन-अपन दीप सभ ठीक करऽ लागलि। 8 मूर्ख कन्‍या सभ बुद्धिआरि कन्‍या सभ केँ कहलकैक, ‘देखह, हमर सभक दीप मिझाय लागल। तोँ सभ अपना मे सँ कनेक तेल हमरा सभ केँ दैह।’ 9 मुदा ओ बुद्धिआरि कन्‍या सभ उत्तर देलकैक जे, ‘नहि, कहीं ई तेल अपना सभ गोटेक लेल पूरा नहि ने होअय। तेँ नीक ई जे तोँ सभ तेल बेचऽ वला सँ किनि कऽ लऽ आनह।’ 10 “ओ सभ जखन तेल किनबाक लेल गेलि तखने वर आबि गेलाह। जे सभ तैयार छलि, से सभ वरक संग विवाह-भोज मे भीतर गेलि आ केबाड़ बन्‍द कयल गेल। 11 बाद मे ओ तेल किनऽ वाली मूर्ख कन्‍या सभ आयल आ कहऽ लागलि, ‘यौ प्रभु, यौ प्रभु! हमरा सभक लेल केबाड़ खोलि दिअ!’ 12 मुदा वर उत्तर देलथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, हम अहाँ सभ केँ नहि चिन्‍हैत छी।’” 13 तखन यीशु कहलनि, “तेँ अहाँ सभ होसियार रहू, कारण अहाँ सभ ओहि दिन आ ओहि समय केँ नहि जनैत छी। 14 “स्‍वर्गक राज्‍य परदेश जाय लागल एक गोटेक यात्रा वला बात जकाँ अछि। परदेश जाय सँ पहिने ओ अपन सेवक सभ केँ बजौलनि आ अपन सम्‍पत्तिक देख-रेख करबाक भार ओकरा सभक जिम्‍मा देलथिन। 15 ओ अपन सेवक सभक गुणक अनुसार एकटा केँ पाँच हजार, दोसर केँ दू हजार आ तेसर केँ एक हजार सोनक रुपैया जिम्‍मा दऽ परदेश चल गेलाह। 16 जकरा पाँच हजार भेटल छलैक, से ओकरा तुरत व्‍यापार मे लगौलक आ ओहि सँ पाँच हजार आओर कमायल। 17 एहि तरहेँ जकरा दू हजार भेटल छलैक से दू हजार आओर कमायल। 18 मुदा जकरा एक हजार भेटल छलैक से खधिया खुनि कऽ अपन मालिकक रुपैया ओहि मे नुका कऽ धयलक। 19 “बहुत समय बितला पर मालिक परदेश सँ घूमि अयलाह आ अपन सेवक सभ सँ हिसाब-किताब लेबऽ लगलाह। 20 जकरा पाँच हजार भेटल छलैक से दस हजार रुपैया आनि कऽ अपना मालिक केँ कहलकनि, ‘मालिक, अपने हमरा पाँच हजार देने छलहुँ, देखल जाओ, हम एहि सँ पाँच हजार आरो कमयलहुँ।’ 21 मालिक ओहि सेवक केँ कहलथिन, ‘चाबस! तोँ नीक आ भरोसमन्‍द सेवक छह! थोड़बो वस्‍तु मे तोँ विश्‍वसनीय रहलह। हम आब तोरा बहुत वस्‍तु पर अधिकार देबह। अपन मालिकक आनन्‍द मे सहभागी बनह!’ 22 “जकरा दू हजार भेटल छलैक सेहो आबि कऽ कहलकनि, ‘मालिक, अपने हमरा दू हजार देने छलहुँ, देखल जाओ, हम एहि सँ दू हजार आरो कमयलहुँ।’ 23 मालिक ओहू सेवक केँ कहलथिन, ‘चाबस! तोँ नीक आ भरोसमन्‍द सेवक छह! थोड़बो वस्‍तु मे तोँ विश्‍वसनीय रहलह। हम आब तोरा बहुत वस्‍तु पर अधिकार देबह। अपन मालिकक आनन्‍द मे सहभागी होअह!’ 24 “तकरबाद जकरा एक हजार भेटल छलैक से आयल आ कहलक, ‘मालिक, हम अपने केँ जनैत छी जे अपने कठोर आदमी छी। जाहि खेत मे रोपने नहि छी, ताहि मे कटनी करबैत छी। जतऽ अपनेक वस्‍तु छिटायल नहि रहैत अछि, ततऽ समटबैत छी। 25 तेँ हमरा डर भेल आ अपनेक देल एक हजार रुपैया हम जमीन मे गाड़ि कऽ रखने छलहुँ। लेल जाओ अपन ओ रुपैया।’ 26 मालिक ओहि सेवक केँ कहलथिन, ‘है दुष्‍ट आ आलसी सेवक! जखन तोँ जनैत छलेँ जे हम जाहि मे रोपने नहि छी ताहि मे कटनी करैत छी आ जतऽ हमर छिटायल नहि अछि ततऽ हम समटैत छी, 27 तँ तोँ हमर पाइ कोनो महाजनक जिम्‍मा लगा दिते, जाहि सँ हम आबि कऽ अपन पाइ कम सँ कम व्‍याजक संग पबितहुँ। 28 हौ, एकरा सँ इहो पाइ लऽ लैह आ जकरा लग दस हजार छैक तकरा दऽ दहक। 29 किएक तँ जकरा लग छैक तकरा आरो देल जयतैक, जाहि सँ ओकरा बहुते भऽ जायत। मुदा जकरा लग नहि छैक, तकरा सँ जेहो छैक सेहो लऽ लेल जयतैक। 30 और एहि निकम्‍मा सेवक केँ बाहर अन्‍हार मे फेकि दैह जतऽ लोक कनैत आ दाँत कटकटबैत रहैत अछि।’ 31 “मनुष्‍य-पुत्र अपन सभ स्‍वर्गदूतक संग जहिया अपना महिमा मे औताह, तहिया ओ अपन महिमामय सिंहासन पर बैसताह। 32 पृथ्‍वी परक सभ जातिक लोक हुनका समक्ष जमा कयल जायत, आ जहिना चरबाह भेँड़ा सभ केँ बकरी सभ सँ छुटिअबैत अछि, तहिना ओ लोक सभ केँ एक-दोसर सँ अलग करताह। 33 ओ ‘भेँड़ा’ सभ केँ अपन दहिना कात आ ‘बकरी’ सभ केँ अपन बामा कात ठाढ़ करताह। 34 “तकरबाद राजा अपन दहिना कात ठाढ़ भेल लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे हमर पिताक कृपापात्र सभ! आउ, ओहि राज्‍यक अधिकारी बनू, जकरा सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ अहाँ सभक लेल तैयार कयल गेल अछि। 35 कारण, हम भूखल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा भोजन करौलहुँ। हम पियासल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा पानि पिऔलहुँ। हम परदेशी छलहुँ आ अहाँ सभ अपना घर मे हमर सेवा-सत्‍कार कयलहुँ। 36 हम नाङट छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा वस्‍त्र पहिरौलहुँ। हम बिमार छलहुँ आ अहाँ सभ हमर रेख-देख कयलहुँ। हम जहल मे छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा सँ भेँट करबाक लेल अयलहुँ।’ 37 “ताहि पर ओ धर्मी लोक सभ हुनका कहथिन, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल देखलहुँ आ भोजन करौलहुँ, पियासल देखलहुँ आ पानि पिऔलहुँ? 38 हम सभ अहाँ केँ कहिया परदेशी देखलहुँ आ अपना घर मे सेवा-सत्‍कार कयलहुँ, नाङट देखलहुँ आ वस्‍त्र पहिरौलहुँ? 39 कहिया हम सभ अहाँ केँ बिमार वा जहल मे देखलहुँ आ अहाँ सँ भेँट करबाक लेल गेलहुँ?’ 40 एहि पर राजा हुनका सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जे किछु अहाँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल कयलहुँ, से हमरा लेल कयलहुँ।’ 41 “तकरबाद राजा अपन बामा कात ठाढ़ लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे सरापित लोक सभ! तोँ सभ हमरा लग सँ दूर हटि जाह और कहियो नहि मिझाय वला ओहि आगिक कुण्‍ड मे पड़ल रहह, जे शैतान आ ओकर दूत सभक लेल तैयार कयल गेल अछि। 42 कारण, हम भूखल छलहुँ आ तोँ सभ हमरा खयबाक लेल किछु नहि देलह, पियासल छलहुँ आ तोँ सभ पानि नहि पिऔलह। 43 हम परदेशी छलहुँ आ तोँ सभ अपना ओतऽ हमर स्‍वागत नहि कयलह, नाङट छलहुँ आ वस्‍त्र नहि पहिरौलह। हम बिमार छलहुँ, जहल मे छलहुँ, मुदा तोँ सभ हमरा देखबाक लेल नहि अयलह।’ 44 “एहि पर ओहो सभ पुछतनि जे, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल, पियासल, परदेशी, नाङट, बिमार वा जहल मे बन्‍द देखलहुँ आ अहाँक सेवा नहि कयलहुँ?’ 45 ताहि पर राजा ओकरा सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम तोरा सभ केँ सत्‍य कहैत छिअह जे, जे किछु तोँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल नहि कयलह से हमरो लेल नहि कयलह।’” 46 तखन यीशु कहलनि, “ई सभ अनन्‍त दण्‍ड भोगबाक लेल चल जायत, मुदा धर्मी सभ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करत।”

Matthew 26

1 ई सभ बात जखन कहल भऽ गेलनि तँ यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, 2 “अहाँ सभ जनैत छी जे दू दिनक बाद फसह-पाबनि अछि। ओहि समय मे मनुष्‍य-पुत्र क्रूस पर लटका कऽ मारबाक लेल पकड़बाओल जायत।” 3 ओम्‍हर काइफा नामक महापुरोहित जे छलाह तिनका आङन मे मुख्‍यपुरोहित आ समाजक बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ जमा भऽ कऽ 4 अपना मे विचार-विमर्श करऽ लगलाह जे कोन तरहेँ छल सँ यीशु केँ पकड़ि कऽ मारल जाय। 5 ओ सभ कहैत छलाह जे, “मुदा पाबनिक समय मे नहि। एना नहि होअय जे जनता उपद्रव करय।” 6 यीशु जखन बेतनिया गाम मे सिमोन नामक एक आदमी, जिनका पहिने कुष्‍ठ-रोग भेल छलनि, तिनका ओहिठाम छलाह, 7 तँ एक स्‍त्री बेसकिमती सुगन्‍धित तेल एकटा संगमरमरक बर्तन मे लऽ कऽ अयलीह। यीशु भोजन करैत छलाह तखने ओ स्‍त्री ओहि सुगन्‍धित तेल केँ यीशुक माथ पर ढारि देलथिन। 8 ई देखि हुनकर शिष्‍य सभ खिसिआइत बजलाह, “एहन नीक वस्‍तु किएक एना बरबाद कयल गेल? 9 एहि तेल केँ बढ़ियाँ दाम मे बेचि कऽ बहुतो गरीबक सहायता कयल जा सकैत छल।” 10 शिष्‍य सभक बात बुझि यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “एहि स्‍त्री केँ अहाँ सभ किएक डाँटि रहल छी? ई तँ हमरा लेल बहुत बढ़ियाँ काज कयलनि। 11 गरीब सभ तँ अहाँ सभक संग सभ दिन रहत, मुदा हम अहाँ सभक संग सभ दिन नहि रहब। 12 ई सुगन्‍धित तेल हमरा मूड़ी पर ढारि कऽ ई स्‍त्रीगण हम जे कबर मे राखल जायब, तकर तैयारी कयलनि। 13 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, संसार भरि मे जतऽ कतौ हमर शुभ समाचारक प्रचार कयल जायत, ततऽ एहि स्‍त्रीगणक स्‍मरण मे हिनकर एहि काजक चर्चा सेहो कयल जायत।” 14 तकरबाद यीशुक बारह शिष्‍य मे सँ एक जकर नाम यहूदा इस्‍करियोती छलैक से मुख्‍यपुरोहित सभ लग जा कऽ कहलकनि, 15 “हम जँ यीशु केँ अहाँ सभक हाथ मे पकड़बा देब तँ अहाँ सभ हमरा की देब?” एहि पर ओ सभ तीसटा चानीक सिक्‍का ओकरा देलथिन। 16 ओहि समय सँ यहूदा यीशु केँ पकड़बयबाक अनुकूल अवसरक ताक मे रहऽ लागल। 17 “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि”क पहिल दिन यीशुक शिष्‍य सभ हुनका लग आबि पुछलथिन, “फसह-पाबनिक भोजक व्‍यवस्‍था अहाँक लेल हम सभ कतऽ ठीक करू?” 18 यीशु कहलथिन, “शहर मे फलानाक ओतऽ जाउ आ कहू, ‘गुरुजी कहलनि अछि जे हमर समय आब लगचिआ गेल अछि। हम अपन शिष्‍य सभक संग अहाँक ओतऽ फसह-भोज खायब।’” 19 शिष्‍य सभ यीशुक कथनानुसार सभ बात कऽ कऽ फसह-पाबनिक भोजक व्‍यवस्‍था ओतहि कयलनि। 20 साँझ पड़ला पर यीशु अपन बारहो शिष्‍यक संग भोजन करबाक लेल बैसलाह। 21 भोजन करैत समय यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, अहाँ सभ मे सँ एक गोटे हमरा पकड़बा देब।” 22 ई सुनि शिष्‍य सभ बहुत उदास भऽ गेलाह। ओ सभ बेरा-बारी हुनका सँ पुछऽ लगलनि जे, “हे प्रभु, ओ हम तँ नहि छी?” 23 यीशु उत्तर देलथिन, “हमरा संग जे बट्टा मे हाथ रखने अछि सैह हमरा पकड़बाओत। 24 मनुष्‍य-पुत्रक सम्‍बन्‍ध मे जहिना धर्मशास्‍त्र मे लिखल गेल अछि तहिना तँ ओ चलिए जायत, मुदा धिक्‍कार अछि ओहि मनुष्‍य केँ जे मनुष्‍य-पुत्र केँ पकड़बा रहल अछि। ओकरा लेल तँ नीक ई रहितैक जे ओ जन्‍मे नहि लेने रहैत।” 25 एहि पर हुनका पकड़बाबऽ वला यहूदा कहलकनि, “गुरुजी, की अहाँ हमरा बारे मे तँ नहि कहि रहल छी?” यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ स्‍वयं कहि देलहुँ।” 26 ओ सभ जखन भोजन कऽ रहल छलाह तँ यीशु रोटी लेलनि आ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि कऽ शिष्‍य सभ केँ देलथिन आ कहलथिन, “लिअ, खाउ, ई हमर देह अछि।” 27 तकरबाद ओ बाटी लेलनि आ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दऽ कऽ शिष्‍य सभ केँ दैत कहलथिन, “अहाँ सभ केओ एहि मे सँ पिबू। 28 ई परमेश्‍वर आ मनुष्‍यक बीच विशेष सम्‍बन्‍ध स्‍थापित करऽ वला हमर खून अछि, जे बहुत लोकक पापक क्षमादानक लेल बहाओल जा रहल अछि। 29 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ई अंगूरक रस हम आजुक बाद ताबत तक फेर नहि पीब जाबत तक हम अपन पिताक राज्‍य मे अहाँ सभक संग नवका अंगूरक रस नहि पीब।” 30 तकरबाद एक भजन गाबि कऽ ओ सभ जैतून पहाड़ पर चल गेलाह। 31 तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आइए राति अहाँ सभ गोटे हमरा कारणेँ अपना विश्‍वास मे डगमगायब, किएक तँ धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे परमेश्‍वर कहने छथि, ‘हम चरबाह केँ मारि देबैक, आ झुण्‍डक भेँड़ा सभ छिड़िया जायत।’ 32 मुदा मृत्‍यु सँ फेर जीवित भऽ गेलाक बाद हम अहाँ सभ सँ पहिने गलील प्रदेश जायब।” 33 एहि पर पत्रुस कहलथिन, “चाहे सभ केओ अहाँक कारणेँ विश्‍वास मे डगमगायत, मुदा हम कहियो नहि डगमगायब!” 34 यीशु पत्रुस केँ कहलथिन, “हम अहाँ केँ सत्‍य कहैत छी जे, आइए राति मे मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर हमरा अस्‍वीकार कऽ कऽ लोक केँ कहबैक जे, हम ओकरा चिन्‍हबो नहि करैत छिऐक।” 35 मुदा पत्रुस कहलथिन, “हमरा जँ अहाँक संग मरहो पड़त तैयो हम किन्‍नहुँ नहि अहाँ केँ अस्‍वीकार करब।” आरो सभ शिष्‍य सेहो यैह बात कहलथिन। 36 ओहिठाम सँ यीशु अपन शिष्‍य सभक संग गतसमनी नामक एक जगह पर गेलाह। ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम किछु आगाँ जा कऽ जाबत प्रार्थना करैत छी ताबत अहाँ सभ एतऽ बैसल रहू।” 37 ओ पत्रुस आ जबदीक दूनू पुत्र केँ अपना संग लऽ गेलाह। ओ बहुत व्‍यथित आ व्‍याकुल होमऽ लगलाह, 38 और हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर मोन व्‍यथा सँ एतेक व्‍याकुल अछि—मानू जे हम दुःख सँ मरऽ पर छी। अहाँ सभ एहिठाम रहि कऽ हमरा संग जागल रहू।” 39 एतेक कहि ओ कनेक आगाँ बढ़लाह आ मुँह भरे खसि कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह, “हे हमर पिता, जँ भऽ सकैत अछि तँ ई दुःखक बाटी हमरा लग सँ हटा लिअ, मुदा तैयो जेना हम चाहैत छी तेना नहि, बल्‍कि जेना अहाँ चाहैत छी तेना होअय।” 40 तकरबाद यीशु अपन तीनू शिष्‍य लग अयलाह। ओ हुनका सभ केँ सुतल देखि पत्रुस केँ पुछलथिन, “की हमरा संग एको घण्‍टा जागल रहितहुँ से अहाँ सभ केँ पार नहि लागल? 41 परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्‍मा तँ तत्‍पर अछि मुदा शरीर कमजोर।” 42 यीशु फेर जा कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह, “हे पिता, जँ ई बाटी बिनु पिने हमरा लग सँ नहि हटाओल जा सकैत अछि, तँ अहाँक जे इच्‍छा अछि से पूरा होअय।” 43 ओ जखन प्रार्थना कऽ कऽ शिष्‍य सभ लग अयलाह तँ ओ सभ फेर सुतल छलाह। हुनकर सभक आँखि नीन सँ भारी भऽ गेल छलनि। 44 यीशु हुनका सभ केँ सुतले छोड़ि कऽ फेर गेलाह आ तेसरो बेर ओही तरहेँ प्रार्थना कयलनि। 45 तकरबाद ओ शिष्‍य सभ लग अयलाह आ कहलथिन, “की अहाँ सभ एखनो तक सुतिए रहल छी आ आरामे कऽ रहल छी? देखू, ओ समय आब आबि गेल, मनुष्‍य-पुत्र पापी सभक हाथ मे पकड़बाओल जा रहल अछि। 46 उठू-उठू! चलू! देखू, हमरा पकड़बाबऽ वला आबि गेल अछि!” 47 यीशु ई बात कहिए रहल छलाह कि यहूदा, जे बारह शिष्‍य मे सँ एक छल, ओतऽ पहुँचि गेल। ओकरा संग लोकक बड़का भीड़ छलैक, और सभक हाथ मे तरुआरि आ लाठी छल। ओकरा सभ केँ मुख्‍यपुरोहित सभ आ समाजक बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोकनि पठौने छलाह। 48 यीशु केँ पकड़बाबऽ वला ओकरा सभ केँ ई संकेत देने छलैक जे, “हम जकरा चुम्‍मा लेब, वैह होयत। अहाँ सभ ओकरे पकड़ि लेब।” 49 यहूदा तुरत यीशुक लग मे जा कऽ कहलकनि, “गुरुजी, प्रणाम!” आ हुनका चुम्‍मा लेलकनि। 50 यीशु कहलथिन, “हौ मित्र, तोँ जाहि काजक लेल आयल छह, से कऽ लैह।” तखन लोक सभ आगाँ बढ़ि कऽ यीशु केँ पकड़ि लेलकनि आ बन्‍दी बना लेलकनि। 51 ई देखि यीशुक एक शिष्‍य अपन तरुआरि निकालि कऽ महापुरोहितक टहलू पर चला देलनि जाहि सँ ओकर एकटा कान छपटा गेलैक। 52 यीशु अपना शिष्‍य केँ कहलथिन, “अपन तरुआरि म्‍यान मे राखि लिअ। जे केओ तरुआरि चलबैत अछि से तरुआरि सँ मारल जायत। 53 की अहाँ ई सोचैत छी, जे हम अपन पिता सँ एहि बातक लेल निवेदन नहि कऽ सकैत छी जे ओ एही क्षण हमरा सहायताक लेल स्‍वर्गदूतक बारह सेना सँ बेसिओ पठबथि? 54 मुदा तखन धर्मशास्‍त्रक जे लेख अछि, जे ई सभ भेनाइ जरूरी अछि, से कोना पूरा होइत?” 55 तकरबाद यीशु अपना चारू भागक भीड़क लोक केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ हमरा विद्रोह मचाबऽ वला बुझि कऽ लाठी और तरुआरि लऽ कऽ पकड़ऽ अयलहुँ? हम तँ सभ दिन मन्‍दिर मे बैसि कऽ लोक केँ उपदेश दैत छलिऐक, ततऽ अहाँ सभ हमरा नहि पकड़लहुँ। 56 मुदा ई सभ एना एहि लेल भेल जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनिक लिखल बात सभ पूरा होअय।” तकरबाद हुनकर सभ शिष्‍य हुनका छोड़ि कऽ पड़ा गेलनि। 57 यीशु केँ पकड़ऽ वला सभ हुनका महापुरोहित काइफाक ओतऽ लऽ गेलनि। ओहिठाम धर्मशिक्षक आ समाजक बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक सभ जमा भेल छलाह। 58 पत्रुस सेहो कनेक दूरे रहि कऽ यीशुक पाछाँ लागल महापुरोहितक आङन तक गेलाह। ओ एहि घटनाक अन्‍त देखबाक उद्देश्‍य सँ नोकर सभक संग भीतर जा कऽ बैसि रहलाह। 59 ओम्‍हर मुख्‍यपुरोहित सभ आ सम्‍पूर्ण धर्म-महासभाक सदस्‍य सभ यीशु केँ मृत्‍युदण्‍डक योग्‍य बनयबाक लेल हुनका विरोध मे झूठ-फूसक प्रमाण सभ जमा करबाक कोशिश मे लागल छलाह। 60 मुदा बहुतो झुट्ठा गवाह सभक वयान लेलाक बादो कोनो पकिया प्रमाण हुनका सभ केँ नहि भेटलनि। अन्‍त मे दू गोटे आगाँ आबि कऽ बाजल, 61 “ई आदमी कहने छल जे, ‘हम परमेश्‍वरक मन्‍दिर केँ तोड़ि कऽ तीन दिन मे फेर ओकर निर्माण कऽ सकैत छी’।” 62 एहि पर महापुरोहित ठाढ़ होइत यीशु केँ पुछलथिन, “की अहाँ कोनो उत्तर नहि देब? ई गवाह सभ अहाँक विरोध मे केहन बात सभ कहि रहल अछि?” 63 मुदा यीशु चुपे रहलाह। महापुरोहित फेर कहलथिन, “अहाँ जीवित परमेश्‍वरक सपत खा कऽ कहू जे, की अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह, परमेश्‍वरक पुत्र छी?” 64 यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ अपने कहि देलहुँ। और हम अहाँ सभ केँ इहो बात कहैत छी जे, भविष्‍य मे अहाँ सभ मनुष्‍य-पुत्र केँ सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वरक दहिना कात बैसल आ आकाशक मेघ मे अबैत देखब।” 65 ई बात सुनिते महापुरोहित अपन वस्‍त्र फाड़ैत बजलाह, “ई आदमी अपना केँ परमेश्‍वरक बराबरि बुझैत अछि! की अपना सभ केँ एखनो गवाह सभक आवश्‍यकता अछि? अहाँ सभ स्‍वयं अपन कान सँ सुनलहुँ जे ई परमेश्‍वरक निन्‍दा कयलक। 66 आब अहाँ सभक की विचार अछि?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “ई मृत्‍युदण्‍डक जोगरक अछि।” 67 तकरबाद ओहिठाम उपस्‍थित लोक सभ यीशु केँ मुँह पर थूक फेकऽ लगलनि, हुनका मुक्‍का मारलकनि। किछु लोक हुनका थप्‍पड़ मारैत कहलकनि, 68 “यौ अन्‍तर्यामी मसीह! कहल जाओ, अपने केँ के मारलक?” 69 पत्रुस ओहि समय धरि बाहर आङन मे बैसल छलाह। तखन एक टहलनी हुनका लग आबि कऽ कहलकनि, “अहूँ तँ गलील निवासी यीशुक संग छलहुँ।” 70 मुदा पत्रुस सभक सामने मे अस्‍वीकार करैत ओकरा कहलथिन, “तोँ की बाजि रहल छेँ से हमरा बुझहे मे नहि अबैत अछि।” 71 ई बात कहि पत्रुस ओहिठाम सँ हटि कऽ आङनक मुँह पर चल गेलाह। तखन एक दोसर टहलनी हुनका देखि ओतऽ ठाढ़ लोक सभ केँ कहलक, “ई आदमी नासरत नगरक यीशुक संग छल।” 72 पत्रुस सपत खाइत फेर अस्‍वीकार कयलनि जे, “हम ओहि आदमी केँ नहि चिन्‍हैत छी!” 73 किछु कालक बाद ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ पत्रुस लग आबि कऽ कहलकनि, “निश्‍चय तोँ ओकरे सभ मे सँ छह। तोहर बोलिए एहि बात केँ स्‍पष्‍ट कऽ रहल छह।” 74 तखन पत्रुस सपत खा कऽ अपना केँ सरापऽ लगलाह आ कहलथिन जे, “हम ओहि आदमी केँ चिन्‍हिते नहि छी!” ठीक ओही क्षण मे मुर्गा बाजि उठल। 75 तखन पत्रुस केँ यीशुक कहल ओ बात मोन पड़ि गेलनि जे, “मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ हमरा तीन बेर अस्‍वीकार करब।” ओ ओहिठाम सँ बाहर भऽ भोकासी पाड़ि कऽ कानऽ लगलाह।

Matthew 27

1 प्रात भेने भोरे-भोर सभ मुख्‍यपुरोहित आ समाजक बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक सभ आपस मे विचार-विमर्श कऽ एहि बातक निश्‍चय कयलनि जे यीशु केँ मारि देल जाय। 2 ओ सभ यीशु केँ बान्‍हि कऽ लऽ गेलाह आ राज्‍यपाल पिलातुसक जिम्‍मा मे लगा देलथिन। 3 यहूदा इस्‍करियोती जे यीशु केँ पकड़बौने छल, से जखन देखलक जे यीशु केँ मृत्‍युदण्‍डक आज्ञा देल गेलनि, तखन ओ बहुत पछतायल। ओ मुख्‍यपुरोहित आ बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ लग चानीक तीस सिक्‍का लऽ कऽ गेल आ हुनका सभ केँ कहलकनि, 4 “हम निर्दोष व्‍यक्‍ति केँ मृत्‍युदण्‍डक लेल पकड़बा कऽ पाप कयलहुँ अछि।” ओ सभ उत्तर देलथिन, “ई बात तोँ जानह, एहि सँ हमरा सभ केँ कोनो मतलब नहि अछि।” 5 एहि पर ओ चानीक सिक्‍का सभ मन्‍दिर मे फेकि कऽ चल गेल आ अपना केँ फँसरी लगा लेलक। 6 मुख्‍यपुरोहित सभ ओ चानीक सिक्‍का उठा कऽ बजलाह, “एकरा मन्‍दिरक खजाना मे राखब उचित नहि होयत, किएक तँ ई खूनक मूल्‍य अछि।” 7 ओ सभ आपस मे एहि बातक विचार-विमर्श कऽ परदेशी लोक सभक लास केँ गाड़बाक लेल ओहि पाइ सँ कुम्‍हारक एकटा खेत किनि लेलनि। 8 एहि कारण सँ आइओ धरि ओ खेत “खूनक खेत” कहबैत अछि। 9 एहि तरहेँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यर्मियाहक ई वचन पूर्ण भेल जे, “ओ सभ तीस चानीक सिक्‍का लेलक; ई ओ मूल्‍य छल, जे इस्राएली लोक सभ हुनकर दाम लगौने छल। 10 जेना प्रभु सँ हमरा आज्ञा भेटल छल, तेना ओहि पाइ सँ कुम्‍हारक खेत किनल गेल।” 11 एम्‍हर यीशु राज्‍यपाल पिलातुसक सम्‍मुख ठाढ़ छलाह। राज्‍यपाल हुनका सँ पुछलथिन, “की अहाँ यहूदी सभक राजा छी?” यीशु हुनका उत्तर देलथिन, “अहाँ अपने कहि रहल छी।” 12 मुदा मुख्‍यपुरोहित आ बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक सभ जे कोनो दोष यीशु पर लगौलथिन तकर ओ कोनो उत्तर नहि देलथिन। 13 एहि पर पिलातुस कहलथिन, “की अहाँ नहि सुनि रहल छी जे ई सभ अहाँ पर कतेक आरोप लगा रहल छथि?” 14 मुदा यीशु एको बातक कोनो उत्तर नहि देलथिन। ई बात देखि राज्‍यपाल केँ बहुत आश्‍चर्य लगलनि। 15 प्रत्‍येक साल फसह-पाबनिक अवसर पर राज्‍यपाल जनताक इच्‍छाक अनुसार एक कैदी केँ छोड़ि दैत छलाह। 16 ओहि समय मे बरब्‍बा नामक एक नामी अपराधी जहल मे बन्‍द छल। 17 भीड़ केँ जमा भेला पर राज्‍यपाल पिलातुस ओकरा सभ केँ पुछलथिन, “अहाँ सभ की चाहैत छी? अहाँ सभक लेल हम ककरा छोड़ि दिअ? बरब्‍बा केँ वा यीशु केँ, जे मसीह कहबैत अछि?” 18 पिलातुस ई बात जानि गेल छलाह जे धर्मगुरु सभ यीशु केँ ईर्ष्‍याक कारणेँ पकड़बौने छथि। 19 पिलातुस न्‍यायासन पर बैसले छलाह कि हुनकर स्‍त्री कहा पठौलथिन जे, “ओहि निर्दोष मनुष्‍य केँ किछु नहि करिऔक! किएक तँ हम आइ राति सपना मे हुनका कारणेँ बहुत दुःख सहलहुँ अछि।” 20 मुदा मुख्‍यपुरोहित सभ आ बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक सभ जमा भेल लोक सभ केँ सिखा देने छलाह जे, “तोँ सभ बरब्‍बा केँ छोड़ि देबाक लेल आ यीशुक मृत्‍युदण्‍डक माँग करिहह।” 21 राज्‍यपाल ओकरा सभ केँ पुछलथिन, “अहाँ सभ की चाहैत छी? एहि दूनू मे सँ अहाँ सभक लेल हम ककरा छोड़ि दिअ?” ओ सभ बाजल, “बरब्‍बा केँ।” 22 पिलातुस कहलथिन, “तखन फेर एहि यीशु केँ, जे मसीह कहबैत अछि तकरा हम की करू?” सभ कहऽ लागल, “ओकरा क्रूस पर चढ़ाउ!” 23 ओ पुछलथिन, “किएक? ई कोन अपराध कयने अछि?” एहि पर लोकक भीड़ आरो जोर-जोर सँ चिचियाय लागल, “ओकरा क्रूस पर चढ़ाउ!” 24 जखन पिलातुस देखलनि जे यीशु केँ बचयबाक हुनकर प्रयत्‍न सफल नहि भऽ रहल अछि, बल्‍कि एहि सँ उपद्रव बढ़ि रहल अछि, तखन ओ हाथ मे पानि लऽ कऽ लोक सभक सामने अपन हाथ धोइत कहलथिन, “एहि मनुष्‍यक खूनक दोषी हम नहि छी। अहीं सभ एहि बात केँ जानू!” 25 भीड़क लोक हुनका उत्तर देलकनि, “एकर खूनक दोष हमरा सभ पर आ हमर सभक सन्‍तान सभ पर होअय!” 26 तकरबाद पिलातुस ओकरा सभक इच्‍छाक अनुसार बरब्‍बा केँ छोड़ि देलथिन आ यीशु केँ कोड़ा सँ पिटबा कऽ क्रूस पर चढ़यबाक लेल सैनिक सभक जिम्‍मा लगा देलथिन। 27 राज्‍यपालक सैनिक सभ यीशु केँ राजभवन मे लऽ गेलनि आ अपन पूरा सैनिक-दल केँ हुनका चारू कात जमा कऽ लेलक। 28 ओ सभ यीशु जे वस्‍त्र पहिरने छलाह तकरा निकलबा कऽ लाल रंगक राजसी वस्‍त्र पहिरा देलकनि। 29 काँटक मुकुट बना हुनका मूड़ी पर रखलकनि आ हुनका दहिना हाथ मे एक छड़ी पकड़ा देलकनि। तकरबाद हुनका सामने ठेहुनिया दऽ कऽ हुनकर मजाक उड़बैत कहऽ लगलनि, “यहूदी सभक राजा, प्रणाम!” 30 ओ सभ हुनका पर थूक फेकलकनि आ हुनका हाथ सँ छड़ी लऽ कऽ बेर-बेर मूड़ी पर मारलकनि। 31 ओ सभ एहि तरहेँ यीशुक मजाक उड़ौलाक बाद हुनका देह पर सँ लाल रंग वला वस्‍त्र निकालि लेलकनि आ हुनकर अपन कपड़ा फेर पहिरा देलकनि। तकरबाद ओ सभ हुनका क्रूस पर लटकयबाक लेल लऽ गेलनि। 32 शहर सँ बाहर लऽ जाइत काल सैनिक सभ केँ सिमोन नामक एक आदमी जे कुरेन नगरक रहऽ वला छल, से भेटलैक। ओकरा सैनिक सभ जबरदस्‍ती पकड़ि कऽ यीशुक क्रूस उठा कऽ लऽ चलबाक लेल कहलकैक। 33 यीशु केँ लऽ कऽ ओ सभ गुलगुता, अर्थात् “खप्‍पड़ वला स्‍थान” पर पहुँचल। 34 ओहिठाम ओ सभ यीशु केँ तीत दवाइ मिलाओल दारू पिबाक लेल देलकनि, मुदा ओ ओकरा चिखि कऽ नहि पिलनि। 35 सैनिक सभ हुनका हाथ-पयर मे काँटी ठोकि कऽ क्रूस पर टाँगि देलकनि। हुनकर वस्‍त्र पर चिट्ठा खसा कऽ अपना मे बाँटि लेलक, 36 तखन ओतऽ बैसि कऽ पहरा देबऽ लागल। 37 ओ सभ एक दोष-पत्र हुनका मूड़ीक उपर क्रूस पर टाँगि देलक जाहि पर लिखल छलैक जे, “ई यीशु अछि, यहूदी सभक राजा”। 38 यीशुक संगे दूटा डाकू सेहो क्रूस पर चढ़ाओल गेल, एकटा हुनकर दहिना कात और दोसर बामा कात। 39 ओहि बाटे आबऽ-जाय वला लोक सभ मूड़ी डोला-डोला कऽ हुनकर निन्‍दा कऽ रहल छल। 40 ओ सभ कहैत छल, “रे मन्‍दिर केँ तोड़ऽ वला और तीन दिन मे ओकरा बनाबऽ वला! तोँ जँ परमेश्‍वरक पुत्र छेँ तँ अपना केँ बचा आ एहि क्रूस पर सँ उतरि आ।” 41 तहिना मुख्‍यपुरोहित लोकनि, धर्मशिक्षक सभ आ बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक सभ सेहो हुनकर मजाक उड़बैत कहलनि, 42 “ई आन लोक सभ केँ बचबैत रहल मुदा अपना केँ नहि बचा सकैत अछि। ई जँ इस्राएलक राजा अछि तँ एखन क्रूस पर सँ उतरि आबओ, तखन हमहूँ सभ एकरा पर विश्‍वास करबैक। 43 ई आदमी परमेश्‍वर पर भरोसा रखैत छल। जँ एकरा सँ परमेश्‍वर प्रसन्‍न छथिन तँ एखन बचबथुन। ई तँ अपना केँ परमेश्‍वरक पुत्र कहैत छल।” 44 एहि तरहेँ ओ डाकू सभ सेहो, जकरा यीशुक संग क्रूस पर चढ़ाओल गेल छलैक, यीशुक निन्‍दा कऽ रहल छल। 45 ओहि दिन बारह बजे सँ तीन बजे तक सम्‍पूर्ण देश अन्‍हार-कुप्‍प भऽ गेल। 46 करीब तीन बजे मे यीशु बहुत जोर सँ बजलाह जे, “एली, एली, लामा सबक्‍तनी”, जकर अर्थ ई अछि, “हे हमर परमेश्‍वर, हे हमर परमेश्‍वर, हमरा अहाँ किएक छोड़ि देलहुँ?” 47 ई सुनि ओतऽ ठाढ़ लोक सभ मे सँ किछु लोक बाजल, “ई आदमी एलियाह केँ बजा रहल अछि।” 48 ओकरा सभ मे सँ एक गोटे तुरत दौड़ि कऽ गेल आ रूइ जकाँ एकटा एहन चीज जे पानि सोखैत अछि से लऽ कऽ तीताह दारू मे डुबा लेलक, तखन ओकरा लाठीक हूर पर अटका कऽ हुनका पिबाक लेल देलकनि। 49 मुदा दोसर लोक सभ ओकरा कहलकैक, “थम्‍हह, पहिने देखी जे एलियाह एकरा बचयबाक लेल अबैत छथि कि नहि।” 50 तकरबाद यीशु फेर जोर सँ आवाज दऽ कऽ अपन प्राण त्‍यागि देलनि। 51 ओही क्षण मन्‍दिर मे जे परदा छलैक से ऊपर सँ नीचाँ तक चिरा कऽ दू भाग मे फाटि गेल। पृथ्‍वी डोलऽ लागल। चट्टान सभ फाटि गेल। 52 कबरक मुँह खुजि गेल आ परमेश्‍वरक बहुतो भक्‍त सभक लास फेर जिआओल गेल। 53 ओ सभ कबर सँ बहरा कऽ यीशु केँ जीबि उठलाक बाद “पवित्र नगर” मे जा कऽ बहुतो लोक सभ केँ देखाइ देलनि। 54 रोमी कप्‍तान आ हुनका संग यीशु पर पहरा देबऽ वला सैनिक सभ, भूकम्‍‍प आ एहि घटना सभ केँ देखि बहुत डेरा गेल, और बाजि उठल, “सत्‍ये ई परमेश्‍वरक पुत्र छलाह!” 55 बहुतो स्‍त्रीगण सभ सेहो ओतऽ छलीह, जे सभ दूरे सँ ई बात सभ देखि रहल छलीह। ओ सभ गलील प्रदेश सँ यीशुक संग हुनकर सेवा-टहल करैत आयल छलीह। 56 हुनका सभ मे मरियम मग्‍दलीनी, याकूब आ यूसुफक माय मरियम, और जबदीक स्‍त्री, अर्थात् याकूब आ यूहन्‍नाक माय, छलीह। 57 साँझ पड़ला पर अरिमतिया नगरक निवासी यूसुफ नामक एक धनिक व्‍यक्‍ति ओतऽ अयलाह। ओहो यीशुक शिष्‍य बनि गेल छलाह। 58 ओ राज्‍यपाल पिलातुसक ओतऽ जा कऽ यीशुक लास मँगलथिन। पिलातुस आदेश देलनि जे लास यूसुफ केँ दऽ देल जानि। 59 यूसुफ हुनकर लास लऽ गेलाह आ साफ मलमलक कपड़ा मे ओकरा लपेटि कऽ 60 अपन नव कबर मे रखलनि जे ओ एक चट्टान मे कटबा कऽ बनबौने छलाह। लास केँ रखलाक बाद ओ कबरक मुँह पर एक भारी पाथर गुड़का कऽ लगा देलनि आ चल गेलाह। 61 मरियम मग्‍दलीनी आ दोसर मरियम कबरक सामने बैसल छलीह। 62 एहि घटनाक प्रात भेने, अर्थात् विश्राम-दिन मे, मुख्‍यपुरोहित लोकनि आ फरिसी सभ एक संग पिलातुसक ओतऽ जा कऽ हुनका कहलथिन, 63 “यौ सरकार! हमरा सभ केँ स्‍मरण अछि जे ओ ठग आदमी, जखन ओ जीबैत छल तखन कहने छल जे, ‘हम तीन दिनक बाद फेर जीबि उठब’। 64 तेँ अपने आज्ञा देल जाओ जे तीन दिन धरि ओहि कबर पर पहरा राखल जाय। नहि तँ कतौ एना नहि होअय जे ओकर चेला सभ ओकर लास चोरा कऽ लऽ जाय आ लोक सभ केँ कहऽ लागय जे, ओ मुइल सभ मे सँ जीबि उठलाह। तखन एहि बेरक ई धोखा वला बात पहिलुको धोखा सँ खराब होयत।” 65 पिलातुस हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ सैनिक सभ लऽ जाउ आ जेहन सुरक्षा अहाँ सभ कबरक करऽ चाहैत होइ तेहन करू।” 66 तखन ओ सभ गेलाह आ कबरक मुँह पर बन्‍दक छाप लगा देलनि। सैनिक सभ केँ कबरक सुरक्षा करबाक लेल पहरा पर राखि देलथिन।

Matthew 28

1 विश्राम-दिनक प्रात भेने, अर्थात् सप्‍ताहक पहिल दिन, भोर सँ भोर मरियम मग्‍दलीनी आ दोसर मरियम कबर देखबाक लेल गेलीह। 2 एकाएक बड़का भूकम्‍‍प भेल, कारण, परमेश्‍वरक एक स्‍वर्गदूत स्‍वर्ग सँ उतरलाह, और कबरक मुँह पर सँ पाथर गुड़का कऽ ओहि पर बैसि रहलाह। 3 हुनकर रूप बिजलोका जकाँ चमकैत छलनि आ हुनकर वस्‍त्र बर्फ सन उज्‍जर छलनि। 4 पहरा पर बैसल सैनिक सभ हुनका देखि एतेक डेरा गेल जे थर-थर काँपऽ लागल आ मरल सन भऽ गेल। 5 तखन स्‍वर्गदूत ओहि स्‍त्रीगण सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ नहि डेराउ। हम जनैत छी जे अहाँ सभ यीशु केँ, जिनका क्रूस पर चढ़ाओल गेल छलनि, तिनका तकबाक लेल आयल छी। 6 मुदा ओ एतऽ नहि छथि। ओ जहिना कहने छलाह तहिना जीबि उठल छथि। आउ, ओहि स्‍थान केँ देखू जतऽ हुनका राखल गेल छलनि, 7 आ तखन जल्‍दी जा कऽ हुनकर शिष्‍य सभ केँ ई समाचार सुनाउ जे, ‘ओ मुइल सभ मे सँ जीबि उठलाह! अहाँ सभ सँ पहिने गलील जा रहल छथि आ ओतऽ हुनका सँ भेँट होयत।’ ई बात अहाँ सभ केँ कहि देलहुँ।” 8 ओ सभ डर आ तैयो बड़का खुशीक संग ई समाचार शिष्‍य सभ केँ सुनयबाक लेल कबर पर सँ दौड़ पड़लीह। 9 एकाएक यीशु हुनका सभक आगाँ मे प्रगट भऽ देखाइ देलथिन आ नमस्‍कार कयलथिन। स्‍त्रीगण सभ लग मे जा कऽ हुनकर पयर पकड़ि कऽ आराधना कयलनि। 10 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ डेराउ नहि। जा कऽ हमर भाय सभ केँ गलील मे पहुँचबाक लेल कहिऔक। ओतहि ओ सभ हमरा देखत।” 11 स्‍त्रीगण सभ एखन रस्‍ते मे छलीह। ओम्‍हर कबर पर पहरा देबऽ वला मे सँ किछु सैनिक सभ नगर मे जा कऽ मुख्‍यपुरोहित सभ केँ एहि घटनाक सम्‍पूर्ण विवरण कहि सुनौलक। 12 मुख्‍यपुरोहित सभ यहूदी सभक बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोकनि केँ जमा कऽ एहि विषय मे किछु विचार-विमर्श कयलनि। तकरबाद ओ सभ ओहि सैनिक सभ केँ बहुत रुपैया-पैसा दैत कहलथिन, 13 “लोक केँ अहाँ सभ ई कहू जे, ‘राति मे हम सभ जखन सुतल छलहुँ तँ ओकर चेला सभ ओकर लास चोरा कऽ लऽ गेल।’ 14 राज्‍यपाल पिलातुस तक जँ कतौ ई खबरि पहुँचत तँ हम सभ हुनका सँ ई बात सभ मिला लेब और अहाँ सभ केँ बचा लेब।” 15 सैनिक सभ हुनका सभ सँ ओ पाइ लऽ लेलक आ जहिना ओ सभ सिखौने छलथिन तहिना लोक सभ केँ कहऽ लागल। ई अफवाह यहूदी सभ मे दूर-दूर पसरि गेल और आइओ तक ओकरा सभ मे प्रचलित अछि। 16 यीशुक एगारह शिष्‍य गलील जा कऽ ओहि पहाड़ पर गेलाह जतऽ यीशु हुनका सभ केँ पहुँचबाक लेल कहने छलथिन। 17 यीशु केँ देखि कऽ ओ सभ हुनकर आराधना कयलथिन। मुदा किछु गोटेक मोन मे हुनका बारे मे शंको छलनि। 18 तखन यीशु हुनका सभक लग आबि कहलथिन, “स्‍वर्ग आ पृथ्‍वीक सम्‍पूर्ण अधिकार हमरा देल गेल अछि। 19 एहि लेल अहाँ सभ आब जा कऽ सभ जातिक लोक केँ हमर शिष्‍य बनाउ और ओकरा सभ केँ पिता, पुत्र आ पवित्र आत्‍माक नाम सँ बपतिस्‍मा दिऔक। 20 हम जतेक आदेश अहाँ सभ केँ देने छी तकर सभक पालन करबाक लेल ओकरा सभ केँ सिखाउ। मोन राखू, संसारक अन्‍त तक हम सदिखन अहाँ सभक संग छी।”


Mark 1

1 परमेश्‍वरक पुत्र यीशु मसीहक शुभ समाचार एहि तरहेँ शुरू होइत अछि— 2 परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाह द्वारा लिखल पुस्‍तक मे भविष्‍यवाणी कयल गेल अछि जे, “देखू, अहाँ सँ पहिने हम अपन दूत पठायब, जे अहाँक आगाँ-आगाँ अहाँक बाट तैयार करत।” 3 “निर्जन क्षेत्र मे केओ जोर सँ आवाज दऽ रहल अछि जे, ‘प्रभुक लेल मार्ग तैयार करू, हुनका लेल सोझ बाट बनाउ।’” 4 तहिना यूहन्‍ना नामक दूत निर्जन क्षेत्र मे अयलाह और लोक केँ बपतिस्‍मा दैत प्रचार करऽ लगलाह जे, “पापक क्षमा पयबाक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करू और बपतिस्‍मा लिअ।” 5 यहूदिया प्रदेशक और यरूशलेम शहरक सभ लोक बाहर निकलि कऽ हुनका लग गेल और अपन पाप स्‍वीकार करैत यरदन नदी मे हुनका सँ बपतिस्‍मा लेलक। 6 यूहन्‍ना ऊँटक रोंइयाँ सँ बनल वस्‍त्र पहिरने रहैत छलाह और अपना डाँड़ मे चमड़ाक पट्टी बन्‍हने रहैत छलाह। भोजन मे फनिगा आ वन वला मधु खाइत छलाह। 7 ओ एहि तरहेँ प्रचार करैत छलाह, “हमरा बाद मे एक गोटे आबि रहल छथि जे हमरा सँ शक्‍तिशाली छथि। हम झुकि कऽ हुनकर जुत्तो खोलऽ जोगरक नहि छी। 8 हम तँ अहाँ सभ केँ पानि सँ बपतिस्‍मा दैत छी लेकिन ओ अहाँ सभ केँ पवित्र आत्‍मा सँ बपतिस्‍मा देताह।” 9 ओहि समय मे यीशु गलील प्रदेशक नासरत नगर सँ अयलाह और यूहन्‍ना सँ यरदन नदी मे बपतिस्‍मा लेलनि। 10 पानि सँ बाहर होइत काल यीशु आकाश केँ फटैत और परबाक रूप मे पवित्र आत्‍मा केँ अपना पर उतरैत देखलनि। 11 स्‍वर्ग सँ आवाज आयल जे, “अहाँ हमर प्रिय पुत्र छी। अहाँ सँ हम बहुत प्रसन्‍न छी।” 12 तखन पवित्र आत्‍मा तुरत यीशु केँ निर्जन क्षेत्र मे पठौलथिन 13 जतऽ चालिस दिन धरि शैतान हुनका सँ पाप करयबाक कोशिश कयलकनि। ओ जंगली जानबर सभक बीच मे रहैत छलाह और स्‍वर्गदूत सभ हुनकर सेवा करैत छलनि। 14 बाद मे, यूहन्‍ना केँ जहल मे राखि देल गेलाक बाद, यीशु गलील प्रदेश गेलाह और परमेश्‍वरक शुभ समाचारक प्रचार कयलनि जे, 15 “समय आबि गेल अछि, परमेश्‍वरक राज्‍य लग मे अछि! अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू आ शुभ समाचार पर विश्‍वास करू।” 16 एक दिन यीशु गलील झीलक कात चलैत काल मे सिमोन और हुनकर भाय अन्‍द्रेयास केँ झील मे जाल फेकैत देखलनि। ओ सभ मछबार छलाह। 17 यीशु हुनका सभ केँ बजौलथिन और कहलथिन, “यौ! हमरा पाछाँ आउ। हम अहाँ सभ केँ मनुष्‍य केँ पकड़ऽ वला मछबार बना देब।” 18 ओ सभ अपन जाल छोड़ि कऽ हुनका पाछाँ लागि गेलनि। 19 किछु आगू बढ़लाक बाद यीशु याकूब और यूहन्‍ना दूनू भाय केँ अपन बाबू जबदीक संग नाव मे जाल तैयार करैत देखलथिन। 20 ओ तुरत हुनका सभ केँ बजौलथिन, और ओ सभ अपन बाबू जबदी केँ जऽन-बोनिहारक संग नाव मे छोड़ि हुनका संग भऽ गेलनि। 21 ओ सभ कफरनहूम नगर गेलाह। विश्रामक दिन मे यीशु सभाघर मे जा कऽ उपदेश देबऽ लगलाह। 22 हुनकर शिक्षा सुनि लोक सभ चकित भेल किएक तँ ओ धर्मशिक्षक सभ जकाँ नहि, बल्‍कि अधिकारपूर्बक शिक्षा दैत छलाह। 23 एकाएक सभाघर मे एकटा दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी हल्‍ला करऽ लागल जे, 24 “यौ नासरतक निवासी यीशु! अहाँ केँ हमरा सभ सँ कोन काज? हमरा सभ केँ नष्‍ट करऽ अयलहुँ की? हम अहाँ केँ चिन्‍हैत छी। अहाँ परमेश्‍वरक पवित्र दूत छी।” 25 यीशु दुष्‍टात्‍मा केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “चुप रह! तोँ एकरा मे सँ निकल!” 26 दुष्‍टात्‍मा ओहि आदमी केँ झकझोड़ैत आ जोर सँ चिचियाइत ओकरा मे सँ निकलि गेल। 27 ई देखि सभ आदमी ततेक आश्‍चर्य-चकित भेल जे एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई की बात? ई कोन प्रकारक नव उपदेश अछि? ई आदमी तँ अधिकारपूर्बक दुष्‍टात्‍मा सभ केँ सेहो आज्ञा दैत छथि और ओ सभ हिनकर बात मानैत छनि!” 28 एहि सभ सँ यीशुक चर्चा बहुत जल्‍दी सम्‍पूर्ण गलील प्रदेश मे चारू कात पसरि गेलनि। 29 यीशु सभाघर सँ बाहर भऽ कऽ तुरत सिमोन और अन्‍द्रेयासक घर गेलाह। हुनका संग यूहन्‍ना और याकूब सेहो छलाह। 30 सिमोनक सासु बोखार सँ पीड़ित ओछायन पर पड़ल छलीह। लोक सभ हुनका विषय मे यीशु केँ कहलकनि। 31 यीशु हुनका लग जा आ हुनकर हाथ पकड़ि कऽ उठौलथिन। हुनकर बोखार तुरत उतरि गेलनि और ओ हिनका सभक सेवा-सत्‍कार मे लागि गेलीह। 32 ओही दिनक साँझ मे सूर्यास्‍‍तक बाद लोक सभ रोगी और दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी सभ केँ हुनका लग अनलकनि। 33 ओहि नगरक सभ लोक घरक सामने जमा भऽ गेल। 34 यीशु अनेक प्रकारक बिमारी सँ पीड़ित बहुत लोक सभ केँ नीक कयलनि, और बहुत लोक मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ सेहो निकाललनि। मुदा ओ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ बाजऽ नहि देलथिन किएक तँ यीशु के छथि से ओकरा सभ केँ बुझल छलैक। 35 दोसर दिन यीशु अन्‍हरोखे उठि बाहर गेलाह और एकान्‍त स्‍थान मे जा कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह। 36 सिमोन और हुनकर संगी सभ हुनका ताकऽ लेल गेलनि। 37 भेँट भेला पर हुनका कहलथिन, “सभ केओ अहाँ केँ खोजि रहल अछि।” 38 तखन ओ उत्तर देलथिन जे, “अपना सभ कोनो दोसर ठाम चलू। लग-पासक आरो गाम-बजार सभ मे सेहो हम परमेश्‍वरक शुभ समाचार सुनायब, किएक तँ हम एही लेल आयल छी।” 39 तेँ ओ पूरा गलील प्रदेश मे घुमलाह और ओकरा सभक सभाघर सभ मे जा कऽ उपदेश देलनि, और लोक सभ मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकाललथिन। 40 एक बेर एकटा कुष्‍ठ-रोगी हुनका लग आबि ठेहुनिया रोपि कऽ हुनका सँ निवेदन कयलकनि जे, “अपने जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।” 41 यीशु केँ ओकरा पर दया आबि गेलनि और ओ अपन हाथ बढ़ा कऽ ओकरा छुबि कऽ कहलथिन, “हम अवश्‍य चाहैत छिअह! तोँ शुद्ध भऽ जाह।” 42 तुरत्ते ओकर कुष्‍ठ-रोग ठीक भऽ गेलैक और ओ शुद्ध भऽ गेल। 43 यीशु ओकरा ई कड़ा आदेश दऽ कऽ विदा कयलथिन जे, 44 “ई बात ककरो नहि कहिअहक। पुरोहित लग जा कऽ अपना केँ देखाबह। शुद्ध होयबाक विषय मे मूसाक लिखल नियमक अनुसार, जे बलिदान चढ़यबाक अछि से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।” 45 मुदा ओ एहि घटनाक विषय मे सभ केँ जा कऽ कहि देलकैक, जकर फल ई भेल जे यीशु आब खुलि कऽ कोनो नगर मे नहि जा सकैत छलाह। ओ शहर सँ बाहर एकान्‍त मे रहऽ लगलाह मुदा तैयो लोक सभ चारू दिस सँ हुनका लग अबैत-जाइत छलनि।

Mark 2

1 किछु दिनक बाद यीशु कफरनहूम नगर घूमि अयलाह। लोक सभ केँ पता लगलैक जे ओ घर मे छथि। 2 ई सुनि ततेक लोक जमा भऽ गेल जे घरक दुआरियो लग कनेको जगह नहि बाँचल। यीशु ओकरा सभ केँ परमेश्‍वरक शुभ समाचार सुनबैत रहथिन। 3 ओही समय मे एकटा लकवा मारल आदमी केँ चारि गोटे सँ खाट पर लदने किछु गोटे आयल। 4 भीड़क कारणेँ ओ सभ यीशु लग नहि पहुँचि सकल। तेँ चार पर चढ़ि चार उजाड़ि कऽ, जाहि ठाम नीचाँ मे यीशु छलाह ताहि ठाम सँ खाट सहित लकवाक रोगी केँ हुनका लग उतारि देलकनि। 5 ओकरा सभक विश्‍वास देखि कऽ यीशु लकवाक रोगी केँ कहलथिन, “हौ बेटा, तोहर पाप माफ भेलह।” 6 किछु धर्मशिक्षक जे ओहिठाम बैसल छलाह मोने-मोन विचार करऽ लगलाह जे, 7 “अरे! ई आदमी कोना एना परमेश्‍वरक निन्‍दा करैत अछि? परमेश्‍वर केँ छोड़ि आरो के पाप केँ माफ कऽ सकैत अछि?” 8 यीशु तुरत अपना आत्‍मा मे हुनका सभक मोनक बात बुझि गेलाह और हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ अपना-अपना मोन मे किएक एना तर्क-वितर्क करैत छी? 9 आसान की अछि—लकवाक रोगी केँ ई कहब जे, ‘तोहर पाप माफ भेलह,’ वा ई कहब जे, ‘उठह! अपन खाट उठा कऽ चलह-फिरह’? 10 मुदा जाहि सँ अहाँ सभ बुझि जाइ जे पृथ्‍वी पर पाप केँ माफ करबाक अधिकार मनुष्‍य-पुत्र केँ छनि, हम एकरा कहैत छी...” तखन ओ लकवाक रोगी केँ कहलथिन, 11 “हम तोरा कहैत छिअह, उठह, अपन खाट उठाबह आ घर चल जाह!” 12 ओ उठल और सभक सामने अपन खाट उठा कऽ विदा भऽ गेल। ई देखि सभ लोक अचम्‍भित भऽ गेल और परमेश्‍वरक जयजयकार करैत कहऽ लागल जे, “हम सभ तँ एहन घटना पहिने कहियो नहि देखने छलहुँ!” 13 तखन यीशु ओहिठाम सँ निकलि कऽ फेर झीलक कात गेलाह। बहुत लोक हुनका लग अबैत-जाइत रहलनि और ओ ओकरा सभ केँ उपदेश दैत रहलाह। 14 ओहिठाम सँ विदा भेलाक बाद रस्‍ता मे अल्‍फेयासक बेटा लेवी केँ कर असूल करऽ वला स्‍थान मे बैसल देखलथिन। हुनका बजा कऽ कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” लेवी उठि कऽ हुनका संग विदा भऽ गेलाह। 15 बाद मे यीशु लेवीक घर मे भोजन करऽ बैसलाह। हुनका आ हुनकर शिष्‍य सभक संग, कर असूल करऽ वला और “पापी” सभ सेहो बैसल छल। हुनका संग चलनिहार मे बहुतो एहनो लोक सभ छल। 16 फरिसी पंथक किछु धर्मशिक्षक जखन देखलनि जे यीशु कर असूल करऽ वला आ “पापी” सभक संग भोजन करैत छथि, तखन ओ सभ हुनकर शिष्‍य सभ सँ पुछलनि जे, “ओ कर असूल करऽ वला और पापी सभक संग किएक खाइत-पिबैत छथि?” 17 ई बात सुनि यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “वैद्यक आवश्‍यकता स्‍वस्‍थ लोक केँ नहि होइत छैक, बल्‍कि बिमार सभ केँ! हम धार्मिक सभ केँ नहि, बल्‍कि पापी सभ केँ बजयबाक लेल आयल छी।” 18 ओहि समय मे यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ और फरिसी सभ उपास करैत छलाह। किछु लोक यीशु लग आबि कऽ पुछलकनि जे, “देखू! यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ और फरिसी सभक शिष्‍य उपास कऽ रहल छथि। अहाँक शिष्‍य सभ किएक नहि?” 19 यीशु ओकरा सभ केँ उत्तर देलथिन जे, “जाबत तक वरियातीक संग वर अछि ताबत तक की वरियाती उपास करत? नहि! जाबत धरि वर संगे रहतैक ताबत धरि उपास नहि करत। 20 मुदा ओ समय आओत जहिया वर ओकरा सभक बीच सँ हटा लेल जायत। ओ सभ ताही दिन उपास करत। 21 “केओ पुरान कपड़ा मे नयाँ कपड़ाक चेफरी नहि लगबैत अछि। जँ लगाओत तँ नयाँ कपड़ा घोकचि कऽ पुरान कपड़ा केँ खिचत और ओ कपड़ा आरो फाटि जायत। 22 केओ नव दारू पुरान चमड़ाक थैली मे नहि रखैत अछि। कारण, एना जँ करत तँ थैली फाटि जयतैक और दारू आ थैली दूनू नष्‍ट भऽ जयतैक। नहि! नव दारू नये थैली मे राखल जाइत अछि।” 23 कोनो विश्राम-दिन कऽ यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ खेत दऽ कऽ जा रहल छलाह। हुनकर शिष्‍य सभ चलैत-चलैत अन्‍नक बालि तोड़ि लैत छलाह। 24 ई देखि फरिसी सभ यीशु केँ कहलथिन, “देखू! जे काज विश्राम-दिन मे करब धर्म-नियमक अनुसार मना अछि, से ई सभ किएक करैत छथि?!” 25 यीशु हुनका सभ केँ जबाब देलथिन जे, “की अहाँ सभ ई नहि पढ़ने छी जे दाऊद आ हुनकर संगी सभ जखन भुखायल छलाह और हुनका सभक संग मे खयबाक लेल किछु नहि छलनि तखन ओ की कयलनि? 26 ओ अपना संगी सभक संग परमेश्‍वरक भवन मे गेलाह और परमेश्‍वर केँ चढ़ाओल रोटी खयलनि। ओहि समय मे अबियातर महापुरोहित छलाह। चढ़ाओल रोटी जे पुरोहित केँ मात्र खयबाक अधिकार छलनि से दाऊद अपनो खयलनि आ अपन संगिओ सभ केँ देलथिन।” 27 तखन ओकरा सभ केँ इहो कहलथिन जे, “विश्राम-दिन मनुष्‍यक लेल बनाओल गेल छैक, मनुष्‍य विश्राम-दिनक लेल नहि। 28 तेँ मनुष्‍य-पुत्र विश्रामो-दिनक मालिक छथि।”

Mark 3

1 दोसर बेर यीशु सभाघर गेलाह। एक गोटे जकर हाथ सुखायल छलैक सेहो ओहिठाम छल। 2 किछु लोक सभ यीशु पर दोष लगयबाक आधारक लेल हुनका पर नजरि गड़ौने छल जे, देखी ओ विश्राम-दिन मे एकरा स्‍वस्‍थ करताह वा नहि। 3 यीशु सुखल हाथ वला आदमी केँ कहलथिन, “उठह! सभक आगाँ मे ठाढ़ होअह।” 4 तखन लोक सभ दिस घूमि कऽ पुछलथिन जे, “विश्राम-दिन मे की उचित? नीक काज करब अथवा अधलाह? ककरो जीवनक रक्षा करब अथवा नष्‍ट करब?” केओ किछु नहि बाजल। 5 यीशु तमसा कऽ चारू दिस लोक सभ पर नजरि दौड़ौलनि। ओ लोक सभक जिद्दीपनक कारणेँ उदास भऽ गेलाह और ओहि आदमी केँ कहलथिन जे, “अपन हाथ बढ़ाबह।” ओ हाथ बढ़ौलक और ओकर हाथ एकदम ठीक भऽ गेलैक। 6 फरिसी सभ तुरत निकलि कऽ हेरोद-दलक संग मिलि कऽ यीशु केँ कोना मारल जाय, तकर षड्‌यन्‍त्र रचऽ लगलाह। 7 यीशु अपन शिष्‍य सभक संग झीलक कात मे चल गेलाह, और गलील प्रदेशक लोक सभक बड़का भीड़ हुनका सभक पाछाँ-पाछाँ गेलनि। 8 यीशु द्वारा कयल गेल काजक विषय मे सुनि कऽ यहूदिया प्रदेश, यरूशलेम, इदूमिया, यरदन नदीक ओहि पारक क्षेत्र, सूर और सीदोन नगरक क्षेत्र सँ बहुत लोक हुनका ओहिठाम आयल। 9 यीशु अपन शिष्‍य सभ केँ कछेर पर एकटा नाव तैयार राखऽ लेल कहलथिन जाहि सँ लोकक भीड़ हुनका दबा नहि देनि। 10 ओ ततेक लोक केँ नीक कयने रहथिन जे विभिन्‍न प्रकारक रोगी सभ हुनका शरीर मे भिड़बाक लेल ठेलम-ठेल कऽ रहल छल। 11 जखन दुष्‍टात्‍मा सभ हुनका देखैत छल तँ हुनका समक्ष खसि कऽ चिचिया लगैत छल जे, “अहाँ परमेश्‍वरक पुत्र छी।” 12 मुदा यीशु ओकरा सभ केँ मना कयलथिन जे, “लोक केँ ई नहि कहिअहक जे हम के छी।” 13 तकर बाद यीशु पहाड़ पर चल गेलाह और जिनका सभ केँ ओ चुनलथिन तिनका सभ केँ अपना लग बजौलथिन। ओ सभ हुनका लग अयलनि। 14 यीशु बारह आदमी केँ “दूत” कहि कऽ नियुक्‍त कयलथिन जाहि सँ ओ सभ हुनका संग रहथि, आ जिनका ओ शुभ समाचारक प्रचार करबाक लेल आ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालबाक लेल पठा सकथि। 16 बारह शिष्‍य जिनका सभ केँ ओ चुनलनि से यैह सभ छथि—सिमोन, जिनका ओ “पत्रुस” नाम देलथिन, 17 जबदीक बेटा याकूब और हुनकर भाय यूहन्‍ना, जिनका सभ केँ ओ बुअनेरगिस, अर्थात्‌ “ठनकाक पुत्र सभ” नाम देलथिन, 18 अन्‍द्रेयास, फिलिपुस, बरतुल्‍मै, मत्ती, थोमा, अल्‍फेयासक बेटा याकूब, तद्दै, सिमोन “देश-भक्‍त”, 19 और यहूदा इस्‍करियोती जे बाद मे यीशुक संग विश्‍वासघात कयलकनि। 20 तखन यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ एकटा घर मे गेलाह। ओहिठाम ततेक लोक फेर जमा भऽ गेल जे हुनका सभ केँ भोजनो करबाक समय नहि भेटलनि। 21 हुनकर घरक लोक जखन ई बात सुनलनि तँ हुनका जबरदस्‍ती लऽ अयबाक लेल विदा भेलाह, ई सोचि जे यीशु पागल भऽ गेल छथि। 22 यरूशलेम सँ आयल धर्मशिक्षक सभ कहऽ लगलाह जे, “यीशु मे दुष्‍टात्‍मा सभक मुखिया बालजबूल छैक। तकरे शक्‍ति सँ ओ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत अछि।” 23 हुनका सभ केँ अपना लग बजा कऽ यीशु उदाहरण द्वारा उत्तर देलथिन जे, “शैतान कोना शैतान केँ भगा सकत? 24 जँ कोनो राज्‍य मे फूट पड़ि जाय तँ ओ नहि टिकि सकत। 25 तहिना जँ कोनो परिवार मे फूट भऽ गेल अछि तँ ओ नहि टिकि सकैत अछि। 26 जँ शैतान अपने केँ विरोध करय और ओकरा अपने मे फूट भऽ जाइक तँ ओ टिकि नहि सकैत अछि। ओकर विनाश निश्‍चित छैक। 27 केओ कोनो बलगर आदमीक घर मे ढुकि कऽ ओकर चीज-वस्‍तु ताबत तक नहि लुटि सकैत छैक, जाबत तक पहिने ओहि बलगर आदमी केँ बान्‍हि कऽ काबू मे नहि कऽ लैत अछि। ओकरा बान्‍हि लेलाक बादे ओकर वस्‍तु लुटि सकैत अछि। 28 अहाँ सभ केँ हम विश्‍वास दिअबैत छी जे, मनुष्‍य केँ सभ तरहक पाप आ निन्‍दाक बातक क्षमा भेटि सकैत छैक, 29 मुदा जँ केओ पवित्र आत्‍माक निन्‍दा करैत अछि तँ ओकरा कहियो क्षमा नहि भेटतैक। ओ अनन्‍त पापक दोषी होयत।” 30 यीशु ई बात एहि लेल कहलथिन जे ओ सभ कहैत छलाह जे हुनका मे दुष्‍टात्‍मा छनि। 31 ओहि समय मे यीशुक माय आ भाय लोकनि ओतऽ पहुँचलाह। सभ गोटे बाहर रहि कऽ, यीशु केँ बाहर अयबाक लेल खबरि पठौलनि। 32 यीशुक चारू कात लोक सभ बैसल छल। एक गोटे आबि कऽ हुनका कहलकनि जे, “सुनू! अहाँक माय और भाय लोकनि बाहर ठाढ़ छथि आ अहाँ केँ बजबैत छथि।” 33 ओ कहलथिन, “के छथि हमर माय? के सभ छथि हमर भाय?” 34 ओ चारू कात बैसल लोकक दिस ताकि कहलनि जे, “देखू! यैह सभ हमर माय और भाय लोकनि छथि! 35 जे केओ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार चलैत छथि वैह हमर भाय, हमर बहिन, हमर माय छथि।”

Mark 4

1 दोसर बेर यीशु फेरो झीलक कात मे लोक सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह। हुनका लग ततेक लोक जमा भऽ गेल जे ओ झील मे नाव पर चढ़ि कऽ किनार सँ कनेक हटि कऽ बैसि गेलाह। लोक सभ किनार पर सँ हुनकर शिक्षा सुनैत छल। 2 ओकरा सभ केँ ओ बहुत बात दृष्‍टान्‍त सभक द्वारा सिखबैत छलथिन। 3 एहि बेर उपदेश दैत ओ कहलथिन, “सुनू! एक किसान बीया बाउग करबाक लेल गेल। 4 बीया बाउग करैत काल किछु बीया रस्‍ताक कात मे खसल आ चिड़ै सभ आबि ओकरा खा लेलकैक। 5 किछु बीया पथराह जमीन पर खसल जतऽ बेसी माटि नहि होयबाक कारणेँ ओ जल्‍दी जनमि गेल। 6 मुदा रौद लगिते ओ झरकि गेल आ जड़ि नहि पकड़ि सकबाक कारणेँ सुखा गेल। 7 फेर दोसर बीया काँट-कुशक बीच मे खसल मुदा काँट-कुश बढ़ि कऽ ओकरा दबा देलकैक। तेँ ओहि बीया सँ कोनो फसिल नहि भेलैक। 8 किछु बीया नीक जमीन पर पड़ल। ओ जनमि कऽ फड़ल-फुलायल और फसिल देलक—कोनो तीस गुना, कोनो साठि गुना, कोनो सय गुना।” 9 तखन यीशु कहलथिन, “जकरा सुनबाक कान छैक, से सुनओ।” 10 बाद मे जखन यीशु अपन बारह शिष्‍य आ आरो संगी सभक संग एकान्‍त मे छलाह तखन ओ सभ एहि दृष्‍टान्‍तक बारे मे हुनका सँ पुछलथिन। 11 यीशु कहलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍यक रहस्‍यक ज्ञान अहाँ सभ केँ देल गेल अछि, मुदा जे बाहरक लोक अछि तकरा सभक लेल सभ बात दृष्‍टान्‍तक रूप मे रहैत छैक, 12 जाहि सँ, जहिना लिखल अछि, ‘तकितो ओ सभ देखय नहि, सुनितो ओ सभ बुझय नहि। एना जँ नहि रहैत तँ ओ सभ घुमि कऽ परमेश्‍वर लग अबैत और क्षमा पबैत।’ “ 13 तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जँ अहाँ सभ एहि दृष्‍टान्‍तक अर्थ नहि बुझैत छिऐक तँ आरो दृष्‍टान्‍तक अर्थ कोना बुझबैक? 14 बाउग करऽ वला परमेश्‍वरक वचन केँ बाउग करैत अछि। 15 रस्‍ताक कात मे खसल बीया जकाँ ओ व्‍यक्‍ति अछि जकरा मे परमेश्‍वरक वचन बाउग कएल गेल छैक, और जखने ओ वचन सुनैत अछि तखने शैतान आबि कऽ ओकरा मे सँ बाउग कएल गेल वचन निकालि कऽ लऽ जाइत छैक। 16 तहिना दोसर आदमी ओहि बीया जकाँ अछि जे पथराह जमीन पर बाउग कएल गेल अछि। ई सभ परमेश्‍वरक वचन सुनि कऽ अपार आनन्‍दक संग तुरत ओकरा स्‍वीकार करैत अछि, 17 मुदा ओ वचन ओकरा मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक और तेँ कनेके काल तक स्‍थिर रहैत अछि। जखन वचनक कारणेँ ओकरा कष्‍ट और अत्‍याचार सहबाक स्‍थिति अबैत छैक तखन ओ सभ तुरत विश्‍वास केँ छोड़ि दैत अछि। 18 फेर दोसर आदमी ओहि बीया जकाँ अछि जे काँट-कुशक बीच खसल। ई सभ वचन तँ सुनैत अछि 19 मुदा एहि संसारक चिन्‍ता, धनक मोह-माया आ आरो चीजक लालसा हृदय मे आबि कऽ वचन केँ दबा दैत छैक और ओ वचन ओकरा जीवन मे कोनो फल नहि दैत अछि। 20 नीक जमीन मे बाउग कयल गेल बीया जकाँ ओ सभ अछि जे वचन केँ सुनि कऽ ओकरा स्‍वीकार करैत अछि और फड़ि-फुला कऽ फसिल दैत अछि—केओ तीस गुना, केओ साठि गुना, केओ सय गुना।” 21 यीशु हुनका सभ केँ पुछलथिन जे, “की केओ डिबिया लेसि कऽ बासन सँ झँपैत अथवा चौकीक नीचाँ रखैत अछि? डिबिया तँ की लाबनि पर नहि रखैत अछि? 22 जँ किछु झाँपल अछि तँ एहि लेल जे उघारल जाय। जँ कोनो बात गुप्‍त अछि तँ एहि लेल जे एक दिन प्रगट कयल जाय। 23 जे सुनि सकैत अछि से सुनए!” 24 तखन ओ हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “जे बात सुनैत छी तकरा पर ध्‍यान दिअ! जाहि नाप सँ अहाँ देब, ओही नाप सँ अहाँ केँ देल जायत, और ओहि सँ बेसिओ। 25 किएक तँ जकरा छैक, तकरा आरो देल जयतैक और जकरा नहि छैक, तकरा सँ जेहो छैक सेहो लऽ लेल जयतैक।” 26 तखन ओ इहो कहलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍य एना छैक—एक आदमी खेत मे बीया बाउग कऽ कऽ 27 अपन दिन-चर्या मे लागि जाइत अछि। ओ बीया अँकुरित होइत छैक और बढ़ैत छैक, ओना तँ ओ आदमी ई नहि बुझैत अछि जे कोना ई सभ होइत छैक। 28 भूमि अपने सँ फल लबैत छैक—पहिने अँकुर, तखन बालि, और अन्‍त मे बालि मे पाकल दाना। 29 जखन अन्‍न पाकि जाइत छैक तखन ओ आदमी तुरत हाँसू चलबैत अछि किएक तँ कटबाक समय आबि गेल छैक।” 30 तखन यीशु कहलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍यक तुलना कोन वस्‍तु सँ कयल जाय? कोन दृष्‍टान्‍त द्वारा ओकर वर्णन कयल जाय? 31 ओ सरिसोक दाना जकाँ अछि। बाउग होमऽ वला बीया सभ मे सरिसोक दाना सभ सँ छोट होइत अछि। 32 मुदा जखन ओ बाउग होइत अछि और बढ़ैत अछि तखन सभ साग-पात सँ पैघ भऽ जाइत अछि। ओकर ठाढ़ि एतेक पैघ भऽ जाइत छैक जे ओकर छाँह मे आकाशक चिड़ै सभ सेहो अपन वास स्‍थान बना सकैत अछि।” 33 एहन आओर बहुत दृष्‍टान्‍त सभक द्वारा यीशु लोक सभ केँ परमेश्‍वरक वचन सुनौलथिन। 34 जहिना लोक केँ बुझऽ मे आबि सकल तहिना शिक्षा देलथिन। बिनु दृष्‍टान्‍त देने ओ ओकरा सभ केँ कोनो बात नहि कहैत छलथिन। मुदा जखन अपन शिष्‍य सभक संग असगरे रहैत छलाह तखन ओ हुनका सभ केँ सभ बातक अर्थ बुझा दैत छलथिन। 35 ओहि दिनक साँझ मे यीशु अपन शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “चलू! झीलक ओहि पार चलू!” 36 शिष्‍य सभ भीड़ केँ छोड़ि, जाहि नाव मे ओ बैसल छलाह ओहि नाव मे हुनका अपना संग लऽ कऽ चललाह। हुनका सभक संग आरो नाव सभ सेहो छल। 37 एकाएक बहुत जोर सँ अन्‍हड़-बिहारि आयल। झील मे बड़का लहरि उठऽ लागल और नाव सँ टकराय लागल। नाव पानि सँ भरऽ लागल। 38 यीशु नावक पछिलका भाग मे गेड़ुआ लगा कऽ सुतल छलाह। शिष्‍य सभ हुनका उठबैत कहलथिन, “यौ गुरुजी! अपना सभ डुबि रहल छी, तकर अहाँ केँ कोनो चिन्‍ता नहि अछि की?!” 39 ओ उठि कऽ अन्‍हड़ केँ डाँटि कऽ झील केँ कहलथिन, “शान्‍त भऽ जो! थम्‍हि जो!” अन्‍हड़-बिहारि रूकि गेल और सभ शान्‍त भऽ गेल। 40 तखन ओ शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ किएक एहन डेरबुक छी! की अहाँ सभ केँ एखनो तक विश्‍वास नहि होइत अछि?” 41 ओ सभ अति भयभीत भऽ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह जे, “ई के छथि?! अन्‍हड़-बिहारि और लहरि केँ सेहो आज्ञा दैत छथिन तँ ओ सभ मानैत छनि!”

Mark 5

1 यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ झीलक ओहि पार गिरासेनी सभक क्षेत्र मे पहुँचलाह। 2 नाव पर सँ उतरैत काल एक दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी कबरिस्‍तान दिस सँ हुनका भेँट करऽ लेल अयलनि। 3 ओ आदमी कबरिस्‍तान मे रहैत छल। केओ आब ओकरा जंजीरो लऽ कऽ बान्‍हि नहि सकैत छल। 4 कतेको बेर लोक ओकरा जंजीर सँ हाथ-पयर बान्‍हि देने रहैक मुदा ओ सभ जंजीर केँ तोड़ि देने रहय। ककरो एतेक शक्‍ति नहि छल जे ओकरा सम्‍हारि कऽ राखि सकय। 5 दिन-राति कबरिस्‍तान और पहाड़ मे ओ सदिखन चिचियाइत रहैत छल और पाथर सँ अपना देह केँ कटैत रहैत छल। 6 यीशु केँ दूर सँ देखि ओ दौड़ैत आयल और हुनका पयर पर खसि कऽ 7 जोर सँ चिचिया लागल जे, “यौ परम परमेश्‍वरक पुत्र यीशु! अपने केँ हमरा सँ कोन काज? अपने केँ परमेश्‍वरक सपत अछि—हमरा दुःख नहि दिअ।” 8 ई बात ओ एहि द्वारे कहलक कि यीशु ओहि दुष्‍टात्‍मा केँ कहैत छलाह जे, “हे दुष्‍टात्‍मा! एहि आदमी मे सँ निकल!” 9 तखन यीशु ओकरा सँ पुछलथिन जे, “तोहर नाम की छह?” ओ कहलक जे, “हमर नाम अछि ‘सेना’, किएक तँ हम सभ बहुत गोटे छी।” 10 तखन ओ हुनका सँ विनती करऽ लागल जे, “हमरा सभ केँ एहि इलाका सँ बाहर नहि निकालू।” 11 ओहीठाम लग मे पहाड़ पर सुगरक बड़का झुण्‍ड चरि रहल छल। 12 दुष्‍टात्‍मा सभ यीशु सँ विनती कयलकनि जे, “हमरा सभ केँ ओहि सुगर सभ मे पठा दिअ, ओकरा सभ मे हमरा सभ केँ पैसऽ दिअ।” 13 यीशु ओकरा सभ केँ अनुमति दऽ देलथिन। ओ सभ ओहि आदमी मे सँ निकलि आयल और सुगर सभ मे प्रवेश कऽ गेल। पूरा झुण्‍ड—लगभग दू हजार सुगर—बताह भऽ पहाड़ पर सँ धरफरा कऽ झील मे खसल और सभ पानि मे डुबि कऽ मरि गेल। 14 सुगर चराबऽ वला तुरत भागि एहि घटनाक बारे मे नगर आ देहातो मे सुनौलक। एहि घटना केँ देखऽ लेल बहुतो लोक आयल। 15 यीशु लग पहुँचि कऽ ओहि आदमी केँ जकरा मे दुष्‍टात्‍मा पहिने रहैत छलैक कपड़ा पहिरने आ स्‍वस्‍थ मोने यीशु लग बैसल देखलक। ई देखि लोक सभ भयभीत भऽ गेल। 16 जे सभ ई घटना देखने छल से सभ विस्‍तारपूर्बक लोक सभ केँ कहि देलक जे कोना दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी नीक भेल और सुगर सभ केँ की भेलैक। 17 तखन लोक सभ यीशु सँ ओहि इलाका सँ चल जयबाक लेल विनती करऽ लगलनि। 18 यीशु जखन नाव पर चढ़ऽ लगलाह तखन ओ आदमी जकरा मे पहिने दुष्‍टात्‍मा सभ रहैत छलैक से हुनका सँ विनती कयलकनि जे, “अपना संग हमरो चलऽ देल जाओ।” 19 मुदा यीशु ओकरा मना करैत कहलथिन, “तोँ अपना घर जाह, और प्रभु तोरा पर कतेक पैघ दया कयलथुन अछि से अपना आदमी सभ केँ सुनबहक।” 20 ओ आदमी “दस नगर” क्षेत्र मे जा कऽ, यीशु ओकरा लेल जे-जतेक कयने रहथिन से सुनाबऽ लागल। जे सभ ई बात सुनलक से सभ बहुत आश्‍चर्य-चकित भेल। 21 यीशु नाव मे झीलक एहि पार अयलाह। हुनकर चारू कात बड़का भीड़ जमा भऽ गेल। जखन यीशु झीलक कात मे ठाढ़ छलाह, 22 ओही समय मे सभाघरक याइरस नामक एक अधिकारी ओहिठाम अयलाह। यीशु केँ देखि कऽ हुनकर पयर पर खसैत 23 निवेदन कयलथिन जे, “हमर बेटी मरि रहल अछि। हमरा घर चलि कऽ ओकरा पर हाथ राखि कऽ ठीक कऽ देल जाओ, जाहि सँ ओ जीबय।” यीशु हुनका संग विदा भऽ गेलाह। 24 हुनका संग बड़का भीड़ चलल। चारू कात सँ लोक सभ यीशु केँ पिचऽ लगलनि। 25 भीड़ मे एक स्‍त्री छलि जकरा बारह वर्ष सँ खून खसऽ वला बिमारी छलैक। 26 ओ बहुतो वैद्य सँ इलाज कराबऽ मे बड्ड कष्‍ट सहल छलि और अपन सभ सम्‍पत्ति खर्च कऽ देने छलि। मुदा तैयो ओकरा कनेको गुण नहि कयलकैक। बल्‍कि ओकर अवस्‍था आओर अधलाहे होइत गेलैक। 27 यीशुक बारे मे ओ सुनने छलि। ओ हुनका पाछू आबि, हुनकर वस्‍त्रक कोर छुबि 28 मोन मे सोचलक जे, “जँ हम हुनकर वस्‍त्रो केँ छुबि लेब तँ हम ठीक भऽ जायब।” 29 हुनकर वस्‍त्र छुबिते ओकर खून बहनाइ बन्‍द भऽ गेलैक। ओकरा अपनो अनुभव भेलैक जे हम रोग सँ मुक्‍त भऽ गेल छी। 30 यीशु केँ सेहो तुरत अनुभव भेलनि जे हमरा मे सँ सामर्थ्‍य निकलि गेल अछि। ओ भीड़ दिस घूमि कऽ पुछलथिन जे, “हमरा वस्‍त्र केँ के छुलक?” 31 हुनकर शिष्‍य सभ हुनका कहलकनि जे, “अहाँ देखिते छी जे कतेक लोक अहाँ केँ दबा रहल अछि, तँ कोना पुछैत छी जे हमरा के छुलक?” 32 मुदा यीशु ई बुझबाक लेल जे ई के कयलक, चारू दिस अपन नजरि खिरौलनि। 33 तखन ओ स्‍त्री ई बुझि जे हमरा संग की भेल, डर सँ कँपैत आगू आयल आ यीशुक पयर पर खसैत हुनका सभ बात सत्‍य-सत्‍य कहि देलकनि। 34 यीशु ओकरा कहलथिन, “बेटी! तोहर विश्‍वास तोरा स्‍वस्‍थ कऽ देलकह। शान्‍तिपूर्बक जाह और अपन रोग सँ मुक्‍त रहह!” 35 यीशु ई बात कहिए रहल छलथिन कि अधिकारी याइरसक घर सँ किछु गोटे आबि कऽ याइरस केँ कहलकनि जे, “अहाँक बेटी मरि गेल। आब गुरुजी केँ आरो कष्‍ट देला सँ कोन लाभ?” 36 यीशु ई बात सुनि लेलथिन और सभाघरक अधिकारी केँ कहलथिन, “अहाँ डेराउ नहि! मात्र विश्‍वास राखू!” 37 ओ अपना संग पत्रुस, याकूब और याकूबक भाय यूहन्‍ना केँ छोड़ि आरो ककरो नहि आबऽ देलथिन। 38 सभाघरक अधिकारीक घर पहुँचि कऽ ओ लोक सभ केँ बहुत कनैत आ जोर सँ विलाप करैत देखलनि। 39 घर मे अबिते यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ हल्‍ला किएक करैत छी और कनैत किएक छी? बच्‍ची मरल नहि अछि—ओ सुतल अछि।” मुदा लोक सभ हुनका पर हँसऽ लागल। 40 तखन यीशु सभ लोक केँ बाहर हटा कऽ बच्‍चीक माय-बाबू केँ और अपन शिष्‍य सभ केँ अपना संग लऽ कऽ ओहि घर मे गेलाह जाहिठाम ओ बच्‍ची छल। 41 यीशु ओकर हाथ पकड़ि ओकरा कहलथिन, “तलीथा कूम!” जकर अर्थ अछि, “हे बच्‍ची! हम तोरा कहैत छिऔक, तोँ उठ!” 42 बच्‍ची तुरत उठि गेल और बुलऽ लागल—ओ तँ बारह वर्षक छल। ओ सभ बहुत आश्‍चर्य-चकित भेलाह। 43 यीशु एहि घटना केँ केओ नहि बुझय ताहि लेल दृढ़तापूर्बक आदेश देलथिन, आ कहलथिन जे बच्‍ची केँ किछु खयबाक लेल देल जाय।

Mark 6

1 यीशु ओहिठाम सँ अपन गाम अयलाह। हुनकर शिष्‍यो सभ हुनका संग छलनि। 2 विश्राम-दिन अयला पर ओ सभाघर मे उपदेश देबऽ लगलाह। हुनकर शिक्षा सुनि कऽ सभाक लोक आश्‍चर्य-चकित भऽ गेल और कहऽ लागल जे, “अरे! एकरा ई सभ बात कतऽ सँ भेटि गेलैक? ई कोन ज्ञान अछि जे एकरा देल गेल छैक? ई एहन चमत्‍कार सभ कोना करैत अछि! 3 की ई लकड़ी मिस्‍तिरी नहि अछि? की ई मरियमक बेटा और याकूब, योसेस, यहूदा और सिमोनक भाय नहि अछि? की एकर बहिन सभ अपना सभक बीच नहि रहैत अछि?” ओ सभ यीशु सँ डाह करऽ लागल। 4 यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “मात्र अपने गाम, कुटुम्‍ब-परिवार, आ अपने घर मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ताक अनादर होइत छैक।” 5 ओ ओहिठाम कोनो चमत्‍कार नहि कऽ सकलाह, मात्र किछु रोगी पर हाथ राखि कऽ ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कयलथिन। 6 लोकक अविश्‍वास पर ओ चकित छलाह। यीशु उपदेश दैत गाम-गाम घुमऽ लगलाह। 7 ओ अपन बारहो शिष्‍य केँ बजा कऽ, हुनका सभ केँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालबाक अधिकार दऽ कऽ, दू-दू गोटेक समूह मे बाहर पठौलथिन। 8 ओ हुनका सभ केँ ई आज्ञा देलथिन जे, “बाटक लेल लाठी छोड़ि आरो किछु नहि लऽ जाउ—ने रोटी, ने झोरा और ने जेबी मे पैसा। 9 चप्‍पल पहिरि लिअ और एकेटा अंगा लिअ।” 10 तखन हुनका सभ केँ कहलथिन, “जाहि घर मे अहाँ सभ ठहरी, जाबत धरि ओहि गाम सँ विदा नहि होइ ताबत धरि ओही घर मे रूकू। 11 जतऽ कतौ लोक सभ अहाँ सभक स्‍वागत नहि करय और अहाँ सभ जे कहऽ चाहैत छी, से नहि सुनय, ताहि गाम सँ विदा होइत काल अपन पयरक गर्दा झाड़ि लेब। ई ओकरा सभक विरोधक गवाही रहत।” 12 ओ सभ विदा भेलाह और लोकक बीच प्रचार करऽ लगलाह जे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू। 13 बहुत लोक मे सँ दुष्‍टात्‍मा निकाललनि और बहुत रोगी पर तेल लगा कऽ ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कयलनि। 14 राजा हेरोद एहि घटना सभक विषय मे सुनलनि किएक तँ यीशुक यश खूब पसरि गेल छल। किछु लोक कहैत छल जे, “बपतिस्‍मा देबऽ वला यूहन्‍ना मुइल सभ मे सँ जिआओल गेल छथि, तेँ चमत्‍कार करबाक एहन सामर्थ्‍य हुनका मे क्रियाशील अछि।” 15 दोसर लोक सभ कहैत छल जे, “ओ तँ एलियाह छथि।” आरो सभ कहैत छल जे, “ओ प्राचीन कालक परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ मे सँ केओ छथि।” 16 मुदा हेरोद यीशुक बारे मे सुनि कऽ कहलनि जे, “ई अवश्‍य यूहन्‍ना अछि जकर मूड़ी हम कटबा देने छलिऐक—ओ फेर जीबि उठल अछि!” यूहन्‍ना हेरोद द्वारा कोना मरबाओल गेल छलाह से एहि प्रकारेँ अछि— 17 राजा हेरोद यूहन्‍ना केँ पकड़बा कऽ बन्‍हबौने आ जहल मे राखि देने छलथिन। ओ अपन स्‍त्री हेरोदियासक कारणेँ एना कयलनि। हेरोदियास, हेरोदक भाय फिलिपुसक स्‍त्री छलीह, मुदा हेरोद अपन भायक स्‍त्री केँ रखने छलाह, 18 और यूहन्‍ना हेरोद केँ कहने छलाह जे, “धर्म-नियमक अनुसार अपन भायक स्‍त्री केँ राखब उचित नहि।” 19 एहि कारणेँ हेरोदियास यूहन्‍ना सँ दुश्‍मनी रखने छलीह और हुनका मरबा देबऽ चाहैत छलीह। मुदा ओ ई काज नहि करबा सकलीह 20 किएक तँ राजा हेरोद यूहन्‍ना केँ धार्मिक और नीक व्‍यक्‍ति बुझि कऽ हुनकर डर मानैत छलथिन और तेँ जहल मे राखि कऽ सुरक्षित रखलथिन। जखन कखनो हुनकर बात सुनैत छलाह तखन ओ घबड़ा जाइत छलाह, मुदा तैयो हुनकर बात सुनब ओ बहुत पसन्‍द करैत छलाह। 21 तखन एक दिन हेरोदियास केँ मौका भेटिए गेलनि। राजा हेरोद अपन जन्‍म दिनक अवसर पर मन्‍त्री सभ, सेनापति सभ और गलील प्रदेशक प्रतिष्‍ठित व्‍यक्‍ति सभ केँ भोजक निमन्‍त्रण देलथिन। 22 ओहि भोज मे हेरोदियासक बेटी भीतर आबि नचलनि जाहि सँ हेरोद और हुनकर आमन्‍त्रित लोक सभ बहुत प्रसन्‍न भेलाह। राजा लड़की केँ कहलथिन, “तोँ जे किछु चाहैत छह से हमरा सँ माँगह, हम तोरा देबह।” 23 ओ लड़की केँ सपत खा कऽ वचन देलथिन जे, “जे किछु तोँ मँगबह से तोरा हम देबह, जँ तोँ हमर आधा राज्‍यो मँगबह तँ हम तोरा देबह।” 24 लड़की निकलि कऽ अपन माय सँ पुछलक जे, “कहू! हम की माँगू?” ओकर माय कहलथिन जे, “बपतिस्‍मा देबऽ वला यूहन्‍नाक मूड़ी माँग!” 25 ओ तुरत भीतर राजा लग झटकारि कऽ आयल और हुनका अपन माँग सुनौलकनि, “हम चाहैत छी जे अहाँ हमरा बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍नाक मूड़ी एखने थारी मे अनबा दिअ!” 26 राजा बहुत दुखी भेलाह। मुदा अपन सपतक कारणेँ और उपस्‍थित आमन्‍त्रित सभक कारणेँ ओ ओकर माँग अस्‍वीकार नहि करऽ चाहैत छलाह। 27 ओ तुरत एकटा जल्‍लाद सिपाही केँ बजा कऽ आज्ञा दऽ कऽ पठौलथिन जे, “यूहन्‍नाक मूड़ी काटि कऽ आनि दैह।” सिपाही जहल मे जा कऽ यूहन्‍नाक मूड़ी काटि 28 थारी मे नेने आयल आ लड़की केँ देलक और लड़की अपन माय केँ देलकैक। 29 जखन यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ ई सुनलनि तखन ओ सभ आबि हुनकर लास लऽ गेलनि और कबर मे राखि देलनि। 30 पठाओल गेल दूत सभ यीशु लग फिरि कऽ अयला पर, जे काज ओ सभ कयने छलाह और जे शिक्षा देने छलाह, से सभ बात यीशु केँ कहि सुनौलथिन। 31 हुनका सभ लग ततेक लोक अबैत-जाइत छल जे हुनका सभ केँ भोजनो करबाक फुरसति नहि भेटैत छलनि। तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आउ! अपना सभ कोनो एकान्‍त स्‍थान मे जा कऽ भीड़ सँ अलग किछु आराम करी।” 32 ओ सभ नाव मे बैसि कऽ एकान्‍त स्‍थानक लेल विदा भऽ गेलाह 33 मुदा बहुत लोक हुनका सभ केँ जाइत देखलकनि और चिन्‍हि गेलनि। लोक सभ, नगर-नगर सँ निकलि हुनका सभक पाछू झीलक कछेरे-कछेर दौड़ल आ हुनका सभ सँ पहिने ओतऽ पहुँचि गेल। 34 यीशु जखन नाव सँ उतरलाह आ लोकक बड़का भीड़ केँ जमा देखलनि तँ हुनका ओहि लोक सभ पर दया आबि गेलनि किएक तँ ओ सभ एहन भेँड़ी जकाँ छल जकर केओ चरबाह नहि होइक। यीशु ओकरा सभ केँ बहुत बात सिखाबऽ लगलथिन। 35 जखन साँझ पड़ऽ लागल तँ हुनकर शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कहलथिन, “ई स्‍थान बस्‍ती सँ दूर अछि और साँझ पड़ऽ वला छैक। 36 लोक सभ केँ एखन जाय दिऔक जाहि सँ लगक गाम-बजार सँ अपना लेल किछु खयबाक वस्‍तु किनि सकत।” 37 मुदा यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहीं सभ एकरा सभ केँ भोजन करबिऔक।” शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन जे, “तकरा लेल तँ दू सय दिनार लगैत। की हम सभ ओतेक खर्च कऽ कऽ रोटी आनि कऽ एकरा सभ केँ खुअबिऔक?” 38 यीशु हुनका सभ केँ जबाब देलथिन जे, “अहाँ सभ जा कऽ देखू जे अहाँ सभ लग कयटा रोटी अछि।” ओ सभ देखि कऽ हुनका कहलथिन जे, “पाँचटा रोटी आ दूटा माछ।” 39 तखन यीशु सभ लोक केँ हरियर घास पर पाँति-पाँति मे बैसयबाक आज्ञा शिष्‍य सभ केँ देलथिन। 40 लोक सभ सय-सय आ पचास-पचासक पाँति मे बैसैत गेल। 41 यीशु ओहि पाँचटा रोटी और दूटा माछ केँ हाथ मे लऽ कऽ, स्‍वर्ग दिस तकैत परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि-तोड़ि, लोक सभ मे परसबाक लेल शिष्‍य सभ केँ देलथिन। तखन ओहि दूटा माछो केँ हुनका सभ केँ लोक सभ मे परसबाक लेल देलथिन। 42 सभ केओ भरि इच्‍छा भोजन कयलक। 43 शिष्‍य सभ जखन रोटी आ माछक उबरल टुकड़ी सभ बिछलनि तँ बारह छिट्टा भेल। 44 भोजन करऽ वला मे मात्र पुरुषक संख्‍या पाँच हजार छल। 45 तकरबाद यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ तुरत नाव पर चढ़ि कऽ अपना सँ पहिने झीलक ओहि पार बेतसैदा नगर चल जयबाक लेल आज्ञा देलथिन आ अपने ओतहि रहि कऽ भीड़क लोक सभ केँ विदा करऽ लगलाह। 46 ओकरा सभ केँ विदा करा कऽ ओ प्रार्थना करऽ लेल पहाड़ पर चल गेलाह। 47 साँझ बितला पर नाव झीलक बीच मे छलैक और यीशु किनार पर असगरे छलाह। 48 ओ देखलनि जे शिष्‍य सभ केँ नाव खेबऽ मे बहुत परिश्रम भऽ रहल छनि, किएक तँ हवा विपरीत दिस सँ बहि रहल छलैक। लगभग रातिक चारिम पहर मे ओ झीलक पानि पर चलैत हुनका सभक दिस गेलाह। यीशु हुनका सभ सँ आगू बढ़ि जाय चाहैत छलाह। 49 शिष्‍य सभ हुनका पानि पर चलैत देखि, हुनका भूत बुझि चिचियाय लगलाह। 50 सभ गोटे हुनका देखि भयभीत भऽ गेलाह। मुदा यीशु हुनका सभ केँ तुरत कहलथिन, “साहस राखू! हम छी! नहि डेराउ!” 51 ओ हुनका सभक संग नाव मे चढ़ि गेलाह और हुनका चढ़िते अन्‍हड़-बिहारि थम्‍हि गेल। शिष्‍य सभ एकदम अवाक भऽ गेलाह 52 किएक तँ ओ सभ रोटी वला घटना सेहो नहि बुझि सकल छलाह—हुनका सभक बुद्धि बन्‍द छलनि। 53 ओ सभ झील केँ पार कऽ कऽ गन्‍नेसरत क्षेत्र मे पहुँचलाह और नाव केँ किनार लगा देलनि। 54 जखन यीशु नाव पर सँ उतरलाह तखन लोक सभ हुनका चिन्‍हि लेलकनि। 55 लोक सभ पूरा क्षेत्र मे जा कऽ रोगी सभ केँ खाट पर लादि जाहि ठाम लोक कहैत छल जे यीशु छथि ओहि ठाम रोगी सभ केँ पहुँचाबऽ लागल। 56 जाहि गाम, शहर, अथवा बस्‍ती मे ओ जाइत छलाह ताहि ठामक लोक रोगी सभ केँ हाट-बजार मे सुता दैत छल। ओ सभ यीशु सँ प्रार्थना करैत छल जे, “अहाँ अपन कपड़ाक खूटो रोगी सभ केँ छुबऽ दिऔक।” जे सभ हुनकर कपड़ा छुलक से सभ स्‍वस्‍थ भऽ गेल।

Mark 7

1 किछु फरिसी आ धर्मशिक्षक लोकनि जे यरूशलेम सँ आयल छलाह यीशु सँ भेँट करऽ लेल अयलाह। 2 ओ लोकनि देखलनि जे हुनकर किछु शिष्‍य सभ बिना हाथ धोने भोजन करैत छथि, जे हुनका लोकनिक अनुसार धर्म-विरोध वला बात छल। 3 सभ यहूदी, ओहू मे खास कऽ फरिसी लोकनि, पुरखा सँ आबि रहल चलन केँ पालन करैत छथि—जाबत तक ओ लोकनि अपन हाथ केँ रीतिक अनुसार धोइत नहि छथि ताबत तक भोजन नहि करैत छथि। 4 जखन बजार सँ अबैत छथि तँ रीतिक अनुसार बिना स्‍नान कयने किछु नहि खाइत छथि। ओहिना पुरखाक आओर बहुत चलन केँ मानैत छथि, जेना बाटी, लोटा और कठौत केँ विशेष प्रकार सँ शुद्ध कयनाइ। 5 तँ फरिसी और धर्मशिक्षक लोकनि यीशु सँ पुछलनि जे, “अहाँक शिष्‍य सभ पुरखाक चलन सभ किएक नहि मानैत अछि? ओ सभ अशुद्ध हाथ सँ किएक भोजन करैत अछि?” 6 ओ उत्तर देलथिन जे, “हे पाखण्‍डी सभ! यशायाह अहाँ सभक बारे मे एकदम ठीक भविष्‍यवाणी कयलनि, जेना धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘ई सभ मुँह सँ हमर आदर करैत अछि, 2 मुदा एकर सभक हृदय हमरा सँ दूर छैक। 7 ई सभ बेकार हमर उपासना करैत अछि। 2 ई सभ जे शिक्षा दैत अछि, से मात्र मनुष्‍यक बनाओल नियम सभ अछि।’ 8 अहाँ लोकनि परमेश्‍वरक आज्ञा केँ अवहेलना करैत छी लेकिन मनुष्‍यक बनाओल रीति-रिवाज केँ पकड़ने रहैत छी।” 9 यीशु आगाँ कहऽ लगलाह जे, “अहाँ सभ अपन चलन चलयबाक लेल कतेक चलाकी सँ परमेश्‍वरक आज्ञा सभक उल्‍लंघन करैत छी! 10 मूसा तँ कहने छलाह जे, ‘अपन माय-बाबूक आदर करह,’ और ‘जे केओ अपन माय-बाबूक निन्‍दा करय तकरा मृत्‍युदण्‍ड देल जाय।’ 11 मुदा अहाँ सभ कहैत छी जे, जँ केओ अपना बाबू वा माय सँ कहैत अछि, ‘जे किछु अहाँ सभ हमरा सँ सहायता प्राप्‍त करितहुँ से आब “कुर्बान” अछि’, अर्थात्‌, परमेश्‍वर केँ अर्पित, 12 आ जँ ओ किछु करहो चाहैत अछि तँ अहाँ सभ ओकरा अपन माय-बाबूक लेल कोनो कर्तव्‍य पूरा नहि करऽ दैत छिऐक। 13 जे चलन अहाँ केँ पुरखा सँ भेटल अछि, तकरा द्वारा अहाँ परमेश्‍वरक वचन केँ निरर्थक ठहरबैत छी। और एतबे नहि—आरो एहन-एहन बहुत काज करैत छी।” 14 तखन यीशु भीड़क लोक केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ गोटे हमर बात सुनू और बुझू! 15 कोनो एहन वस्‍तु नहि होइत छैक जे बाहर सँ मनुष्‍य मे प्रवेश कऽ कऽ ओकरा अशुद्ध बना सकय, बल्‍कि जे मनुष्‍यक मोनक भीतर सँ बहराइत छैक से ओकरा अशुद्ध बनबैत छैक। 16 [जे सुनि सकैत अछि से सुनए!]” 17 बाद मे भीड़ केँ छोड़ि यीशु घर गेलाह। हुनकर शिष्‍य सभ एहि उदाहरणक बारे मे हुनका सँ पुछलथिन। 18 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “की, अहूँ सभ नहि बुझैत छी? की ई बुझऽ मे नहि अबैत अछि जे, जे किछु खाइत काल मनुष्‍य मे प्रवेश करैत अछि से ओकरा अशुद्ध नहि कऽ सकैत अछि? 19 किएक तँ ओ मोन मे नहि प्रवेश करैत अछि, ओ पेट मे जाइत अछि और फेर देह सँ बहरा जाइत अछि।” (ओ ई कहि कऽ सभ भोजन-वस्‍तु केँ शुद्ध ठहरा देलथिन।) 20 ओ आगाँ कहऽ लगलाह, “जे मनुष्‍य मे सँ निकलैत छैक से ओकरा अशुद्ध करैत छैक। 21 किएक तँ मनुष्‍यक भीतर मे सँ, अर्थात्‌ हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, 22 लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता। 23 ई सभ बात मनुष्‍यक भीतर मे सँ निकलैत अछि और ओकरा अशुद्ध करैत अछि।” 24 ओतऽ सँ यीशु सूर आ सीदोन नगरक इलाका मे चल गेलाह। एकटा घर मे जा कऽ ओहिठाम डेरा रखलनि। ओ चाहैत छलाह जे लोक ई नहि बुझए जे ओ कतऽ छथि, लेकिन लोक जल्‍दी सँ बुझि गेलनि जे ओ एहि घर मे छथि। 25 एकटा स्‍त्री जकर छोट बेटी दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित छल हुनका विषय मे सुनिते हुनका ओहिठाम जा कऽ हुनका समक्ष मे खसल। 26 ओ स्‍त्री यहूदी जातिक नहि, यूनानी छल। ओकर जन्‍म सीरिया प्रदेशक फीनिकी क्षेत्र मे भेल छलैक। ओ यीशु सँ विनती कयलकनि जे, हमर बेटी मे सँ दुष्‍टात्‍मा केँ निकालू। 27 यीशु ओकरा कहलथिन, “सभ सँ पहिने बच्‍चे सभ केँ इच्‍छापूर्बक खाय दिऔक, किएक तँ बच्‍चा सभक लेल जे रोटी अछि तकरा कुकुरक आगाँ फेकि देब से ठीक बात नहि।” 28 ओ लेकिन उत्तर देलकनि जे, “ठीके कहैत छी, प्रभु, मुदा कुकुरो सभ तँ बच्‍चा सभक टेबुल सँ खसल चुर-चार खाइते अछि।” 29 यीशु ओकरा कहलथिन, “एहन उत्तर दैत छह तँ जा सकैत छह!—दुष्‍टात्‍मा तोरा बेटी मे सँ निकलि गेल छह!” 30 ओ घर जा कऽ अपना बेटी केँ ओछायन पर पड़ल देखलक। दुष्‍टात्‍मा ओकरा मे सँ निकलि गेल छल। 31 तकरबाद यीशु सूर क्षेत्र सँ घूरला पर सीदोन नगर और “दस नगर” क्षेत्र दऽ कऽ गलील झील तक अयलाह। 32 लोक सभ कोनो एक आदमी केँ यीशु लग अनलनि जे बहीर छल और ठीक सँ बाजिओ नहि सकैत छल। ओ सभ यीशु सँ प्रार्थना कयलनि जे ओकरा पर हाथ राखि कऽ ओकरा नीक कऽ देल जाओ। 33 यीशु ओकरा भीड़ सँ अलग लऽ कऽ ओकर कान मे अपन आङुर राखि देलथिन और अपन थूक ओकरा जीह पर लगा देलथिन। 34 स्‍वर्ग दिस ताकि आ जोर सँ साँस लैत ओहि आदमी केँ कहलथिन, “एफफाता,” जकर अर्थ छैक, “खुजि जो!” 35 ओकर कान तुरत खुजि गेलैक। ओकर जीह सेहो ठीक भऽ गेलैक और स्‍पष्‍ट बाजऽ लागल। 36 यीशु एहि घटनाक बारे मे लोक सभ केँ कहबाक लेल ओकरा मना कयलथिन, लेकिन जतेक बेसी ओ मना करैत छलाह, ततेक बेसी एहि घटनाक प्रचार भेलैक। 37 सभ लोक एकदम आश्‍चर्य-चकित भऽ कऽ कहऽ लागल जे, “देखू! सभ काज ओ नीक जकाँ करैत छथि। बहीरो सभ केँ सुनबाक और बौको सभ केँ बजबाक शक्‍ति दैत छथिन!”

Mark 8

1 ओहि काल मे फेर यीशु लग बहुत लोक सभ जमा भेल। ओकरा सभ केँ खयबाक लेल किछु नहि छलैक। तेँ यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ बजा कऽ कहलथिन जे, 2 “एहि लोक सभ पर हमरा दया अबैत अछि, किएक तँ ई सभ तीन दिन सँ हमरा संग अछि आ संग मे खयबाक लेल किछु नहि छैक। 3 हम एकरा सभ केँ भूखल विदा कऽ देबैक तँ रस्‍ता मे ई सभ मुर्छित भऽ जायत किएक तँ एहि मे सँ किछु लोक बहुत दूरो सँ आयल अछि।” 4 शिष्‍य सभ यीशु केँ कहलथिन, “एहन निर्जन क्षेत्र मे एतेक लोकक भोजन कतऽ सँ भेटत?” 5 यीशु हुनका सभ सँ पुछलथिन जे, “अहाँ सभ लग कयटा रोटी अछि?” शिष्‍य सभ उत्तर देलथिन जे, “सातटा।” 6 यीशु लोक सभ केँ जमीन पर बैसबाक लेल आदेश देलनि, और ओ सातो रोटी लऽ कऽ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलथिन। रोटी सभ केँ तोड़ि-तोड़ि कऽ लोक सभ मे बाँटऽ लेल शिष्‍य सभ केँ देलथिन और ओ सभ रोटी बाँटि देलनि। 7 किछु छोटका माछो रहैक। यीशु माछोक लेल धन्‍यवाद दऽ कऽ लोक सभ मे बाँटि देबऽ लेल शिष्‍य सभ केँ देलथिन। 8 सभ केओ भरि पेट भोजन कयलक। भोजनक बाद शिष्‍य सभ उबरल टुकड़ा सभ सात टोकरी मे भरि कऽ जमा कयलनि। 9 ओहि मे भोजन करऽ वलाक संख्‍या करीब चारि हजार लोक छल। 10 ओकरा सभ केँ विदा कऽ कऽ यीशु तुरत शिष्‍य सभक संग नाव मे चढ़ि दलमनूथा क्षेत्र चल गेलाह। 11 हुनका सभ केँ पहुँचला पर फरिसी सभ आबि कऽ यीशु सँ वाद-विवाद करऽ लगलाह, आ हुनका जाँच करबाक लेल स्‍वर्ग सँ एकटा चमत्‍कार वला चिन्‍ह मँगलथिन। 12 यीशु भीतर सँ कुहरि कऽ कहलनि जे, “एहि पीढ़ीक लोक एकटा चिन्‍ह किएक मँगैत अछि! हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे एकरा सभ केँ कोनो चिन्‍ह नहि देखाओल जयतैक!” 13 हुनका सभ केँ छोड़ि कऽ यीशु फेर नाव मे चढ़ि कऽ झीलक ओहि पार चल गेलाह। 14 शिष्‍य सभ रोटी अननाइ बिसरि गेल छलाह; एकेटा रोटी नाव पर संग मे छलनि। 15 यीशु हुनका सभ केँ चेतबैत कहलथिन, “फरिसी सभक और हेरोदक रोटी फुलाबऽ वला खमीर सँ सावधान रहू!” 16 ओ सभ आपस मे विचार करैत बजलाह जे, “अपना सभ रोटी आनब बिसरि गेलहुँ, एही कारणेँ ओ ई बात कहि रहल छथि।” 17 यीशु बुझि गेलथिन जे ओ सभ एना एक-दोसर सँ बात-चीत करैत छथि और हुनका सभ सँ पुछलथिन जे, “अहाँ सभ आपस मे एहि पर बात किएक कऽ रहल छी जे अपना सभ लग रोटी नहि अछि? की एखनो तक नहि देखैत छी? एखनो तक नहि बुझैत छी? बुद्धि मन्‍द भऽ गेल अछि की? 18 की आँखि रहितो नहि देखैत छी, आ कान रहितो नहि सुनैत छी? की मोन नहि अछि?— 19 जखन ओ पाँचटा रोटी हम पाँच हजार लोकक लेल तोड़लहुँ तँ उबरल रोटीक टुकड़ीक कतेक छिट्टा भेल?” ओ सभ जबाब देलथिन जे, “बारहटा।” 20 “और जखन ओहि सातटा रोटी सँ हम चारि हजार आदमी केँ खुऔलहुँ तँ रोटीक टुकड़ी कतेक ढाकी बिछलहुँ?” ओ सभ उत्तर देलथिन जे, “सातटा।” 21 तखन ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “की एखनो तक नहि बुझैत छी?” 22 ओ सभ बेतसैदा नगर अयलाह। लोक सभ यीशु लग एकटा आन्‍हर आदमी केँ आनि कऽ हुनका सँ विनती कयलकनि जे, एकरा छुबि दिऔक। 23 यीशु ओहि आन्‍हर आदमी केँ हाथ पकड़ि कऽ नगर सँ बाहर लऽ गेलथिन। ओकरा आँखि पर थूक लगा देलथिन, और ओकरा पर हाथ राखि कऽ पुछलथिन जे, “की, किछु देखि रहल छह?” 24 ओ आँखि उठा कऽ जबाब देलकनि जे, “हँ! मनुष्‍य सभ केँ देखैत छी—गाछ जकाँ लगैत छैक लेकिन चलि रहल अछि।” 25 तखन यीशु ओकरा आँखि पर फेर हाथ रखलथिन। ओकरा आँखि मे तुरत पूरा इजोत आबि गेलैक और ओ सभ किछु साफ-साफ देखऽ लागल। 26 यीशु ओकरा अपन घर पठा देलथिन और ई आदेश देलथिन जे, “शहर मे नहि जाह।” 27 यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ कैसरिया-फिलिप्‍पीक लग-पासक गाम सभ मे गेलाह। चलिते-चलिते यीशु हुनका सभ सँ पुछलनि जे, “हम के छी, ताहि सम्‍बन्‍ध मे लोक की कहि रहल अछि?” 28 ओ सभ हुनका जबाब देलथिन जे, “केओ-केओ कहैत अछि जे अहाँ बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना छी। केओ कहैत अछि जे एलियाह छी, और किछु लोक कहैत अछि जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ मे सँ एक छी।” 29 तखन यीशु हुनका सभ केँ पुछलनि जे, “और अहाँ सभ? अहाँ सभ की कहैत छी जे हम के छी?” पत्रुस उत्तर देलथिन जे, “अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह छी।” 30 यीशु हुनका सभ केँ दृढ़तापूर्बक आदेश देलथिन जे हमरा बारे मे ई बात ककरो नहि कहिऔक। 31 तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ सिखाबऽ लगलथिन जे, “मनुष्‍य-पुत्र केँ बहुत दुःख भोगऽ पड़तैक। ई आवश्‍यक अछि जे बूढ़-प्रतिष्‍ठित, मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ द्वारा तुच्‍छ ठहराओल जाय, जान सँ मारल जाय, आ तीन दिनक बाद ओ फेर जीबि उठय।” 32 ई बात एकदम स्‍पष्‍ट कहलथिन। एहि पर पत्रुस हुनका कात मे लऽ जा कऽ डाँटऽ लगलनि। 33 मुदा यीशु शिष्‍य सभक दिस घूमि कऽ पत्रुस केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “है शैतान! तोँ हमरा सोझाँ सँ दूर होअह! तोँ परमेश्‍वरक विचार नहि, बल्‍कि मनुष्‍यक विचार मोन मे रखैत छह।” 34 तखन यीशु लोक सभ केँ और शिष्‍य सभ केँ अपना लग बजौलनि और कहलथिन, “जँ केओ हमर शिष्‍य बनऽ चाहैत अछि तँ ओ अपना केँ त्‍यागि, हमरा कारणेँ दुःख उठयबाक आ प्राणो देबाक लेल तैयार रहओ, और हमरा पाछाँ चलओ। 35 कारण, जे केओ अपन जीवन बचाबऽ चाहैत अछि से ओकरा गमाओत। मुदा जे केओ हमरा लेल और शुभ समाचारक लेल अपन जीवन गमबैत अछि से ओकरा बचाओत। 36 जँ कोनो मनुष्‍य सम्‍पूर्ण संसार केँ पाबि लय और अपन आत्‍मा गमा लय तँ ओहि सँ ओकरा की लाभ भेलैक? 37 अथवा मनुष्‍य अपन आत्‍माक बदला मे की दऽ सकत? 38 जँ केओ एहि पापी और विश्‍वासघाती युग मे हमरा और हमर शिक्षा सँ लजाइत अछि तँ ओकरो सँ मनुष्‍य-पुत्र लजायत जखन पिताक महिमा मे स्‍वर्गदूत सभक संग आओत।”

Mark 9

1 यीशु इहो कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एतऽ किछु एहनो लोक सभ ठाढ़ अछि जे जाबत तक परमेश्‍वरक राज्‍य शक्‍तिक संग अबैत नहि देखि लेत ताबत तक नहि मरत।” 2 छओ दिनक बाद यीशु अपना संग पत्रुस, याकूब और यूहन्‍ना केँ लेलनि और एक ऊँच पहाड़ पर एकान्‍त मे गेलाह। हुनका सभक सामने मे यीशुक रूप बदलि गेलनि। 3 हुनकर वस्‍त्र एकदम उज्‍जर भऽ कऽ चमकऽ लगलनि। हुनकर वस्‍त्र एतेक उज्‍जर भऽ गेलनि जे पृथ्‍वीक कोनो धोबिओ ओतेक उज्‍जर नहि कऽ सकैत। 4 तखन शिष्‍य सभक समक्ष मे एलियाह और मूसा प्रगट भेलाह जे यीशु सँ बात करैत छलाह। 5 ई देखि पत्रुस बाजऽ लगलाह जे, “यौ गुरुजी! हमरा सभक लेल ई कतेक नीक बात अछि जे हम सभ एतऽ छी। हम सभ तीनटा मण्‍डप बनायब, एकटा अहाँक लेल, एकटा मूसाक लेल और एकटा एलियाहक लेल।” 6 पत्रुस केँ बुझऽ मे एकदम नहि अयलनि जे हम की बाजू, की नहि बाजू, किएक तँ ओ सभ केओ अति भयभीत भऽ गेल छलाह। 7 तखन एकटा मेघ आबि कऽ हुनका सभ केँ झाँपि देलकनि और मेघ मे सँ आवाज आयल जे, “ई हमर प्रिय पुत्र छथि—हिनका बात पर ध्‍यान दिअ!” 8 एकाएक शिष्‍य सभ चारू कात ताकऽ लगलाह तँ ओ सभ अपना संग यीशु केँ छोड़ि आरो किनको नहि देखलनि। 9 पहाड़ पर सँ उतरैत काल यीशु हुनका सभ केँ आदेश देलथिन जे, “जाबत तक मनुष्‍य-पुत्र मृत्‍यु सँ फेर जीबि कऽ नहि उठत ताबत तक जे बात अहाँ सभ देखलहुँ से ककरो नहि कहिऔक।” 10 ई आदेश ओ सभ मानलनि मुदा आपस मे गप्‍प करैत छलाह जे “मनुष्‍य-पुत्र मृत्‍यु सँ फेर जीबि कऽ उठत”, एहि बातक अर्थ की छलनि। 11 तखन ओ सभ यीशु सँ पुछलथिन जे, “धर्मशिक्षक लोकनि किएक कहैत छथि जे पहिने एलियाह केँ अयनाइ आवश्‍यक अछि?” 12 यीशु उत्तर देलथिन जे, “ई बात एकदम ठीक अछि—पहिने एलियाह अबैत छथि आ सभ चीजक सुधार करैत छथि। लेकिन मनुष्‍य-पुत्रक बारे मे ई किएक लिखल गेल अछि जे हुनका बहुत दुःख उठाबऽ पड़तनि और तुच्‍छ बुझल जयताह? 13 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे एलियाह आबिओ गेलाह आ जहिना हुनका बारे मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि तहिना लोक सभ केँ जे मोन भेलैक, से हुनका संग कयलकनि।” 14 ओ सभ जखन आरो शिष्‍य सभ लग पहुँचलाह तखन देखलनि जे हुनका सभक चारू कात बड़का भीड़ अछि और हुनका सभ सँ धर्मशिक्षक सभ वाद-विवाद कऽ रहल छनि। 15 यीशु केँ देखिते सभ लोक चकित भऽ कऽ हुनका लग दौड़ल और प्रणाम करऽ लगलनि। 16 ओ हुनका सभ सँ पुछलथिन जे, “हुनका सभ सँ की वाद-विवाद कऽ रहल छी?” 17 भीड़ मे सँ एक आदमी हुनका जबाब देलकनि जे, “गुरुजी, हम अपने लग अपना बेटा केँ अनने छी जकरा मे एक दुष्‍टात्‍मा पैसि गेल छैक जे एकरा बौक बना देने छैक। 18 जखने ओ एकरा लागि जाइत छैक तँ एकरा तोड़ि-मड़ोड़ि कऽ खसा दैत छैक, और मुँह सँ गाउज बहराय लगैत छैक। दाँत पिसऽ लगैत अछि और देह टाँट भऽ जाइत छैक। एहि दुष्‍टात्‍मा केँ निकालबाक लेल हम अपनेक शिष्‍य सभ सँ विनती कयलहुँ लेकिन ओ सभ नहि निकालि सकलाह।” 19 यीशु ओकरा सभ केँ उत्तर देलथिन जे, “हे अविश्‍वासी पीढ़ीक लोक सभ! हम तोरा सभक संग कहिया तक रहिअह? कहिया तक तोरा सभ केँ सहैत रहिअह?—लड़का केँ आनह हमरा लग।” 20 लोक सभ ओहि नेना केँ यीशु लग अनलकनि। दुष्‍टात्‍मा यीशु केँ देखिते नेना केँ ममोड़ि देलकैक। लड़का नीचाँ खसि पड़लैक। ओकरा मुँह सँ गाउज निकलऽ लगलैक और ओ ओँघराय लागल। 21 यीशु ओकरा बाबू सँ पुछलथिन जे, “एकरा ई दशा कहिया सँ छैक?” ओ उत्तर देलकनि जे, “बचपने सँ। 22 एकरा नष्‍ट करबाक लेल दुष्‍टात्‍मा कतेक बेर आगि और पानि मे खसौने अछि। मुदा अपने जँ किछु कऽ सकैत छी तँ हमरा सभ पर दया कऽ सहायता करू।” 23 यीशु ओकरा कहलथिन, “कोना कहैत छह जे, ‘अपने जँ कऽ सकैत छी तँ...’? विश्‍वास करऽ वलाक लेल सभ किछु सम्‍भव छैक!” 24 एहि पर लड़काक बाबू तुरत जोर सँ बाजल जे, “हम विश्‍वास करैत छी, हमर अविश्‍वास केँ दूर कऽ दिअ।” 25 जखन यीशु देखलनि जे भीड़ हमरा सभ केँ आब दबा देत तँ ओ दुष्‍टात्‍मा केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “है बौक और बहीर वला आत्‍मा! हम तोरा आज्ञा दैत छिऔ जे एकरा मे सँ निकलि जो और एकरा मे फेर कहियो प्रवेश नहि कर!” 26 दुष्‍टात्‍मा चिचियाइत और लड़का केँ बहुत जोर सँ मड़ोड़ि कऽ ओकरा मे सँ निकलि गेल। लड़का मुरदा जकाँ भऽ गेल। से देखि बहुत लोक कहऽ लागल जे ओ मरि गेल अछि। 27 मुदा यीशु ओकरा हाथ पकड़ि कऽ उठौलथिन और ओ ठाढ़ भऽ गेल। 28 जखन यीशु घर मे असगरे छलाह तखन शिष्‍य सभ हुनका सँ पुछलथिन जे, “हम सभ ओहि दुष्‍टात्‍मा केँ किएक नहि निकालि सकलहुँ?” 29 ओ उत्तर देलनि जे, “एहि प्रकारक दुष्‍टात्‍मा प्रार्थना केँ छोड़ि आरो कोनो दोसर उपाय सँ नहि निकालल जा सकैत अछि।” 30 ओहि ठाम सँ विदा भऽ कऽ ओ सभ गलील प्रदेश होइत आगाँ बढ़लाह। यीशु ई बात गुप्‍त राखऽ चाहैत छलाह 31 कारण ओ अपन शिष्‍य सभ केँ सिखबैत छलाह जे, “मनुष्‍य-पुत्र पकड़बा कऽ लोकक हाथ मे सौंपल जायत, आ ओ सभ ओकरा मारि देतैक। मरलाक तीन दिनक बाद ओ फेर जीबि उठत।” 32 मुदा शिष्‍य सभ ई बात नहि बुझि सकलाह और हुनका सँ एहि सम्‍बन्‍ध मे पुछऽ सँ डेराइत छलाह। 33 ओ सभ कफरनहूम नगर पहुँचलाह। घर मे आबि कऽ यीशु शिष्‍य सभ सँ पुछलथिन जे, “बाट मे अहाँ सभ की तर्क-वितर्क करैत छलहुँ?” 34 ओ सभ चुप रहलाह किएक तँ बाट मे ओ सभ एहि विषय मे वाद-विवाद करैत छलाह जे हमरा सभ मे सभ सँ पैघ के अछि? 35 यीशु बैसि कऽ बारहो शिष्‍य केँ अपना लग बजौलनि आ कहलथिन, “जे केओ पैघ बनऽ चाहैत अछि से अपना केँ छोट बनाबओ और सभक सेवक बनओ।” 36 तखन ओ एक छोट बच्‍चा केँ लऽ कऽ हुनका सभक बीच मे ठाढ़ कऽ देलथिन, और कोरा मे लऽ कऽ शिष्‍य सभ केँ कहलथिन जे, 37 “जे केओ हमरा नाम सँ एहन छोट बच्‍चा केँ स्‍वीकार करैत अछि से हमरे स्‍वीकार करैत अछि, और जे हमरा स्‍वीकार करैत अछि से हमरे नहि, बल्‍कि हुनको स्‍वीकार करैत छनि जे हमरा पठौने छथि।” 38 तखन यूहन्‍ना यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, हम सभ एक आदमी केँ अहाँक नाम लऽ कऽ दुष्‍टात्‍मा निकालैत देखलहुँ और ओकरा मना कयलिऐक किएक तँ ओ हमरा सभक संग अहाँक शिष्‍य नहि अछि।” 39 लेकिन यीशु कहलथिन, “हुनका मना नहि करिऔन कारण, जे हमरा नाम सँ कोनो पैघ काज करताह से जल्‍दी हमरा विरोध मे नहि बजताह। 40 जे अपना सभक विरोध मे नहि अछि से अपना सभक पक्षे मे अछि। 41 हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जे केओ अहाँ केँ एक लोटा पानि एहि लेल पिया दैत अछि जे अहाँ मसीहक आदमी छी, तकरा एकर प्रतिफल अवश्‍य भेटतैक।” 42 “ई बच्‍चा सभ जे हमरा पर विश्‍वास करैत अछि, ताहि मे सँ जँ एकोटा केँ केओ पाप मे फँसाओत, तँ ओहि फँसौनिहारक गरदनि मे जाँतक पाट बान्‍हि कऽ समुद्र मे डुबा देल जाइक, से ओकरा लेल नीक होइत। 43 “अहाँक हाथ जँ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। दूनू हाथक संग नरक मे जायब जतऽ आगि कहियो नहि मिझायत, अहाँक लेल ताहि सँ नीक ई जे लुल्‍ह भऽ कऽ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करब। 45 अहाँक पयर जँ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। दूनू पयरक संग नरक मे फेकि देल जायब, ताहि सँ नीक ई जे नाङड़ भऽ कऽ जीवन मे प्रवेश करब। 47 और अहाँक आँखि जँ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा निकालि दिअ। कनाह भऽ कऽ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करब से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे दूनू आँखिक संग नरक मे फेकि देल जायब, 48 जतऽ मनुष्‍य मे फड़ि गेल कीड़ा नहि मरैत अछि आ अनन्‍त आगि जरैत रहैत अछि। 49 “प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अग्‍नि-परीक्षा द्वारा सिद्ध बनाओल जायत। 50 नून नीक वस्‍तु अछि, मुदा जँ ओकर स्‍वाद समाप्‍त भऽ जाइक तँ अहाँ कोन वस्‍तु सँ ओकरा फेर नूनगर बना सकब? अहाँ सभ अपना मे नूनक गुण राखू और एक-दोसराक संग मेल-मिलाप सँ रहू!”

Mark 10

1 यीशु तखन ओहि ठाम सँ विदा भऽ कऽ यहूदिया प्रदेश मे और यरदन नदीक ओहि पार गेलाह। बहुत बड़का भीड़ फेर हुनका लग अयलनि, तँ ओ अपन आदतक अनुसार ओकरा सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह। 2 किछु फरिसी सभ आबि कऽ हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन जे, “की धर्म-नियमक अनुसार पुरुष केँ अपना स्‍त्री केँ तलाक देनाइ ठीक अछि?” 3 यीशु हुनका सभ केँ पुछलथिन जे, “एहि सम्‍बन्‍ध मे मूसा की आज्ञा देने छथि?” 4 ओ सभ उत्तर देलथिन, “मूसा तलाकनामा लिखि कऽ तलाकक अनुमति देने छथि।” 5 एहि पर यीशु हुनका सभ केँ जबाब देलथिन जे, “अहाँ सभक मोनक कठोरताक कारणेँ मूसा अहाँ सभक लेल ई आज्ञा देने छथि। 6 लेकिन सृष्‍टिक शुरुए सँ परमेश्‍वर मनुष्‍य केँ ‘पुरुष आ स्‍त्री बनौलनि।’ 7 ‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्‍त्रीक संग रहत और दूनू एक शरीर भऽ जायत।’ 8 आब ओ सभ दू नहि अछि—एके भऽ गेल। 9 तेँ जकरा परमेश्‍वर जोड़ि देलथिन तकरा मनुष्‍य अलग नहि करओ।” 10 बाद मे जखन घर मे छलाह तखन शिष्‍य सभ एहि विषय मे यीशु सँ फेर पुछलथिन। 11 ओ उत्तर देलथिन जे, “जे केओ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से ओहि स्‍त्रीक संग परस्‍त्रीगमन करैत अछि। 12 और जे स्‍त्री अपना पति केँ तलाक दऽ कऽ दोसर पुरुष सँ विवाह करैत अछि, सेहो परपुरुषगमन करैत अछि।” 13 तखन लोक सभ यीशु लग अपन बच्‍चा सभ केँ आनऽ लगलनि जे ओ ओकरा सभ पर हाथ राखि आशीर्वाद देथिन। मुदा शिष्‍य सभ ओकरा सभ केँ डँटलनि। 14 ई देखि यीशु बहुत अप्रसन्‍न भऽ गेलाह और शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “बच्‍चा सभ केँ हमरा लग आबऽ दिऔक, ओकरा सभ केँ नहि रोकिऔक, किएक तँ परमेश्‍वरक राज्‍य एहने सभक अछि। 15 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जे बच्‍चा जकाँ परमेश्‍वरक राज्‍य ग्रहण नहि करत से ओहि मे कहियो नहि प्रवेश करत।” 16 तखन बच्‍चा सभ केँ कोरा मे उठा लेलथिन और ओकरा सभ पर हाथ राखि कऽ आशीर्वाद देलथिन। 17 यीशु जखन ओहिठाम सँ विदा भऽ रस्‍ता मे जा रहल छलाह तँ एक आदमी दौड़ि कऽ अयलाह, और हुनका आगाँ मे ठेहुनिया रोपि कऽ यीशु सँ पुछलथिन जे, “यौ उत्तम गुरुजी! अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करबाक लेल हम की करू?” 18 यीशु हुनका कहलथिन, “अहाँ हमरा ‘उत्तम’ किएक कहैत छी? परमेश्‍वर केँ छोड़ि आरो केओ उत्तम नहि अछि। 19 मुदा अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनिते छी—’हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, ककरो नहि ठकह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’ “ 20 ओ उत्तर देलथिन जे, “गुरुजी, एहि सभ आज्ञाक पालन हम बचपने सँ करैत छी।” 21 यीशु हुनका देखि कऽ प्रेम कयलथिन और कहलथिन, “अहाँ मे एकटा बातक कमी अछि—अहाँ जाउ, अपन पूरा सम्‍पत्ति बेचि कऽ ओकरा गरीब सभ मे बाँटि दिअ, अहाँ केँ स्‍वर्ग मे धन भेटत। तकरबाद आउ आ हमरा पाछाँ चलू।” 22 ई बात सुनि कऽ ओहि आदमीक मुँह उतरि गेलनि, आ ओ उदास भऽ कऽ चल गेलाह किएक तँ हुनका बहुत धन-सम्‍पत्ति छलनि। 23 तखन यीशु चारू कात देखि कऽ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “धनिक सभक लेल परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ कतेक कठिन अछि!” 24 शिष्‍य सभ एहि बात सँ अचम्‍भित भऽ गेलाह। यीशु हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हे हमर बेटा सभ! परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ कतेक कठिन अछि! 25 धनिक केँ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ सँ ऊँट केँ सुइक भूर दऽ कऽ निकलनाइ आसान अछि।” 26 ओ सभ आरो चकित भऽ कऽ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह जे, “तखन उद्धार ककर भऽ सकैत छैक?!” 27 यीशु हुनका सभ केँ एकटक देखैत कहलथिन, “मनुष्‍यक लेल तँ ई असम्‍भव अछि, लेकिन परमेश्‍वरक लेल नहि। परमेश्‍वरक लेल सभ किछु सम्‍भव अछि।” 28 पत्रुस हुनका कहलथिन, “देखू! हम सभ तँ सभ किछु त्‍यागि कऽ अहाँक पाछाँ आयल छी।” 29 यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी, प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जे हमरा लेल और शुभ समाचारक लेल घर, भाय, बहिन, माय-बाबू, सन्‍तान वा जमीन-जालक त्‍याग करत 30 तकरा एहि युग मे सय गुना भेटतैक—घर, भाय, बहिन, माय, सन्‍तान, जमीन, मुदा संगे-संगे सहऽ पड़तैक अत्‍याचार, और आबऽ वला युग मे भेटतैक अनन्‍त जीवन। 31 मुदा बहुतो लोक जे एखन आगाँ अछि से पाछाँ भऽ जायत, आ जे एखन पाछाँ अछि से आगाँ भऽ जायत।” 32 यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ यरूशलेम जाय वला रस्‍ता पर बढ़ैत छलाह। यीशु आगू-आगू चलि रहल छलाह। शिष्‍य सभ आश्‍चर्य-चकित छलाह और जे सभ संग मे पाछू-पाछू अबैत छल से सभ भयभीत छल। बारहो शिष्‍य केँ यीशु फेर अलग लऽ जा कऽ हुनका सभ केँ बुझा देलथिन जे हुनका संग केहन घटना सभ होयतनि। ओ हुनका सभ केँ कहलथिन जे, 33 “सुनू, अपना सभ यरूशलेम जा रहल छी। ओहिठाम मनुष्‍य-पुत्र मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभक हाथ मे पकड़ाओल जायत। ओ सभ ओकरा मृत्‍युदण्‍डक जोगरक ठहरा देतैक और गैर-यहूदी सभक हाथ मे सौंपि देतैक। 34 ओ सभ ओकर हँसी उड़ौतैक और ओकरा पर थुकतैक, ओकरा कोड़ा सँ मारतैक और मारि देतैक। मुदा तीन दिनक बाद ओ फेर जीबि उठत।” 35 जबदीक दूनू पुत्र याकूब और यूहन्‍ना यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, हम सभ चाहैत छी जे, हम सभ जे किछु माँगी से अहाँ हमरा सभक लेल कऽ दिअ।” 36 यीशु पुछलथिन जे, “अहाँ सभ की चाहैत छी जे हम कऽ दिअ?” 37 ओ सभ जबाब देलथिन जे, “अहाँ अपन महिमामय राज्‍य मे हमरा सभ मे सँ एक केँ अपना दहिना कात मे और दोसर केँ अपना बामा कात मे बैसबाक अधिकार दिअ।” 38 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ की माँगि रहल छी से अहाँ सभ नहि बुझैत छी। की दुःखक बाटी सँ जे हमरा पिबाक अछि से अहाँ सभ पिबि सकैत छी? वा कष्‍टक बपतिस्‍मा लऽ सकैत छी जे हमरा लेबाक अछि?” 39 ओ सभ उत्तर देलथिन जे, “हँ, कऽ सकैत छी।” तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जे बाटी हमरा पिबाक अछि से तँ अहाँ सभ पीब, और जे बपतिस्‍मा हमरा लेबाक अछि से अहाँ सभ लेब, 40 मुदा किनको अपना दहिना कात वा बामा कात बैसायब, तकर अधिकार हमरा नहि अछि—ई स्‍थान सभ तिनका सभक लेल छनि, जिनका सभक लेल तैयार कयल गेल अछि।” 41 जखन बाँकी दस शिष्‍य एहि बातक बारे मे सुनलनि तखन ओ सभ याकूब और यूहन्‍ना पर खिसिआय लगलाह। 42 एहि पर यीशु शिष्‍य सभ केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ जनैत छी जे एहि संसार मे जे सभ शासन करऽ वला बुझल जाइत छथि से सभ जनता पर हुकुम चलबैत रहैत छथि, और जनता मे जे पैघ लोक सभ छथि से जनता पर अधिकार जमबैत छथि। 43 मुदा अहाँ सभ मे एना नहि होअय। बल्‍कि, जे अहाँ सभ मे पैघ होमऽ चाहय से अहाँ सभक सेवक बनय। 44 और जे केओ अहाँ सभ मे प्रमुख व्‍यक्‍ति होमऽ चाहय से सभक टहलू बनय! 45 किएक तँ मनुष्‍य-पुत्र सेहो एहि लेल नहि आयल अछि जे अपन सेवा कराबय बल्‍कि एहि लेल जे ओ सेवा करय और बहुतो लोकक छुटकाराक मूल्‍य मे अपन प्राण देअय।” 46 तखन ओ सभ यरीहो नगर पहुँचलाह। जखन यीशु और शिष्‍य सभ बड़का भीड़क संग यरीहो सँ निकलैत छलाह तखन रस्‍ताक कात मे तिमाईक पुत्र, बरतिमाई, जे आन्‍हर छल, से भीख मँगैत बैसल छल। 47 जखन ओ सुनलक जे नासरत-निवासी यीशु जा रहल छथि तँ ओ सोर पारि कऽ कहऽ लागल जे, “यौ दाऊदक पुत्र यीशु! हमरा पर दया करू!” 48 ओकरा बहुत लोक डाँटि कऽ चुप रहऽ लेल कहलकैक, मुदा ओ आरो जोर सँ हल्‍ला कऽ कऽ कहऽ लागल जे, “यौ दाऊदक पुत्र! हमरा पर दया करू!” 49 यीशु ठाढ़ भऽ गेलाह आ कहलनि जे, “ओकरा बजाउ!” तखन ओहि आन्‍हर केँ बजा कऽ लोक सभ कहलकैक जे, “निराश नहि हो! उठ! तोरा बजबैत छथुन!” 50 अपन ओढ़ना फेकि कऽ ओ छरपि उठल और यीशु लग आयल। 51 यीशु ओकरा पुछलथिन जे, “तोँ की चाहैत छह, हम तोरा लेल की करिअह?” आन्‍हर बाजल, “गुरुजी, हम देखऽ चाहैत छी!” 52 यीशु ओकरा कहलथिन, “जाह—तोहर विश्‍वास तोरा नीक कऽ देलकह।” ओ तुरत देखऽ लागल और रस्‍ता मे यीशुक पाछाँ चलऽ लागल।

Mark 11

1 यीशु आ हुनकर शिष्‍य सभ जखन यरूशलेम लग पहुँचलाह, अर्थात्‌ जैतून पहाड़ पर बेतफगे और बेतनिया गाम सभ लग, तखन यीशु दूटा शिष्‍य केँ ई कहि कऽ पठौलथिन जे, 2 “सामने मे जे गाम अछि, ताहि मे जाउ। जखने अहाँ सभ गाम मे प्रवेश करब तखन गदहीक एक बच्‍चा बान्‍हल भेटत जाहि पर केओ कहियो नहि चढ़ल अछि। ओकरा खोलि कऽ आनू। 3 जँ केओ पुछत जे ‘एकरा किएक खोलैत छी?’ तँ कहबैक जे, ‘प्रभु केँ एकर आवश्‍यकता छनि और एकरा तुरत फेर लौटा देताह।’” 4 दूनू चल गेलाह, और हुनका सभ केँ सड़कक कात मे एक घरक द्वारि लग बान्‍हल एक गदहीक बच्‍चा भेटलनि। जखने ओ सभ ओकरा खोलऽ लगलाह 5 तँ ओहिठाम ठाढ़ भेल किछु लोक सभ हुनका सभ केँ पुछलकनि जे, “अहाँ सभ की करैत छी? ई गदहा किएक खोलि रहल छी?” 6 ओ सभ वैह उत्तर देलनि जे यीशु कहने छलथिन, और लोक सभ हुनका सभ केँ जाय देलकनि। 7 गदहीक बच्‍चा केँ ओ सभ यीशु लग अनलनि और ओकरा पीठ पर अपन कपड़ा राखि देलनि। यीशु ओहि पर बैसि गेलाह। 8 बहुत लोक रस्‍ता मे अपन चादर ओछा देलक, दोसर लोक खेत मे सँ पात वला ठाढ़ि तोड़ि कऽ सड़क पर ओछौलक। 9 यीशुक आगाँ-पाछाँ चलऽ वला लोकक भीड़ एहि तरहेँ जयजयकार करऽ लागल जे, “जय! जय! धन्‍य छथि ओ जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि! 10 हमरा सभक पुरखा दाऊदक आबऽ वला राज्‍य केँ जय! सर्वोच्‍च स्‍वर्ग मे प्रभुक जयजयकार!” 11 यीशु यरूशलेम पहुँचि कऽ मन्‍दिर मे गेलाह। ओहिठाम चारू दिस नजरि दौड़ा कऽ सभ किछु देखलनि मुदा साँझ पड़ि जयबाक कारणेँ ओतऽ सँ बाहर गेलाह आ बारहो शिष्‍यक संग बेतनिया चल गेलाह। 12 दोसर दिन जखन ओ सभ बेतनिया सँ अबैत छलाह तखन यीशु केँ भूख लागल छलनि। 13 दूर सँ ओ हरियर पात सँ भरल एक अंजीरक गाछ देखि कऽ गाछ लग गेलाह जे शायद ओहि पर किछु फल भेटय। मुदा ओतऽ पहुँचला पर पात छोड़ि आरो किछु नहि भेटलनि, किएक तँ अंजीरक फलक समय नहि छल। 14 यीशु ओहि गाछ केँ कहलथिन, “आइ सँ तोहर फल केओ कहियो नहि खयतौ!” शिष्‍य सभ हुनका ई कहैत सुनलनि। 15 तखन ओ सभ यरूशलेम पहुँचलाह। मन्‍दिर मे जा कऽ यीशु बेचऽ वला और किनऽ वला सभ केँ ओतऽ सँ बाहर भगाबऽ लगलाह। ओ पाइ भजौनिहार सभक टेबुल आ परबा-पेउरकी बेचनिहार सभक पीढ़ी-बैसकी सभ केँ उनटा-पुनटा देलथिन। 16 ककरो मन्‍दिर दऽ कऽ कोनो सामान लऽ कऽ नहि जाय देलथिन। 17 लोक केँ शिक्षा देबऽ लगलथिन जे, “की धर्मशास्‍त्र मे नहि लिखल अछि जे, ‘हमर घर सभ जातिक लेल प्रार्थनाक घर कहाओत’ ? मुदा तोँ सभ एकरा ‘चोर-डाकूक अड्डा’ बना देने छह।” 18 मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ ई बात सुनि कऽ यीशु केँ कोना मारल जाय तकर उपाय सोचऽ लगलाह, एहि द्वारे जे हुनका सँ डेराइत छलाह किएक तँ पूरा जनता हुनकर शिक्षाक कारणेँ आश्‍चर्यित छल। 19 सूर्यास्‍‍तक बाद यीशु और शिष्‍य सभ शहर सँ बाहर चल गेलाह। 20 प्रात भेने रस्‍ता मे जाइत-जाइत ओ सभ देखलनि जे अंजीरक गाछ जड़ि सँ सुखि गेल अछि। 21 पत्रुस पछिला दिनक घटनाक स्‍मरण करैत यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, देखू! ओहि अंजीरक गाछ जकरा सराप देने छलहुँ से सुखि गेल अछि!” 22 ओ हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन जे, “परमेश्‍वर पर विश्‍वास राखू! 23 हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जँ केओ एहि पहाड़ केँ कहत जे ‘एतऽ सँ हट आ समुद्र मे जो,’ और मोन मे सन्‍देह नहि करत, बल्‍कि एकर विश्‍वास करत जे हम जे कहि रहल छी से भऽ जायत, तँ ओकरा लेल से भइए जायत। 24 एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, अहाँ प्रार्थना मे जे किछु माँगब, विश्‍वास करू जे ओ भेटि गेल, और अहाँ केँ भेटिए जायत। 25 और जखन अहाँ प्रार्थनाक लेल ठाढ़ होयब, अहाँक हृदय मे जँ ककरो प्रति विरोध होअय तँ ओकरा क्षमा करू जाहि सँ अहाँक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि सेहो अहाँक अपराध क्षमा करताह।” 27 ओ सभ फेर यरूशलेम पहुँचलाह। यीशु केँ मन्‍दिर मे टहलैत काल मुख्‍यपुरोहित, धर्मशिक्षक लोकनि और बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ हुनका लग अयलनि। 28 ई सभ यीशु सँ पुछलथिन जे, “अहाँ कोन अधिकार सँ ई सभ बात कऽ रहल छी? अहाँ केँ ई काज करबाक के अधिकार देलनि?” 29 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन जे, “हमहूँ अहाँ सभ सँ एकटा बात पुछैत छी। अहाँ सभ उत्तर देब तँ हमहूँ अहाँ सभ केँ कहब जे हम कोन अधिकार सँ ई सभ काज कऽ रहल छी। 30 यूहन्‍ना केँ बपतिस्‍मा देबाक अधिकार परमेश्‍वर सँ भेटल छलनि वा मनुष्‍य सँ? बाजू!” 31 ई सुनि ओ सभ अपना मे तर्क-वितर्क करऽ लगलाह जे, “जँ अपना सभ कहबैक जे, परमेश्‍वर सँ, तँ ओ पुछत जे, ‘तखन हुनकर बातक विश्‍वास किएक नहि कयलहुँ?’ 32 मुदा जँ कहबैक जे, ‘मनुष्‍य सँ, तँ...’” ओ सभ जनता सँ डेराइत छलाह किएक तँ सभ लोक यूहन्‍ना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता मानैत छल। 33 तेँ ओ सभ यीशु केँ उत्तर देलथिन जे, “हम सभ नहि जनैत छी।” एहि पर यीशु कहलथिन, “तँ हमहूँ अहाँ सभ केँ नहि कहब जे, हम कोन अधिकार सँ ई काज करैत छी!”

Mark 12

1 तखन ओ हुनका सभ केँ दृष्‍टान्‍त द्वारा शिक्षा देबऽ लगलाह, “एक आदमी एक अंगूरक बगान लगौलनि और चारू कात सँ ओकरा घेरि देलनि। अंगूरक रस जमा करबाक लेल ओ एक रसकुण्‍ड बनौलनि आ रखबारीक लेल मचान बनौलनि। तकरबाद किसान सभ केँ बटाइ पर दऽ कऽ परदेश चल गेलाह। 2 फलक समय अयला पर ओ अपन हिस्‍सा लेबाक लेल एक नोकर केँ बटाइदार सभक ओहिठाम पठौलथिन। 3 मुदा ओ सभ ओकरा पकड़ि कऽ मारि-पिटि कऽ खाली हाथ लौटा देलकैक। 4 तखन मालिक फेर दोसर नोकर केँ ओकरा सभक ओहिठाम पठौलथिन, मुदा ओ सभ ओकर कपार फोड़ि देलकैक और ओकर अपमान कयलकैक। 5 मालिक तेसरो केँ पठौलथिन और ओकरा ओ सभ मारि देलकैक। तहिना आरो बहुत नोकर केँ ओ सभ पिटलकैक वा मारि देलकैक। 6 आब मालिक केँ एकेटा आदमी रहि गेलनि—हुनकर अपन प्रिय बेटा। अन्‍त मे ओ ओकरो, ई सोचि कऽ पठौलथिन जे, ‘हमरा बेटा केँ ओ सभ अवश्‍य आदर करत।’ 7 मुदा बटाइदार सभ एक-दोसर केँ कहलक जे, ‘ई अपन बापक उत्तराधिकारी अछि। चलू एकरा मारि दिऐक, तखन ई सम्‍पत्ति अपने सभक भऽ जायत!’ 8 एना सोचि ओ सभ हुनका पकड़ि कऽ मारि देलकनि और हुनकर लास बगान सँ बाहर फेकि देलकनि।” 9 यीशु आगाँ कहलथिन, “बगानक मालिक आब की करताह? ओ आबि कऽ ओहि बटाइदार सभक सर्वनाश करथिन और बगान दोसर बटाइदार सभ केँ दऽ देथिन। 10 की अहाँ सभ धर्मशास्‍त्र मे ई नहि पढ़ने छी?— ‘जाहि पाथर केँ राजमिस्‍तिरी सभ बेकार बुझि कऽ फेकि देलक, वैह पाथर मकानक प्रमुख पाथर भऽ गेल। 11 ई काज प्रभु-परमेश्‍वर कयलनि, और ई हमरा सभक नजरि मे अद्‌भुत बात अछि!’” 12 एहि पर ओ सभ हुनका पकड़ऽ चाहैत छलाह किएक तँ ओ सभ बुझि गेलाह जे ई हमरे सभक बारे मे ई कथा कहलक अछि। मुदा जनता सँ डेरयबाक कारणेँ ओ सभ हुनका छोड़ि कऽ चल गेलाह। 13 बाद मे ओ सभ किछु फरिसी और हेरोद-दलक किछु लोक केँ यीशु लग पठा देलनि जे हुनका अपन कहल बातक जाल मे फँसाबय। 14 ओ सभ आबि कऽ हुनका कहलकनि जे, “गुरुजी, हम सभ जनैत छी जे अपने सत्‍यवादी छी, आ केओ की सोचैत अछि, तकर अपने केँ कोनो चिन्‍ता नहि, कारण, अपने मुँह-देखी बात नहि करैत छी। अपने सत्‍यक अनुसार परमेश्‍वरक बाटक शिक्षा दैत छी। आब हमरा सभ केँ एकटा बात कहल जाओ—रोमी सम्राट-कैसर केँ कर देब धर्म-नियमक अनुसार उचित अछि वा नहि? अपना सभ केँ कर देबाक चाही वा नहि देबाक चाही?” 15 यीशु ओकरा सभक कपट बुझि कऽ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ हमरा किएक फँसाबऽ चाहैत छी? हमरा एकटा सिक्‍का दिअ, हम देखब।” 16 ओ सभ एक दिनारक सिक्‍का लऽ आयल। तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “ई किनकर चित्र छनि? आ एहि पर किनकर नाम लिखल छनि?” ओ सभ उत्तर देलकनि, “सम्राट-कैसरक।” 17 तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जे सम्राटक छनि से सम्राट केँ दिऔन, आ जे परमेश्‍वरक छनि से परमेश्‍वर केँ दिऔन।” एहि पर ओ सभ एकदम अवाक रहि गेल। 18 तखन किछु सदुकी पंथक लोक, जे सभ एहि बात केँ नहि मानैत अछि जे मृत्‍यु मे सँ मनुष्‍य फेर जिआओल जायत, से सभ एकटा प्रश्‍न लऽ कऽ यीशु लग आयल। 19 ओ सभ कहलकनि, “गुरुजी, मूसा हमरा सभक लेल लिखलनि जे, जँ ककरो भाय निःसन्‍तान मरि जाइक आ ओकर स्‍त्री जीविते होइक तँ ओकरा ओहि स्‍त्री सँ विवाह कऽ अपना भायक लेल सन्‍तान उत्‍पन्‍न करबाक चाही। 20 एक परिवार मे सात भाय छल। जेठ भाय विवाह कयलक और निःसन्‍तान मरि गेल। 21 तँ दोसर भाय ओहि स्‍त्री सँ विवाह कयलक लेकिन ओहो निःसन्‍तान मरि गेल। तेसरो भाय केँ एहिना भेलैक। 22 तहिना सातो भाय ओहि स्‍त्री सँ विवाह कऽ कऽ निःसन्‍तान मरि गेल, और अन्‍त मे स्‍त्रिओ मरि गेल। 23 आब कहल जाओ, ओहि समय मे जहिया मुइल सभ केँ जिआओल जयतैक, तँ ओ स्‍त्री एहि भाय सभ मे सँ ककर स्‍त्री होयतैक? ओकरा सँ तँ सातो विवाह कयने छलैक।” 24 यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ ने धर्मशास्‍त्र आ ने परमेश्‍वरक सामर्थ्‍य केँ जनैत छी। तेँ अहाँ सभ केँ एहि तरहेँ धोखा भऽ रहल अछि। 25 किएक तँ, जखन लोक सभ मृत्‍यु सँ जीबि जायत तखन ने ओ सभ विवाह करत आ ने विवाह मे देल जायत, बल्‍कि ओ सभ स्‍वर्गदूत सभ जकाँ होयत। 26 तखन मुइल सभ केँ जिआओल जयबाक जे बात अछि, ताहि सम्‍बन्‍ध मे की अहाँ सभ कहियो मूसाक पुस्‍तक मे नहि पढ़ने छी—जाहि ठाम जरैत झाड़ीक वर्णन अछि, कोना परमेश्‍वर ⌞एहि पूर्वज लोकनिक मृत्‍युक बादो⌟ मूसा केँ कहलथिन जे, ‘हम अब्राहमक परमेश्‍वर, इसहाकक परमेश्‍वर और याकूबक परमेश्‍वर छी।’ ? 27 ओ मुइल सभक नहि, जीवित सभक परमेश्‍वर छथि! अहाँ सभ एकदम गलत बुझैत छी!” 28 एक धर्मशिक्षक ई वाद-विवाद सुनि कऽ देखलनि जे यीशु सदूकी सभ केँ बहुत नीक जबाब देने छथिन, तँ ओ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?” 29 यीशु उत्तर देलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा यैह अछि—’हे इस्राएल, सुनह, प्रभु, अपना सभक परमेश्‍वर, सैह एकमात्र प्रभु छथि। 30 तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ और अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ प्रेम करह।’ 31 और दोसर पैघ आज्ञा यैह अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ एहि सँ पैघ आरो कोनो आज्ञा नहि अछि।” 32 धर्मशिक्षक हुनका कहलथिन, “गुरुजी, कतेक नीक जबाब देलहुँ! अहाँ ठीके कहलहुँ जे एकेटा परमेश्‍वर छथि और हुनका छोड़ि आरो केओ नहि छथि। 33 हुनका अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ और अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ प्रेम कयनाइ, और अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम कयनाइ सभ प्रकारक पशु-बलिदान, अग्‍नि-बलिदान और चढ़ौना सँ पैघ अछि।” 34 यीशु ई देखि कऽ जे ओ बहुत बुद्धिपूर्बक उत्तर देलनि ताहि पर हुनका कहलथिन, “अहाँ परमेश्‍वरक राज्‍य सँ दूर नहि छी।” तकरबाद ककरो हुनका आरो प्रश्‍न पुछबाक साहस नहि भेलैक। 35 बाद मे यीशु मन्‍दिर मे शिक्षा दैत पुछलथिन जे, “धर्मशिक्षक सभक कहबाक अर्थ की अछि जखन ओ सभ कहैत छथि जे ‘उद्धारकर्ता-मसीह’ दाऊदक पुत्र छथि? 36 दाऊद अपने, पवित्र आत्‍माक प्रेरणा सँ बजलाह, ‘प्रभु-परमेश्‍वर हमरा प्रभु केँ कहलथिन, अहाँ हमर दहिना कात बैसू और हम अहाँक शत्रु सभ केँ अहाँक पयरक तर मे कऽ देब।’ 37 दाऊद अपने, ‘उद्धारकर्ता-मसीह’ केँ ‘प्रभु’ कहैत छथिन, तँ ओ फेर हुनकर पुत्र कोना भेलाह?” भीड़क लोक सभ बहुत आनन्‍दक संग हुनकर बात सुनि रहल छलनि। 38 यीशु आगाँ शिक्षा देबऽ लगलाह जे, “धर्मशिक्षक सभ सँ सावधान रहू। धर्मगुरु वला लम्‍बा-लम्‍बा कपड़ा पहिरि कऽ घुमब, और बजार मे लोक सभ हुनका सभ केँ प्रणाम-पात करनि से बहुत नीक लगैत छनि। 39 ओ सभ सभाघर सभ मे प्रमुख आसन पर बैसब और भोज-काज मे सम्‍मानित स्‍थान भेटय से पसन्‍द करैत छथि। 40 विधवा सभक घर-आङन हड़पि लैत छथि, और लोक सभ केँ देखयबाक लेल लम्‍बा-लम्‍बा प्रार्थना करैत छथि। हुनका सभ केँ बेसी दण्‍ड देल जयतनि।” 41 तखन यीशु मन्‍दिर मे दान-पात्र लग बैसि कऽ लोक सभ केँ ओहि मे दान दैत देखलनि। बहुत लोक जे सभ धनिक छल से सभ ओहि मे बहुत किछु रखैत छल। 42 तखन एकटा गरीब विधवा आबि कऽ तामक दूटा पाइ, जकर मूल्‍य एको पैसा सँ कम छलैक, से दान-पात्र मे देलक। 43 यीशु शिष्‍य सभ केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, ई गरीब विधवा ओहि सभ लोक सँ बेसी दान चढ़ौलक, 44 किएक तँ ओ सभ धनिक भऽ कऽ अपन फाजिल धन मे सँ दान चढ़ौलक मुदा ई गरीब भऽ कऽ अपना लेल किछु नहि राखि अपन पूरा जीविके चढ़ा देलक।”

Mark 13

1 मन्‍दिर सँ बहराइत काल यीशु केँ हुनकर एकटा शिष्‍य कहलथिन, “गुरुजी, देखू! एहि मन्‍दिरक मकान सभ कतेकटा अछि! और एहि मे कतेक सुन्‍दर-सुन्‍दर पाथर लागल अछि!” 2 यीशु हुनका कहलथिन, “ई जे बड़का मकान सभ देखैत छिऐक—एतऽ एकोटा पाथर एक-दोसर पर नहि रहत, सभ ढाहल जायत।” 3 तखन मन्‍दिरक सामने मे जैतून पहाड़ पर यीशु जखन बैसल छलाह, तँ पत्रुस, याकूब, यूहन्‍ना और अन्‍द्रेयास एकान्‍त मे हुनका सँ पुछलथिन जे, 4 “हमरा सभ केँ कहू—ई बात सभ कहिया होयत? और कोन चिन्‍ह होयतैक जाहि सँ बुझि सकी जे ई बात सभ आब होयत?” 5 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “होसियार रहू जे अहाँ सभ केँ केओ बहकाबऽ नहि पाबय। 6 बहुतो लोक हमर नाम लऽ कऽ आओत और कहत जे ‘हम वैह छी!’, और बहुतो लोक केँ बहका देत। 7 जखन अहाँ सभ लड़ाइक समाचार और लड़ाइक हल्‍ला सभ सुनब तखन घबड़ायब नहि, ई सभ होयब आवश्‍यक अछि, मुदा संसारक अन्‍त तहिओ नहि होयत। 8 एक देश दोसर देश सँ लड़ाइ करत, और एक राज्‍य दोसर राज्‍य सँ। बहुतो ठाम मे अकाल पड़त आ भूकम्‍‍प होयत। ई सभ बात तँ कष्‍टक शुरुआते होयत! 9 “मुदा अहाँ सभ सावधान रहू! किएक तँ लोक सभ अहाँ सभ केँ पकड़ि कऽ दण्‍ड लगबयबाक लेल पंच सभक समक्ष लऽ जायत आ सभाघर सभ मे अहाँ सभ केँ कोड़ा सँ पिटबाओत। हमरा कारणेँ अहाँ सभ राज्‍यपाल सभ और राजा सभक समक्ष ठाढ़ कयल जायब, और हुनका सभ केँ अहाँ सभ हमरा बारे मे गवाही देब। 10 अन्‍तिम समय सँ पहिने परमेश्‍वरक शुभ समाचारक प्रचार सभ जाति मे होयब आवश्‍यक अछि। 11 और जखन लोक अहाँ सभ केँ पकड़ि कऽ दण्‍ड लगबयबाक लेल कचहरी मे लऽ जायत तँ ओहि सँ पहिने एकर चिन्‍ता नहि करब जे हम की कहब। बाजऽ वला अहाँ अपने नहि होयब, पवित्र आत्‍मा होयताह, तेँ ओहि समय मे अहाँ केँ मोन मे जे बात देल जाय वैह बात बाजब। 12 “भाय भाय केँ, और बाबू अपना बेटा केँ मृत्‍युदण्‍डक लेल पकड़बाओत, और बेटा-बेटी अपन माय-बाबूक विरोधी भऽ कऽ मरबा देत। 13 अहाँ सभ सँ सभ केओ एहि लेल घृणा करत जे अहाँ सभ हमर लोक छी। मुदा जे व्‍यक्‍ति अन्‍त तक स्‍थिर रहत से उद्धार पाओत। 14 “मुदा जखन अहाँ सभ ‘विनाश करऽ वला घृणित वस्‍तु’ केँ ओहिठाम ठाढ़ देखब जाहि ठाम नहि होयबाक चाही—पढ़ऽ वला ई बात ध्‍यान दऽ कऽ बुझू!—तखन जे सभ यहूदिया प्रदेश मे होअय से सभ पहाड़ पर भागि जाय। 15 जे छत पर होअय से उतरि कऽ कोनो सामान लेबाक लेल घर मे नहि जाओ—ओहो भागि जाओ। 16 और जे खेत मे होअय से अपन ओढ़ना लेबाक लेल घूमि कऽ नहि आबओ। 17 ओहि समय मे जे स्‍त्रीगण सभ गर्भवती होयत वा जकरा दूधपीबा बच्‍चा होयतैक, तकरा सभ केँ कतेक कष्‍ट होयतैक! 18 प्रार्थना करू जे ई सभ बात जाड़क समय मे नहि होअय! 19 कारण ओहि समय मे एहन कष्‍ट होयत जे शुरू सँ, जखन परमेश्‍वर पृथ्‍वीक सृष्‍टि कयलनि, आइ तक कहियो नहि भेल अछि, आ ने फेर कहियो होयत। 20 परमेश्‍वर ओहि समय केँ जँ घटा नहि देने रहितथि, तँ केओ नहि बँचैत। मुदा परमेश्‍वर अपन चुनल लोकक कारणेँ ओहि समय केँ घटा देलथिन। 21 “ओहि समय मे जँ केओ अहाँ सभ केँ कहत जे, ‘देखू! मसीह एतऽ छथि’, वा ‘ओतऽ छथि’ तँ ओहि बात पर विश्‍वास नहि करब। 22 कारण, ओहि समय मे झुट्ठा मसीह आ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहऽ वला सभ प्रगट होयत, और एहन आश्‍चर्यजनक बात आ चमत्‍कार सभ देखाओत जे, जँ सम्‍भव रहैत, तँ परमेश्‍वरक चुनल लोक सभ केँ सेहो बहका दैत। 23 मुदा अहाँ सभ होसियार रहू! हम अहाँ सभ केँ सभ बात पहिनहि कहि देलहुँ। 24 “मुदा ओहि दिन सभ मे, एहि संकटक बाद, ‘सूर्य अन्‍हार भऽ जायत, चन्‍द्रमा इजोत नहि देत। 25 आकाश सँ तारा सभ खसत, और आकाशक शक्‍ति सभ हिलाओल जायत।’ 26 तखन लोक सभ मनुष्‍य-पुत्र केँ अपार शक्‍ति और महिमाक संग मेघ मे अबैत देखत। 27 तखन पृथ्‍वी सँ आकाश तक चारू दिस सँ ओ अपन चुनल लोक सभ केँ जमा करबाक लेल अपन स्‍वर्गदूत सभ केँ पठौताह। 28 “आब अंजीरक गाछ सँ एकटा बात सिखू—जखन ओकर ठाढ़ि कोमल होमऽ लगैत छैक और ओहि मे नव पात निकलऽ लगैत छैक तखन अहाँ सभ बुझि जाइत छी जे गर्मीक समय आबि रहल अछि। 29 तहिना जखन अहाँ सभ ई बात सभ होइत देखब तखन बुझि लिअ जे समय लगचिआ गेल, हँ, ई बुझू जे ओ घरक मुँह पर आबि गेल अछि। 30 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एहि पीढ़ी केँ समाप्‍त होमऽ सँ पहिने ई सभ घटना निश्‍चित घटत। 31 आकाश और पृथ्‍वी समाप्‍त भऽ जायत, मुदा हमर वचन अनन्‍त काल तक रहत। 32 “मुदा एहि घटना सभक दिन वा समय केओ नहि जनैत अछि, स्‍वर्गदूतो सभ नहि आ पुत्रो नहि—मात्र पिता जनैत छथि। 33 होसियार रहू! बाट तकैत रहू आ प्रार्थना करैत रहू! अहाँ सभ तँ नहि जनैत छी जे ओ समय कहिया होयत। 34 ई बात एहन अछि जेना एक आदमी यात्रा पर परदेश जाय लगलाह। जाय सँ पहिने ओ अपन घरक लेल नोकर सभ केँ अपन-अपन जबाबदेही देलनि, और चौकीदार केँ पहरा देबाक लेल आज्ञा देलनि। 35 तहिना अहाँ सभ बाट तकैत रहू, किएक तँ अहाँ नहि जनैत छी जे घरक मालिक कखन फिरि औताह—साँझ, आधा राति, भोरहरिया, वा भिनसर मे। 36 एना नहि होअय जे ओ अचानक आबि कऽ अहाँ सभ केँ सुतल पौताह। 37 अहाँ सभ केँ हम जे कहैत छी से सभ केँ कहैत छी—होसियार रहू!”

Mark 14

1 फसह-पाबनि और “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि” होमऽ मे दू दिन बाँकी छल। मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ यीशु केँ कोन तरहेँ छल सँ पकड़ब और मारि देब, तकर उपाय तकैत छलाह। 2 मुदा ओ सभ कहलनि जे, “पाबनिक समय मे नहि। एना नहि होअय जे जनता उपद्रव करय।” 3 यीशु बेतनिया गाम मे सिमोन नामक एक आदमी, जिनका पहिने कुष्‍ठ-रोग भेल छलनि, तिनका घर मे भोजन करैत छलाह। तखने एकटा स्‍त्रीगण संगमरमरक बर्तन मे जटामासी नामक बहुत दामी तेल अनलनि। बर्तन फोड़ि कऽ तेल हुनका माथ पर ढारि देलथिन। 4 लेकिन ओहिठाम बैसल किछु लोक खिसिआ कऽ एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई दामी तेल किएक बरबाद कयल गेल? 5 ई तँ एक वर्षक मजदूरी सँ बेसी मे बेचि कऽ गरीब सभ मे बाँटल जा सकैत छल!” और ओहि स्‍त्री केँ डाँटऽ लागल। 6 मुदा यीशु कहलथिन, “हिनका छोड़ि दिऔन! हिनका किएक तंग करैत छिऐन? हमरा लेल बहुत बढ़ियाँ काज कयलनि। 7 गरीब सभ तँ अहाँ सभक संग सभ दिन रहत, और अहाँ सभ केँ जहिया मोन होयत तहिया ओकरा सभक सहायता कऽ सकब। मुदा हम अहाँ सभक संग सभ दिन नहि रहब। 8 ई जे किछु कऽ सकैत छलीह से कयलनि। ई पहिनहि सँ हमरा देह मे तेल लगा कऽ हम जे कबर मे राखल जायब तकर तैयारी कयलनि। 9 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, संसार भरि मे जतऽ कतौ हमर शुभ समाचारक प्रचार कयल जायत, ततऽ एहि स्‍त्रीगणक स्‍मरण मे हिनकर एहि काजक चर्चा सेहो कयल जायत।” 10 तखन यहूदा इस्‍करियोती, जे बारह शिष्‍य मे सँ एक छल, यीशु केँ मुख्‍यपुरोहित सभक हाथ मे पकड़यबाक योजना बनयबाक लेल हुनका सभक ओहिठाम गेल। 11 यहूदाक बात सुनि कऽ मुख्‍यपुरोहित सभ बहुत खुश भऽ गेलाह और ओकरा ई काज करबाक लेल पैसा देबाक वचन देलथिन। तेँ ओ यीशु केँ पकड़बयबाक अनुकूल अवसरक ताक मे रहऽ लागल। 12 बिनु खमीरक रोटी वला पाबनिक पहिल दिन, जाहि दिन मे फसह-भोजक भेँड़ा बलिदान करबाक प्रथा छल, शिष्‍य सभ यीशु सँ पुछलथिन जे, “फसह-पाबनिक भोजक व्‍यवस्‍था अहाँक लेल हम सभ कतऽ ठीक करू?” 13 यीशु दूटा शिष्‍य सभ केँ ई कहि कऽ पठौलनि जे, “शहर मे जाउ। ओतऽ घैल मे पानि लऽ जाइत एक पुरुष अहाँ सभ केँ भेटत, ओकरा पाछाँ-पाछाँ जाउ। 14 जाहि घर मे ओ प्रवेश करत ओहि घरक मालिक केँ कहबनि जे, ‘गुरुजी पुछैत छथि जे हमर अतिथि-घर कतऽ अछि जतऽ हम अपना शिष्‍य सभक संग फसह-भोज खायब?’ 15 ओ अहाँ सभ केँ उपरका तल्‍ला पर एक नमहर कोठली देखौताह जाहि मे सभ किछु तैयार रहत। ओतहि अहाँ सभ अपना सभक भोजक तैयारी करू।” 16 दूनू शिष्‍य विदा भऽ कऽ शहर मे पहुँचलाह, और जहिना यीशु हुनका सभ केँ कहने छलथिन, ठीक ओहिना सभ किछु भेटलनि, और ओ सभ ओतऽ फसह-भोजक तैयारी कयलनि। 17 ओहि साँझ मे यीशु अपन बारहो शिष्‍यक संग ओतऽ पहुँचलाह। 18 भोजन करैत काल यीशु कहऽ लगलाह जे, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, अहाँ सभ मे सँ एक गोटे हमरा पकड़बा देत, एक गोटे जे हमरा संग भोजन सेहो कऽ रहल अछि।” 19 शिष्‍य सभ दुखी भऽ कऽ एक-एक कऽ हुनका सँ पुछऽ लगलनि जे, “ओ हम तँ नहि छी?!” 20 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “ओ अहाँ बारहो मे सँ एक अछि जे हमरा संग बट्टा मे रोटी केँ बोड़ैत अछि। 21 मनुष्‍य-पुत्रक सम्‍बन्‍ध मे जहिना धर्मशास्‍त्र मे लिखल गेल अछि तहिना तँ ओ चलिए जायत, मुदा धिक्‍कार अछि ओहि मनुष्‍य केँ जे मनुष्‍य-पुत्र केँ पकड़बा रहल अछि। ओकरा लेल तँ नीक ई रहितैक जे ओ जन्‍मे नहि लेने रहैत।” 22 ओ सभ जखन भोजन कऽ रहल छलाह तँ यीशु रोटी लेलनि आ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि कऽ शिष्‍य सभ केँ देलथिन आ कहलथिन, “लिअ, ई हमर देह अछि।” 23 तखन बाटी हाथ मे लेलनि, और परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दऽ कऽ हुनका सभ केँ देलथिन। ओ सभ गोटे ओहि मे सँ पिलनि। 24 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “ई परमेश्‍वर आ मनुष्‍यक बीच विशेष सम्‍बन्‍ध स्‍थापित करऽ वला हमर खून अछि, जे बहुत लोकक लेल बहाओल जा रहल अछि। 25 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जाबत तक परमेश्‍वरक राज्‍य मे हम नवका अंगूरक रस नहि पीब, ताबत तक अंगूरक रस फेर नहि पीब।” 26 तकरबाद एक भजन गाबि कऽ ओ सभ जैतून पहाड़ पर चल गेलाह। 27 तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ गोटे अपना विश्‍वास मे डगमगायब, किएक तँ धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे परमेश्‍वर कहने छथि, ‘हम चरबाह केँ मारि देबैक, और भेँड़ा सभ छिड़िया जायत।’ 28 मुदा मृत्‍यु सँ फेर जीवित भऽ गेलाक बाद हम अहाँ सभ सँ पहिने गलील प्रदेश जायब।” 29 एहि पर पत्रुस हुनका कहलथिन, “चाहे सभ केओ विश्‍वास मे डगमगायत, मुदा हम नहि डगमगायब!” 30 यीशु हुनका कहलथिन, “हम अहाँ केँ सत्‍य कहैत छी जे, आइए राति मे, अहाँ हमरा अस्‍वीकार करब। मुर्गा केँ दू बेर बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर लोक केँ कहबैक जे, हम ओकरा चिन्‍हबो नहि करैत छिऐक।” 31 मुदा पत्रुस आरो जोर सँ कहलथिन जे, “हमरा जँ अहाँक संग मरहो पड़त तैयो हम किन्‍नहुँ नहि अहाँ केँ अस्‍वीकार करब।” आरो सभ शिष्‍य सेहो यैह बात कहलथिन। 32 ओ सभ गतसमनी नामक एक जगह पर गेलाह। यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “जाबत हम प्रार्थना करैत छी, ताबत अहाँ सभ एहिठाम बैसल रहू।” 33 ओ पत्रुस, याकूब और यूहन्‍ना केँ अपना संग लऽ गेलाह। ओ मानसिक वेदना सँ व्‍याकुल होमऽ लगलाह, 34 आ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर मोन व्‍यथा सँ एतेक व्‍याकुल अछि—मानू जे हम दुःख सँ मरऽ पर छी। अहाँ सभ एहिठाम रहि कऽ जागल रहू।” 35 एतेक कहि ओ कनेक आगाँ जा मुँह भरे खसि कऽ प्रार्थना कयलनि जे, सम्‍भव होअय तँ ई दुःखक समय हमरा लग सँ दूर भऽ जाय। 36 ओ प्रार्थना करैत कहलनि जे, “हे बाबूजी! हे पिता! अहाँ तँ सभ किछु कऽ सकैत छी—ई दुःखक बाटी हमरा सँ हटा लिअ, मुदा तैयो हमर इच्‍छा नहि, अहींक इच्‍छा पूरा होअय।” 37 तकरबाद अपन शिष्‍य सभ लग आबि कऽ हुनका सभ केँ सुतल देखलथिन। ओ पत्रुस केँ कहलथिन, “सिमोन! सुतल छी की? की एको घण्‍टा जागल रहितहुँ से अहाँ केँ पार नहि लागल? 38 परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्‍मा तँ तैयार अछि मुदा शरीर कमजोर।” 39 यीशु फेर जा कऽ पहिने जकाँ प्रार्थना कयलनि। 40 ओ जखन प्रार्थना कऽ कऽ शिष्‍य सभ लग अयलाह तँ ओ सभ फेर सुतल छलाह। हुनकर सभक आँखि नीन सँ भारी भऽ गेल छलनि। आब यीशु केँ की जबाब दिऔन से हिनका सभ केँ किछु नहि फुरयलनि। 41 यीशु फेर तेसर बेर हुनका सभ लग अयलाह और कहलथिन, “एखनो तक सुतिए रहल छी आ आरामे कऽ रहल छी? आब भऽ गेल! समय आबि गेल—देखू आब मनुष्‍य-पुत्र पापी सभक हाथ मे पकड़बाओल जा रहल अछि। 42 उठू-उठू! चलू! देखू, हमरा पकड़बाबऽ वला आबि गेल अछि!” 43 यीशु ई कहिए रहल छलाह कि यहूदा, जे बारह शिष्‍य मे सँ एक छल, पहुँचि गेल। ओकरा संग लोकक भीड़ छलैक, और सभक हाथ मे तरुआरि और लाठी छल। ओकरा सभ केँ मुख्‍यपुरोहित, धर्मशिक्षक, और बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोकनि पठौने छलाह। 44 यीशु केँ पकड़बाबऽ वला ओकरा सभ केँ ई संकेत देने छलैक जे, “हम जकरा चुम्‍मा लेब, वैह होयत—अहाँ सभ ओकरे पकड़ू आ घेरि कऽ पहरा मे लऽ जायब।” 45 यहूदा तुरत यीशुक लग मे जा कऽ कहलकनि, “गुरुजी!” आ हुनका चुम्‍मा लेलकनि। 46 ओ सभ हुनका तुरत पकड़ि कऽ बन्‍दी बना लेलकनि। 47 ओहि ठाम ठाढ़ एक आदमी तरुआरि निकालि कऽ महापुरोहितक टहलू पर चला कऽ ओकर एकटा कान उड़ा देलनि। 48 यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ हमरा विद्रोह मचाबऽ वला बुझि कऽ, लाठी और तरुआरि लऽ कऽ पकड़ऽ अयलहुँ? 49 सभ दिन हम मन्‍दिर मे शिक्षा दैत अहाँ सभक संग छलहुँ, ततऽ अहाँ सभ हमरा नहि पकड़लहुँ। मुदा ई सभ एना एहि लेल भेल जे धर्मशास्‍त्र मे लिखल बात पूरा होअय।” 50 तखन सभ शिष्‍य हुनका छोड़ि कऽ भागि गेलनि। 51 ओहिठाम एक नवयुवक सेहो छल जे यीशुक पाछाँ-पाछाँ चलैत छल। ओ अपना देह पर मात्र चद्दरि लपेटने रहय। लोक सभ ओकरो पकड़ऽ लागल 52 लेकिन ओ चद्दरि ओकरा सभक हाथ मे छोड़ि कऽ नंगटे दौड़ैत भागल। 53 तखन यीशु केँ महापुरोहितक ओहिठाम लऽ गेलनि, जाहिठाम सभ मुख्‍यपुरोहित, बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोक और धर्मशिक्षक सभ जमा भेल छलाह। 54 पत्रुस सेहो किछु दूरे रहि कऽ यीशुक पाछाँ-पाछाँ महापुरोहितक अङने मे पैसि गेलाह। ओ सिपाही सभक संग घूर लग बैसि कऽ आगि तापऽ लगलाह। 55 मुख्‍यपुरोहित सभ और पूरा धर्म-महासभाक सदस्‍य सभ यीशु केँ मृत्‍युदण्‍डक जोगरक बनयबाक लेल हुनका विरोध मे प्रमाण सभ तकैत छलाह, मुदा किछु नहि भेटलनि। 56 कारण बहुत लोक हुनका विरोध मे झूठ गवाही देलक लेकिन ओकरा सभक बात एक-दोसर सँ नहि मिललैक। 57 तखन किछु लोक उठि कऽ हुनका विरोध मे झूठ गवाही दैत कहलक जे, 58 “हम सभ ओकरा ई कहैत सुनलहुँ अछि जे, ‘ई हाथ सँ बनाओल मन्‍दिर केँ हम तोड़ि देब और तीन दिनक बाद हम दोसर बनायब जे मनुष्‍यक हाथ सँ बनाओल नहि होयत।’” 59 मुदा तैयो ओकरा सभक बात एक-दोसर सँ नहि मिलैत छल। 60 तखन महापुरोहित सभाक बीच मे ठाढ़ भऽ कऽ यीशु सँ पुछलथिन जे, “की अहाँ कोनो उत्तर नहि देब? ई गवाह सभ अहाँक विरोध मे केहन बात सभ कहि रहल अछि?” 61 मुदा यीशु चुप रहि कऽ कोनो उत्तर नहि देलथिन। फेर महापुरोहित हुनका पुछलथिन जे, “की अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह छी? परमधन्‍य परमेश्‍वरक पुत्र छी?” 62 यीशु कहलथिन, “हँ, हम छी। और अहाँ सभ मनुष्‍य-पुत्र केँ सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वरक दहिना कात बैसल और आकाशक मेघ मे अबैत देखब।” 63 ई सुनि महापुरोहित अपन वस्‍त्र फाड़ि कऽ कहलथिन, “आब आरो गवाह सभक की आवश्‍यकता? 64 अहाँ सभ एकरा परमेश्‍वरक निन्‍दा करैत सुनबे कयलहुँ—आब अहाँ सभक की विचार?” सभ हुनका मृत्‍युदण्‍डक जोगरक ठहरौलकनि। 65 किछु लोक हुनका पर थूक फेकऽ लगलनि, हुनका आँखि पर पट्टी बान्‍हि कऽ हुनका मुक्‍का मारऽ लगलनि और कहलकनि जे, “यौ अन्‍तर्यामी, कहल जाओ! अपने केँ के मारलक?” सिपाही सभ सेहो हुनका थप्‍पड़ मारलकनि। 66 एहि समय मे पत्रुस नीचाँ आङन मे छलाह। महापुरोहितक एक टहलनी आबि कऽ 67 पत्रुस केँ आगि तपैत देखि हुनकर मुँह ठिकिअबैत कहलकनि जे, “अहूँ एहि नासरत-निवासी यीशुक संग छलहुँ!” 68 मुदा पत्रुस अस्‍वीकार करैत कहलथिन, “तोँ की बाजि रहल छेँ से हमरा बुझहो मे नहि अबैत अछि आ ने ओहि बात केँ हम जनैत छी।” और ओहिठाम सँ हटि कऽ आङनक मुँह पर चल गेलाह, आ मुर्गा बाजल। 69 फेर ओ टहलनी हुनका देखि कऽ ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ केँ कहलकैक जे, “ई आदमी ओकरे सभ मे सँ केओ अछि!” 70 मुदा पत्रुस फेर अस्‍वीकार कयलनि। किछु कालक बाद ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ पत्रुस केँ कहलकनि जे, “निश्‍चय तोँ ओकरे सभ मे सँ छह! तोँहूँ तँ गलीले प्रदेशक छह!” 71 एहि पर ओ सपत खा कऽ अपना केँ सरापऽ लगलाह और कहलथिन, “जाहि व्‍यक्‍तिक बारे मे अहाँ सभ बाजि रहल छी, तकरा हम नहि चिन्‍हैत छी!” 72 तखने मुर्गा दोसर बेर बाजि उठल। तखन पत्रुस केँ ओ बात मोन पड़ि गेलनि जे यीशु हुनका कहने छलथिन जे, “मुर्गा केँ दू बेर बाजऽ सँ पहिने अहाँ हमरा तीन बेर अस्‍वीकार करब।” और ओ भोकासी पाड़ि कऽ कानऽ लगलाह।

Mark 15

1 प्रात भेने भोरे-भोर मुख्‍यपुरोहित, बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ, धर्मशिक्षक सभ, और धर्म-महासभाक आरो सभ सदस्‍य निर्णय कऽ कऽ, यीशु केँ बान्‍हि देलथिन, और हुनका लऽ जा कऽ राज्‍यपाल पिलातुसक जिम्‍मा मे लगा देलथिन। 2 पिलातुस हुनका सँ पुछलथिन जे, “की अहाँ यहूदी सभक राजा छी?” यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ अपने कहि रहल छी।” 3 तखन मुख्‍यपुरोहित सभ हुनका पर बहुत बातक दोष लगाबऽ लगलाह। 4 पिलातुस हुनका सँ फेर पुछलथिन जे, “की अहाँ कोनो उत्तर नहि देब? देखू, ई सभ अहाँ पर कतेक आरोप लगा रहल छथि!” 5 मुदा यीशु तैयो कोनो उत्तर नहि देलथिन। एहि सँ पिलातुस केँ बहुत आश्‍चर्य लगलनि। 6 प्रत्‍येक साल फसह-पाबनिक अवसर पर राज्‍यपाल जनताक माँगक अनुसार एक कैदी केँ छोड़ि दैत छलाह। 7 एहि बेर आरो क्रान्‍तिकारी सभक संग जहल मे एक बरब्‍बा नामक कैदी छल जे आन्‍दोलन मे हत्‍या कयने छल। 8 भीड़ पिलातुसक लग मे आबि कऽ हुनका सँ माँग कयलकनि जे ओ अपन प्रथाक अनुसार ओकरा सभक लेल एक कैदी केँ छोड़ि देथि। 9 ओ ओकरा सभ केँ उत्तर देलथिन जे, “की अहाँ सभ चाहैत छी जे हम अहाँ सभक लेल ‘यहूदी सभक राजा’ केँ छोड़ि दी?” 10 ओ जनैत छलाह जे मुख्‍यपुरोहित सभ यीशु केँ ईर्ष्‍याक कारणेँ पकड़बौने छथि। 11 मुदा मुख्‍यपुरोहित सभ भीड़क लोक केँ एहि बातक लेल भड़कौलनि जे ओ सभ यीशु केँ नहि, बल्‍कि बरब्‍बा केँ छोड़ि देबाक लेल पिलातुस सँ माँग करय। 12 पिलातुस ओकरा सभ केँ फेर कहलथिन, “तखन एकरा लऽ कऽ हम की करिऔक जकरा अहाँ सभ ‘यहूदी सभक राजा’ कहैत छी?” 13 एहि पर ओ सभ बहुत जोर-जोर सँ हल्‍ला करऽ लागल जे, “ओकरा क्रूस पर चढ़ाउ!” 14 मुदा पिलातुस ओकरा सभ केँ कहलथिन, “किएक? ओ कोन अपराध कयने अछि?” लेकिन ओ सभ आरो जोर-जोर सँ चिचियाय लागल जे, “ओकरा क्रूस पर चढ़ाउ!” 15 तखन पिलातुस लोक सभ केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ ओकरा सभक लेल बरब्‍बा केँ छोड़ि देलथिन और यीशु केँ कोड़ा सँ पिटबा कऽ क्रूस पर चढ़यबाक लेल सैनिक सभक जिम्‍मा लगा देलथिन। 16 तखन सैनिक सभ हुनका राजभवनक आङन मे, जकरा “प्राईटोरियम” कहल जाइत छैक, लऽ गेलनि। ओहिठाम पूरा सैनिक-दल बजाओल गेल। 17 ओ सभ हुनका बैगनी रंगक राजसी वस्‍त्र पहिरा देलकनि, और काँटक मुकुट बना कऽ हुनका माथ पर रखलकनि। 18 ओ सभ हुनका कहऽ लगलनि जे, “यहूदी सभक राजा, प्रणाम!” 19 ओ सभ छड़ी लऽ कऽ बेर-बेर हुनका मूड़ी पर मारलकनि, हुनका पर थूक फेकलकनि, और ठेहुनिया दऽ कऽ गोड़ लगलकनि। 20 ओ सभ एहि तरहेँ यीशुक मजाक उड़ौलाक बाद हुनका देह पर सँ बैगनी रंग वला वस्‍त्र निकालि लेलकनि आ हुनकर अपन कपड़ा फेर पहिरा देलकनि। तकरबाद ओ सभ हुनका क्रूस पर लटकयबाक लेल शहर सँ बाहर लऽ गेलनि। 21 रस्‍ता मे कुरेन नगरक रहऽ वला सिमोन नामक एक आदमी, जे सिकन्‍दर और रूफुसक पिता छल, गाम सँ शहर दिस आबि रहल छल। ओकरा सिपाही सभ बलजोरी पकड़लक जे ओ यीशुक क्रूस उठा कऽ लऽ चलय। 22 यीशु केँ ओ सभ गुलगुता नामक जगह, जकर अर्थ अछि “खप्‍पड़ वला स्‍थान”, पर लऽ गेलनि। 23 ओतऽ केओ मूर्र नामक तीत दवाइ दारू मे मिला कऽ हुनका पिबाक लेल देबऽ लगलनि मुदा ओ नहि लेलनि। 24 तखन यीशु केँ हाथ-पयर मे काँटी ठोकि कऽ क्रूस पर टाँगि देलकनि। सिपाही सभ ककरा कोन कपड़ा भेटतैक ताहि लेल यीशुक कपड़ा पर चिट्ठा खसौलक। एहि तरहेँ ओ सभ हुनकर कपड़ा अपना मे बाँटि लेलक। 25 जखन ओ सभ यीशु केँ क्रूस पर चढ़ौलकनि तखन नौ बजे दिन छल। 26 हुनका विरोध मे जे दोष-पत्र लिखि कऽ टाँगल गेल ताहि पर ई लिखल छल, “यहूदी सभक राजा”। 27 हुनका संगे दूटा डाकू केँ सेहो क्रूस पर चढ़ाओल गेल, एकटा हुनकर दहिना कात और दोसर बामा कात। 28 [तहिना धर्मशास्‍त्रक वचन पूरा भऽ गेल जाहि मे लिखल अछि जे, “ओ अपराधी सभ मे सँ बुझल गेलाह।”] 29 ओहि बाटे आबऽ-जाय वला लोक सभ माथ हिला-हिला कऽ हुनकर निन्‍दा करैत छलनि जे, “रे मन्‍दिर केँ तोड़ऽ वला और तीन दिन मे ओकरा बनाबऽ वला— 30 आब क्रूस पर सँ उतरि कऽ अपना केँ बचा!” 31 तहिना मुख्‍यपुरोहित लोकनि और धर्मशिक्षक सभ सेहो अपना मे यीशुक हँसी उड़बैत कहलनि, “ई आन लोक सभ केँ बचबैत रहल मुदा अपना केँ नहि बचा सकैत अछि! 32 ई उद्धारकर्ता-मसीह, इस्राएलक राजा, एखन क्रूस पर सँ उतरि आबओ जाहि सँ हम सभ देखिऐक और विश्‍वास करिऐक!” यीशुक संग जे सभ क्रूस पर चढ़ाओल गेल छल, सेहो सभ हुनकर निन्‍दा करऽ लगलनि। 33 बारह बजे दिन मे पूरा देश अन्‍हार-कुप्‍प भऽ गेल, और तीन बजे तक ओहिना रहल। 34 लगभग तीन बजे मे यीशु बहुत जोर सँ बजलाह जे, “एली, एली, लामा सबक्‍तनी?” जकर अर्थ ई अछि, “हे हमर परमेश्‍वर, हे हमर परमेश्‍वर, हमरा अहाँ किएक छोड़ि देलहुँ?” 35 लग मे ठाढ़ किछु लोक ई सुनि कहलक जे, “सुनू!—ओ एलियाह केँ बजा रहल अछि।” 36 एक आदमी दौड़ि कऽ गेल आ रूइ जकाँ एकटा एहन चीज जे पानि सोखैत अछि से लऽ कऽ तिताह दारू मे डुबा लेलक, तखन ओकरा लाठीक हूर पर अटका कऽ ऊपर हुनका मुँह लग पिबाक लेल देलकनि आ बाजल, “आब अपना सभ देखी जे एलियाह एकरा क्रूस पर सँ उतारबाक लेल अबैत छथि कि नहि।” 37 तकरबाद यीशु बहुत जोर सँ आवाज दैत अपन प्राण त्‍यागि देलनि। 38 मन्‍दिर मे जे परदा छलैक से ऊपर सँ नीचाँ तक चिरा कऽ दू भाग मे फाटि गेल। 39 रोमी कप्‍तान जे यीशुक सामने मे ठाढ़ छल, ई देखि जे यीशु कोना मरलाह बाजल, “सत्‍ये ई आदमी परमेश्‍वरक पुत्र छलाह!” 40 किछु स्‍त्रीगण सभ छलीह जे दूरे सँ देखि रहल छलीह। हुनका सभ मे मरियम मग्‍दलीनी, छोटका याकूब और योसेसक माय मरियम, और सलोमी सेहो छलीह। 41 ई सभ गलील प्रदेश मे यीशुक संगे-संग घूमि कऽ हुनकर सेवा कयने छलीह। ओहिठाम आरो बहुत स्‍त्रीगण सेहो छलि जे हुनका संग यरूशलेम आयल छलि। 42 ई सभ घटना विश्रामक दिन सँ एक दिन पहिने भेल छल, जाहि दिन विश्राम दिनक लेल तैयारी कयल जाइत अछि। तेँ साँझ भेला पर 43 अरिमतिया नगरक यूसुफ नामक महासभाक एक प्रतिष्‍ठित सदस्‍य, जे परमेश्‍वरक राज्‍यक बाट सेहो तकैत छलाह, से साहसक संग पिलातुसक ओहिठाम जा कऽ यीशुक लास मँगलनि। 44 पिलातुस केँ आश्‍चर्य लगलनि जे यीशु एतेक जल्‍दी कोना मरि गेलाह, तेँ सेनाक कप्‍तान केँ बजबा कऽ ओकरा सँ पुछलथिन जे, “की यीशु एखने मरि गेल अछि?” 45 कप्‍तान सँ एहि बातक पता लगा कऽ पिलातुस यूसुफ केँ यीशुक लास लऽ जयबाक अनुमति दऽ देलथिन। 46 यूसुफ मलमलक कपड़ा किनि कऽ यीशुक लास क्रूस पर सँ उतारि लेलनि और ओहि कपड़ा मे लपेटि देलथिन। तखन पाथर मे काटि कऽ बनाओल कबर मे लास केँ राखि देलथिन, और कबरक मुँह पर एक पाथर गुड़का कऽ लगा देलनि। 47 मरियम मग्‍दलीनी आ योसेसक माय मरियम देखलनि जे यीशु कतऽ राखल गेलाह।

Mark 16

1 विश्रामक दिन बितला पर मरियम मग्‍दलीनी, याकूबक माय मरियम, और सलोमी जा कऽ सुगन्‍धित तेल किनलनि, जाहि सँ यीशुक लास पर लगबथि। 2 तखन प्रात भेने जे कि सप्‍ताहक पहिल दिन छल, भोरगरे सुर्योदय काल मे ओ सभ कबर पर गेलीह। 3 रस्‍ता मे एक-दोसर केँ कहैत छलीह जे, “अपना सभक लेल कबरक मुँह पर सँ पाथर केँ के हटा देत?” 4 ओ पाथर तँ बहुत बड़का छल। तखन कबर दिस तकैत ओ सभ देखलनि जे पाथर हटाओल गेल अछि। 5 ओ सभ कबर मे पैसि कऽ दहिना कात मे एक युवक केँ बैसल देखलनि, जे लम्‍बा उज्‍जर वस्‍त्र पहिरने छलाह। ओ सभ एकदम आश्‍चर्य-चकित भऽ गेलीह। 6 युवक हुनका सभ केँ कहलथिन जे “चकित नहि होउ! अहाँ सभ नासरतक निवासी यीशु केँ खोजैत छिऐन, जिनका क्रूस पर चढ़ाओल गेल छलनि। ओ जीबि उठलाह! एतऽ नहि छथि! देखू, एही जगह पर हुनका राखल गेल छलनि। 7 मुदा अहाँ सभ जाउ, और शिष्‍य सभ केँ—पत्रुस केँ सेहो—ई कहि देबनि जे, ‘ओ अहाँ सभ सँ पहिने, जहिना अहाँ सभ केँ कहने छलाह, गलील जा रहल छथि, ओतऽ हुनका सँ भेँट होयत।’” 8 ओ स्‍त्रीगण सभ आश्‍चर्य सँ कँपैत कबर मे सँ निकलि कऽ भगलीह। ओ सभ डर सँ ककरो किछु नहि कहलथिन। 9 [यीशु सप्‍ताहक पहिल दिन भोरे मृत्‍यु सँ जीबि उठि कऽ सभ सँ पहिने मरियम मग्‍दलीनी केँ देखाइ देलथिन, जकरा मे सँ ओ सातटा दुष्‍टात्‍मा निकालने रहथिन। 10 ओ जा कऽ, यीशुक संगी सभ केँ, जे शोक सँ कनैत छलाह, ई समाचार कहलथिन। 11 मुदा मरियमक बात सुनि कऽ जे यीशु फेर जीबि उठलाह और ओ हमरा भेँट भेलाह, से बात ओ सभ नहि पतिअयलाह। 12 एकरा बाद जखन हुनका सभ मे सँ दू व्‍यक्‍ति गाम दिस जा रहल छलाह, तखन यीशु हुनका सभ केँ दोसर रूप मे दर्शन देलथिन। 13 ई सभ घूमि आबि कऽ आरो शिष्‍य सभ केँ एहि घटनाक बारे मे सुनौलनि, लेकिन हुनको सभक बात ओ सभ नहि पतिअयलाह। 14 बाद मे एगारहो शिष्‍य सभ केँ भोजन करैत काल यीशु हुनका सभ केँ दर्शन देलथिन। ओ हुनका सभक अविश्‍वास और मोनक कठोरताक कारणेँ हुनका सभ केँ डँटलथिन, किएक तँ ओ सभ ओहि व्‍यक्‍ति सभक बात केँ नहि पतिआयल छलाह जे व्‍यक्‍ति सभ यीशु केँ मृत्‍युक बाद जीवित देखने छलाह। 15 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “पूरा संसार मे जा कऽ सभ मनुष्‍य केँ शुभ समाचार सुनबिऔक। 16 जे व्‍यक्‍ति विश्‍वास करत और बपतिस्‍मा लेत तकरा उद्धार होयतैक, मुदा जे व्‍यक्‍ति विश्‍वास नहि करत से दोषी ठहराओल जायत। 17 जे सभ विश्‍वास करत से सभ ई चिन्‍ह सभ देखाओत—हमरा नाम सँ दुष्‍टात्‍मा केँ निकालत, अनजान भाषा मे बाजत, 18 जँ साँप उठा लेत वा विष पी लेत तँ ओकरा सभ केँ कोनो हानि नहि होयतैक। बिमार आदमी सभ पर हाथ राखत तँ ओ स्‍वस्‍थ भऽ जायत।” 19 तखन प्रभु यीशु शिष्‍य सभ सँ बात कयलाक बाद स्‍वर्ग मे उठा लेल गेलाह, और परमेश्‍वरक दहिना कात बैसलाह। 20 शिष्‍य सभ बाहर जा कऽ सभ जगह मे शुभ समाचारक प्रचार कयलनि। प्रभु हुनका सभक सहायता करैत रहलथिन, और प्रचारक संगे-संग जे चमत्‍कार देखाओल गेल तकरा द्वारा ओ अपन शुभ समाचारक सत्‍यता प्रमाणित कयलथिन।]


Luke 1

1 आदरणीय थियुफिलुस, बहुतो लोक हमरा सभक मध्‍य घटल घटनाक विवरण लिखने छथि। 2 ओ सभ अपन विवरण तिनका सभक बातक आधार पर लिखलनि, जे शुरुए सँ एहि घटना सभक प्रत्‍यक्षदर्शी छलाह आ शुभ समाचारक प्रचारक सेवा मे लागल छलाह, जिनका सभक द्वारा हमरा सभ केँ एहि बात सभक जानकारी भेटल। 3 तेँ शुरुए सँ सभ बातक सावधानीपूर्बक अध्‍ययन कऽ कऽ हमरा उचित बुझायल जे हमहूँ अहाँक लेल क्रमानुसार तकर सम्‍पूर्ण विवरण लिखी, 4 जाहि सँ अहाँ जानि सकी जे जाहि बातक शिक्षा अहाँ केँ भेटल अछि से एकदम सत्‍य अछि। 5 यहूदिया प्रदेशक राजा हेरोदक समय मे जकरयाह नामक एक पुरोहित छलाह। ओ पुरोहित सभक ताहि समूहक छलाह जे अबियाहक समूह कहबैत छल। हुनकर स्‍त्री इलीशिबा सेहो पुरोहित हारूनक वंशक छलीह। 6 ओ दूनू गोटे परमेश्‍वरक नजरि मे धर्मी छलाह। हुनका सभक जीवन परमेश्‍वरक सभ आज्ञा और विधि-विधानक अनुसार निर्दोष छलनि। 7 मुदा हुनका सभ केँ कोनो सन्‍तान नहि छलनि, कारण इलीशिबा बाँझ छलीह, आ हुनका दूनू गोटेक अवस्‍था ढरि गेल छलनि। 8 एक दिन मन्‍दिर मे सेवा करबाक पार जखन जकरयाहक समूह केँ भेल आ जकरयाह परमेश्‍वरक सामने पुरोहितक काज कऽ रहल छलाह, 9 तँ पुरोहित सभक प्रथाक अनुसार हुनका नामक एक चिट्ठा निकलल जे ओ मन्‍दिर मे जा कऽ धूप जरबथि। 10 धूप जरयबाक समय मे लोकक भीड़ बाहर प्रार्थना कऽ रहल छल। 11 तखन परमेश्‍वरक एक स्‍वर्गदूत धूप-वेदीक दहिना कात ठाढ़ भऽ जकरयाह केँ दर्शन देलथिन। 12 हुनका देखि जकरयाह घबड़ा गेलाह आ भयभीत भऽ गेलाह। 13 मुदा स्‍वर्गदूत हुनका कहलथिन, “यौ जकरयाह, नहि डेराउ, कारण परमेश्‍वर लग अहाँक प्रार्थना सुनल गेल अछि। अहाँक स्‍त्री इलीशिबा एक पुत्र केँ जन्‍म देतीह। अहाँ ओकर नाम यूहन्‍ना राखब। 14 अहाँ केँ खुशी आ आनन्‍द होयत। ओकर जन्‍म सँ बहुत लोक आनन्‍द मनाओत, 15 कारण, ओ प्रभुक नजरि मे महान् होयत। ओ मदिरा वा आरो कोनो तरहक निसा लागऽ वला वस्‍तु कहियो नहि पीत। ओ मायक पेटे सँ पवित्र आत्‍मा सँ परिपूर्ण होयत। 16 ओ इस्राएलक बहुतो लोक केँ अपना प्रभु-परमेश्‍वर दिस घुमाओत। 17 आत्‍मा आ सामर्थ्‍य मे ओ एलियाह सन भऽ कऽ प्रभुक आगाँ चलत। ओ पिता-सन्‍तान सभक बीच मेल-मिलाप कराओत, आज्ञा उल्‍लंघन करऽ वला सभ केँ ओहन बुद्धि दियाओत जाहि सँ ओ सभ धार्मिकताक अनुसार चलत, आ एहि तरहेँ प्रभुक लेल एक योग्‍य प्रजा तैयार करतनि।” 18 एहि पर जकरयाह स्‍वर्गदूत केँ कहलथिन, “ई बात हम निश्‍चित रूप सँ कोना जानि सकैत छी? हम अपनो बूढ़ छी आ हमर घरवाली सेहो बुढ़ि छथि।” 19 स्‍वर्गदूत हुनका उत्तर देलथिन, “हम जिब्राएल छी। हम परमेश्‍वरक सामने उपस्‍थित रहैत छी। हम अहाँ सँ बात करबाक लेल आ ई खुशीक सम्‍बाद सुनयबाक लेल पठाओल गेल छी। 20 आब सुनू, जाहि दिन धरि ई बात पूरा नहि भऽ जायत, ताहि दिन धरि अहाँ बौक रहब, बाजि नहि सकब। कारण, हमर बात जे ठीक समय अयला पर पूरा होयत, ताहि पर अहाँ विश्‍वास नहि कयलहुँ।” 21 एम्‍हर लोक सभ जकरयाहक प्रतीक्षा कऽ रहल छल आ आश्‍चर्यित छल जे हुनका मन्‍दिर मे एतेक देरी किएक भऽ रहल छनि। 22 ओ जखन बाहर अयलाह तँ ओकरा सभ सँ बाजि नहि सकलाह। ओ सभ बुझि गेल जे हिनका मन्‍दिर मे दर्शन भेटलनि अछि। ओ लोक सभ सँ इसारा सँ गप्‍प करैत छलाह कारण ओ बौक भऽ गेल छलाह। 23 अपन पुरहिताइक समयक पार समाप्‍त भेला पर ओ घर चल गेलाह। 24 किछु दिनक बाद जकरयाहक स्‍त्री इलीशिबा गर्भवती भेलीह। ओ पाँच महिना धरि कतौ नहि बहरयलीह। 25 ओ कहैत छलीह, “प्रभु कतेक दयालु छथि! आब ओ हमरा पर कृपा कऽ कऽ समाज मे हमर कलंक केँ धो देलनि।” 26 इलीशिबाक गर्भक छठम मास मे परमेश्‍वर जिब्राएल स्‍वर्गदूत केँ गलील प्रदेशक नासरत नगर मे 27 एक कुमारि कन्‍या लग सम्‍बाद दऽ कऽ पठौलथिन। हुनकर विवाहक निश्‍चय दाऊदक वंशज यूसुफ नामक पुरुष सँ भेल छलनि। ओहि कुमारि कन्‍याक नाम मरियम छलनि। 28 स्‍वर्गदूत मरियम लग आबि कऽ कहलथिन, “मरियम, आनन्‍द मनाउ, परमेश्‍वर अहाँ पर कृपा कयलनि अछि। प्रभु अहाँक संग छथि।” 29 हुनकर एहि कथन सँ ओ बहुत घबड़ा गेलीह आ सोचऽ लगलीह जे, ई केहन बात कहि रहल छथि! 30 तखन स्‍वर्गदूत कहलथिन, “मरियम, भयभीत नहि होउ, परमेश्‍वर अहाँ सँ प्रसन्‍न छथि। 31 सुनू, अहाँ गर्भवती होयब आ पुत्र केँ जन्‍म देब। अहाँ हुनकर नाम यीशु राखि देबनि। 32 ओ महान् होयताह आ परम-परमेश्‍वरक पुत्र कहौताह। प्रभु-परमेश्‍वर हुनकर पूर्वज दाऊदक सिंहासन हुनका देथिन। 33 ओ याकूबक वंश पर अनन्‍त काल तक राज्‍य करताह और हुनकर राज्‍यक अन्‍त कहियो नहि होयतनि।” 34 मरियम स्‍वर्गदूत केँ कहलथिन, “ई होयत कोना? कारण हम तँ कुमारिए छी।” 35 स्‍वर्गदूत उत्तर देलथिन, “पवित्र आत्‍मा अहाँ पर उतरताह, और परम-परमेश्‍वरक सामर्थ्‍यक छाँह अहाँ पर रहत। तेँ जन्‍म लेनिहार पवित्र बालक परमेश्‍वरक पुत्र कहौताह। 36 एतबे नहि! अहाँक सम्‍बन्‍धी इलीशिबा केँ सेहो, बुढ़ारी अवस्‍था मे बच्‍चा होयतनि! ओ जे बाँझ कहबैत छलीह, तिनका आब छठम मासक गर्भ छनि। 37 परमेश्‍वरक लेल कोनो बात असम्‍भव नहि छनि।” 38 एहि पर मरियम कहलथिन, “हम परमेश्‍वरक दासी छियनि। अहाँ जहिना कहलहुँ तहिना हमरा संग होअय।” तकरबाद स्‍वर्गदूत हुनका ओतऽ सँ विदा भऽ गेलाह। 39 तखन मरियम यात्राक तैयारी कऽ कऽ विदा भेलीह और यहूदिया प्रदेशक ओहि पहाड़ी नगर मे जल्‍दी सँ गेलीह जतऽ जकरयाह आ इलीशिबा रहैत छलाह। 40 ओ हुनका सभक घर मे प्रवेश कऽ कऽ इलीशिबा केँ नमस्‍कार कयलथिन। 41 जखन इलीशिबा मरियमक नमस्‍कार सुनलनि तँ हुनकर पेटक बच्‍चा कुदि उठलनि आ इलीशिबा पवित्र आत्‍मा सँ परिपूर्ण भऽ जोर सँ बाजि उठलीह, 42 “स्‍त्रीगण मे अहाँ धन्‍य छी, आ धन्‍य छथि ओ जिनका अहाँ जन्‍म देबनि। 43 मुदा हम कोन जोगरक छी जे हमर प्रभुक माय हमरा ओतऽ अयलीह? 44 अहाँक कहल नमस्‍कार शब्‍द जखने हमरा कान मे पड़ल, तखने हमर पेटक बच्‍चा खुशी सँ कुदि उठल। 45 धन्‍य छी अहाँ, कारण, अहाँ विश्‍वास कयलहुँ जे, प्रभु अहाँ केँ जे बात कहलनि, से पूरा होयत।” मरियमक स्‍तुति-गान 46 तखन मरियम कहलनि, “हमर मोन प्रभुक स्‍तुति करैत अछि, 47 और हमर आत्‍मा हमर उद्धारकर्ता-परमेश्‍वरक कारणेँ अति आनन्‍दित अछि, 2 48 किएक तँ ओ अपना एहि तुच्‍छ दासी पर दया कयलनि। आब पुस्‍त-पुस्‍तानिक लोक हमरा धन्‍य कहत, 2 49 कारण, सर्वशक्‍तिमान प्रभु हमरा लेल महान् काज कयलनि अछि, 2 हुनकर नाम पवित्र छनि! 50 हुनकर भय माननिहार लोक पर हुनकर कृपा पुस्‍त-पुस्‍तानि रहैत अछि। 51 ओ अपन बाहुबल प्रगट कयने छथि। 2 तकरा सभ केँ ओ छिन्‍न-भिन्‍न कऽ देने छथिन, 2 जकर सभक मोन अहंकार सँ भरल छल। 52 ओ शासक सभ केँ अपना सिंहासन सँ उतारि देने छथिन, 2 आ नम्र सभ केँ पैघ बना देने छथिन। 53 ओ भूखल सभ केँ नीक-नीक वस्‍तु सँ तृप्‍त कयने छथिन, 2 आ धनवान सभ केँ खाली हाथ घुमा देने छथिन। 54 ओ हमरा सभक पूर्वज लोकनि केँ देल अपन वचन अनुसार 2 अपन सेवक इस्राएलक मदति कयलनि। 55 अब्राहम और हुनकर वंशज पर सदा दया करबाक अपना वचन केँ स्‍मरण रखलनि।” 56 मरियम करीब तीन मास तक इलीशिबाक संग रहि कऽ अपना घर चलि अयलीह। 57 जखन इलीशिबाक पूर मास भेलनि तँ हुनका बेटा भेलनि। 58 हुनकर पड़ोसी आ सम्‍बन्‍धी सभ ई बात सुनि जे प्रभु हुनका पर कतेकटा दया कयलथिन, हुनका संग खुशी मनौलनि। 59 आठम दिन ओ सभ बच्‍चा केँ खतनाक विधि करबाक लेल अयलाह, आ पिताक नाम पर बच्‍चाक नाम “जकरयाह” राखऽ लगलथिन, 60 मुदा हुनकर माय कहलथिन, “नहि! एकर नाम यूहन्‍ना रखबाक अछि।” 61 एहि पर ओ सभ कहलथिन, “अहाँक कुटुम्‍ब-परिवार मे ई नाम कहाँ किनको छनि!” 62 तखन ओ सभ बच्‍चाक पिता सँ इसारा कऽ कऽ पुछलथिन जे, अहाँ एकर की नाम राखऽ चाहैत छी? 63 ओ पाटी मँगा कऽ लिखलनि, “एकर नाम यूहन्‍ना छैक।” एहि पर सभ चकित रहि गेलाह। 64 तखने हुनकर आवाज फुजि गेलनि आ परमेश्‍वरक स्‍तुति करैत बाजऽ लगलाह। 65 एहि सँ लग-पास मे रहऽ वला सभ लोक मे डर सन्‍हिया गेलैक और यहूदिया प्रदेशक पहाड़ सभ मे सभतरि एहि सभ बातक चर्चा पसरि गेल। 66 एहि बातक विषय मे जे सभ सुनलक, से सभ अपना-अपना मोन मे एहि सभक बारे मे विचार करऽ लागल आ बाजल, “ई बालक की बनताह?” कारण, स्‍पष्‍ट छल जे प्रभुक आशिष हुनका पर छलनि। 67 यूहन्‍नाक पिता जकरयाह पवित्र आत्‍मा सँ परिपूर्ण भऽ भविष्‍यवाणी कयलनि जे, 68 “इस्राएलक परमेश्‍वर, प्रभुक स्‍तुति होनि, 2 कारण ओ अपन प्रजा लग आबि कऽ ओकरा मुक्‍ति देलनि। 69 ओ अपन सेवक दाऊदक वंश मे 2 हमरा सभक लेल एक सामर्थ्‍यवान उद्धारकर्ता उत्‍पन्‍न कयलनि अछि, 70 जेना कि ओ अपन चुनल प्रवक्‍ता सभक माध्‍यम सँ प्राचीन काल सँ कहने छलाह। 71 ओ हमरा सभ केँ दुश्‍मन सभ सँ बचयबाक प्रतिज्ञा कयने रहथि, 2 आ हमरा सभ केँ घृणा कयनिहार सभक हाथ सँ सुरक्षित रखबाक वचन देने रहथि। 72 ओ अपन ओहि वचन केँ पूरा कऽ कऽ हमरा पूर्वज लोकनि पर दया कयलनि अछि। ओ अपन ओहि पवित्र वचन केँ स्‍मरण रखने छलाह 2 जे वचन ओ सपत खा कऽ हमरा सभक पुरखा अब्राहम केँ देने रहथिन जे, 74 हम तोरा सभ केँ शत्रु सभक हाथ सँ बचयबह; 2 तोँ सभ निर्भयतापूर्बक जीवन भरि पवित्रता आ धार्मिकताक संग 2 हमरा समक्ष हमर सेवा करबह। 76 आ हौ बौआ, तोँ परम-परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहयबह, 2 किएक तँ तोँ प्रभुक लेल बाट तैयार करबाक हेतु हुनका आगाँ-आगाँ चलबह। 77 तोँ हुनकर प्रजा केँ उद्धारक ज्ञान प्रदान करबहुन, 2 जे उद्धार पापक क्षमा द्वारा भेटैत अछि, 78 आ से हमर सभक दयालु परमेश्‍वरक करुणाक कारणेँ अछि। एही करुणाक कारणेँ हमरा सभक लेल ऊपर सँ प्रकाश उगत, 2 79 जे अन्‍हार आ मृत्‍युक छाँह मे बैसल लोक सभ पर इजोत करत, 2 और हमरा सभ केँ शान्‍तिक बाट पर आगाँ बढ़ाओत।” 80 बालक यूहन्‍ना बढ़ैत गेलाह आ आत्‍मिक रूप सँ सबल होइत गेलाह। ओ जा धरि इस्राएली सभक बीच अपन काज शुरू नहि कयलनि, ता धरि निर्जन क्षेत्र मे वास कयलनि।

Luke 2

1 ओहि समय मे कैसर औगुस्‍तुस आदेश देलनि जे सम्‍पूर्ण रोम साम्राज्‍‍यक जनगणना कयल जाय। 2 एहि तरहक ई पहिल जनगणना छल, आ ई ताहि समय मे भेल जखन क्‍विरीनियुस सीरिया प्रदेशक राज्‍यपाल छलाह। 3 सभ केओ नाम लिखयबाक लेल अपन-अपन पैतृक नगर जाय लागल। 4 यूसुफ राजा दाऊदक खानदान आ वंशक छलाह, तेँ ओ अपन नाम लिखयबाक लेल गलील प्रदेशक नासरत नगर सँ यहूदिया प्रदेशक बेतलेहम गाम गेलाह, जे दाऊदक गाम छल। 5 ओ संग मे मरियम केँ सेहो लऽ गेलाह, जिनका संग हुनकर विवाहक निश्‍चय कयल गेल छलनि और जे गर्भवती छलीह। 6 ओतहि रहैत मरियम केँ बच्‍चाक जन्‍म देबाक समय आबि गेलनि, 7 आ ओ अपन पहिल पुत्र केँ जन्‍म देलनि। ओ बच्‍चा केँ कपड़ाक टुकड़ा मे लपेटि कऽ नादि मे राखि देलथिन, कारण हुनका सभ केँ रहबाक लेल सराय मे कोनो स्‍थान नहि भेटल छलनि। 8 ओहि इलाका मे चरबाह सभ छल जे बाध मे रहि कऽ राति मे अपन भेँड़ाक रखबारी कऽ रहल छल। 9 एकाएक परमेश्‍वरक एक स्‍वर्गदूत ओकरा सभक सामने मे ठाढ़ भऽ गेलाह आ प्रभुक तेज प्रकाश सँ ओकरा सभक चारू कात इजोत भऽ गेलैक। एहि सँ ओ सभ बहुत डेरा गेल। 10 मुदा स्‍वर्गदूत कहलथिन, “डेराह नहि! हम तोरा सभ केँ बड़का आनन्‍दक खुस खबरी सुनबैत छिअह, जे सभ लोकक लेल होयत। 11 आइ दाऊदक नगर मे तोरा सभक लेल एक उद्धारकर्ता जन्‍म लेलथुन अछि। ओ छथि प्रभु, परमेश्‍वरक पठाओल मसीह। 12 तोरा सभक लेल एकटा ई चेन्‍ह रहतह—तोँ सभ बच्‍चा केँ कपड़ाक टुकड़ा सँ लपेटल आ नादि मे राखल पयबह।” 13 तखन एकाएक ओहि स्‍वर्गदूतक संग असंख्‍य स्‍वर्गदूतक एक झुण्‍ड देखाइ पड़ल, जे परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा कऽ रहल छलाह जे, 14 “सर्वोच्‍च स्‍वर्ग मे परमेश्‍वरक स्‍तुति-गान होनि, और पृथ्‍वी पर ताहि मनुष्‍य सभ केँ शान्‍ति भेटैक जकरा सँ ओ प्रसन्‍न छथिन।” 15 जखन स्‍वर्गदूत सभ ओकरा सभक लग सँ चल गेलाह, तखन चरबाह सभ एक-दोसर केँ कहलक, “अपना सभ चल! बेतलेहम जा कऽ एहि घटना केँ देखि ली जाहि दऽ प्रभु अपना सभ केँ कहबौलनि अछि।” 16 ओ सभ जल्‍दी सँ गेल, आ ओतऽ पहुँचि कऽ मरियम आ यूसुफ केँ और नादि मे राखल बच्‍चा केँ पौलक। 17 बच्‍चा केँ देखि कऽ ओ सभ ओहि बातक विषय मे सभ केँ कहऽ लागल जे बात बच्‍चाक सम्‍बन्‍ध मे स्‍वर्गदूत ओकरा सभ केँ कहने छलथिन। 18 एकरा सभक बात जे सभ सुनलक, से सभ ओहि पर आश्‍चर्य कयलक। 19 मुदा मरियम ई सभ बात अपना मोन मे राखि कऽ ओहि पर विचार करैत रहलीह। 20 चरबाह सभ जे किछु देखने आ सुनने छल, ताहि सभ बातक लेल परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा गबैत घूमि गेल। जहिना स्‍वर्गदूत ओकरा सभ केँ कहने छलथिन, ठीक ओहिना सभ बात ओकरा सभ केँ भेटलो छलैक। 21 आठम दिन बालक केँ खतनाक विधि करबाक समय मे हुनकर नाम यीशु राखल गेलनि, जे नाम मायक गर्भ मे अयबा सँ पहिने स्‍वर्गदूत द्वारा राखल गेल छलनि। 22 मूसाक धर्म-नियमक अनुसार हुनका सभक शुद्धीकरणक दिन जखन आबि गेलनि, तँ मरियम आ यूसुफ बच्‍चा केँ प्रभु केँ अर्पित करबाक लेल यरूशलेम लऽ गेलथिन, 23 जेना कि प्रभुक नियम मे लिखल अछि जे, “प्रत्‍येक जेठ पुत्र प्रभुक मानल जायत।” 24 प्रभुक नियमक अनुसार शुद्धीकरणक वास्‍ते बलि चढ़यबाक लेल सेहो गेलाह, जेना कि लिखल अछि, “एक जोड़ा पउड़की वा परवाक दू बच्‍चा।” 25 यरूशलेम मे सिमियोन नामक एक आदमी छलाह, जे परमेश्‍वरक भय मानऽ वला एक धर्मी लोक छलाह। ओ “इस्राएल केँ शान्‍ति देनिहारक” बाट तकैत छलाह, आ पवित्र आत्‍मा हुनका संग छलथिन। 26 पवित्र आत्‍मा द्वारा हुनका ई कहल गेल छलनि जे, जा धरि अहाँ प्रभुक पठाओल उद्धारकर्ता-मसीह केँ नहि देखि लेबनि, ता धरि अहाँ नहि मरब। 27 पवित्र आत्‍माक प्रेरणा सँ ओ मन्‍दिर मे गेलाह। मरियम-यूसुफ जखन बेटाक लेल धर्म-नियमक विधि सभ पूरा करबाक हेतु बालक यीशु केँ मन्‍दिरक भीतर अनलथिन, 28 तँ सिमियोन हुनका कोरा मे लेलथिन, आ परमेश्‍वरक स्‍तुति कऽ कऽ बजलाह, 29 “हे परम प्रभु, अहाँ जहिना वचन देलहुँ 2 तहिना आब अपना एहि दास केँ शान्‍ति सँ विदा करू, 30 किएक तँ हम अपना आँखि सँ अहाँक उद्धार केँ देखि लेलहुँ, 2 31 जाहि उद्धार केँ अहाँ सभ जातिक लोकक सम्‍मुख प्रस्‍तुत कयलहुँ। 32 हँ, ई उद्धार आन जाति सभ केँ बाट देखौनिहार 2 आ अहाँक निज जाति इस्राएल केँ गौरव देनिहार एक इजोत होयताह।” 33 बच्‍चाक माय-बाबू सिमियोनक एहि कथन सँ चकित भेलाह। 34 तखन सिमियोन हुनका सभ केँ आशीर्वाद देलथिन आ बच्‍चाक माय मरियम केँ कहलथिन, “ई बच्‍चा परमेश्‍वरक दिस संकेत करऽ वला चिन्‍ह होयबाक लेल चुनल गेल छथि। बहुत लोक हिनकर विरोध करत। अहूँक हृदय तरुआरि सँ बेधल जायत। हिनका कारणेँ इस्राएलक बहुत गोटेक पतन आ उत्‍थान होयतैक, और एहि तरहेँ बहुत लोकक असली मनोभावना प्रगट कयल जयतैक।” 36 ओतऽ हन्‍नाह नामक परमेश्‍वरक एक बड्ड बुढ़ि प्रवक्‍तिनि सेहो छलीह, जे आशेर-कुलक फनुएलक बेटी छलीह। विवाहक बाद ओ सात वर्ष धरि सुहागिन रहलीह, 37 तकरा बाद विधवा भऽ गेलीह, और आब ओ चौरासी वर्षक छलीह। ओ मन्‍दिर केँ नहि छोड़ि कऽ दिन-राति उपास आ प्रार्थनाक संग परमेश्‍वरक सेवा मे लागल रहैत छलीह। 38 ठीक ओही क्षण मरियम और यूसुफ लग आबि कऽ ओ परमेश्‍वरक धन्‍यवाद देबऽ लगलीह आ जे लोक सभ यरूशलेमक छुटकाराक बाट ताकि रहल छल, तकरा सभ सँ बच्‍चाक विषय मे बात करऽ लगलीह। 39 मरियम आ यूसुफ प्रभुक धर्म-नियमक अनुसार जे करबाक छलनि से सभ पूरा कऽ कऽ गलील प्रदेश मे अपन नगर नासरत घूमि अयलाह। 40 बच्‍चा बढ़ि कऽ बलिष्‍ठ आ नीक बुद्धि सँ परिपूर्ण होइत गेलाह, और हुनका पर परमेश्‍वरक आशीर्वाद छलनि। 41 यीशुक माय-बाबू प्रत्‍येक साल फसह-पाबनिक समय मे यरूशलेम जाइत छलाह। 42 यीशु जखन बारह वर्षक छलाह तँ ओ सभ आने बेर जकाँ पाबनि मनयबाक लेल यरूशलेम गेलाह। 43 पूरा पाबनि बिति गेला पर जखन ओ सभ विदा भेलाह तँ बालक यीशु यरूशलेमे मे रहि गेलाह, मुदा ई बात हुनकर माय-बाबू केँ नहि बुझल छलनि। 44 ओ सभ ई बुझि जे यीशु यात्री सभ मे कतौ होयताह एक दिनक रस्‍ता आगाँ बढ़ि गेलाह। तखन ओ सभ अपना सम्‍बन्‍धी आ संगी-साथी सभ मे हुनकर खोजबीन करऽ लगलथिन। 45 मुदा ओ जखन नहि भेटलथिन तँ ओ सभ हुनका तकबाक लेल फेर यरूशलेम गेलाह। 46 तेसर दिन यीशु हुनका सभ केँ मन्‍दिर मे धर्मगुरु सभक बीच बैसल, हुनका सभक बात सुनैत आ हुनका सभ सँ प्रश्‍न करैत, भेटलथिन। 47 जे सभ यीशुक बात सुनलथिन, से सभ हुनकर बुद्धि और उत्तर सभ सँ चकित छलाह। 48 यीशु केँ ओतऽ देखि कऽ हुनकर माय-बाबू आश्‍चर्यित भेलाह। हुनकर माय कहलथिन, “बौआ, हमरा सभक संग एना किएक कयलह? देखह, तोहर बाबूजी आ हम तोरा तकैत-तकैत परेसान भऽ गेल छलहुँ।” 49 ओ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ हमरा तकैत किएक छलहुँ? अहाँ सभ केँ नहि बुझल छल जे हमरा अपना पिताक घर मे होयब आवश्‍यक अछि?” 50 मुदा ओ सभ हुनकर कहबाक अर्थ नहि बुझि सकलाह। 51 तखन ओ हुनका सभक संग नासरत घूमि अयलाह, आ हुनकर सभक कहल मे रहलाह। हुनकर माय ई सभ बात अपना मोन मे राखि लेलनि। 52 यीशु बुद्धि आ शरीर मे बढ़ैत गेलाह, और परमेश्‍वर आ लोक दूनू हुनका सँ प्रसन्‍न रहलथिन।

Luke 3

1 कैसर तिबिरियुसक शासन-कालक पन्‍द्रहम वर्ष मे जकरयाहक पुत्र यूहन्‍ना लग निर्जन क्षेत्र मे परमेश्‍वरक दिस सँ सम्‍बाद अयलनि। ओहि समय मे पुन्‍तियुस पिलातुस यहूदिया प्रदेशक राज्‍यपाल छलाह, गलील प्रदेशक शासक हेरोद छलाह, इतूरिया आ त्रखोनीतिस क्षेत्रक शासक हुनकर भाय फिलिपुस और अबिलेन क्षेत्रक शासक लुसानियास छलाह। महापुरोहितक पद पर छलाह हन्‍ना और काइफा। यूहन्‍ना लग परमेश्‍वरक सम्‍बाद एही समय मे अयलनि। 3 ओ यरदन नदीक लग-पासक पूरा इलाका मे घूमि-घूमि कऽ प्रचार करऽ लगलाह जे, “पापक क्षमा पयबाक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करू और बपतिस्‍मा लिअ,” 4 जेना परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक पुस्‍तक मे लिखल अछि जे, “निर्जन क्षेत्र मे केओ जोर सँ आवाज दऽ रहल अछि— ‘प्रभुक लेल मार्ग तैयार करू, हुनका लेल सोझ बाट बनाउ। 5 प्रत्‍येक गहींर भाग भरि देल जायत, प्रत्‍येक ऊँच भाग आ पहाड़ नीच कयल जायत, घुमान बाट सोझ, और उबर-खाबड़ बाट समतल कयल जायत। 6 सभ मनुष्‍य परमेश्‍वर द्वारा प्रदान कयल उद्धार केँ देखत।’” 7 लोकक भीड़ सभ यूहन्‍ना सँ बपतिस्‍मा लेबऽ अबैत रहैत छल आ ओ ओकरा सभ केँ कहैत छलथिन, “है साँपक सन्‍तान सभ! परमेश्‍वरक आबऽ वला क्रोध सँ बचबाक लेल तोरा सभ केँ के सिखौलकह? 8 तोँ सभ जँ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयने छह, तँ तकर प्रमाण अपना व्‍यवहार द्वारा देखाबह। और अपना मोन मे एना सोचि निश्‍चिन्‍त नहि रहह जे, हमर सभक कुल-पिता अब्राहम छथि, कारण, हम तोरा सभ केँ कहैत छिअह जे परमेश्‍वर एहि पाथर सभ सँ अब्राहमक लेल सन्‍तान उत्‍पन्‍न कऽ सकैत छथि। 9 गाछक जड़ि मे कुड़हरि रखा गेल अछि। जे गाछ नीक फल नहि दैत अछि से काटल आ आगि मे फेकल जायत।” 10 एहि पर लोक सभ यूहन्‍ना सँ पुछऽ लागल, “तँ हम सभ की करू?” 11 ओ उत्तर देलथिन, “जकरा दूटा कुर्ता होइक से एकटा तकरा देअओ जकरा नहि छैक, और जकरा लग भोजनक वस्‍तु होइक सेहो एहिना करओ।” 12 कर असूल करऽ वला सभ सेहो बपतिस्‍मा लेबऽ आयल आ यूहन्‍ना सँ पुछलकनि, “यौ गुरुजी, हम सभ की करू?” 13 ओ उत्तर देलथिन, “जतबा कर निश्‍चित कयल गेल अछि ताहि सँ बेसी नहि लैह।” 14 एहि पर सैनिक सभ पुछलकनि, “आ हम सभ की करू?” ओ कहलथिन, “ककरो सँ बलजोरी पाइ नहि लैह, आ ने ककरो पर झुट्ठे दोष लगाबह। अपना दरमाहा सँ सन्‍तुष्‍ट रहह।” 15 जनता मे एकटा बड़का उत्‍सुकता आबि गेल छलैक, आ सभ मोने-मोन यूहन्‍नाक बारे मे सोचि रहल छल जे, कहीं ई उद्धारकर्ता-मसीह तँ नहि छथि? 16 यूहन्‍ना सभ केँ उत्तर दैत छलथिन, “हम तोरा सभ केँ पानि सँ बपतिस्‍मा दैत छिअह। मुदा हमरा सँ शक्‍तिशाली एक गोटे आबि रहल छथि, जिनकर जुत्तो खोलऽ जोगरक हम नहि छी। ओ तोरा सभ केँ पवित्र आत्‍मा और आगि सँ बपतिस्‍मा देथुन। 17 ओ अपन खरिहानक अन्‍न साफ करबाक लेल हाथ मे सूप लेने छथि। ओ गहुम केँ बखारी मे राखि लेताह, मुदा भुस्‍सा केँ ओहि आगि मे जरौताह जे कहियो नहि मिझायत।” 18 ई बात और आरो अन्‍य तरहक बहुत बातक द्वारा यूहन्‍ना लोक सभ केँ बुझा-सुझा कऽ शुभ समाचार सुनबैत रहलथिन। 19 मुदा जखन यूहन्‍ना शासक हेरोद पर भायक घरवाली हेरोदियासक कारणेँ, तथा आरो कुकर्म सभक कारणेँ जे ओ कयने छलाह, दोष लगौलथिन, 20 तँ हेरोद अपना कुकर्म मे एकटा इहो कुकर्म जोड़ि लेलनि जे, ओ यूहन्‍ना केँ जहल मे बन्‍द करबा देलथिन। 21 सभ लोक केँ बपतिस्‍मा लेलाक बाद यीशुओ बपतिस्‍मा लेलनि। बपतिस्‍माक बाद जखन ओ प्रार्थना कऽ रहल छलाह तँ स्‍वर्ग खुजल 22 आ पवित्र आत्‍मा परबाक रूप मे हुनका ऊपर उतरि अयलाह, और स्‍वर्ग सँ आवाज आयल जे, “अहाँ हमर प्रिय पुत्र छी। अहाँ सँ हम बहुत प्रसन्‍न छी।” 23 यीशु जखन अपन काज शुरू कयलनि तँ लगभग तीस वर्षक छलाह। एना मानल जाइत छल जे ओ यूसुफक पुत्र छलाह। यूसुफ एलीक पुत्र छलाह, 24 एली मतातक पुत्र छलाह, मतात लेवीक पुत्र छलाह, लेवी मलकीक पुत्र छलाह, मलकी यन्‍नाक पुत्र छलाह, यन्‍ना यूसुफक पुत्र छलाह, 25 यूसुफ मततियाक पुत्र छलाह, मततिया आमोसक पुत्र छलाह, आमोस नहूमक पुत्र छलाह, नहूम एसलीक पुत्र छलाह, एसली नागैक पुत्र छलाह, 26 नागै मातक पुत्र छलाह, मात मततियाक पुत्र छलाह, मततिया शिमीक पुत्र छलाह, शिमी योसेखक पुत्र छलाह, योसेख योदाहक पुत्र छलाह, 27 योदाह योहनानक पुत्र छलाह, योहनान रेसाक पुत्र छलाह, रेसा जरुब्‍बाबेलक पुत्र छलाह, जरुब्‍बाबेल शालतिएलक पुत्र छलाह, शालतिएल नेरीक पुत्र छलाह, 28 नेरी मलकीक पुत्र छलाह, मलकी अद्दीक पुत्र छलाह, अद्दी कोसामक पुत्र छलाह, कोसाम इलमोदामक पुत्र छलाह, इलमोदाम एरक पुत्र छलाह, 29 एर यहोशूक पुत्र छलाह, यहोशू एलिएजरक पुत्र छलाह, एलिएजर योरीमक पुत्र छलाह, योरीम मतातक पुत्र छलाह, मतात लेवीक पुत्र छलाह, 30 लेवी सिमियोनक पुत्र छलाह, सिमियोन यहूदाक पुत्र छलाह, यहूदा यूसुफक पुत्र छलाह, यूसुफ योनामक पुत्र छलाह, योनाम एलयाकीमक पुत्र छलाह, 31 एलयाकीम मलेआहक पुत्र छलाह, मलेआह मिन्‍नाहक पुत्र छलाह, मिन्‍नाह मताताक पुत्र छलाह, मताता नातानक पुत्र छलाह, नातान दाऊदक पुत्र छलाह, 32 दाऊद यिशयक पुत्र छलाह, यिशय ओबेदक पुत्र छलाह, ओबेद बोअजक पुत्र छलाह, बोअज सलमोनक पुत्र छलाह, सलमोन नाशोनक पुत्र छलाह, 33 नाशोन अमीनादाबक पुत्र छलाह, अमीनादाब अदमीनक पुत्र छलाह, अदमीन अरनीक पुत्र छलाह, अरनी हेस्रोनक पुत्र छलाह, हेस्रोन पेरसक पुत्र छलाह, पेरस यहूदाक पुत्र छलाह, 34 यहूदा याकूबक पुत्र छलाह, याकूब इसहाकक पुत्र छलाह, इसहाक अब्राहमक पुत्र छलाह, अब्राहम तेरहक पुत्र छलाह, तेरह नाहोरक पुत्र छलाह, 35 नाहोर सरूगक पुत्र छलाह, सरूग रऊक पुत्र छलाह, रऊ पेलेगक पुत्र छलाह, पेलेग एबेरक पुत्र छलाह, एबेर शेलहक पुत्र छलाह, 36 शेलह केनानक पुत्र छलाह, केनान अर्पक्षदक पुत्र छलाह, अर्पक्षद शेमक पुत्र छलाह, शेम नूहक पुत्र छलाह, नूह लामेकक पुत्र छलाह, 37 लामेक मथूशेलहक पुत्र छलाह, मथूशेलह हनोकक पुत्र छलाह, हनोक यारेदक पुत्र छलाह, यारेद महलालेलक पुत्र छलाह, महलालेल केनानक पुत्र छलाह, 38 केनान एनोशक पुत्र छलाह, एनोश शेतक पुत्र छलाह, शेत आदमक पुत्र छलाह, और आदम परमेश्‍वरक पुत्र छलाह।

Luke 4

1 यीशु पवित्र आत्‍मा सँ परिपूर्ण भऽ यरदन नदी सँ घुमलाह। तखन पवित्र आत्‍मा हुनका निर्जन क्षेत्र मे लऽ गेलथिन, 2 जतऽ चालिस दिन धरि शैतान हुनका सँ पाप करयबाक प्रयत्‍न कयलकनि। एहि चालिस दिन मे ओ किछु नहि खयलनि, और एतेक दिन बितला पर हुनका बहुत भूख लागल छलनि। 3 तँ शैतान हुनका कहलकनि, “तोँ जँ परमेश्‍वरक पुत्र छह तँ एहि पाथर केँ रोटी बनि जयबाक आज्ञा दहक।” 4 यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, मनुष्‍य मात्र रोटिए सँ नहि जीवित रहत। “ 5 तखन शैतान हुनका ऊँच स्‍थान मे लऽ जा कऽ एके क्षण मे संसारक सभ राज्‍य देखा देलकनि 6 आ कहलकनि, “हम तोरा एहि सभ राज्‍यक अधिकार आ वैभव दऽ देबह, कारण ई सभ हमरे जिम्‍मा मे दऽ देल गेल अछि, आ हम जकरा ककरो चाहबैक तकरा दऽ सकैत छिऐक। 7 तेँ तोँ जँ हमर उपासना करबह तँ ई सभ तोहर भऽ गेलह।” 8 यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, ‘तोँ अपना प्रभु-परमेश्‍वरेक उपासना करहुन और मात्र हुनके सेवा करहुन।’” 9 शैतान हुनका यरूशलेम लऽ जा कऽ मन्‍दिरक सभ सँ ऊँच स्‍थान पर ठाढ़ कऽ कऽ कहलकनि, “तोँ जँ परमेश्‍वरक पुत्र छह, तँ एतऽ सँ नीचाँ कुदि जाह, 10 कारण धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘परमेश्‍वर तोहर रक्षा करबाक लेल स्‍वर्गदूत सभ केँ आज्ञा देथिन, 11 और ओ सभ अपना कोरा मे तोरा लोकि लेथुन, जाहि सँ पयर मे पाथर सँ चोट नहि लगतह।’” 12 यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्‍त्रक कथन इहो अछि, ‘अपन प्रभु-परमेश्‍वरक जाँच नहि करहुन।’” 13 शैतान जखन हुनका सँ सभ ढंग सँ पाप करयबाक प्रयत्‍न कऽ चुकल तँ ओ ओतऽ सँ चल गेल आ दोसर उपयुक्‍त अवसरक ताक मे रहऽ लागल। 14 यीशु गलील प्रदेश मे घूमि कऽ चल अयलाह, और पवित्र आत्‍माक सामर्थ्‍य हुनका संग छलनि। ओहि क्षेत्रक सभ ठाम हुनकर चर्चा पसरि गेलनि। 15 ओ सभाघर सभ मे शिक्षा दैत छलथिन, आ सभ लोक हुनकर प्रशंसा करैत छलनि। 16 एक दिन यीशु नासरत नगर अयलाह, जतऽ हुनकर पालन-पोषण भेल छलनि। ओ अपना आदतक अनुसार विश्राम-दिन सभाघर मे गेलाह। ओ धर्मशास्‍त्रक पाठ पढ़बाक लेल ठाढ़ भेलाह, 17 तँ हुनका परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक पुस्‍तक देल गेलनि। ओ पुस्‍तक खोलि कऽ ओहि ठाम सँ पढ़ऽ लगलाह जतऽ लिखल अछि जे, 18 “प्रभुक आत्‍मा हमरा पर छथि; 2 किएक तँ ओ गरीब सभ केँ शुभ समाचार सुनयबाक लेल 2 हमर अभिषेक कयने छथि। ओ हमरा पठौलनि अछि जे हम कैदी सभक लेल मुक्‍तिक घोषणा करी, 2 आन्‍हर सभ केँ कहिऐक जे, ‘तोँ सभ आब देखि सकैत छह,’ 2 सताओल लोक सभ केँ छुटकारा दिआबी 19 और एहि बातक घोषणा करी जे, प्रभुक ओ युग आबि गेल अछि जाहि मे ओ अपन करुणा प्रगट करताह।” 20 ई पाठ पढ़लाक बाद यीशु पुस्‍तक बन्‍द कऽ कऽ सभाघरक सेवक केँ दऽ देलथिन आ बैसि गेलाह। सभ केओ एकटक लगा कऽ हुनका दिस ताकि रहल छल। 21 तखन ओ बजलाह, “आइ धर्मशास्‍त्रक ई लेख अहाँ सभक समक्ष मे पूरा भऽ गेल।” 22 सभ केओ हुनकर प्रशंसा कयलकनि और आश्‍चर्यित भेल जे ओ एतेक नीक-नीक बात सभ कहैत छथि। सभ कहैत छल, “की ई यूसुफेक बेटा नहि छथि?” 23 यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ अवश्‍य हमरा ई कहबी सुनायब जे, ‘यौ वैद्यजी, पहिने अपना केँ नीक करू!’ आ ई कहब जे ‘एतौ अपना गाम मे ओ काज सभ करू जकरा बारे मे सुनैत छी जे अहाँ कफरनहूम मे कयलहुँ।’ 24 हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, परमेश्‍वरक कोनो प्रवक्‍ता केँ अपना गाम मे स्‍वीकार नहि कयल जाइत छैक। 25 हमर बात सुनू! अहूँ सभ तँ जनिते छी जे एलियाहक समय मे जखन साढ़े तीन वर्ष धरि वर्षा नहि भेल आ सौंसे देश मे भयंकर अकाल पड़ि गेल, तँ ओहि समय मे इस्राएल मे बहुते विधवा रहय, 26 मुदा परमेश्‍वर एलियाह केँ ओकरा सभ मे सँ ककरो लग मदति देबाक लेल वा लेबाक लेल नहि पठौलथिन—ओ हुनका सीदोन क्षेत्रक सारफत गाम मे रहऽ वाली एकटा विधवाक ओहिठाम पठौलथिन। 27 फेर परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता एलीशाक समय मे इस्राएल मे बहुते कुष्‍ठ-रोगी छल, मुदा ओकरा सभ मे सँ ककरो नीक नहि कयल गेलैक—मात्र सीरिया प्रदेशक निवासी नामान केँ।” 28 ई बात सुनि सभाघरक लोक सभ तिलमिला उठल। 29 ओ सभ उठि कऽ यीशु केँ नगर सँ बाहर अनलकनि, और जाहि पहाड़ पर ओ नगर बसल छल, तकर कनगी पर लऽ गेलनि जे एहि ठाम सँ एकरा नीचाँ धकेलि दी। 30 मुदा ओ ओहि भीड़ मे सँ बहरा कऽ चल जाइत रहलाह। 31 तखन यीशु कफरनहूम गेलाह, जे गलील प्रदेशक एक नगर अछि, और विश्राम-दिन मे लोक सभ केँ उपदेश देबऽ लगलथिन। 32 हुनकर शिक्षा सँ लोक सभ चकित भेल, कारण, ओ अधिकारक संग शिक्षा दैत छलाह। 33 सभाघर मे एक आदमी छल जे दुष्‍टात्‍मा, अर्थात्‌ अशुद्ध आत्‍मा, सँ ग्रसित छल। ओ जोर सँ चिकरि कऽ बाजल, 34 “यौ! नासरतक निवासी यीशु! अहाँ केँ हमरा सभ सँ कोन काज? हमरा सभ केँ नष्‍ट करऽ अयलहुँ की? हम अहाँ केँ चिन्‍हैत छी। अहाँ परमेश्‍वरक पवित्र दूत छी।” 35 यीशु दुष्‍टात्‍मा केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “चुप रह! तोँ एकरा मे सँ निकल!” तखन ओ दुष्‍टात्‍मा ओहि आदमी केँ सभक सामने मे पटकि देलकैक आ बिनु हानि पहुँचौने ओकरा मे सँ निकलि गेल। 36 एहि पर सभ लोक चकित होइत एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई केहन उपदेश अछि? ई आदमी शक्‍ति आ अधिकारक संग दुष्‍टात्‍मा सभ केँ आज्ञा दैत छथि और ओ सभ निकलि जाइत अछि!” 37 एहि सभ सँ हुनकर चर्चा ओहि क्षेत्रक चारू कात पसरि गेलनि। 38 यीशु सभाघर सँ बाहर भऽ कऽ सिमोनक ओहिठाम गेलाह। सिमोनक सासु केँ बहुत जोर बोखार छलनि। लोक सभ हुनका मदति करबाक लेल यीशु सँ विनती कयलकनि। 39 सिमोनक सासुक लग मे जा कऽ यीशु बोखार केँ उतरि जयबाक आज्ञा देलथिन, तँ हुनकर बोखार उतरि गेलनि। ओ तुरत उठि कऽ हिनका सभक सेवा-सत्‍कार करऽ मे लागि गेलीह। 40 सूर्यास्‍त भेला पर जकरा-जकरा ओहिठाम विभिन्‍न बिमारी सँ पीड़ित लोक सभ छलैक, से सभ ओकरा सभ केँ यीशु लग आनऽ लागल। प्रत्‍येक पर हाथ राखि कऽ ओ ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन। 41 बहुत लोक मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ सेहो एना चिकरि कऽ कहैत निकलि आयल जे, “अहाँ परमेश्‍वरक पुत्र छी!” मुदा ओ ओहि दुष्‍टात्‍मा सभ केँ डँटलथिन आ बाजऽ नहि देलथिन, कारण ओ सभ जनैत छल जे ई उद्धारकर्ता-मसीह छथि। 42 भोर भेला पर यीशु कोनो एकान्‍त स्‍थान मे चल गेलाह। लोक सभ तकैत-तकैत हुनका लग पहुँचल आ हुनका रोकलकनि जे, अहाँ हमरा सभ केँ छोड़ि कऽ नहि जाउ। 43 मुदा ओ उत्तर देलथिन, “हमरा तँ परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार दोसरो-दोसरो नगर मे सुनयबाक अछि, किएक तँ हम एही लेल पठाओल गेल छी।” 44 अतः ओ यहूदिया प्रदेशक सभाघर सभ मे प्रचारक काज करैत रहलाह।

Luke 5

1 एक दिन यीशु जखन गन्‍नेसरत झीलक कछेर पर ठाढ़ छलाह, आ लोक सभक भीड़ परमेश्‍वरक वचन सुनबाक लेल हुनका चारू कात सँ ठेलम-ठेल करैत घेरने छलनि, 2 तँ हुनकर नजरि कछेर पर लागल दूटा नाव पर पड़लनि। मछबार सभ ओतऽ नाव छोड़ि कऽ अपन जाल धोइत छल। 3 ओहि मे एकटा नाव जे सिमोनक छलनि, यीशु ताहि पर चढ़ि कऽ सिमोन केँ कहलथिन जे, नाव केँ कछेर सँ हटा कऽ कनेक पानि मे लऽ जा कऽ ठाढ़ करू। तखन नाव पर बैसि कऽ यीशु ओही पर सँ लोक सभ केँ उपदेश देबऽ लगलथिन। 4 उपदेश समाप्‍त भेला पर यीशु सिमोन केँ कहलथिन, “नाव केँ गहींर पानि मे लऽ चलू, आ माछ पकड़बाक लेल जाल खसाउ।” 5 सिमोन कहलथिन, “मालिक, हम सभ राति भरि परिश्रम कयलहुँ और एकोटा माछ नहि पकड़ायल। मुदा अहाँ जँ कहैत छी तँ हम फेर जाल खसायब।” 6 ओ सभ जाल उतारलनि तँ ततेक माछ पड़लनि जे जाल फाटऽ लगलनि। 7 ई देखि ओ सभ अपना संगी सभ, जे दोसर नाव मे छलनि, तिनका सभ केँ संकेत कयलथिन जे, आउ, हमर सभक सहायता करू। ओ सभ आबि कऽ दूनू नाव केँ माछ सँ ततेक भरि लेलनि जे आब नाव डुबऽ लागल। 8 सिमोन पत्रुस ई देखि यीशुक पयर पर खसि कऽ कहलथिन, “यौ प्रभु, हमरा लग सँ चल जाउ, किएक तँ हम पापी आदमी छी।” 9 सिमोन और हुनकर संगी सभ एतेक माछ केँ पकड़यला सँ चकित भऽ गेल छलाह। 10 तहिना जबदीक पुत्र याकूब और यूहन्‍ना, जे सिमोनक हिस्‍सेदार छलथिन, सेहो चकित भेलाह। एहि पर यीशु सिमोन केँ कहलथिन, “डेराउ नहि! आब अहाँ मनुष्‍य सभ केँ पकड़ब।” 11 ओ सभ नाव केँ कछेर पर घीचि कऽ अनलनि, और सभ किछु ओतहि छोड़ि कऽ हुनका संग लागि गेलाह। 12 एक बेर जखन यीशु कोनो नगर मे छलाह, तँ ओतऽ एक आदमी छल जकरा सौंसे देह मे कुष्‍ठ-रोगक घाव भऽ गेल छलैक। यीशु केँ देखि कऽ ई आदमी हुनका सामने मे मुँह भरे खसि कऽ विनती करऽ लगलनि जे, “यौ प्रभु! अहाँ जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।” 13 यीशु अपन हाथ बढ़ा ओकरा छुबि कऽ कहलथिन, “हम अवश्‍य चाहैत छिअह! तोँ शुद्ध भऽ जाह!” ओकर कुष्‍ठ-रोग तुरत्ते छुटि गेलैक। 14 यीशु ओकरा आदेश देलथिन, “ई बात ककरो नहि कहिअहक, मुदा जा कऽ अपना केँ पुरोहित केँ देखाबह, और शुद्ध होयबाक विषय मे मूसाक लिखल नियमक अनुसार, जे बलिदान चढ़यबाक अछि से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।” 15 तैयो यीशुक चर्चा आरो बहुत पसरैत गेलनि, और हाँजक-हाँज लोक सभ हुनकर उपदेश सुनबाक लेल आ अपन बिमारी सँ स्‍वस्‍थ होयबाक लेल हुनका लग अबैत रहल। 16 मुदा यीशु एकान्‍त स्‍थान मे प्रार्थना करबाक लेल निकलि जाइत छलाह। 17 एक दिन यीशु जखन उपदेश दऽ रहल छलाह, तँ हुनका लग मे फरिसी आ धर्मशिक्षक सभ बैसल छलनि, जे सभ गलील प्रदेशक सभ गाम सँ, यहूदिया प्रदेश सँ आ यरूशलेम सँ आयल छलाह। रोगी सभ केँ स्‍वस्‍थ करबाक लेल प्रभु-परमेश्‍वरक सामर्थ्‍य हुनका संग छलनि। 18 किछु लोक एकटा लकवा मारल आदमी केँ खाट पर लदने आयल, और ओकरा यीशुक सामने मे रखबाक लेल घरक भीतर लऽ जयबाक कोशिश कयलक। 19 मुदा भीड़क कारणेँ जखन कोनो रस्‍ता नहि भेटलैक, तँ ओ सभ चार पर चढ़ि गेल, आ खपड़ा हटा कऽ ओकरा खाट सहित लोकक बीच मे यीशुक ठीक सामने मे उतारि देलकैक। 20 यीशु ओकर सभक विश्‍वास देखि कऽ कहलथिन, “हौ भाइ, तोहर पाप माफ भेलह।” 21 एहि पर फरिसी आ धर्मशिक्षक सभ अपना मोन मे सोचऽ लगलाह जे, “ई के अछि जे परमेश्‍वरक निन्‍दा कऽ रहल अछि? परमेश्‍वर केँ छोड़ि आओर के पाप केँ माफ कऽ सकैत अछि?” 22 हुनकर सभक मोनक बात बुझि यीशु पुछलथिन, “अहाँ सभ अपना-अपना मोन मे एहन बात किएक सोचैत छी? 23 आसान की अछि—ई कहब जे ‘तोहर पाप माफ भेलह,’ वा ई जे, ‘उठि कऽ चलह-फिरह’? 24 मुदा जाहि सँ अहाँ सभ ई बात बुझि जाइ जे मनुष्‍य-पुत्र केँ पृथ्‍वी पर पाप केँ माफ करबाक अधिकार छनि, हम एकरा कहैत छी...” तखन ओ लकवा मारल आदमी केँ कहलथिन, “हम तोरा कहैत छिअह, उठह, अपन खाट उठाबह आ घर चल जाह!” 25 ओ तुरत सभक सामने मे ठाढ़ भऽ गेल, और जाहि खाट पर ओ पड़ल रहैत छल, से उठा लेलक आ परमेश्‍वरक स्‍तुति करैत घर चल गेल। 26 सभ लोक केँ बहुत आश्‍चर्य लगलैक। ओ सभ परमेश्‍वरक प्रशंसा करैत आ हुनकर डर मानैत कहऽ लागल, “आइ तँ हम सभ बहुत अद्‌भुत बात सभ देखलहुँ अछि!” 27 तकरबाद यीशु जखन बाहर गेलाह तँ लेवी नामक एक कर असूल कयनिहार केँ कर असूल करऽ वला स्‍थान मे बैसल देखलनि। यीशु कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” 28 लेवी उठलाह और सभ किछु छोड़ि-छाड़ि कऽ हुनका संग विदा भऽ गेलाह। 29 लेवी अपना ओहिठाम यीशुक सत्‍कारक लेल बड़का भोज कयलनि। हुनका सभक संग दोसरो कर असूल करऽ वला सभ आ आरो-आरो बहुत लोक सभ भोजन पर बैसल छलाह। 30 तँ फरिसी आ ओहि पंथक धर्मशिक्षक सभ यीशुक शिष्‍य सभ पर दोष लगबैत कहलथिन, “अहाँ सभ कर असूल करऽ वला आ पापी सभक संग किएक खाइत-पिबैत छी?” 31 यीशु उत्तर देलथिन, “स्‍वस्‍थ लोक केँ वैद्यक आवश्‍यकता नहि होइत छैक, बल्‍कि बिमार लोक केँ। 32 हम धार्मिक सभ केँ नहि, बल्‍कि पापी सभ केँ बजयबाक लेल आयल छी जाहि सँ ओ सभ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करय।” 33 तखन ओ सभ यीशु केँ कहलथिन, “यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ बेर-बेर उपास करैत रहैत छथि आ प्रार्थना मे लागल रहैत छथि, आ तहिना फरिसी सभक शिष्‍य सभ सेहो करैत छथि, मुदा अहाँक शिष्‍य सभ तँ खाइत-पिबैत रहैत अछि।” 34 यीशु उत्तर देलथिन, “जाबत तक वरियातीक संग वर अछि, ताबत तक की वरियाती सँ उपास करा सकैत छी? नहि! 35 मुदा ओ समय आओत जहिया वर ओकरा सभक बीच सँ हटा लेल जायत; ओ सभ तहिये उपास करत।” 36 तखन यीशु हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दैत कहलथिन, “केओ नयाँ कपड़ा मे सँ फाड़ि कऽ पुरान कपड़ा पर चेफरी नहि लगबैत अछि। एना जँ करत, तँ नयाँ कपड़ा तँ फाटिए गेल, आ पुरान कपड़ा पर नयाँ कपड़ाक चेफरी मिलबो नहि करत। 37 तहिना केओ नव दारू पुरान चमड़ाक थैली मे नहि रखैत अछि। कारण, एना जँ करत, तँ नव दारू ओहि थैली केँ फाड़ि देत, दारू बहि जायत, आ थैलिओ नष्‍ट भऽ जायत। 38 नहि! नव दारू नये थैली मे राखऽ पड़ैत अछि। 39 आ पुरान दारू पिला पर नव दारू पिबाक ककरो इच्‍छा नहि होइत छैक। ओ कहैत अछि जे, पुराने नीक अछि।”

Luke 6

1 कोनो विश्राम-दिन कऽ यीशु खेत दऽ कऽ जा रहल छलाह; हुनकर शिष्‍य सभ अन्‍नक बालि तोड़ि हाथ सँ मीड़ि-मीड़ि कऽ खाय लगलाह। 2 एहि पर किछु फरिसी सभ कहलथिन, “जे काज विश्राम-दिन मे करब धर्म-नियमक अनुसार मना अछि, से अहाँ सभ किएक कऽ रहल छी?” 3 यीशु उत्तर देलथिन, “की अहाँ सभ कहियो नहि पढ़ने छी जे, दाऊद आ हुनकर संगी सभ जखन भुखायल छलाह तँ ओ की कयलनि? 4 ओ परमेश्‍वरक भवन मे जा कऽ परमेश्‍वर केँ चढ़ाओल रोटी लऽ लेलनि। जाहि रोटी केँ खयबाक अधिकार पुरोहित केँ छोड़ि आरो ककरो नहि छलैक, तकरा ओ अपनो खयलनि आ संगियो सभ केँ देलथिन।” 5 तकरबाद यीशु इहो कहलथिन, “मनुष्‍य-पुत्र विश्रामो-दिनक मालिक छथि।” 6 एक अन्‍य विश्राम-दिन यीशु सभाघर मे जा कऽ उपदेश देबऽ लगलाह। ओहिठाम एक आदमी छल जकर दहिना हाथ सुखायल छलैक। 7 फरिसी आ धर्मशिक्षक सभ यीशु पर दोष लगयबाक आधारक लेल हुनका पर नजरि गड़ौने छलाह जे, देखी ओ विश्राम-दिन मे ककरो स्‍वस्‍थ करताह वा नहि। 8 यीशु हुनकर सभक विचार बुझि गेलाह। तेँ ओ सुखल हाथ वला आदमी केँ कहलथिन, “उठह! सभक आगाँ मे ठाढ़ होअह।” ओ उठि कऽ ठाढ़ भेल। 9 तखन यीशु लोक सभ केँ कहलथिन, “एकटा बात हम अहाँ सभ सँ पुछैत छी। विश्राम-दिन मे धर्म-नियमक अनुसार की करब उचित होयत—नीक वा अधलाह? ककरो जीवनक रक्षा करब वा नष्‍ट करब?” 10 तखन ओ चारू दिस सभ पर नजरि दऽ कऽ ओहि आदमी केँ कहलथिन, “अपन हाथ बढ़ाबह।” ओ हाथ बढ़ौलक, आ ओकर हाथ एकदम ठीक भऽ गेलैक। 11 मुदा एहि पर फरिसी आ धर्मशिक्षक सभ क्रोध सँ भरि गेलाह और एक-दोसराक संग विचारऽ लगलाह जे अपना सभ यीशु केँ की करी? 12 ओहि समय मे एक दिन यीशु प्रार्थना करबाक लेल पहाड़ पर गेलाह, आ भरि राति परमेश्‍वर सँ प्रार्थना कयलनि। 13 भोर भेला पर ओ अपना शिष्‍य सभ केँ अपना लग बजौलनि और ओहि मे सँ बारह गोटे केँ चुनि कऽ हुनका सभ केँ अपन “दूत” कहलथिन। 14 ओ लोकनि यैह सभ छलाह—सिमोन, जिनका ओ “पत्रुस” नाम देलथिन, हुनकर भाय अन्‍द्रेयास, याकूब और यूहन्‍ना, फिलिपुस, बरतुल्‍मै, 15 मत्ती, थोमा, अल्‍फेयासक पुत्र याकूब, सिमोन, जे “देश-भक्‍त” कहबैत छलाह, 16 याकूबक पुत्र यहूदा, और यहूदा इस्‍करियोती जे बाद मे विश्‍वासघाती भऽ गेलनि। 17 यीशु हिनका सभक संग पहाड़ पर सँ नीचाँ आबि एक समतल स्‍थान मे ठाढ़ भेलाह। ओतऽ हुनकर शिष्‍यक विशाल समूह और आन-आन ठामक लोक सभक बड़का भीड़ छल। ओ सभ सौंसे यहूदिया प्रदेश सँ, यरूशलेम सँ, और समुद्रक कछेर पर बसल सूर आ सीदोन नगर सँ हुनकर उपदेश सुनबाक लेल और अपना बिमारी सँ स्‍वस्‍थ होयबाक लेल ओतऽ आयल छल। 18 दुष्‍टात्‍मा सँ पीड़ित लोक सभ सेहो ठीक कयल जाइत छल। 19 सभ केओ यीशु केँ छुबाक कोशिश करैत छल, कारण, हुनका मे सँ जे सामर्थ्‍य बहराइत छल, ताहि सँ सभ लोक स्‍वस्‍थ होइत छल। 20 यीशु अपना शिष्‍य सभक दिस तकैत कहऽ लगलथिन, “धन्‍य छी अहाँ सभ, जिनका किछु नहि अछि, 2 किएक तँ परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभक अछि। 21 धन्‍य छी अहाँ सभ, जे एखन भूखल छी, 2 किएक तँ अहाँ सभ तृप्‍त कयल जायब। धन्‍य छी अहाँ सभ, जे एखन कनैत छी, 2 किएक तँ अहाँ सभ हँसब। 22 “धन्‍य छी अहाँ सभ जखन लोक सभ मनुष्‍य-पुत्रक कारणेँ अहाँ सभ सँ घृणा करत, अपना समाज सँ बारि देत, अहाँ सभ केँ अपमानित करत, और दुष्‍ट मानि कऽ अहाँ सभक नामो नहि लेत। 23 तहिया अहाँ सभ आनन्‍द मनाउ और खुशी सँ कुदू-फानू, किएक तँ स्‍वर्ग मे अहाँ सभक लेल बड़का इनाम राखल अछि। ठीक एहने व्‍यवहार ओकरा सभक पूर्वज सभ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनिक संग सेहो कयने छलनि। 24 मुदा धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ, जे सम्‍पत्तिशाली छी, 2 किएक तँ अहाँ सभ अपन सभ सुख भोगि लेने छी। 25 धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ, जे एखन तृप्‍त छी, 2 किएक तँ अहाँ सभ भूखल रहब। धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ, जे एखन हँसैत छी, 2 किएक तँ अहाँ सभ शोक मनायब आ कानब। 26 “धिक्‍कार अहाँ सभ केँ, जखन सभ लोक अहाँ सभक प्रशंसा करत, किएक तँ ठीक एहने व्‍यवहार ओकर सभक पूर्वज सभ ताहि लोकक संग सेहो कयने छलैक जे सभ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत छल। 27 “मुदा हम अहाँ सभ केँ, जे हमर बात सुनि रहल छी, कहैत छी जे, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू; जे सभ अहाँ सँ घृणा करैत अछि, तकरा सभक संग भलाइ करू। 28 जे सभ अहाँ केँ सराप दैत अछि, तकरा सभ केँ आशीर्वाद दिऔक। जे सभ अहाँक संग दुर्व्‍यवहार करैत अछि, तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू। 29 जँ केओ अहाँक एक गाल पर थप्‍पड़ मारैत अछि, तँ ओकरा समक्ष दोसरो गाल कऽ दिऔक। जँ केओ अहाँक ओढ़ना छिनैत अछि, तँ अपन कुर्तो ओकरा लेबऽ दिऔक। 30 जे केओ अहाँ सँ किछु माँगय तकरा दिऔक, आ जँ केओ अहाँक कोनो वस्‍तु लऽ लेत तँ ओकरा सँ फेर नहि माँगू। 31 जेहन व्‍यवहार अहाँ चाहैत छी जे लोक अहाँक संग करय, तेहने व्‍यवहार अहूँ लोकक संग करू। 32 “जँ तकरे सभ सँ प्रेम करैत छी जे सभ अहाँ सँ प्रेम करैत अछि, तँ ओहि मे अहाँक प्रशंसाक कोन बात भेल? ‘पापिओ’ सभ तकरा सभ सँ प्रेम करैत अछि जे सभ ओकरा सभ सँ प्रेम करैत छैक। 33 आ जँ अहाँ तकरे सभक भलाइ करैत छी जे सभ अहाँक भलाइ करैत अछि, तँ ओहि मे अहाँक कोन बड़प्‍पन? ‘पापिओ’ सभ तँ एहिना करैत अछि। 34 और जँ अहाँ तकरे सभ केँ पैंच-उधार दैत छी जकरा सँ फेर फिरता पयबाक आशा रखैत छी, तँ ओहि मे अहाँक कोन प्रशंसा? ‘पापिओ’ सभ तँ ई आशा राखि कऽ जे हमरा फेर पूरा भेटि जायत ‘पापी’ सभ केँ पैंच-उधार दैत छैक। 35 नहि! अपना दुश्‍मनो सभ सँ प्रेम करू! ओकरा सभक संग भलाइ करू, और फेर फिरता पयबाक आशा नहि राखि कऽ पैंच-उधार दिऔक। अहाँक इनाम पैघ होयत, और परम-परमेश्‍वरक सन्‍तान ठहरब। कारण, जे सभ धन्‍यवाद देबाक भावना नहि रखैत अछि आ दुष्‍ट अछि, तकरो सभ पर ओ कृपा करैत छथिन। 36 दयालु बनू, जहिना अहाँक पिता दयालु छथि। 37 “दोसराक न्‍याय नहि करू, तँ अहूँक न्‍याय नहि कयल जायत। दोसर केँ दोषी नहि ठहराउ, तँ अहूँ दोषी नहि ठहराओल जायब। माफ करिऔक, तँ अहूँ केँ माफ कयल जायत। 38 दिऔक, तँ अहूँ केँ देल जायत। पूरा-पूरी नाप, दबा-दबा कऽ, हिला-डोला कऽ आ उमड़ा-उमड़ा कऽ अहाँ केँ देल जायत। किएक तँ जाहि नाप सँ अहाँ नपैत छी, ताहि नाप सँ अहूँ केँ देल जायत।” 39 तकरबाद ओ हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दैत कहलथिन, “की एक आन्‍हर दोसर आन्‍हर केँ बाट देखा सकैत अछि? की एहि तरहेँ दूनू खधिया मे नहि खसत? 40 चेला अपना गुरु सँ पैघ नहि होइत अछि, मुदा जखन ओ पूर्ण शिक्षा प्राप्‍त करत तखन अपना गुरु जकाँ बनत। 41 “अहाँ अपन भायक आँखि मेहक काठक कुन्‍नी किएक देखैत छी? की अपना आँखि मेहक ढेंग नहि सुझाइत अछि? 42 अपना भाय केँ अहाँ कोना कहैत छी जे, ‘हौ भाइ, लाबह, हम तोरा आँखि मे सँ ओ कुन्‍नी निकालि दैत छिअह’, जखन कि अपना आँखि मेहक ढेंग नहि देखैत छी? हे पाखण्‍डी! पहिने अपना आँखि मेहक ढेंग निकालि लिअ, तखने अपन भायक आँखि मेहक कुन्‍नी निकालबाक लेल अहाँ ठीक सँ देखि सकब। 43 “नीक गाछ मे खराब फल नहि फड़ैत अछि, आ ने खराब गाछ मे नीक फल। 44 प्रत्‍येक गाछ ओकर अपन फल सँ चिन्‍हल जाइत अछि। लोक काँटक गाछ सँ अंजीर-फल नहि तोड़ैत अछि, आ ने काँटक झाड़ी सँ अंगूर। 45 नीक मनुष्‍य नीक वस्‍तु सँ भरल अपना हृदयक भण्‍डार मे सँ नीक वस्‍तु सभ निकालैत अछि, और अधलाह मनुष्‍य अपन अधलाह वस्‍तु सँ भरल भण्‍डार मे सँ अधलाह वस्‍तु सभ बाहर करैत अछि। कारण, जाहि बात सँ ओकर हृदय भरल छैक, सैह बात सभ ओकरा मुँह सँ बहराइत रहैत छैक। 46 “हमरा ‘प्रभु, प्रभु’ किएक कहैत छी, जखन की हमर कहल नहि करैत छी? 47 आब हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे केओ हमरा लग अबैत अछि और हमर बात सुनि कऽ ओकर पालन करैत अछि, से केहन अछि। 48 ओ ताहि आदमी सनक अछि जे घर बनयबाक समय मे गहींर तक खुनि कऽ पाथर पर न्‍यो रखलक। जखन बाढ़ि आयल और बाढ़िक रेत ओहि घर सँ टकरायल तँ ओकरा हिला नहि सकल, कारण ओ घर मजगूती सँ बनाओल गेल छल। 49 मुदा जे केओ हमर बात सुनैत अछि और ओकर पालन नहि करैत अछि, से ताहि आदमी जकाँ अछि जे बिनु न्‍यो रखनहि सोझे माटि पर घर बनौलक। ओहि घर सँ बाढ़िक पानि टकराइत देरी ओ घर खसि पड़ल आ पूरा नष्‍ट भऽ गेल।”

Luke 7

1 यीशु ई सभ उपदेश लोक सभ केँ सुनौलाक बाद कफरनहूम नगर मे अयलाह। 2 ओतऽ रोमी सेनाक एकटा कप्‍तान छलाह जिनकर अति प्रिय नोकर बिमार भऽ कऽ मरऽ पर छलनि। 3 ओ कप्‍तान यीशुक बारे मे सुनि कऽ हुनका लग किछु यहूदी बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ केँ निवेदन करबाक लेल पठौलथिन जे ओ आबि कऽ हुनका नोकर केँ स्‍वस्‍थ कऽ देथि। 4 ओ सभ यीशु लग पहुँचि कऽ बहुत आग्रहपूर्बक विनती कयलथिन जे, “ओ आदमी एहि जोगरक छथि जे अहाँ हुनकर ई काज कऽ दियनि। 5 ओ अपना सभक जाति सँ प्रेम करैत छथि, और हमरा सभक सभाघर वैह बनबा देने छथि।” 6 यीशु हुनका सभक संग विदा भऽ गेलथिन। ओ जखन कप्‍तानक घरक लग मे पहुँचलाह तँ कप्‍तान अपन किछु संगी सभ केँ हुनका लग ई कहबाक लेल पठौलथिन जे, “यौ प्रभु, अपने आरो कष्‍ट नहि कयल जाओ। हम एहि जोगरक नहि छी जे अपने हमरा घर मे आबी, 7 आ ने हम अपना केँ एहू जोगरक बुझलहुँ जे हम अपने लग जाइ। तेँ मात्र आज्ञा देल जाओ और हमर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ जायत। 8 कारण हमहूँ शासनक अधीन मे छी, और हमरा अधीन मे सैनिक सभ अछि। हम एकटा केँ कहैत छिऐक, ‘जाह,’ तँ ओ जाइत अछि; दोसर केँ कहैत छिऐक, ‘आबह,’ तँ ओ अबैत अछि। अपना नोकर केँ कहैत छिऐक, ‘ई काज करह,’ तँ ओ करैत अछि।” 9 कप्‍तानक एहि बात सभ सँ यीशु केँ आश्‍चर्य लगलनि। ओ भीड़क लोक सभ जे हुनका पाछाँ चलि रहल छल तकरा सभक दिस घूमि कऽ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, एहन विश्‍वास हमरा कतौ नहि भेटल अछि—इस्राएलिओ सभ मे नहि।” 10 कप्‍तानक पठाओल संगी सभ जखन घुरि कऽ अयलाह तँ देखलनि जे नोकर एकदम स्‍वस्‍थ भऽ गेल अछि। 11 किछु दिनक बाद यीशु नाइन नामक नगर गेलाह। हुनका संग हुनकर शिष्‍य सभ और बहुत बड़का भीड़ सेहो छलनि। 12 यीशु जखन नगरक फाटक लग पहुँचलाह तँ देखैत छथि जे लोक सभ एक मुइल आदमी केँ नगर सँ बाहर लऽ जा रहल अछि। ओ मुइल आदमी अपना मायक एकमात्र बेटा छल और ओकर माय विधवा छलैक। विधवाक संग नगरक बहुते लोक सभ छलैक। 13 ओकरा देखि कऽ प्रभु केँ बहुत दया लगलनि, और ओ कहलथिन, “नहि कानह।” 14 तकरबाद ओ आगाँ बढ़ि कऽ अर्थी केँ छुलनि। ताहि पर कान्‍ह देनिहार सभ ठाढ़ भऽ गेल। ओ कहलथिन, “हौ युवक, हम तोरा कहैत छिअह, उठह!” 15 मुइल आदमी उठि बैसल, और बाजऽ लागल। यीशु ओकरा मायक जिम्‍मा मे लगा देलथिन। 16 ई देखि लोक सभ केँ बड़का डर सन्‍हिया गेलैक। ओ सभ परमेश्‍वरक स्‍तुति करैत कहऽ लागल, “हमरा सभक बीच मे परमेश्‍वरक एक पैघ प्रवक्‍ता आबि गेल छथि! परमेश्‍वर अपना लोक पर दया करबाक लेल उतरि आयल छथि!” 17 यीशुक सम्‍बन्‍ध मे ई खबरि सौंसे यहूदिया प्रदेश मे और लग-पासक सभ क्षेत्र मे पसरि गेल। 18 यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ हुनका एहि सभ बातक बारे मे कहि सुनौलथिन। एहि पर यूहन्‍ना अपना शिष्‍य सभ मे सँ दू गोटे केँ बजा कऽ ई बात पुछबाक लेल प्रभु लग पठौलथिन जे, 19 “ओ जे आबऽ वला छलाह, से की अहीं छी, वा हम सभ दोसराक बाट ताकू?” 20 ओ सभ यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना हमरा सभ केँ अहाँ सँ ई पुछबाक लेल पठौलनि अछि जे, ओ जे आबऽ वला छलाह, से की अहीं छी, वा हम सभ दोसराक बाट ताकू?” 21 ओही काल मे यीशु बहुत लोक केँ बिमारी, पीड़ा और दुष्‍टात्‍मा सभ सँ मुक्‍त कऽ देलथिन, और बहुत आन्‍हर सभ केँ देखबाक शक्‍ति देलथिन। 22 तखन ओ यूहन्‍नाक शिष्‍य सभ केँ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ जे किछु देखलहुँ और सुनलहुँ से सभ बात जा कऽ यूहन्‍ना केँ सुना दिऔन—आन्‍हर सभ देखि रहल अछि, नाङड़ सभ चलि-फिरि रहल अछि, कुष्‍ठ-रोगी सभ स्‍वस्‍थ कयल जा रहल अछि, बहीर सभ सुनि रहल अछि, मुइल सभ जिआओल जा रहल अछि, और असहाय सभ केँ शुभ समाचार सुनाओल जा रहल छैक। 23 धन्‍य अछि ओ जे हमरा कारणेँ अपना विश्‍वास केँ नहि छोड़ैत अछि।” 24 यूहन्‍ना द्वारा पठाओल शिष्‍य सभ जखन चल गेलाह तँ यीशु यूहन्‍नाक बारे मे भीड़क संग बात करैत पुछलथिन, “अहाँ सभ निर्जन क्षेत्र मे की देखबाक लेल गेल छलहुँ? हवा सँ हिलैत खड़ही केँ?... 25 तखन की देखऽ लेल निकलल छलहुँ? बढ़ियाँ-बढ़ियाँ वस्‍त्र पहिरने कोनो मनुष्‍य केँ? नहि, कारण जे सभ नीक-नीक वस्‍त्र पहिरैत अछि और सुख-विलासक जीवन बितबैत अछि, से सभ राजभवन मे भेटैत अछि। 26 तँ फेर की देखबाक लेल गेल छलहुँ? परमेश्‍वरक एकटा प्रवक्‍ता केँ? हँ! हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, प्रवक्‍तो सँ पैघ व्‍यक्‍ति केँ देखलहुँ! 27 ई वैह दूत छथि जिनका सम्‍बन्‍ध मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, प्रभु कहैत छथि, ‘देखू, अहाँ सँ पहिने हम अपन दूत पठायब, जे अहाँक आगाँ-आगाँ अहाँक बाट तैयार करत।’ 28 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, मनुष्‍य सभ मे यूहन्‍ना सँ पैघ केओ कहियो जन्‍म नहि लेने अछि। तैयो परमेश्‍वरक राज्‍य मे जे सभ सँ छोट अछि, से हुनका सँ पैघ अछि। 29 “सभ लोक—कर असूल करऽ वला सभ सेहो—यूहन्‍नाक बात सुनि कऽ ई मानि लेलक जे परमेश्‍वरक बात ठीक अछि, कारण ओ सभ यूहन्‍ना सँ बपतिस्‍मा लेलक। 30 मुदा फरिसी और धर्म-नियमक पंडित सभ हुनका सँ बपतिस्‍मा नहि लऽ कऽ हुनका सभक लेल जे परमेश्‍वरक योजना छलनि, तकरा ओ सभ व्‍यर्थ कऽ लेलनि।” 31 यीशु आगाँ कहलथिन, “तँ एहि पीढ़ीक लोकक तुलना हम कोन बात सँ करू जे ई सभ केहन अछि? 32 ई सभ बजार मे बैसल ओहि बच्‍चा सभ सनक अछि जे, एक-दोसर केँ सोर पारि कऽ कहैत अछि, ‘हम सभ तँ तोरा सभक लेल बाँसुरी बजौलिऔ, मुदा तोँ सभ नचलें नहि। हम सभ कन्‍ना-रोहटि कयलिऔ, मुदा तोँ सभ कनलें नहि।’ 33 कारण, बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना अयलाह, और लोक सभ जकाँ रोटी नहि खाइत छथि, मदिरा नहि पिबैत छथि तँ अहाँ सभ कहैत छी जे, ‘ओकरा मे दुष्‍टात्‍मा छैक।’ 34 मनुष्‍य-पुत्र आयल, और खाइत-पिबैत अछि, तँ अहाँ सभ कहैत छी जे, ‘यैह देखू! केहन पेटू आ पिअक्‍कड़! कर असूल करऽ वला आ पापी सभक संगी!’ 35 मुदा परमेश्‍वरक बुद्धि ठीक अछि, से बात तेहन लोक द्वारा प्रमाणित होइत अछि जे सभ ओहि बुद्धिक अनुसार चलैत अछि।” 36 एक फरिसी यीशु केँ अपना संग भोजन करबाक निमन्‍त्रण देलथिन। यीशु हुनका घर गेलाह, और भोजन करबाक लेल बैसलाह। 37 ओहि नगर मे रहऽ वाली एकटा स्‍त्रीगण, जे पापी जीवन बितबैत छलि, जखन सुनलक जे यीशु ओहि फरिसीक घर मे भोजन पर बैसल छथि, तँ ओ संगमरमरक बर्तन मे सुगन्‍धित तेल लऽ कऽ आयल। 38 कनैत-कनैत ओ यीशुक पाछाँ पयर लग ठाढ़ भेलि, और ओकर नोर हुनकर पयर पर खसैत छलैक। ओ हुनकर पयर अपना केश सँ पोछऽ लगलनि, और पयरक चुम्‍मा लैत ओहि पर तेल लगाबऽ लगलनि। 39 ओ फरिसी जे हुनका बजौने छलथिन से ई देखि अपना मोन मे सोचलनि, “ई आदमी जँ वास्‍तव मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता रहैत तँ केहन स्‍त्री ओकरा छुबि रहल छैक, से ओ जनने रहैत—ओ बुझि जाइत जे ई केहन पापिनि अछि!” 40 यीशु जबाब देलथिन, “सिमोन, हमरा अहाँ केँ किछु कहबाक अछि।” ओ कहलथिन, “गुरुजी, बाजू ने।” 41 “कोनो महाजन केँ दूटा ऋणी छलनि। ओहि मे सँ एकटा पर पाँच सय ‘दिनार’ ऋण छलनि, आ दोसर पर पचास ‘दिनार’। 42 दूनू लग अपन ऋण चुकयबाक लेल किछु नहि छलैक, तँ महाजन दूनू केँ माफ कऽ देलथिन। आब ओहि दूनू मे सँ कोन हुनका बेसी मानतनि?” 43 सिमोन उत्तर देलथिन, “हमरा होइत अछि जे ओ, जकर बेसी ऋण माफ भेलैक।” यीशु कहलथिन, “अहाँ ठीक कहलहुँ।” 44 तखन ओहि स्‍त्रीगणक दिस घूमि कऽ ओ सिमोन केँ कहलथिन, “एहि स्‍त्री केँ देखैत छिऐक? हम अहाँक घर मे अयलहुँ, तँ अहाँ हमरा पयर धोबाक लेल पानि नहि देलहुँ, मुदा ई हमर पयर अपन नोर सँ धोलक आ केश सँ पोछलक। 45 अहाँ चुम्‍मा लऽ कऽ हमर स्‍वागत नहि कयलहुँ, मुदा जखने हम घर मे अयलहुँ तखने सँ ई हमर पयरक चुम्‍मा लैते अछि। 46 अहाँ हमर माथ मे तेल नहि लगौलहुँ, मुदा ई हमर पयर पर सुगन्‍धित तेल लगौलक। 47 तेँ, हम अहाँ केँ कहैत छी जे, एकर पाप, जे बहुते अछि, से सभ माफ कयल गेल अछि, कारण देखू—कतेक प्रेम कयलक! मुदा जकरा कम माफ भेल छैक, से कम प्रेम करैत अछि।” 48 तखन ओ स्‍त्री केँ कहलथिन, “तोहर पाप माफ भेलह।” 49 जे सभ हुनका संग भोजन पर बैसल छल, से सभ अपना मे कहऽ लागल, “ई के छथि जे पापो माफ करैत छथि?” 50 यीशु स्‍त्री केँ कहलथिन, “तोहर विश्‍वास तोरा उद्धार देलकह। शान्‍ति सँ जाह।”

Luke 8

1 तकरबाद यीशु लोक सभ केँ परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार सुनबैत नगर-नगर आ गाम-गाम घुमऽ लगलाह। हुनका संग हुनकर बारहो शिष्‍य छलनि, 2 और किछु स्‍त्रीगण सभ सेहो, जिनका सभ केँ विभिन्‍न बिमारी आ दुष्‍टात्‍मा सभ सँ स्‍वस्‍थ कयल गेल छलनि। ओहि मे ई सभ छलीह—मरियम, जे मग्‍दलीनी कहबैत छलीह आ जिनका मे सँ सातटा दुष्‍टात्‍मा निकालल गेल छलनि, 3 हेरोद राजाक हाकिम खुसाक स्‍त्री योअन्‍ना, सुसन्‍ना आ आरो बहुत गोटे। ई स्‍त्रीगण सभ अपन व्‍यक्‍तिगत सम्‍पत्ति सँ हुनका सभक सेवा करैत छलीह। 4 नगर-नगर सँ लोक सभ यीशु लग आबि रहल छल, और एक दिन जखन बड़का भीड़ हुनका लग जमा भेल तँ ओ ई दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ कहलथिन, 5 “एक किसान बीया बाउग करबाक लेल गेल। बीया बाउग करैत काल, किछु बीया रस्‍ताक कात मे खसल, लतखुर्दन भऽ गेल और ओकरा चिड़ै सभ खा लेलकैक। 6 किछु बीया पथराह जमीन पर खसल, आ हाल नहि रहबाक कारणेँ जनमिते सुखा गेल। 7 किछु बीया काँट-कुशक बीच मे खसल, मुदा काँट-कुश सभ सेहो संगे-संग बढ़ि कऽ ओकरा दबा देलकैक। 8 किछु बीया नीक जमीन पर पड़ल। ओ बढ़ि कऽ फड़ल-फुलायल आ सय गुना फसिल देलक।” ई कहि कऽ ओ जोर सँ बजलाह, “जकरा सुनबाक कान छैक से सुनओ।” 9 तखन हुनकर शिष्‍य सभ एहि दृष्‍टान्‍तक अर्थ पुछलथिन। 10 ओ उत्तर देलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍यक रहस्‍यक ज्ञान अहाँ सभ केँ देल गेल अछि, मुदा दोसर सभक लेल दृष्‍टान्‍ते सभ अछि, जाहि सँ, ‘तकितो ओ देखए नहि, सुनितो ओ बुझए नहि।’ 11 “दृष्‍टान्‍तक अर्थ ई अछि—बीया परमेश्‍वरक वचन अछि। 12 रस्‍ताक कात मे खसल बीया ओ लोक सभ अछि जे हुनकर वचन सुनैत अछि मुदा शैतान आबि कऽ ओकरा सभक मोन मे सँ ओहि वचन केँ निकालि कऽ लऽ जाइत छैक, जाहि सँ कतौ ओ सभ विश्‍वास कऽ कऽ उद्धार नहि पाबए। 13 पथराह जमीन मे खसल बीया ओ लोक सभ अछि जे परमेश्‍वरक वचन सुनि खुशी सँ ओकरा स्‍वीकार करैत अछि, मुदा ओ वचन ओकरा सभ मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक। ओ सभ किछु काल विश्‍वास तँ करैत अछि, मुदा परीक्षाक समय जखन अबैत छैक तँ विश्‍वास केँ छोड़ि दैत अछि। 14 काँट-कुश मे खसल बीया ओ लोक सभ अछि जे सुनैत तँ अछि, मुदा आगाँ जा कऽ जीवनक चिन्‍ता, धन-सम्‍पत्ति और सुख-विलास सभक द्वारा दबाओल जाइत अछि, और ओ सभ कोनो फसिल नहि दैत अछि। 15 मुदा नीक जमीन मे खसल बीया ओ लोक सभ अछि जे नीक और शुद्ध मोन सँ परमेश्‍वरक वचन सुनि कऽ अपना हृदय मे रखैत अछि, और धैर्यपूर्बक नीक फसिल दैत अछि। 16 “केओ डिबिया लेसि कऽ ओकरा तौला सँ नहि झँपैत अछि, आ ने चौकीक तर मे रखैत अछि। ओ ओकरा लाबनि पर रखैत अछि जाहि सँ घरक भीतर आबऽ वला लोक सभ केँ इजोत भेटैक। 17 हँ, कोनो वस्‍तु नुकायल नहि अछि जे प्रगट नहि कयल जायत, आ ने कोनो वस्‍तु गुप्‍त अछि जे जानल नहि जायत और इजोत मे नहि आनल जायत। 18 एहि लेल, अहाँ सभ कोन प्रकारेँ सुनैत छी, ताहि पर नीक जकाँ ध्‍यान दिअ, कारण जकरा किछु छैक, तकरा आरो देल जयतैक, और जकरा नहि छैक, तकरा सँ सेहो लऽ लेल जयतैक जाहि केँ ओ अपन बुझैत अछि।” 19 यीशुक माय और भाय सभ हुनका सँ भेँट करबाक लेल अयलाह, मुदा भीड़क कारणेँ हुनका लग नहि पहुँचि सकलाह। 20 तँ हुनका लग कहा पठाओल गेलनि जे, “अहाँक माय और भाय सभ बाहर ठाढ़ छथि, अहाँ सँ भेँट करऽ चाहैत छथि।” 21 एहि पर यीशु उत्तर देलथिन, “हमर माय और भाय ओ सभ छथि जे सभ परमेश्‍वरक वचन सुनैत छथि और ओहि अनुसार चलैत छथि।” 22 एक दिन यीशु अपना शिष्‍य सभक संग नाव मे चढ़लाह आ कहलथिन, “झीलक ओहि पार चलू।” ओ सभ नाव खोलि देलनि। 23 किछु बढ़लाक बाद यीशु सुति रहलाह। एकाएक झील मे भयंकर अन्‍हड़-बिहारि आयल। नाव मे पानि भरऽ लागल, और ओ सभ बड़का विपत्ति मे पड़ि गेलाह। 24 शिष्‍य सभ यीशु केँ जगा कऽ कहलथिन, “मालिक, यौ मालिक, अपना सभ डुबऽ पर छी!” ओ उठि कऽ अन्‍हड़-बिहारि और लहरि केँ डँटलथिन। अन्‍हड़-बिहारि बन्‍द भऽ गेल, आ सभ किछु शान्‍त भऽ गेलैक। 25 तखन ओ अपना शिष्‍य सभ सँ पुछलथिन, “अहाँ सभक विश्‍वास की भऽ गेल?” ओ सभ भयभीत और आश्‍चर्यित भऽ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “ई के छथि? हवा और पानि केँ सेहो आज्ञा दैत छथिन तँ ओ मानैत छनि!” 26 जाइत-जाइत यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ गिरासेनी सभक इलाका मे पहुँचलाह, जे गलील प्रदेशक सामने झीलक ओहि पार अछि। 27 यीशु जखने कछेर पर उतरलाह तँ ओहि शहरक एक आदमी भेटलनि जकरा दुष्‍टात्‍मा लागल छलैक। ई आदमी बहुत दिन सँ कपड़ा-लत्ता नहि पहिरैत छल, और घर मे नहि रहि कऽ कबरिस्‍तान मे रहैत छल। 28 यीशु केँ देखिते ओ जोर सँ चिकरल, हुनका पयर पर खसलनि, और जोर-जोर सँ कहलकनि, “यौ परम परमेश्‍वरक पुत्र यीशु! हमरा सँ अपने केँ कोन काज? हम विनती करैत छी जे हमरा दुःख नहि दिअ!” 29 ओ ई बात एहि लेल कहलकनि जे यीशु दुष्‍टात्‍मा केँ ओकरा मे सँ बहरयबाक आज्ञा देने छलथिन। ओ दुष्‍टात्‍मा ओकरा बहुत बेर पकड़ने छलैक, और लोक ओकरा जिंजीर सँ हाथ-पयर बान्‍हि कऽ पहरा मे रखैत छल, मुदा ओ जिंजीर सभ केँ तोड़ि-ताड़ि लैत छल, और दुष्‍टात्‍मा ओकरा सुन-सान क्षेत्र सभ मे लऽ जाइत छलैक। 30 यीशु ओकरा सँ पुछलथिन, “तोहर नाम की छह?” ओ उत्तर देलकनि, “सेना” कारण, ओकरा मे बहुते दुष्‍टात्‍मा वास करैत छलैक। 31 दुष्‍टात्‍मा सभ हुनका सँ विनती करऽ लागल जे, हमरा सभ केँ “अथाह कुण्‍ड” मे जयबाक आज्ञा नहि दिअ। 32 ओहिठाम पहाड़ पर सुगरक बड़का झुण्‍ड चरि रहल छल। दुष्‍टात्‍मा सभ विनती कयलकनि जे, हमरा सभ केँ ओहि सुगर सभ मे जयबाक अनुमति दऽ दिअ। तँ यीशु अनुमति दऽ देलथिन। 33 तखन दुष्‍टात्‍मा सभ ओहि आदमी मे सँ निकलि कऽ सुगर सभ मे चल गेल। सुगरक पूरा झुण्‍ड दौड़ि कऽ पहाड़ पर सँ झील मे खसल और डुबि कऽ मरि गेल। 34 सुगर चराबऽ वला सभ ई देखि तुरत भागि गेल और नगर आ देहातो मे एहि घटनाक बारे मे सुनौलक। 35 एहि पर लोक सभ देखबाक लेल आयल, और यीशु लग जखन पहुँचल तँ देखैत अछि जे ओ आदमी जकरा मे सँ दुष्‍टात्‍मा निकलि गेल छल, से कपड़ा पहिरने आ स्‍वस्‍थ मोने हुनका पयर लग बैसल अछि। ई देखि ओ सभ भयभीत भऽ गेल। 36 जे सभ ई घटना देखने छल, से सभ ओहि लोक सभ केँ सुनौलकैक जे दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी कोना स्‍वस्‍थ कयल गेल। 37 गिरासेनी सभक क्षेत्रक सम्‍पूर्ण परोपट्टाक लोक सभ केँ तेहन डर भऽ गेलैक जे ओ सभ यीशु सँ विनती करऽ लगलनि जे, अहाँ एतऽ सँ चल जाउ। एहि पर यीशु नाव मे चढ़ि कऽ घूमि गेलाह। 38 जाहि आदमी मे सँ दुष्‍टात्‍मा निकलि गेल छलैक, से यीशु सँ विनती कयलकनि जे, अपना संग हमरो चलऽ देल जाओ। मुदा यीशु ओकरा ई कहि कऽ विदा कयलथिन जे, 39 “तोँ घर चल जाह, और परमेश्‍वर तोरा लेल कतेकटा काज कयलथुन से सभ केँ सुनाबह।” तखन ओ आदमी चल गेल, और यीशु ओकरा लेल जे-जतेक कयने रहथिन से सौंसे शहर मे लोक केँ सुनाबऽ लागल। 40 यीशु जखन झीलक एहि पार फेर पहुँचलाह तँ बड़का भीड़ जे एहि पार घूमि अयबाक हुनकर बाट ताकि रहल छलनि, से सभ हुनकर स्‍वागत कयलकनि। 41 तखने याइरस नामक एक आदमी यीशु लग अयलाह, जे सभाघरक अधिकारी छलाह। ओ यीशुक पयर पर खसि कऽ हुनका सँ आग्रह करऽ लगलथिन जे, हमरा ओतऽ चलल जाओ। 42 कारण, हुनकर एकमात्र बेटी, जे बारह वर्षक छलि, मरऽ-मरऽ पर छलि। रस्‍ता मे चलैत काल लोकक रेड़म-रेड़ा सँ यीशु पिचाय लगलाह। 43 भीड़ मे एक स्‍त्री छलि, जे बारह वर्ष सँ खून खसऽ वला रोग सँ पीड़ित छलि आ अपन सभ सम्‍पत्ति इलाजक पाछाँ वैद्य केँ दऽ देने छलि, मुदा ओकरा केओ नहि स्‍वस्‍थ कऽ सकल छल। 44 ओ पाछाँ सँ आबि यीशुक वस्‍त्रक कोर छुबि लेलक, और ओकर खून खसनाइ तुरत बन्‍द भऽ गेलैक। 45 यीशु पुछलथिन, “हमरा के छुलक?” जखन सभ केओ अस्‍वीकार कयलक तँ पत्रुस कहलथिन, “यौ मालिक, अहाँ तँ भीड़ सँ घेरल छी आ लोक सभ चारू कात सँ अहाँ केँ पिचि रहल अछि!” 46 मुदा यीशु कहलथिन, “नहि, केओ हमरा छुलक अछि। हम जनैत छी जे हमरा मे सँ सामर्थ्‍य बहरायल अछि।” 47 ओ स्‍त्री जखन देखलक जे हम नुकायल नहि रहि सकैत छी तँ कँपैत आबि यीशुक पयर पर खसलि, और सभ लोकक सामने कहि सुनौलकनि जे हुनका किएक छुलकनि आ कोना तुरत्ते स्‍वस्‍थ भऽ गेल। 48 तखन यीशु ओकरा कहलथिन, “बेटी, तोहर विश्‍वास तोरा स्‍वस्‍थ कऽ देलकह। शान्‍तिपूर्बक जाह।” 49 यीशु ई बात कहिए रहल छलथिन कि सभाघरक अधिकारी याइरसक घर सँ एक गोटे आयल और याइरस केँ कहलकनि, “अहाँक बच्‍ची नहि रहल। आब गुरुजी केँ आरो कष्‍ट नहि दिऔन।” 50 ई बात सुनला पर यीशु याइरस केँ कहलथिन, “अहाँ डेराउ नहि, मात्र विश्‍वास राखू—अहाँक बेटी ठीक भऽ जायत।” 51 याइरसक ओहिठाम पहुँचला पर यीशु पत्रुस, यूहन्‍ना, याकूब और बच्‍चीक माय-बाबू केँ छोड़ि आरो ककरो अपना संग घरक भीतर नहि आबऽ देलथिन। 52 सभ केओ बच्‍चीक लेल विलाप कऽ रहल छल, मुदा यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “नहि कानू! ओ मुइल नहि, सुतल अछि।” 53 एहि पर लोक सभ हुनका पर हँसऽ लागल, कारण ओ सभ जनैत छल जे बच्‍ची मरि गेल अछि। 54 मुदा यीशु बच्‍चीक हाथ पकड़ि कऽ कहलथिन, “बौआ! उठ!” 55 बच्‍चीक प्राण घूमि अयलैक और ओ तुरत ठाढ़ भऽ गेल। यीशु आदेश देलथिन जे ओकरा किछु खाय लेल देल जाय। 56 ओकर माय-बाबू आश्‍चर्य-चकित भेलाह, मुदा यीशु हुनका सभ केँ आज्ञा देलथिन जे एहि घटनाक विषय मे ककरो संग चर्चा नहि करू।

Luke 9

1 यीशु अपन बारहो शिष्‍य केँ एक संग बजौलथिन, और हुनका सभ केँ सभ तरहक दुष्‍टात्‍मा केँ निकालबाक आ बिमारी सभ केँ ठीक करबाक शक्‍ति और अधिकार देलथिन। 2 तखन ओ हुनका सभ केँ परमेश्‍वरक राज्‍यक प्रचार करबाक लेल और रोगी सभ केँ स्‍वस्‍थ करबाक लेल गाम-गाम पठौलथिन। 3 ओ कहलथिन, “बाटक लेल अहाँ सभ किछु नहि लऽ जाउ—ने लाठी ने झोरा, ने रोटी ने पाइ, आ ने दोसर अंगा राखू। 4 जाहि कोनो घर मे ठहरब, जाबत धरि ओहि गाम सँ विदा नहि होयब ताबत धरि ओही घर मे ठहरू। 5 और जतऽ कतौ लोक अहाँ सभक स्‍वागत नहि करय, ताहि गाम सँ विदा होइत काल अपन पयरक गर्दा झाड़ि लेब। ई ओकरा सभक विरोधक गवाही रहत।” 6 तँ ओ सभ विदा भेलाह और गाम-गाम मे शुभ समाचारक प्रचार करैत आ सभ ठाम लोक केँ स्‍वस्‍थ करैत घुमऽ लगलाह। 7 एम्‍हर शासक हेरोद एहि सभ घटनाक विषय मे सुनलनि, और दुबिधा मे पड़ि गेलाह, कारण किछु लोकक कथन छलैक जे, बपतिस्‍मा देबऽ वला यूहन्‍ना मुइल सभ मे सँ जिआओल गेल छथि। 8 दोसर लोक सभ कहैत छल जे, एलियाह फेर आबि गेल छथि। आरो लोकक कथन छलैक जे, प्राचीन समयक परमेश्‍वरक अन्‍य प्रवक्‍ता सभ मे सँ केओ फेर जीबि उठल छथि। 9 मुदा हेरोद कहलनि, “यूहन्‍ना केँ तँ हम मूड़ी कटबा देने छिऐक, तँ फेर ई के अछि जकरा बारे मे एतेक बात सुनैत छी?” और ओ यीशु सँ भेँट करबाक कोशिश करऽ लगलाह। 10 पठाओल गेल दूत सभ जहिया घूमि कऽ अयलाह तँ ओ सभ जे किछु कयने छलाह से सभ बात यीशु केँ कहि सुनौलथिन। तकरबाद यीशु हुनका सभ केँ अपना संग लऽ कऽ बेतसैदा नगर गेलाह, जाहि सँ ओ सभ एकान्‍त स्‍थान मे रहि सकथि। 11 मुदा लोक सभ केँ एहि बातक पता लागि गेलैक, और ओहो सभ हुनका पाछाँ-पाछाँ आबऽ लागल। यीशु ओकरा सभक स्‍वागत कयलथिन, और परमेश्‍वरक राज्‍यक सम्‍बन्‍ध मे ओकरा सभक संग बात-चीत करऽ लगलाह। जकरा ककरो कोनो बिमारी सँ स्‍वस्‍थ होयबाक आवश्‍यकता छलैक, तकरा सभ केँ ओ स्‍वस्‍थ कयलथिन। 12 जखन साँझ पड़ऽ लागल तँ बारहो शिष्‍य सभ यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “आब लोक सभ केँ लग-पासक गाम-बजार सभ मे अपना लेल राति मे रहबाक जगह आ भोजनक प्रबन्‍ध करबाक लेल विदा कऽ दिऔक, कारण अपना सभ एतऽ बस्‍ती सँ दूर मे छी।” 13 ओ उत्तर देलथिन, “अहीं सभ एकरा सभ केँ भोजन करबिऔक।” ओ सभ कहलथिन, “हमरा सभ लग खाली पाँचटा रोटी आ दूटा माछ अछि, बस, आओर किछु नहि। वा की—एहि सभ लोकक लेल हम सभ भोजनक वस्‍तु किनि कऽ लाउ?” 14 ओतऽ पुरुषक संख्‍या लगभग पाँच हजार छल। यीशु शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “सभ केँ पचास-पचासक समूह मे बैसा दिऔक।” 15 शिष्‍य सभ ओहिना कयलनि आ सभ केओ बैसि रहल। 16 तकरबाद यीशु ओ पाँचटा रोटी आ दूटा माछ लऽ लेलनि आ स्‍वर्ग दिस तकैत ओहि रोटी आ माछक लेल परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। तखन रोटी आ माछ केँ तोड़लनि आ लोक सभ मे परसबाक लेल अपना शिष्‍य सभ केँ देलथिन। 17 सभ केओ भरि इच्‍छा भोजन कयलक। शिष्‍य सभ जखन रोटी आ माछक उबरल टुकड़ा सभ बिछलनि तँ ओ बारह छिट्टा भेल। 18 एक बेर यीशु एकान्‍त मे प्रार्थना कऽ रहल छलाह आ हुनकर शिष्‍य सभ हुनका संग छलनि, तँ ओ हुनका सभ सँ पुछलथिन जे, “हम के छी, ताहि सम्‍बन्‍ध मे लोक की कहि रहल अछि?” 19 ओ सभ उत्तर देलथिन, “किछु लोक सभ ‘बपतिस्‍मा देनिहार यूहन्‍ना’ कहैत अछि, किछु लोक ‘एलियाह’ आ किछु लोक सभ कहैत अछि जे प्राचीन कालक परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनि मे सँ केओ जीबि उठलाह अछि।” 20 ओ पुछलथिन, “और अहाँ सभ?—अहाँ सभ की कहैत छी जे हम के छी?” पत्रुस उत्तर देलथिन, “अहाँ परमेश्‍वरक पठाओल उद्धारकर्ता-मसीह छी।” 21 एहि पर यीशु हुनका सभ केँ दृढ़तापूर्बक आदेश देलथिन जे, “ई बात ककरो नहि कहिऔक।” 22 फेर आगाँ कहऽ लगलथिन, “ई आवश्‍यक अछि जे मनुष्‍य-पुत्र बहुत दुःख सहय, बूढ़-प्रतिष्‍ठित, मुख्‍यपुरोहित आ धर्मशिक्षक सभ द्वारा तुच्‍छ ठहराओल जाय, जान सँ मारल जाय आ तेसर दिन जिआओल जाय।” 23 तखन यीशु सभ केँ कहलथिन, “जँ केओ हमर शिष्‍य बनऽ चाहैत अछि तँ ओ अपना केँ त्‍यागि, प्रतिदिन हमरा कारणेँ दुःख उठयबाक आ प्राणो देबाक लेल तैयार रहओ, और हमरा पाछाँ चलओ। 24 कारण, जे केओ अपन जीवन बचाबऽ चाहैत अछि, से ओकरा गमाओत, और जे केओ हमरा लेल अपन जीवन गमबैत अछि, से ओकरा बचाओत। 25 जँ कोनो मनुष्‍य सम्‍पूर्ण संसार केँ पाबि लय मुदा अपना केँ गमा लय वा नष्‍ट कऽ लय तँ ओकरा की लाभ भेलैक? 26 जँ केओ हमरा और हमर शिक्षा सँ लजाइत अछि, तँ ओकरो सँ मनुष्‍य-पुत्र ओहि समय मे लजायत जखन ओ अपना महिमाक संग आ पिताक और पवित्र स्‍वर्गदूत सभक महिमाक संग आओत। 27 और हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एतऽ किछु एहनो लोक सभ ठाढ़ अछि जे जाबत तक परमेश्‍वरक राज्‍य नहि देखि लेत ताबत तक नहि मरत।” 28 एहि बात सभक करीब आठ दिनक बाद यीशु अपना संग पत्रुस, यूहन्‍ना और याकूब केँ लऽ कऽ प्रार्थना करबाक लेल पहाड़ पर गेलाह। 29 जखन ओ प्रार्थना कऽ रहल छलाह तँ हुनकर मुँहक रूप बदलि गेलनि, और हुनकर वस्‍त्र बिजलोका जकाँ चमकऽ लगलनि। 30 एकाएक दू पुरुष, मूसा और एलियाह, 31 स्‍वर्गिक इजोत सँ चमकैत और यीशु सँ बात करैत देखाइ देलनि। ओ सभ हुनकर मृत्‍युक सम्‍बन्‍ध मे बात कऽ रहल छलाह, जकरा द्वारा ओ यरूशलेम मे परमेश्‍वरक इच्‍छा पूरा करऽ वला छलाह। 32 पत्रुस और हुनकर संगी सभ औँघाय लागल छलाह, मुदा जखन पूर्ण रूप सँ सचेत भेलाह तँ यीशुक स्‍वर्गिक सुन्‍दरता और हुनका संग ठाढ़ ओहि दूनू पुरुष केँ देखलथिन। 33 जखन ओ दूनू पुरुष यीशु लग सँ विदा होमऽ लगलाह तँ पत्रुस यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी! हमरा सभक लेल ई कतेक नीक बात अछि जे हम सभ एतऽ छी! हम सभ एतऽ तीन मण्‍डप बनाबी—एक अहाँक लेल, एक मूसाक लेल, और एक एलियाहक लेल।” ओ अपनो नहि जनैत छलाह जे हम की बाजि रहल छी। 34 ओ ई बात बाजिए रहल छलाह कि एकटा मेघ आबि कऽ हुनका सभ केँ झाँपि देलकनि। शिष्‍य सभ मेघ सँ झँपा कऽ डेरा गेलाह। 35 तखन मेघ मे सँ ई आवाज आयल, “ई हमर पुत्र छथि, जिनका हम चुनने छी। हिनका बात पर ध्‍यान दिअ!” 36 ई आकाशवाणी भेलाक बाद शिष्‍य सभ देखलनि जे यीशु असगर छथि। एहि घटनाक सम्‍बन्‍ध मे ओ सभ चुप रहलाह और जे किछु देखने छलाह तकर चर्चा ओहि समय मे ककरो सँ नहि कयलनि। 37 प्रात भेने जखन ओ सभ पहाड़ पर सँ उतरलाह तँ यीशु केँ लोकक बड़का भीड़ भेटलनि। 38 भीड़ मेहक एक आदमी जोर सँ सोर पारि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, अपने सँ हमर विनती अछि जे हमरा बेटा केँ देखल जाओ। ई हमर एकमात्र सन्‍तान अछि। 39 दुष्‍टात्‍मा एकरा पकड़ि लैत छैक, और ई एकाएक चिकरि उठैत अछि। एकरा नीचाँ पटकि दैत छैक आ एकरा मुँह सँ गाउज आबऽ लगैत छैक। बिनु चोट पहुँचौने एकरा छोड़िते नहि छैक। 40 हम अपनेक शिष्‍य सभ सँ एहि दुष्‍टात्‍मा केँ निकालबाक लेल विनती कयलियनि, मुदा ओ सभ नहि निकालि सकलाह।” 41 यीशु उत्तर देलथिन, “हे अविश्‍वासी आ भ्रष्‍ट पीढ़ीक लोक सभ! हम तोरा सभक संग कहिया तक रहिअह? कहिया तक तोरा सभ केँ सहैत रहिअह? आनह अपना बेटा केँ।” 42 ओ लड़का आबि रहल छल कि दुष्‍टात्‍मा ओकरा नीचाँ पटकि देलकैक आ तोड़ऽ-ममोरऽ लगलैक। मुदा यीशु दुष्‍टात्‍मा केँ बहरयबाक आज्ञा दऽ कऽ लड़का केँ ठीक कऽ देलथिन, आ ओकरा अपना बाबू केँ जिम्‍मा मे दऽ देलथिन। 43 परमेश्‍वरक सामर्थ्‍य और महानता केँ देखि कऽ सभ केओ आश्‍चर्य-चकित रहि गेल। लोक सभ यीशुक काज सभ देखि आश्‍चर्य मानैत छल, मुदा यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, 44 “हम जे बात कहऽ जा रहल छी, अहाँ सभ ताहि बात पर ठीक सँ ध्‍यान दिअ—मनुष्‍य-पुत्र पकड़बा कऽ लोकक हाथ मे सौंपल जायत।” 45 मुदा ओ सभ हुनकर कहबाक अर्थ नहि बुझलनि। हुनका सभ सँ एहि बातक अर्थ नुकायल रहलनि, ताहि सँ नहि बुझि सकलाह, और ओ सभ हुनका सँ एहि सम्‍बन्‍ध मे पुछऽ सँ डेराइत छलाह। 46 शिष्‍य सभ मे एहि बातक विवाद होमऽ लगलनि जे, हमरा सभ मे सभ सँ पैघ के अछि? 47 यीशु हुनका सभक विचार बुझि एकटा छोट बच्‍चा केँ अपना लग मे ठाढ़ कयलनि 48 और शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “जे केओ हमरा नाम सँ एहि बच्‍चा केँ स्‍वीकार करैत अछि, से हमरे स्‍वीकार करैत अछि, और जे हमरा स्‍वीकार करैत अछि से हमरे नहि, बल्‍कि तिनको स्‍वीकार करैत छनि जे हमरा पठौने छथि। हँ, अहाँ सभ मे जे सभ सँ छोट होइ, सैह सभ सँ पैघ भेलहुँ।” 49 तखन यूहन्‍ना बजलाह, “मालिक, हम सभ एक आदमी केँ अहाँक नाम लऽ कऽ दुष्‍टात्‍मा निकालैत देखलहुँ, और ओकरा रोकबाक प्रयत्‍न कयलहुँ किएक तँ ओ हमरा सभक संग अहाँक शिष्‍य नहि अछि।” 50 यीशु उत्तर देलथिन, “हुनका नहि रोकिऔन, कारण जे अहाँक विरोध मे नहि अछि से अहाँक पक्ष मे अछि।” 51 जखन यीशु केँ स्‍वर्ग मे उठाओल जयबाक समय लगचिआय लगलनि तँ ओ यरूशलेम जयबाक दृढ़ निश्‍चय कयलनि, 52 और अपना सँ आगाँ किछु आदमी केँ पठौलथिन। ओ सभ विदा भऽ कऽ एक सामरी गाम मे हुनका लेल तैयारी करबाक लेल गेलाह। 53 मुदा ओहिठामक लोक सभ यीशुक स्‍वागत नहि कयलकनि, किएक तँ ओ यरूशलेम जा रहल छलाह। 54 ई बात जखन हुनकर शिष्‍य याकूब और यूहन्‍ना देखलनि तँ बाजि उठलाह, “की प्रभु, हम सभ आज्ञा दऽ कऽ एकरा सभ केँ नष्‍ट करबाक लेल आकाश सँ आगि बरिसाउ?” 55 मुदा ओ हुनका सभक दिस घूमि कऽ डँटलथिन, 56 और ओ सभ दोसर गाम चल गेलाह। 57 रस्‍ता मे चलैत काल एक आदमी यीशु केँ कहलकनि, “अपने जतऽ कतौ जायब, ततऽ हमहूँ अपनेक संग चलब।” 58 यीशु ओकरा उत्तर देलथिन, “नढ़िया केँ सोन्‍हि छैक और आकाशक चिड़ै केँ खोंता, मुदा मनुष्‍य-पुत्र केँ मूड़िओ नुकयबाक जगह नहि छैक।” 59 दोसर आदमी केँ यीशु कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” मुदा ओ उत्तर देलकनि, “प्रभु, हमरा पहिने जा कऽ अपना बाबूक लास केँ गाड़ि आबऽ दिअ।” 60 यीशु कहलथिन, “मुरदे सभ केँ अपन मुरदा गाड़ऽ दिऔक। अहाँ जा कऽ परमेश्‍वरक राज्‍यक प्रचार करू।” 61 फेर दोसर कहलकनि, “प्रभुजी, हम अहाँक संग आयब। मुदा हमरा पहिने अपना परिवार सँ विदा लेबऽ दिअ।” 62 यीशु उत्तर देलथिन, “जे केओ हऽर पर हाथ राखि कऽ पाछाँ देखैत अछि से परमेश्‍वरक राज्‍यक योग्‍य नहि अछि।”

Luke 10

1 एहि सभक बाद प्रभु बहत्तरि आरो व्‍यक्‍ति केँ नियुक्‍त कयलथिन और हुनका सभ केँ दू-दू गोटे कऽ प्रत्‍येक नगर आ गाम मे पठा देलथिन जतऽ-जतऽ ओ अपने जाय वला छलाह। 2 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “पाकल फसिल तँ बहुत अछि, मुदा काटऽ वला मजदूर कम अछि। तेँ खेतक मालिक सँ प्रार्थना करिऔन जे ओ अपना खेत मे आरो मजदूर पठबथि। 3 अहाँ सभ आब जाउ। हम अहाँ सभ केँ जंगली जानबर सभक बीच मे भेँड़ी जकाँ पठा रहल छी। 4 अपना संग ने बटुआ लिअ आ ने झोरा आ ने जुत्ता; रस्‍ता मे ककरो सँ हाल-समाचार पुछबाक लेल नहि रूकू। 5 जखन कोनो घर मे प्रवेश करब, तँ पहिने ई कहिऔक, ‘एहि घर मे शान्‍ति होअय।’ 6 जँ ओतऽ केओ शान्‍तिक पात्र होयत तँ अहाँक आशीर्वाद ओकरा पर बनल रहतैक, अन्‍यथा अहाँ लग घूमि आओत। 7 वासक लेल घर-घर नहि घुमू, और जे किछु ओ सभ अहाँ सभ केँ देत से खाउ-पीबू, कारण मजदूर केँ मजदूरी तँ भेटबाक चाही। 8 “हँ, जखन कोनो नगर मे प्रवेश कयलाक बाद स्‍वागत होइत अछि तँ जे किछु अहाँक सामने राखल जाय से खाउ। 9 ओतुक्‍का बिमार लोक सभ केँ ठीक करू, और लोक सभ केँ कहिऔक जे, परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभक लग मे आबि गेल अछि। 10 मुदा जखन कोनो नगर मे जायब और ओहि ठामक लोक सभ अहाँ सभक स्‍वागत नहि करय तँ ओहि नगरक सड़क-ग‍ली सभ मे जा कऽ कहिऔक, 11 ‘अहाँ सभक नगरक गर्दो जे हमरा सभक पयर मे लागल अछि से अहाँ सभक विरोध मे झाड़ैत छी। तैयो ई बात जानि लिअ जे परमेश्‍वरक राज्‍य लग मे आबि गेल अछि।’ 12 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, न्‍यायक दिन मे ओहि नगर सँ सदोम नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक। 13 “है खुराजीन नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! हे बेतसैदा नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! जे चमत्‍कार सभ तोरा सभक बीच कयल गेल, से जँ सूर और सीदोन नगर सभ मे कयल गेल रहैत तँ ओहिठामक निवासी सभ बहुत पहिनहि चट्टी ओढ़ि और छाउर पर बैसि अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन कऽ लेने रहैत। 14 न्‍यायक दिन मे तोरा सभक अपेक्षा सूर आ सीदोन नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक। 15 और हे कफरनहूम नगर! की तोँ स्‍वर्ग तक उठाओल जयबेँ? नहि! तोँ तँ पाताल मे खसाओल जयबेँ। 16 “जे केओ अहाँ सभक बात सुनैत अछि से हमर बात सुनैत अछि। जे केओ अहाँ सभ केँ अस्‍वीकार करैत अछि, से हमरा अस्‍वीकार करैत अछि, और जे केओ हमरा अस्‍वीकार करैत अछि से तिनका अस्‍वीकार करैत छनि जे हमरा पठौलनि।” 17 ओ बहत्तरि लोक सभ जखन अपन प्रचारक काज कऽ कऽ अयलाह तँ बहुत खुशीपूर्बक बजलाह, “प्रभुजी, अहाँक नामक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ सेहो हमरा सभक बात मानलक।” 18 यीशु उत्तर देलथिन, “हम शैतान केँ बिजुली जकाँ आकाश सँ खसैत देखलहुँ। 19 हँ, हम अहाँ सभ केँ साँप और बीछ केँ पिचबाक सामर्थ्‍य और शत्रुक समस्‍त शक्‍ति पर अधिकार देने छी। कोनो वस्‍तु अहाँ सभक हानि नहि कऽ सकत। 20 तैयो, एहि लेल आनन्‍द नहि मनाउ जे दुष्‍टात्‍मा सभ अहाँ सभक बात मानैत अछि, बल्‍कि एही लेल आनन्‍दित होउ जे अहाँ सभक नाम स्‍वर्ग मे लिखायल अछि।” 21 तखने यीशु पवित्र आत्‍मा सँ अत्‍यन्‍त आनन्‍दित भऽ कऽ बजलाह, “हे पिता, स्‍वर्ग आ पृथ्‍वीक मालिक, हम अहाँ केँ एहि लेल धन्‍यवाद दैत छी जे अहाँ ई बात सभ बुद्धिमान और विद्वान सभ सँ नुका कऽ रखलहुँ मुदा बच्‍चा सभ पर प्रगट कयलहुँ। हँ पिता, कारण, अहाँ केँ एही बात सँ प्रसन्‍नता भेल। 22 “हमरा पिता द्वारा सभ किछु हमरा हाथ मे सौंपल गेल अछि। पुत्र के छथि, से पिता केँ छोड़ि आरो केओ नहि जनैत अछि, और पिता के छथि, सेहो केओ नहि जनैत अछि—मात्र पुत्र और जकरा सभ पर पुत्र हुनका प्रगट करऽ चाहय, से जनैत अछि।” 23 तखन ओ अपना शिष्‍य सभक दिस घूमि कऽ नहुएँ जोर सँ कहलथिन, “अहाँ सभ धन्‍य छी जे, जे बात सभ देखि रहल छी से देखि पौलहुँ। 24 कारण, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे अपना समय मे एहन बहुत राजा और परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनि रहथि, जे सभ चाहलनि जे, जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ देखि रहल छी, तकरा देखी, मुदा नहि देखलनि; और जे बात सभ अहाँ सभ सुनि रहल छी, से सुनी, मुदा नहि सुनलनि।” 25 एक बेर धर्म-नियमक एक पंडित उठि कऽ यीशु केँ जँचबाक लेल पुछलथिन, “गुरुजी, अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करबाक लेल हम की करू?” 26 यीशु उत्तर देलथिन, “धर्म-नियम मे की लिखल अछि? ओहि मे की पढ़ैत छी?” 27 ओ कहलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ और अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह,’ और ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’” 28 यीशु कहलथिन, “अहाँ ठीक कहलहुँ। एना करू तँ जीवन पायब।” 29 मुदा ओ अपना केँ ठीक ठहरयबाक उद्देश्‍य सँ यीशु सँ पुछलथिन, “तँ हमर पड़ोसी के अछि?” 30 यीशु उत्तर देलथिन, “एक आदमी यरूशलेम सँ यरीहो नगर जा रहल छल कि डाकू सभ आबि कऽ ओकरा घेरि लेलकैक। ओकरा नाङट कऽ कऽ आ मारैत-मारैत अधमरू बना कऽ छोड़ि देलकैक। 31 संयोग सँ एक पुरोहित ओहि रस्‍ता सँ जा रहल छलाह। ओ जखन ओहि आदमी केँ देखलनि तँ रस्‍ता काटि कऽ आगाँ बढ़ि गेलाह। 32 तहिना मन्‍दिरक एक सेवक जखन ओहि स्‍थान पर अयलाह आ ओकरा देखलनि तँ ओहो रस्‍ता काटि कऽ आगाँ बढ़ि गेलाह। 33 मुदा सामरी जातिक एक आदमी जे ओहि दने जाइत रहय से ओकरा देखि कऽ दया सँ भरि गेल। 34 ओ ओकरा लग जा कऽ ओकर घाव सभ पर तेल और दारू लगा कऽ पट्टी बान्‍हि देलकैक। तखन ओकरा अपना गदहा पर बैसा कऽ एकटा सराय मे लऽ गेल और ओहिठाम ओकर सेवा कयलकैक। 35 प्रात भेने ओ दू चानीक रुपैया निकालि कऽ सरायक मालिक केँ दऽ कऽ कहलकनि, ‘हिनकर देखभाल करिऔन। एहि सँ बेसी जे खर्च पड़त से हम घुमती काल मे अहाँ केँ दऽ देब।’ 36 आब अहाँक विचार सँ, एहि तीनू मे सँ डाकू सभक हाथ मे पड़ल आदमीक पड़ोसी अपना केँ के बुझलक?” 37 धर्म-नियमक पंडित उत्तर देलथिन, “जे ओकरा पर दया कयलकैक, से।” यीशु कहलथिन, “अहूँ जा कऽ एहिना करू।” 38 यीशु और हुनकर शिष्‍य सभ आगाँ बढ़ि कऽ एक गाम मे अयलाह जतऽ मार्था नामक एक स्‍त्री अपना ओहिठाम हुनकर अतिथि-सत्‍कार कयलथिन। 39 ओहि स्‍त्री केँ मरियम नामक एकटा बहिन छलनि। ओ यीशुक पयर लग बैसि हुनकर बात सुनि रहल छलीह। 40 मुदा मार्था सेवा-सत्‍कारक भार सँ चिन्‍तित छलीह। ओ यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “प्रभु, अहाँ केँ कनेको चिन्‍ता नहि अछि जे हमर बहिन सभटा काज करऽ लेल हमरा असगरे छोड़ि देने अछि? ओकरा हमर मदति करबाक लेल कहिऔक!” 41 प्रभु उत्तर देलथिन, “मार्था, अए मार्था! अहाँ बहुत बातक लेल चिन्‍तित छी, 42 मुदा बात एकेटा जरूरी अछि। मरियम वैह नीक बात चुनि लेने अछि और ओकरा सँ ओ नहि छिनल जयतैक।”

Luke 11

1 एक दिन यीशु कोनो स्‍थान पर प्रार्थना कऽ रहल छलाह। जखन ओ प्रार्थना समाप्‍त कयलनि तखन हुनकर एक शिष्‍य कहलथिन, “प्रभु, जहिना यूहन्‍ना अपना शिष्‍य सभ केँ प्रार्थना कयनाइ सिखौलनि, तहिना अहूँ हमरा सभ केँ सिखाउ।” 2 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जखन अहाँ सभ प्रार्थना करब तँ एना कहू— हे पिता, अहाँक नाम पवित्र मानल जाय। अहाँक राज्‍य आबय। 3 हमरा सभ केँ प्रत्‍येक दिन भोजन दिअ, जे दिन प्रति दिन हमरा सभक लेल आवश्‍यक अछि। 4 हमरा सभक पाप क्षमा करू, किएक तँ हमहूँ सभ तकरा सभ केँ क्षमा करैत छी जे सभ हमरा सभक संग अपराध करैत अछि। और हमरा सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सँ दूर राखू।” 5 तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “मानि लिअ जे अहाँ सभ मे सँ ककरो कोनो संगी होइक और ओ ओहि संगीक ओहिठाम दुपहरिया राति मे जा कऽ कहैक जे, ‘यौ मित्र, हमरा तीनटा रोटी दिअ। 6 कारण, हमर एक मित्र जे यात्रा पर छथि से हमरा ओतऽ एखने अयलाह अछि और हुनका भोजन करयबाक लेल हमरा लग किछु नहि अछि।’ 7 तँ की भीतर सँ ओकर संगी उत्तर देतैक जे, ‘हमरा तंग नहि करू। केबाड़ लागल अछि और धिआ-पुता सभ हमरा लग सुतल अछि। हम अहाँ केँ किछु देबाक लेल नहि उठि सकैत छी।’? 8 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ओ जँ ओकर संगी रहबाक कारणेँ उठि कऽ रोटी नहि देतैक तैयो ओकरा निःसंकोच भऽ कऽ मँगबाक कारणेँ ओ उठि कऽ ओकरा जतेक आवश्‍यकता छैक ततेक देतैक। 9 हँ, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, माँगू तँ अहाँ केँ देल जायत। ताकू तँ अहाँ केँ भेटत। ढकढकाउ तँ अहाँक लेल खोलल जायत। 10 कारण, जे केओ मँगैत अछि, से प्राप्‍त करैत अछि। जे केओ तकैत अछि, तकरा भेटैत छैक। और जे केओ ढकढकबैत अछि, तकरा लेल खोलल जाइत छैक। 11 “अहाँ सभ मे सँ के एहन बाबू छी जे, बेटा जँ माछ माँगय तँ तकरा बदला मे साँप दिऐक? 12 वा जँ अण्‍डा माँगय तँ बीछ दिऐक? 13 जखन अहाँ सभ पापी होइतो अपना बच्‍चा सभ केँ नीक वस्‍तु सभ देनाइ जनैत छी, तँ अहाँ सभ सँ बढ़ि कऽ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, से मँगनिहार सभ केँ अपन पवित्र आत्‍मा किएक नहि देथिन?” 14 एक बेर यीशु एक बौक दुष्‍टात्‍मा केँ एक आदमी मे सँ निकालि रहल छलाह। दुष्‍टात्‍मा जखन निकलि गेल तँ बौक आदमी बाजऽ लागल। ई देखि लोक सभ चकित भऽ गेल। 15 मुदा कतेक गोटे कहऽ लागल, “ई तँ दुष्‍टात्‍मा सभक मुखिया बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालैत अछि।” 16 दोसर लोक हुनका जाँच करबाक लेल स्‍वर्ग सँ कोनो चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह देखयबाक लेल कहलकनि। 17 मुदा यीशु ओकरा सभक विचार बुझि कऽ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जाहि राज्‍य मे फूट पड़ि जाय, से उजड़ि जाइत अछि, और जाहि परिवार मे फूट भऽ जाय से नष्‍ट भऽ जाइत अछि। 18 शैतान जँ स्‍वयं अपन विरोधी भऽ जाय तँ ओकर राज्‍य कोना टिकल रहतैक? हम ई बात एहि लेल कहैत छी जे अहाँ सभक कथन अछि जे हम दुष्‍टात्‍मा सभ केँ बालजबूलक शक्‍ति सँ निकालैत छी। 19 जँ हम बालजबूलक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा निकालैत छी तँ अहाँ सभक चेला सभ ककरा शक्‍ति सँ निकालैत अछि? वैह सभ अहाँ सभक फैसला करत। 20 मुदा जँ हम परमेश्‍वरक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा निकालैत छी तँ ई जानि लिअ जे परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभ लग पहुँचि गेल अछि। 21 “जखन कोनो बलगर आदमी हाथ-हथियार सँ लैस भऽ कऽ अपन घरक रखबारी करैत अछि तँ ओकर धन-सम्‍पत्ति सुरक्षित रहैत छैक। 22 मुदा जखन ओकरो सँ बलगर कोनो दोसर आदमी ओकरा पर आक्रमण कऽ कऽ ओकरा पराजित करैत छैक, तँ ओ ओकर सभ हथियार जाहि पर ओकरा पूरा भरोसा रहैत छैक, से छिनि लैत अछि आ ओकर सम्‍पत्ति लुटि कऽ अपना संगी सभ मे बाँटि दैत अछि। 23 “जे हमरा संग नहि अछि से हमरा विरोध मे अछि; जे हमरा संग जमा नहि करैत अछि से छिड़िअबैत अछि। 24 “जखन दुष्‍टात्‍मा कोनो आदमी मे सँ बहरा जाइत अछि तँ ओ दुष्‍टात्‍मा मरुभूमि मे आराम करबाक स्‍थानक खोज मे घुमैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भेटैत नहि छैक। तखन ओ कहैत अछि, ‘हम अपन पहिलुके घर मे, जतऽ सँ बहरा कऽ आयल छलहुँ ततहि फेर जायब।’ 25 ओ जखन ओहिठाम पहुँचैत अछि और देखैत अछि जे ओ घर झाड़ल-बहारल साफ-सुथरा अछि, 26 तँ ओ जा कऽ अपनो सँ दुष्‍टाह सातटा आरो दुष्‍टात्‍मा केँ लऽ अनैत अछि आ ओ सभ ओहि घर मे अपन डेरा खसा लैत अछि। एहि तरहेँ ओहि आदमीक ई दशा पहिलुको दशा सँ खराब भऽ जाइत छैक।” 27 यीशु ई बात सभ कहिए रहल छलाह कि भीड़ मे एक स्‍त्री जोर सँ बाजि उठलि, “धन्‍य छथि ओ स्‍त्री जे अहाँ केँ जन्‍म देलनि और दूध पियौलनि!” 28 यीशु उत्तर देलथिन, “हँ, मुदा ताहू सँ धन्‍य छथि ओ सभ जे परमेश्‍वरक वचन सुनैत छथि और तकर पालन करैत छथि।” 29 जखन यीशुक चारू कात लोकक भीड़ बढ़ि गेल तँ ओ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “एहि पीढ़ीक लोक कतेक दुष्‍ट अछि! कारण, ई चमत्‍कार वला चिन्‍ह मँगैत अछि, मुदा जे घटना परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता योनाक संग भेल छलनि, से चिन्‍ह छोड़ि कऽ एकरा सभ केँ आरो कोनो चिन्‍ह नहि देखाओल जयतैक। 30 जहिना योना निनवे नगरक निवासी सभक लेल चिन्‍ह बनलाह, तहिना मनुष्‍य-पुत्र एहि पीढ़ीक लेल चिन्‍ह रहत। 31 दक्षिण देशक रानी एहि पीढ़ीक लोकक संग न्‍यायक दिन मे ठाढ़ भऽ कऽ एकरा सभ केँ दोषी ठहरौतीह, किएक तँ ओ सुलेमान राजाक बुद्धिक बात सभ सुनबाक लेल पृथ्‍वीक दोसर कात सँ अयलीह, और हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, एतऽ एखन केओ एहन अछि जे सुलेमानो सँ महान् अछि। 32 निनवेक निवासी सभ न्‍यायक दिन मे एहि पीढ़ीक लोकक संग ठाढ़ भऽ कऽ एकरा सभ केँ दोषी ठहराओत, किएक तँ ओ सभ योनाक प्रचार सुनि कऽ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयलक, और हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, एतऽ एखन केओ एहन अछि जे योनो सँ महान् अछि। 33 “केओ डिबिया लेसि कऽ ओकरा नुका कऽ नहि रखैत अछि, आ ने पथिया सँ झँपैत अछि। ओ ओकरा लाबनि पर रखैत अछि, जाहि सँ भीतर आबऽ वला लोक सभ केँ इजोत भेटैक। 34 शरीरक डिबिया अहाँक आँखि भेल। जखन आँखि ठीक अछि तँ अहाँक सम्‍पूर्ण शरीर इजोत मे रहैत अछि, मुदा जखन अहाँक आँखि खराब अछि तँ सम्‍पूर्ण शरीर अन्‍हार मे अछि। 35 तेँ सावधान रहू जे कतौ अहाँक भितरी इजोत अन्‍हार नहि बनि जाय। 36 एहि लेल जँ अहाँक सौंसे शरीर इजोत मे अछि, कोनो अंग अन्‍हार मे नहि अछि, तँ ओ पूर्ण रूप सँ इजोत सँ चमकत, जहिना डिबिया अपना प्रकाश सँ अहाँ केँ आलोकित करैत अछि।” 37 यीशु जखन ई सभ बात कहब समाप्‍त कयलनि, तँ हुनका एक फरिसी भोजनक लेल निमन्‍त्रण देलथिन। यीशु हुनका ओहिठाम गेलाह आ भोजन करबाक लेल भीतर मे बैसलाह। 38 ई देखि जे यीशु भोजन करऽ सँ पहिने रीतिक अनुसार हाथ-पयर नहि धोलनि, फरिसी केँ बड्ड आश्‍चर्य लगलनि। 39 मुदा प्रभु हुनका कहलथिन, “अहाँ फरिसी सभ थारी-बाटी सभ केँ बाहर-बाहर तँ मँजैत छी, मुदा भीतर अहाँ सभ लोभ और दुष्‍टता सँ भरल छी। 40 है मूर्ख सभ! जे बाहरक भाग बनौलनि, की से भीतरको भाग नहि बनौलनि? 41 अहाँ सभक बाटी मे जे किछु अछि से गरीब सभ केँ दान करिऔक, तखन अहाँ सभक लेल सभ किछु शुद्ध होयत। 42 “यौ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! कारण, अहाँ सभ पुदीना, मसल्‍ला और छोट सँ छोट साग-पात सभक दसम अंश तँ परमेश्‍वर केँ अर्पण करैत छी, मुदा न्‍याय और परमेश्‍वरक प्रेम सँ कोनो मतलब नहि रखैत छी। होयबाक तँ ई चाहैत छल जे ओ सभ बात करैत परमेश्‍वरक प्रेम और न्‍याय पर ध्‍यान दितहुँ। 43 “यौ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! कारण, सभाघर सभ मे प्रमुख आसन पर बैसब और हाट-बजार मे लोकक प्रणाम स्‍वीकार करब अहाँ सभ केँ बहुत नीक लगैत अछि। 44 “हँ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! कारण, अहाँ बिनु चिन्‍हक कबर सनक छी जाहि पर लोक बिनु बुझने चलैत-फिरैत अछि।” 45 एहि पर धर्म-नियमक एक पंडित यीशु केँ उत्तर देलथिन, “गुरुजी, एहन बात सभ कहि कऽ अहाँ हमरो सभक अपमान करैत छी।” 46 यीशु कहलथिन, “हँ, अहूँ सभ जे धर्म-नियमक पंडित छी, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ लोक सभ पर तेहन बोझ लादि दैत छिऐक जे ओ सभ सहि नहि सकैत अछि और ओकरा सभ केँ बोझ उठाबऽ मे आङुरो भिड़ा कऽ मदति नहि करैत छिऐक। 47 “धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! कारण, अहाँ सभ परमेश्‍वरक ओहि प्रवक्‍ता सभक कबर पर चबुतराक निर्माण करैत छी जिनका अहाँ सभक पूर्वज सभ जान सँ मारि देलकनि। 48 एहि तरहेँ अहाँ सभ स्‍पष्‍ट करैत छी जे अपना पूर्वज सभक काज सँ सहमत छी। ओ सभ हुनका सभ केँ मारि देलकनि और अहाँ सभ हुनकर सभक कबर बनबैत छी। 49 एहि कारणेँ सर्वज्ञानी परमेश्‍वर कहलनि, ‘हम ओकरा सभक ओहिठाम अपन प्रवक्‍ता और दूत लोकनि केँ पठयबैक। ओ सभ हिनका सभ मे सँ कतेको गोटे केँ मारि देतनि और कतेको गोटे केँ सतौतनि।’ 50 तेँ सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ परमेश्‍वरक जतेक प्रवक्‍ताक खून बहाओल गेल अछि तकर लेखा एहि पीढ़ीक लोक सँ लेल जायत, 51 अर्थात् हाबिलक खून सँ लऽ कऽ, मन्‍दिरक बलि-वेदी और ‘पवित्र स्‍थान’क बीच मे मारल गेल जकरयाहक खून धरिक लेखा। हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे तकर पूरा लेखा एही पीढ़ीक लोक सँ लेल जायत। 52 “यौ धर्म-नियमक पंडित सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! कारण, अहाँ सभ ओ कुंजी छिनि कऽ रखने छी जे ज्ञानक द्वारि खोलैत अछि। अहाँ सभ अपनो नहि प्रवेश कयलहुँ, और जे सभ प्रवेश कऽ रहल छल तकरो सभ केँ रोकि देलिऐक।” 53 जखन यीशु ओहिठाम सँ चल गेलाह तँ फरिसी और धर्मशिक्षक सभ हुनकर कड़ा विरोध करऽ लागल। ओ सभ एहि बातक घात लगा कऽ हुनका सँ विभिन्‍न विषय मे प्रश्‍न करऽ लगलनि जे हुनकर कोनो कहल बात द्वारा हुनका फँसाबी।

Luke 12

1 एम्‍हर हजारो-हजार लोकक भीड़ जुटि गेल, एतऽ तक जे लोक सभ एक-दोसर सँ पिचाय लागल। तखन यीशु सभ सँ पहिने अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “फरिसी सभक रोटी फुलाबऽ वला खमीर सँ सावधान रहू—हमर कहबाक अर्थ अछि, हुनका सभक कपटपन सँ। 2 एहन किछु नहि अछि जे झाँपल होअय आ उघारल नहि जायत, वा जे नुकाओल होअय आ प्रगट नहि कयल जायत। 3 अहाँ जे किछु अन्‍हार मे कहने छी से इजोत मे सुनल जायत, और जे किछु बन्‍द कयल कोठली मे कानो-कान फुसफुसा कऽ बाजल छी, से छत पर सँ घोषणा कयल जायत। 4 “हे हमर मित्र सभ, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, तकरा सभ सँ नहि डेराउ जे सभ शरीर केँ मारि दैत अछि मुदा आओर किछु नहि कऽ सकैत अछि। 5 किनका सँ डेराइ से हम कहैत छी—तिनका सँ डेराउ, जिनका अहाँक शरीर केँ मारि देलाक बाद अहाँ केँ नरको मे फेकबाक अधिकार छनि। हँ, हुनके सँ डेराउ! 6 की दू पाइ मे पाँचटा बगेड़ी नहि बिकाइत अछि? तैयो परमेश्‍वर ओकरा सभ मे सँ एकोटा केँ नहि बिसरैत छथि। 7 हँ, अहाँ सभक माथक एक-एकटा केशो गनल अछि। नहि डेराउ—अहाँ सभ बहुतो बगेड़ी सँ मूल्‍यवान छी! 8 “हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे केओ मनुष्‍यक सामने हमरा अपन प्रभु मानि लेत, तकरो मनुष्‍य-पुत्र परमेश्‍वरक स्‍वर्गदूत सभक सामने अपन लोक मानि लेतैक। 9 मुदा जे केओ मनुष्‍यक सामने हमरा अस्‍वीकार करत, तकरो हम परमेश्‍वरक स्‍वर्गदूत सभक सामने अस्‍वीकार करबैक। 10 और जे केओ मनुष्‍य-पुत्रक विरोध मे कोनो बात कहत, तकरा क्षमा कयल जयतैक, मुदा जे केओ पवित्र आत्‍माक निन्‍दा करत, तकरा क्षमा नहि कयल जयतैक। 11 “जखन लोक सभ अहाँ सभ केँ सभाघर, शासक सभ और अधिकारी सभक समक्ष लऽ जायत, तँ एकर चिन्‍ता नहि करू जे हम अपन वयान मे की उत्तर देबैक वा की कहबैक, 12 किएक तँ पवित्र आत्‍मा ओही घड़ी अहाँ सभ केँ सिखा देताह जे की कहबाक चाही।” 13 तखन भीड़ मे सँ केओ यीशु केँ कहलकनि, “यौ गुरुजी, हमरा भैया केँ हमरा संग बाबूक सम्‍पत्तिक बटबारा करबाक लेल कहिऔन।” 14 मुदा ओ उत्तर देलथिन, “हौ भाइ, हमरा तोहर सभक पंच वा बटबारा करऽ वला के बनौलक?” 15 तखन ओ लोक सभ केँ कहलथिन, “सावधान! सभ तरहक लोभ सँ बाँचल रहू! कारण, मनुष्‍यक जीवन ओकर धन-सम्‍पत्ति पर निर्भर नहि रहैत छैक, ओ चाहे कतबो धनिक होअय।” 16 तखन ओ ओकरा सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ कहलथिन, “कोनो धनी आदमीक खेत मे बहुत उपजा भेलैक। 17 ओ मोने-मोन सोचलक जे, ‘आब हम की करू? हमरा लग अपन अन्‍न रखबाक लेल जगहे नहि अछि।’ 18 तखन सोचलक, ‘हम एना करब—ई सभ बखारी तोड़ि कऽ आरो नमहर-नमहर बना लेब, और ओही सभ मे हम अपन सभ अन्‍न और धन-सम्‍पत्ति राखब। 19 तखन हम अपना केँ कहब, ले, तोरा बहुते वर्षक लेल सम्‍पत्ति राखल छौ। आब आराम कर, खो-पी और आनन्‍द कर!’ 20 मुदा परमेश्‍वर ओकरा कहलथिन, ‘है मूर्ख, आइए राति तोहर प्राण तोरा सँ लऽ लेल जयतौ। तखन अपना लेल एतेक जे जमा कऽ लेलें, से ककर होयतैक?’” 21 यीशु आगाँ कहलथिन, “एहने दशा तकरा होयतैक जे केओ अपना लेल धन जुटबैत अछि मुदा परमेश्‍वरक नजरि मे धनिक नहि अछि।” 22 तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, प्राणक लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम की खायब, आ ने शरीरक लेल चिन्‍ता करू जे की पहिरब। 23 कारण, प्राण भोजन सँ महत्‍वपूर्ण अछि आ शरीर वस्‍त्र सँ। 24 कौआ केँ देखू। ओ सभ ने बाउग करैत अछि आ ने कटनी। ओकरा सभ केँ ने कोठी छैक आ ने बखारी। तैयो परमेश्‍वर ओकरा सभ केँ खुअबैत छथिन। और अहाँ सभ तँ चिड़ै सभ सँ कतेक मूल्‍यवान छी! 25 अहाँ सभ मे सँ के चिन्‍ता कऽ कऽ अपन उमेर केँ एको पल बढ़ा सकैत छी? 26 जँ ई छोट सँ छोट बात नहि कऽ सकैत छी, तँ आओर बातक चिन्‍ता किएक करैत छी? 27 “मैदानक फूल सभ केँ देखू, जे कोना बढ़ैत अछि। ओ सभ ने खटैत अछि आ ने चर्खा कटैत अछि। तैयो हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, राजा सुलेमान सेहो अपन राजसी वस्‍त्र पहिरि कऽ एहि फूल सन सुन्‍दर नहि लगैत छलाह। 28 परमेश्‍वर जँ घास केँ, जे आइ मैदान मे अछि और काल्‍हि आगि मे फेकल जायत, एहि प्रकारेँ हरियरी सँ भरल रखैत छथि, तँ ओ अहाँ सभ केँ आओर किएक नहि पहिरौताह-ओढ़ौताह? अहाँ सभ केँ कतेक कम विश्‍वास अछि! 29 तेँ अहाँ सभ अपन मोन एहि सोच मे नहि लगौने रहू जे, हम की खायब और की पीब। एकर चिन्‍ता मे नहि लागल रहू। 30 एहि संसारक लोक सभ, जे परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत छनि, से सभ एहि बात सभक पाछाँ दौड़ैत रहैत अछि। अहाँ सभक पिता तँ जनैत छथि जे अहाँ सभ केँ एहि बात सभक आवश्‍यकता अछि। 31 नहि! परमेश्‍वरक राज्‍य पर मोन लगाउ, और इहो वस्‍तु सभ अहाँ केँ देल जायत। 32 “हे हमर भेँड़ाक छोट समूह, नहि डेराउ, किएक तँ अहाँ सभक पिता खुशी सँ अपन राज्‍य अहाँ सभ केँ देबाक निर्णय कऽ लेने छथि। 33 अपन सम्‍पत्ति बेचि कऽ गरीब सभ केँ दिअ। अपना लेल एहन बटुआ बना लिअ जे कहियो नहि पुरान होइत अछि, स्‍वर्ग मे धन जमा करू जे कहियो घटैत नहि अछि, जकरा ने चोर छुबि सकैत अछि आ ने कीड़ा नोकसान कऽ सकैत अछि। 34 कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत। 35 “अहाँ सभ अपन डाँड़ कसने रहू, और डिबिया लेसने रहू। 36 ओहि नोकर सभ जकाँ रहू जे अपना मालिकक बाट ताकि रहल अछि जे, ओ विवाहक भोज खा कऽ कखन औताह जाहि सँ जखने आबि केबाड़ खटखटौताह तँ तुरत्ते खोलि दियनि। 37 कतेक नीक ओहि नोकर सभक लेल होयतैक, जकरा सभ केँ मालिक अयला पर प्रतीक्षा करैत पौताह। हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, मालिक अपन फाँड़ बान्‍हि कऽ ओकरा सभ केँ भोजन करबाक लेल बैसौथिन, और अपने सँ ओकरा सभ केँ परसि कऽ खुऔथिन। 38 हँ, ओहि नोकर सभक लेल कतेक नीक होयत, जकरा सभ केँ मालिक रातिक दोसरो वा तेसरो पहर मे आबि कऽ तैयार पौथिन। 39 मुदा ई बात जानि लिअ जे, घरक मालिक जँ बुझने रहैत जे चोर कय बजे आबि रहल अछि, तँ ओ अपना घर मे सेन्‍ह नहि काटऽ दैत। 40 अहूँ सभ सदिखन तैयार रहू, कारण मनुष्‍य-पुत्र एहने समय मे आबि जयताह जाहि समयक लेल अहाँ सभ सोचबो नहि करब जे ओ एखन औताह।” 41 पत्रुस पुछलथिन, “प्रभु, की ई दृष्‍टान्‍त अहाँ हमरे सभक लेल कहि रहल छी, वा सभक लेल?” 42 प्रभु उत्तर देलथिन, “तँ के अछि ओहन विश्‍वासपात्र आ बुद्धिमान भण्‍डारी जकरा मालिक अपना नोकर-चाकर सभक मुखिया बना दैत छथि जे ओ निश्‍चित समय पर ओकरा सभ केँ निर्धारित भोजन दैक? 43 ओहि सेवकक लेल कतेक नीक होयत, जकरा मालिक आबि कऽ ओहिना करैत पौताह। 44 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, मालिक अपन सम्‍पूर्ण सम्‍पत्तिक जबाबदेही ओकरा जिम्‍मा मे दऽ देथिन। 45 मुदा जँ ओ सेवक अपना मोन मे सोचऽ लागय जे, ‘हमर मालिक आबऽ मे बहुत देरी कऽ रहल अछि,’ और ओ नोकर-नोकरनी सभ केँ मारऽ-पिटऽ लागय आ खाय-पिबऽ मे लागि कऽ मातल रहऽ लागय, 46 तँ ओकर मालिक एहन दिन मे घूमि औताह जहिया ओ हुनकर बाट नहि तकैत रहत आ एहन समय मे औताह जकरा ओ नहि जानत। मालिक ओकरा खण्‍डी-खण्‍डी कऽ देथिन और ओकर अन्‍त ओहन होयतैक जे अविश्‍वासी सभक होइत छैक। 47 “ओ सेवक जे अपन मालिकक इच्‍छा तँ जनैत अछि मुदा तकरा पूरा करबाक लेल किछु नहि करैत अछि, से बहुत मारि खायत। 48 मुदा जे नहि जनैत अछि आ तखन मारि खाय जोगरक काज करैत अछि, से कम मारि खायत। जकरा बहुत देल गेल छैक, तकरा सँ बहुत माँगलो जयतैक, आ जतेक आओर बेसी ककरो देल गेल छैक, ततेक आओर फेर ओकरा घुमाबऽ पड़तैक। 49 “हम पृथ्‍वी पर आगि लगाबऽ आयल छी, और हमरा बड्ड इच्‍छा अछि जे ओ एखने सुनगि गेल रहैत। 50 मुदा हमरा एकटा बड़का कष्‍ट भोगबाक अछि, और जाबत तक ओ बात पूर्ण नहि होयत, ताबत तक हम कतेक व्‍याकुल छी! 51 की अहाँ सभ सोचैत छी जे हम पृथ्‍वी पर मेल-मिलाप करयबाक लेल आयल छी? नहि! हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, मेल-मिलाप नहि, बल्‍कि फूट! 52 आब सँ एके परिवार मे पाँच व्‍यक्‍ति एक-दोसराक विरोधी भऽ जायत, तीन गोटेक विरोध मे दू, आ दू गोटेक विरोध मे तीन। 53 अपना मे फूट भऽ जायत—बाबू बेटाक विरोध मे, आ बेटा बाबूक विरोध मे, माय बेटीक विरोधी, आ बेटी मायक, सासु पुतोहुक विरोधी, आ पुतोहु सासुक।” 54 यीशु भीड़क लोक सभ केँ इहो कहलथिन, “पश्‍चिम मे मेघ उठैत देखिते अहाँ सभ कहैत छी जे, वर्षा होयत, और से होइतो अछि। 55 और जखन दछिनाही बहैत देखैत छी तँ कहैत छी जे, बड्ड गर्मी पड़त, और से पड़बो करैत अछि। 56 यौ पाखण्‍डी सभ! पृथ्‍वी और आकाशक लक्षण अहाँ सभ चिन्‍हि लैत छी, तँ एहि वर्तमान समयक लक्षण सभ किएक नहि चिन्‍हैत छी? 57 “अहाँ सभ अपने किएक नहि निर्णय करैत छी जे उचित की अछि? 58 केओ अहाँ पर मोकदमा कऽ कऽ कचहरी लऽ जा रहल अछि, तँ बाटे मे ओकरा संग समझौता करबाक प्रयत्‍न करू। एना नहि होअय जे ओ अहाँ केँ न्‍यायाधीशक समक्ष बलजोरी लऽ जाय, न्‍यायाधीश अहाँ केँ सिपाहीक हाथ मे दऽ देअय, आ सिपाही अहाँ केँ जहल मे बन्‍द कऽ देअय। 59 हम अहाँ केँ कहैत छी जे, जाबत धरि अहाँ पाइ-पाइ कऽ सधा नहि देबैक, ताबत धरि ओतऽ सँ नहि छुटब।”

Luke 13

1 तखने किछु लोक यीशु लग आबि कऽ हुनका किछु गलीली सभक बारे मे सुनौलकनि जे, कोना ओ सभ जखन बलि चढ़ा रहल छल तँ राज्‍यपाल पिलातुस ओकर सभक हत्‍या करबा देलथिन। 2 यीशु उत्तर देलथिन, “की अहाँ सभ बुझैत छी जे ई गलील निवासी सभ आओर सभ गलील निवासी सँ अधिक पापी छल जे ओकरा सभ पर ई विपत्ति अयलैक? 3 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, नहि! मुदा अहाँ सभ जँ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन नहि करब, तँ अहूँ सभ एहिना नाश होयब। 4 वा ओ अठारह गोटे जकरा सभ पर शिलोहक मिनार खसि पड़ल आ पिचा कऽ मरि गेल, की अहाँ सभ बुझैत छी जे ओ सभ यरूशलेमक आओर सभ निवासी सँ बेसी दोषी छल? 5 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, नहि! मुदा अहाँ सभ जँ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन नहि करब, तँ अहूँ सभ एहिना नाश होयब।” 6 यीशु ओकरा सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ कहलथिन, “एक आदमीक अंगूर-उद्यान मे एक अंजीरक गाछ छल। ओ ओहि सँ फल तोड़बाक लेल गेल, मुदा ओकरा किछुओ नहि भेटलैक। 7 तखन ओ माली केँ कहलकैक, ‘देखह! हम तीन वर्ष सँ एहि गाछ सँ अंजीर तोड़ऽ अबैत छी, मुदा ई कोनो फले नहि दैत अछि। एकरा काटि दैह। ई बेकार जगहो छेकने अछि।’ 8 माली उत्तर देलकैक, ‘सरकार, एकरा एक वर्ष आओर रहऽ देल जाओ। हम एकरा चारू कात कोड़ि कऽ गोबर पटा देबैक। 9 तखन अगिला वर्ष जँ फड़त, तँ ठीक, नहि तँ अपने एकरा कटबा देबैक।’” 10 एक विश्राम-दिन मे यीशु एकटा सभाघर मे उपदेश दऽ रहल छलाह। 11 ओहिठाम एक स्‍त्री छलि जकरा अठारह वर्ष सँ दुष्‍टात्‍मा लगबाक कारणेँ डाँड़ टुटल छलैक। ओ एकदम झुकल रहैत छलि और कनेको सोझ नहि भऽ सकैत छलि। 12 यीशु ओकरा देखि बजा कऽ कहलथिन, “बहिन, अहाँ अपना कष्‍ट सँ मुक्‍त भऽ गेलहुँ।” 13 तखन ओ ओकरा पर हाथ रखलनि, और ओ तुरत्ते सोझ भऽ गेलि आ परमेश्‍वरक स्‍तुति करऽ लागलि। 14 एहि पर सभाघरक अधिकारी तमसा गेलाह जे यीशु किएक विश्राम-दिन मे ककरो ठीक कयलनि, और ओ लोक सभ केँ कहलथिन, “छओ दिन अछि जाहि मे काज करबाक चाही। ओहि छओ दिन मे आउ और स्‍वस्‍थ कऽ देबाक लेल कहू, नहि कि विश्राम-दिन मे।” 15 प्रभु हुनका उत्तर देलथिन, “हे पाखण्‍डी सभ! की अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक आदमी विश्राम-दिन मे अपन बड़द वा गदहा केँ थरि सँ खोलि कऽ पानि पिअयबाक लेल नहि लऽ जाइत छी? 16 तँ ई स्‍त्री जे अब्राहमक वंशज अछि, और जे अठारह वर्ष सँ शैतानक बन्‍हन मे छलि, की एकरा विश्राम-दिन मे एहि बन्‍हन सँ मुक्‍त नहि करबाक चाही?” 17 यीशु जखन ई बात कहलनि तँ हुनकर सभ विरोधी लज्‍जित भऽ गेल। मुदा लोक सभ हुनकर नीक-नीक काज सभ देखि अति आनन्‍दित भेल। 18 तखन यीशु कहलनि, “परमेश्‍वरक राज्‍य केहन अछि? ओकर तुलना हम कोन चीज सँ करू? 19 ओ सरिसोक दाना जकाँ अछि जकरा किसान अपना बाड़ी मे बाउग कयलक। ओ बढ़ि कऽ नमहर गाछ बनि गेल, और ओकर ठाढ़ि मे आकाशक चिड़ै सभ आबि कऽ अपन खोंता बना लेलक।” 20 यीशु फेर कहलनि, “परमेश्‍वरक राज्‍यक हम कोन चीज सँ तुलना करू? 21 ओ ओहि खमीर जकाँ अछि जकरा एक स्‍त्री तीन पसेरी आँटा मे मिला कऽ सनलक। बाद मे खमीरक शक्‍ति सँ पूरा आँटा फुलि गेलैक।” 22 तखन यीशु नगर-नगर और गाम-गाम घूमि कऽ लोक सभ केँ उपदेश दैत यरूशलेम दिस बढ़ऽ लगलाह। 23 केओ हुनका सँ पुछलकनि, “प्रभु, की उद्धार पौनिहार किछुए लोक मात्र होयत?” 24 ओ उत्तर देलथिन, “द्वारिक चौराइ कम अछि तेँ पूरा शक्‍ति सँ प्रवेश करबाक कोशिश करू। कारण, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, एहन बहुतो लोक होयत जे प्रवेश करऽ चाहत मुदा कऽ नहि सकत। 25 जखन घरक मालिक उठि कऽ केबाड़ बन्‍द कऽ लेताह तँ अहाँ सभ बाहर ठाढ़ भऽ कऽ केबाड़ केँ ढकढका कऽ कहऽ लागब जे, ‘प्रभु, हमरा सभक लेल खोलि दिअ।’ ओ उत्तर देताह, ‘हम तोरा सभ केँ नहि चिन्‍हैत छिअह आ नहि जनैत छिअह जे कतऽ सँ आयल छह।’ 26 तखन अहाँ सभ कहऽ लागब जे, ‘हम सभ तँ अहाँक संग खयलहुँ-पिलहुँ, और अहाँ हमरा सभक गाम-घर मे उपदेश देलहुँ।’ 27 मुदा ओ कहताह, ‘हम तोरा सभ केँ नहि चिन्‍हैत छिअह, आ नहि जनैत छिअह जे कतऽ सँ आयल छह। है कुकर्मी सभ, तोँ सभ गोटे हमरा लग सँ भाग!’ 28 अहाँ सभ जखन अब्राहम, इसहाक, याकूब आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ केँ परमेश्‍वरक राज्‍य मे देखबनि और अपना केँ बाहर निकालल पायब तखन अहाँ सभ कानब और दाँत कटकटायब। 29 लोक पूब आ पश्‍चिम, उत्तर आ दक्षिण सँ आबि कऽ परमेश्‍वरक राज्‍य मे भोज खयबाक लेल बैसत। 30 हँ, कतेक लोक जे एखन पाछाँ अछि से तखन आगाँ रहत, आ कतेक लोक जे एखन आगाँ अछि से तखन पाछाँ रहत।” 31 तखने किछु फरिसी सभ आबि कऽ यीशु केँ कहलथिन, “अहाँ एहिठाम सँ चल जाउ, कारण हेरोद अहाँ केँ मारि देबऽ चाहैत अछि।” 32 ओ उत्तर देलथिन, “जा कऽ ओहि नढ़िया केँ कहि दिऔक जे, हम आइ और काल्‍हि दुष्‍टात्‍मा निकालबाक और बिमार लोक सभ केँ नीक करबाक अपन काज करैत रहब, और परसू हम अपन लक्ष्‍य पूरा करब। 33 हमरा आइ, काल्‍हि और परसू आगाँ बढ़ैत रहबाक अछि, किएक तँ ई कोना होयत जे परमेश्‍वरक कोनो प्रवक्‍ता यरूशलेम छोड़ि कोनो दोसर ठाम मारल जाय? 34 “हे यरूशलेम! हे यरूशलेम! तोँ प्रभुक प्रवक्‍ता सभक हत्‍या करैत छह आ जिनका परमेश्‍वर तोरा लग पठबैत छथुन, तिनका सभ केँ तोँ पथरबाहि कऽ कऽ मारि दैत छहुन। हम कतेको बेर चाहलिअह जे जहिना मुर्गी अपना बच्‍चा सभ केँ अपन पाँखिक तर मे नुकबैत अछि, तहिना हमहूँ तोहर सन्‍तान सभ केँ जमा कऽ लिअह। मुदा तोँ ई नहि चाहलह! 35 देखह, आब तोहर घर उजड़ल पड़ल छह। हम तोरा कहैत छिअह, तोँ हमरा फेर ताबत तक नहि देखबह जाबत तक ओ समय नहि आओत जहिया तोँ ई कहबह जे, ‘धन्‍य छथि ओ जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि!’”

Luke 14

1 एक विश्राम-दिन यीशु एक मुख्‍य फरिसीक घर भोजन करबाक लेल गेलाह। फरिसी सभ हुनका पर घात लगौने छलाह। 2 यीशुक ठीक सामने मे एक आदमी छल, जकर देह-हाथ बिमारी सँ फुलि गेल छलैक। 3 यीशु धर्म-नियमक पंडित और फरिसी सभ सँ पुछलथिन, “की विश्राम-दिन मे रोगी केँ स्‍वस्‍थ करब धर्म-नियमक अनुसार उचित होयत वा नहि?” 4 मुदा ओ सभ एकर किछु उत्तर नहि देलथिन। यीशु ओहि आदमी केँ हाथ सँ पकड़ि कऽ नीक कऽ देलथिन और जाय देलथिन। 5 तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ मे एहन के छी, जकर बेटा वा बड़द जँ विश्राम-दिन मे इनार मे खसि पड़य तँ ओकरा तुरत्ते बाहर नहि निकालब?” 6 ओ सभ फेर किछु उत्तर नहि दऽ सकलथिन। 7 यीशु जखन निमन्‍त्रित लोक सभ केँ अपना लेल मुख्‍य-मुख्‍य आसन चुनैत देखलनि, तँ हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ सिखाबऽ लगलथिन जे, 8 “अहाँ सभ केँ जखन केओ विवाह मे निमन्‍त्रित करय तँ मुख्‍य आसन पर नहि बैसू। कतौ एना नहि होअय जे अहूँ सँ प्रतिष्‍ठित व्‍यक्‍ति सेहो आमन्‍त्रित होथि 9 और जे घरबैआ अहाँ दूनू गोटे केँ नोत देने छथि से आबि कऽ अहाँ केँ कहथि जे, ‘एहिठाम हिनका बैसऽ दिऔन।’ तखन अहाँ केँ लाजक अनुभव होयत आ सभ सँ नीच स्‍थान पर बैसऽ पड़त। 10 नहि, अहाँ केँ जखन केओ नोत दिअय, तँ जा कऽ सभ सँ नीच स्‍थान पर बैसू जाहि सँ घरबैआ जखन औताह तँ अहाँ केँ कहथि, ‘यौ संगी, चलू, एम्‍हर नीक आसन पर बैसू।’ एहि तरहेँ अतिथि सभक सामने अहाँक आदर कयल जायत। 11 हँ, जे केओ अपना केँ पैघ बनाबऽ चाहैत अछि, से छोट बनाओल जायत, और जे केओ अपना केँ छोट बुझैत अछि, से पैघ बनाओल जायत।” 12 तखन यीशु घरबैआ केँ कहलथिन, “जखन लोक केँ भोजन करबाक वा भोज खयबाक नोत दैत छी, तँ अपना संगी-साथी, कुटुम्‍ब-परिवारक लोक वा धनी-मनी पड़ोसी सभ केँ नहि बजाउ। ओकरा सभ केँ जँ बजायब तँ बहुत सम्‍भावना अछि जे ओ सभ अहूँ केँ फेर बजाओत, और एहि तरहेँ अहाँ केँ तकर बदला भेटि जायत। 13 नहि, अहाँ जखन भोज करी तँ गरीब, लुल्‍ह-नाङड़ और आन्‍हर सभ केँ बजाउ। 14 अहाँ धन्‍य होयब, कारण ओ सभ अहाँ केँ फेर बजा कऽ तकर बदला नहि दऽ सकत; अहाँ तकर बदला तहिया पायब जहिया धर्मी सभ मृत्‍यु सँ जीबि उठताह।” 15 ई सुनि यीशुक संग भोजन पर बैसल एक आदमी कहलकनि, “धन्‍य अछि ओ सभ जे परमेश्‍वरक राज्‍यक भोज खाय पाओत!” 16 यीशु उत्तर देलथिन, “एक बेर एक आदमी बड़का भोज कऽ कऽ बहुत लोक केँ निमन्‍त्रण देलनि। 17 भोजक सामग्री तैयार भेला पर, जकरा सभ केँ ओ नोत देने छलथिन, तकरा सभ लग ई कहबाक लेल अपना नोकर केँ पठौलथिन जे, ‘चलै जाइ जाउ, बिझो भेल, सभ वस्‍तु ठीक भऽ गेल अछि।’ 18 मुदा ओ सभ एक-एक कऽ बहाना करऽ लागल। पहिल आदमी कहलकैक, ‘हम एकटा खेत किनने छी और ओकरा एखन देखऽ जयबाक अछि। कृपा कऽ कऽ हमरा माफ करू।’ 19 दोसर कहलकैक, ‘हम पाँच जोड़ बड़द किनने छी, और ओकरा सभ केँ जोति कऽ जँचबाक लेल हम एखन विदा भऽ गेल छी। कृपा कऽ कऽ हमरा माफ करू।’ 20 फेर तेसर कहलकैक, ‘हम एखने विवाह कयलहुँ, तेँ हम नहि आबि सकैत छी।’ 21 नोकर घूमि कऽ सभटा बात अपना मालिक केँ कहलकनि। तखन घरबैआ तामसे-पित्ते नोकर केँ अढ़ौलनि जे, ‘जल्‍दी-जल्‍दी नगरक बाट और गली सभ मे जाह और गरीब, लुल्‍ह-नाङड़ और आन्‍हर सभ केँ बजा लाबह।’ 22 कनेक काल मे नोकर आबि कऽ कहलकनि, ‘मालिक, अपने जहिना हमरा कहलहुँ तहिना हम कयलहुँ, तैयो बैसबाक जगह बाँकिए अछि।’ 23 तँ मालिक ओकरा उत्तर देलथिन, ‘तखन बाहर देहातोक सड़क और आरि-धुर पर सँ लोक सभ केँ बलजोरी बजा कऽ लाबह, जाहि सँ हमर घर भरि जाय। 24 हम तोरा सभ केँ कहैत छिअह जे, जकरा सभ केँ हम पहिने नोत देने छलिऐक, ताहि मे सँ एको गोटे हमर एहि भोज मे सँ किछु नहि चिखऽ पाओत।’” 25 आब बहुत बड़का भीड़ यीशुक संग चलि रहल छलनि। ओ ओकरा सभ दिस घूमि कऽ कहलथिन, 26 “जँ केओ हमरा लग आओत, और अपन माय-बाबू, स्‍त्री, धिआ-पुता और भाय-बहिन केँ, और हँ, अपना प्राणो केँ अप्रिय नहि बुझत, तँ ओ हमर शिष्‍य नहि बनि सकैत अछि। 27 जे केओ हमरा कारणेँ दुःख उठयबाक आ प्राणो देबाक लेल तैयार भऽ हमरा पाछाँ नहि चलैत अछि, से हमर शिष्‍य नहि बनि सकैत अछि। 28 “तहिना, मानि लिअ जे अहाँ सभ मे सँ केओ बड़का घर बनाबऽ चाहत, तँ की ओ पहिने बैसि कऽ हिसाब नहि करत जे एहि मे कतेक खर्च लागत, पूरा करबाक लेल हमरा लग पाइ अछि वा नहि? 29 किएक तँ ओ जँ शुरू करत आ न्‍यो राखि कऽ घर पूरा नहि कऽ सकत, तँ जतेक लोक देखतैक, से सभ ओकरा हँसी उड़ाबऽ लगतैक जे, 30 ‘ई घर बनाबऽ लागल और बीचहि मे छोड़ऽ पड़लैक!’ 31 “वा मानि लिअ जे कोनो राजा दोसर राजा सँ युद्ध करबाक लेल बहरा रहल अछि। तँ की ओ पहिने बैसि कऽ नीक जकाँ विचार नहि कऽ लेत जे, जे राजा बीस हजार सैनिक लऽ कऽ हमरा पर आक्रमण करऽ आबि रहल अछि, की तकर सामना हम दस हजार सैनिक लऽ कऽ कऽ सकब? 32 जँ ओकरा होयतैक जे नहि कऽ सकब, तँ ओहि राजा केँ दूर रहिते ओ दूत सभ केँ पठा कऽ मेल-मिलापक समझौताक लेल आग्रह करतैक। 33 तहिना, अहाँ सभ मे सँ जे केओ अपन सभ किछु केँ त्‍यागि नहि देत, से हमर शिष्‍य नहि बनि सकैत अछि। 34 “नून नीक वस्‍तु अछि, मुदा जँ ओकर स्‍वाद समाप्‍त भऽ जाइक तँ कोन वस्‍तु सँ ओकरा फेर नूनगर बनाओल जा सकत? 35 ओ ने जमीनक लेल उपयुक्‍त होयत आ ने खादक लेल। तखन ओ फेकले जायत। जकरा सुनबाक लेल कान होइक, से सुनओ।”

Luke 15

1 कर असूल करऽ वला और “पापी” सभ यीशु लग हुनकर शिक्षा सुनबाक लेल जमा भऽ रहल छल। 2 मुदा फरिसी और धर्मशिक्षक सभ दूसऽ लगलाह जे, “ई तँ पापी सभ केँ स्‍वागत करैत अछि और ओकरा सभक संग खाइतो अछि।” 3 तखन यीशु हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त देलथिन, 4 “मानि लिअ जे अहाँ सभ मे सँ ककरो जँ एक सय भेँड़ा होअय और एकटा हेरा जाय, तँ की ओ अपन निनान्‍नबे केँ बाध मे छोड़ि हेरायल भेँड़ा केँ ताबत धरि नहि तकैत रहत जाबत धरि ओ नहि भेटतैक? 5 तकरबाद भेटि गेला पर ओ कतेक प्रसन्‍न होयत! अपना भेँड़ा केँ कान्‍ह पर उठा कऽ घर चल आओत 6 और अपन संगी-साथी, पड़ोसी सभ केँ बजा कऽ कहतैक जे, ‘हमरा संग आनन्‍द मनाउ, किएक तँ हमर हेरायल भेँड़ा भेटि गेल।’ 7 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, एहि तरहेँ निनान्‍नबे एहन धर्मी सभ जे ई बुझैत अछि जे हमरा अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करबाक कोनो आवश्‍यकता नहि अछि, स्‍वर्ग मे ओकरा सभक अपेक्षा ओहि एक पापीक लेल बेसी आनन्‍द मनाओल जायत जे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करैत अछि। 8 “वा मानि लिअ जे कोनो स्‍त्री केँ दसटा चानीक रुपैया होइक और एकटा हेरा जाइक, तँ की ओ डिबिया लेसि कऽ घर बहारि कऽ ओ रुपैया जा धरि नहि भेटि जयतैक ता धरि बढ़ियाँ जकाँ तकैत नहि रहत? 9 तकरबाद रुपैया भेटला पर ओ अपन सहेली और पड़ोसी सभ केँ बजा कऽ कहतैक जे, ‘हमरा संग आनन्‍द मनाउ, किएक तँ हमर हेरायल रुपैया फेर भेटि गेल।’ 10 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, एही तरहेँ एकोटा पापी जे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करैत अछि, तकरा लेल परमेश्‍वरक स्‍वर्गदूत सभ आनन्‍द मनबैत छथि।” 11 यीशु आगाँ कहलथिन, “एक आदमी केँ दूटा बेटा रहनि। 12 छोटका अपना बाबू केँ कहलकनि, ‘यौ बाबूजी! हमर अंश-सम्‍पत्ति जे-जतेक होयत, से एखने हमरा बाँटि कऽ दऽ दिअ।’ एहि पर बाबू दूनू बेटा मे अपन धन-सम्‍पत्ति बाँटि देलथिन। 13 “किछु दिनक बाद छोटका बेटा अपन सभ धन-सम्‍पत्ति लऽ कऽ दूर परदेश चल गेल। ओतऽ ओ भोग-विलास मे अपन सभ धन उड़ा लेलक। 14 ओकर सभ धन खर्च भऽ गेलाक बाद, ओहि देश मे बहुत भारी रौदी पड़लैक, और ओ बड़का विपत्ति मे पड़ि गेल। 15 तखन ओ ओहि देशक एक आदमीक शरण मे गेल, जे ओकरा अपना खेत मे सुगर चरयबाक लेल पठौलकैक। 16 ओकरा बड्ड इच्‍छा भेलैक जे, जे खोंइचा सुगर सभ खा रहल अछि ताहि सँ हम अपनो पेट भरितहुँ, मुदा ओकरा केओ किछु नहि दैत छलैक। 17 “तखन ओकरा होश अयलैक, और ओ सोचऽ लागल जे, हमर बाबूजीक ओतेक नोकर-चाकर सभ भरि पेट भोजन पबैत अछि, और हम एतऽ भूख सँ मरऽ-मरऽ पर छी। 18 हम अपना बाबूक ओहिठाम जा कऽ ई कहबनि जे, बाबूजी, हम परमेश्‍वरक विरोध मे और अहाँक विरोध मे पाप कयने छी। 19 हम आब अहाँक बालक कहयबा जोगरक नहि छी। अपना नोकर सभ जकाँ हमरो एकटा नोकर मानू। 20 “एना विचार कऽ कऽ ओ उठल आ अपना बाबूक ओहिठाम जयबाक लेल विदा भऽ गेल। ओ घर सँ दूरे छल कि ओकर बाबू ओकरा चिन्‍हि गेलथिन और हुनकर हृदय दया सँ भरि गेलनि। ओ दौड़ि कऽ अपना बेटा केँ भरि पाँज पकड़ि ओकरा चुम्‍मा लेबऽ लगलथिन। 21 बेटा हुनका कहलकनि, ‘बाबूजी, हम परमेश्‍वरक विरोध मे और अहाँक विरोध मे पाप कयने छी। हम आब अहाँक पुत्र कहयबा जोगरक नहि छी।’ 22 मुदा पिता अपना नोकर सभ केँ कहलथिन, ‘जल्‍दी सँ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा आनि कऽ एकरा पहिरा दहक, हाथ मे औँठी लगा दहक, पयर मे जुत्ता सेहो पहिरा दहक, 23 और ओ मोटका पशु जे पोसि कऽ रखने छी, तकरा काटह! हम सभ भोज कऽ कऽ खुशी मनायब, 24 किएक तँ ई हमर बेटा मरि गेल छल आ फेर जीबि गेल! ई हेरायल छल आ फेर भेटि गेल!’ तकरबाद ओ सभ खुशी मनाबऽ लगलाह। 25 “ई सभ होइत काल जेठका बेटा खेत मे रहनि। जखन ओ घर लग पहुँचल तँ घर मे नाच-गान सुनलक। 26 ओ एकटा नोकर केँ बजा कऽ पुछलक, ‘ई की भऽ रहल अछि?’ 27 नोकर कहलकैक, ‘अहाँक भाय अयलाह अछि, आओर अहाँक बाबूजी एहि खुशी मे जे हमर बेटा हमरा फेर सकुशल भेटि गेल अछि, मोटका पशु जे पोसल छलैक, तकरा कटबौलनि अछि।’ 28 “ई सुनि कऽ ओकरा ततेक तामस भेलैक जे ओ भीतरो नहि गेल। बाबूजी ई बात बुझि, बाहर आबि कऽ ओकरा मनाबऽ लगलथिन। 29 मुदा ओ अपना बाबू केँ उत्तर देलकनि जे, ‘देखू! एतेक वर्ष सँ हम मरि-मरि कऽ अहाँक सेवा कऽ रहल छी, आ कहियो अहाँक बात नहि टारलहुँ। तैयो आइ धरि हमरा संगी सभक संग खुशी मनयबाक लेल एकोटा पठरू तक काटऽ नहि देलहुँ, 30 मुदा अहाँक ई बेटा वेश्‍या सभ लग अहाँक सभ धन-सम्‍पत्ति उड़ा कऽ जखन घर आयल अछि, तँ अहाँ ओकरा लेल पोसल मोटका पशु कटबबैत छी!’ 31 “बाबू कहलथिन, ‘बौआ! अहाँ सभ दिन हमरा संग छी, आ जे-जतेक हमर सम्‍पत्ति अछि, से सभ अहींक अछि। 32 मुदा एहि शुभ अवसर पर खुशी तँ मनाबहि पड़ल, किएक तँ ई अहाँक भाय मरि गेल छल आ फेर जीबि गेल, हेरा गेल छल आ फेर भेटि गेल!’”

Luke 16

1 यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “कोनो धनी आदमी रहथि। हुनका एकटा मुन्‍सी छलनि जे हुनकर पाइ-कौड़ीक हिसाब-किताब रखैत छलनि। मुन्‍सीक बारे मे हुनका लग ई सिकायत अयलनि जे, ओ अपनेक सम्‍पत्ति उड़ा रहल अछि। 2 एहि पर ओ अपना मुन्‍सी केँ बजा कऽ पुछलथिन, ‘ई हम तोरा विषय मे की सुनि रहल छिअह? तोँ अपना काजक हिसाब-किताब हमरा दैह, कारण आब हम तोरा नोकरी सँ हटा रहल छिअह।’ 3 “तँ मुन्‍सी मोने-मोन सोचलक जे, आब हम की करू? मालिक हमरा सँ हमर नोकरी छिनि रहल छथि। माटि कोड़बाक लेल देह मे तागति नहि अछि, आ भीख माँगऽ मे लाज होइत अछि। 4 हँ, आब फुरायल एकटा बात जे हम कऽ सकैत छी जाहि सँ नोकरी छुटला पर लोक सभ अपना घर मे हमर स्‍वागत करत। 5 “ई विचारि कऽ ओ अपना मालिकक कर्जदार सभ केँ एक-एक कऽ बजबौलक। पहिल वला सँ पुछलकैक, ‘अहाँ पर हमर मालिकक कतेक ऋण अछि?’ 6 ओ उत्तर देलकैक जे ‘एक सय मन तेल।’ तँ मुन्‍सी कहलकैक, ‘लिअ अपन लेखत, आ जल्‍दी बैसि कऽ ओकरा पचास मन बना लिअ।’ 7 तखन दोसर सँ पुछलकैक, ‘और अहाँ पर कतेक ऋण अछि?’ ओ कहलकैक, ‘एक सय बोरा गहुम।’ मुन्‍सी कहलकैक, ‘लिअ अपन लेखत और अस्‍सी बोरा लिखि लिअ।’ 8 मालिक एहि बइमान मुन्‍सीक प्रशंसा कयलथिन, जे ओ चतुराइ सँ काज कयलक। एहि संसारक पुत्र सभ इजोतक पुत्र सभक अपेक्षा अपना लोकक संग जे व्‍यवहार छैक, ताहि मे विशेष चतुर रहैत अछि। 9 “हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, सांसारिक धन अपना लेल संगी बनाबऽ मे प्रयोग करू, जाहि सँ धन-सम्‍पत्ति जखन समाप्‍त भऽ जायत तँ स्‍वर्गक भवन मे अहाँक स्‍वागत होयत। 10 “जे छोट बात सभ मे विश्‍वासपात्र अछि, से पैघो बात सभ मे विश्‍वासपात्र रहत। जे छोट बात मे बइमान अछि, से पैघो बात मे बइमान रहत। 11 अहाँ सांसारिक धन मे जँ विश्‍वासपात्र नहि भेलहुँ, तँ वास्‍तविक धन दऽ कऽ अहाँ पर के विश्‍वास करत? 12 जँ अनका धन मे अहाँ विश्‍वासपात्र नहि भेलहुँ, तँ अहाँक अपन धन अहाँ केँ के देत? 13 “कोनो खबास दूटा मालिकक सेवा नहि कऽ सकैत अछि। कारण, ओ एक सँ घृणा करत आ दोसर सँ प्रेम, अथवा पहिल केँ खूब मानत आ दोसर केँ तुच्‍छ बुझत। अहाँ परमेश्‍वर और धन-सम्‍पत्ति दूनूक सेवा नहि कऽ सकैत छी।” 14 फरिसी सभ, जे धनक लोभी छलाह, से सभ ई सभ बात सुनि रहल छलाह और हुनकर हँसी उड़ाबऽ लगलनि। 15 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ ठीक ओहन लोक सभ छी जे मनुष्‍यक सामने अपना केँ धर्मी ठहरबैत छी, मुदा परमेश्‍वर अहाँ सभक मोन केँ जनैत छथि। जे मनुष्‍यक नजरि मे सम्‍मानजनक बात अछि, से परमेश्‍वरक दृष्‍टि मे घृणित अछि। 16 “यूहन्‍नाक समय धरि मूसाक धर्म-नियम और प्रभुक प्रवक्‍ता सभक लेख छल। तकरा बादक समय सँ परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचारक प्रचार भऽ रहल अछि, और सभ केओ हुनकर राज्‍य मे प्रवेश करबाक पूरा बल सँ प्रयत्‍न कऽ रहल अछि। 17 तैयो धर्म-नियमक एको अक्षरक मात्रा मेटा जयबाक अपेक्षा आकाश और पृथ्‍वी समाप्‍त भेनाइ आसान होयत। 18 “जे केओ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि। आ जे कोनो पुरुष पति द्वारा तलाक देल गेल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि। 19 “एक धनिक आदमी छल जे मलमल आ दामी-दामी वस्‍त्र पहिरैत छल। ओ सभ दिन भोज सनक भोजन करैत छल आ सुख-विलास सँ रहैत छल। 20 ओकरा दुआरि पर लाजर नामक गरीब आदमी केँ, जकर सम्‍पूर्ण शरीर घाव सँ भरल छलैक, राखि देल जाइत छलैक। 21 ओ गरीब आदमी आशा करैत छल जे धनिकक टेबुल सँ खसल टुकड़ा-टुकड़ी पाबि कऽ पेट भरब। कुकुर सभ आबि कऽ ओहि दुखिताह केँ घाव सेहो चाटि लैत छलैक। 22 “एक दिन गरीब लाजर मरि गेल आओर स्‍वर्गदूत सभ ओकरा स्‍वर्ग मे अब्राहम लग पहुँचौलनि। धनिक आदमी सेहो मरल आ माटि मे गाड़ल गेल। 23 नरक मे ओ अत्‍यन्‍त पीड़ा सहैत ऊपर दिस ताकि बहुत दूर अब्राहम केँ आ हुनका लग लाजर केँ देखलकनि। 24 ओ सोर पारलकनि जे, ‘यौ पिता अब्राहम! हमरा पर दया कऽ कऽ एहिठाम लाजर केँ पठा दिअ, जे ओ अपन आङुरक नऽह पानि मे डुबा कऽ हमर जीह केँ कनेक शीतल कऽ दिअय, हमरा एहि आगि मे बड्ड पीड़ा भऽ रहल अछि!’ 25 “मुदा अब्राहम उत्तर देलथिन, ‘हौ बेटा! मोन पाड़ह जे तोँ अपना जीवन मे नीक-नीक वस्‍तु सभ पौलह, जहिना लाजर खराब वस्‍तु। आब ओ एतऽ आनन्‍द मे अछि आओर तोँ पीड़ा मे। 26 आओर एतबे नहि—हमरा सभक आ तोरा बीच मे बड़का दरारि बनाओल गेल अछि, जाहि सँ जँ केओ एतऽ सँ तोरा ओहिठाम जाय चाहत तँ नहि जा सकत, आ ने तोँ जतऽ छह, ततऽ सँ केओ हमरा सभक ओहिठाम आबि सकत।’ 27 “तखन ओ धनिक उत्तर देलकनि, ‘एना अछि तँ, यौ पिता, हम विनती करैत छी जे हमर बाबूक ओहिठाम लाजर केँ पठाउ, 28 ओतऽ हमर पाँच भाय अछि। ओकरा सभ केँ ओ चेतावनी दैक जाहि सँ ओ सभ एहि पीड़ाक स्‍थान मे नहि आबय।’ 29 “अब्राहम कहलथिन, ‘मूसाक धर्म-नियम और परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख ओकरा सभ लग छैक, तोहर भाय सभ ओकरा मानओ।’ 30 “ओ उत्तर देलकनि, ‘नहि पिता अब्राहम! ओतबे सँ नहि होयत! मुदा जँ केओ मरल सभ मे सँ ओकरा सभ लग जायत, तखन ओ सभ मानत और अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ ठीक रस्‍ता पर आओत।’ 31 “अब्राहम कहलथिन, ‘ओ सभ जँ मूसाक और परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख नहि मानत, तँ जँ केओ मरि कऽ जिबिओ जायत तँ ओकरो बात नहि मानतैक।’”

Luke 17

1 यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “ई निश्‍चित अछि जे लोक सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ होयत, मुदा धिक्‍कार ताहि मनुष्‍य केँ, जकरा द्वारा ओहन बात सभ अबैत अछि! 2 ओकरा लेल एहि सँ नीक जे ओ एहि बच्‍चा सभ मे सँ एकोटा केँ पाप मे फँसाबय ई होइत जे ओकरा घेंट मे जाँतक पाट बान्‍हि समुद्र मे फेकि देल जाय। 3 तेँ अहाँ सभ सावधान रहू! “अहाँक भाय जँ पाप करैत अछि तँ ओकरा मना करू। जँ ओ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ पाप केँ छोड़ैत अछि तँ ओकरा माफ कऽ दिऔक। 4 आ जँ ओ दिन मे सात बेर अहाँक विरोध मे अपराध करय और सात बेर अहाँ लग घूमि कऽ अपन अपराध मानि कऽ माफी माँगय तँ माफ कऽ दिऔक।” 5 तखन समीह-दूत सभ हुनका कहलथिन, “हमरा सभक विश्‍वास केँ बढ़ाउ!” 6 ओ उत्तर देलथिन, “जँ अहाँ सभ केँ सरिसोक दानो बराबरि विश्‍वास अछि, तँ एहि तूँइतक गाछ केँ कहि सकैत छिऐक जे, उखड़ि कऽ समुद्र मे रोपा जो, और ओ अहाँक आज्ञा मानत। 7 “अहाँ सभ मे एहन मालिक के छी, जकर नोकर खेत मे सँ हऽर जोति कऽ वा बाध मे सँ भेँड़ा चरा कऽ जखन अबैत अछि, तँ कहैत छिऐक जे, ‘आउ, आउ, बैसू, भोजन कऽ लिअ’? 8 की ई नहि कहबैक जे, ‘हमर भानस करह, तखन जा धरि हम भोजन पर सँ उठब नहि, ता धरि तोँ फाँड़ बान्‍हि कऽ हमर सेवा करह, तकरबाद तोहूँ खाह-पिबह’? 9 जखन नोकर मालिकक कहल करैत छनि, तँ की ओहि लेल मालिक ओकरा धन्‍यवाद दैत छथिन? नहि! 10 तहिना अहूँ सभ, जतेक काज अहाँ सभ केँ अढ़ाओल गेल होअय, से सभ पूरा कऽ कऽ ई कहू जे, ‘हम सभ कोनो प्रशंसा जोगरक नहि छी; हम सभ तँ खाली वैह कयलहुँ जे हमर सभक कर्तव्‍य छल।’” 11 यीशु यरूशलेम जाइत काल सामरिया और गलील प्रदेशक सीमा दऽ कऽ जा रहल छलाह। 12 कोनो गाम मे जखन प्रवेश कयलनि तँ दसटा कुष्‍ठ-रोगी हुनका भेटलनि। ओ सभ फराके सँ ठाढ़ भऽ कऽ 13 जोर सँ सोर पारलकनि जे, “यौ मालिक यीशु! हमरा सभ पर दया करू!” 14 यीशु ओकरा सभ केँ देखि कऽ कहलथिन, “पुरोहित सभक ओहिठाम जाह और अपना केँ हुनका सभ केँ देखा दहुन।” ओ सभ जाइते-जाइत मे नीक भऽ गेल। 15 तखन ओकरा सभ मे सँ एक गोटे जखन देखलक जे हम नीक भऽ गेलहुँ, तँ ओ जोर-जोर सँ परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा करैत घूमि आयल, 16 और यीशुक पयर पर खसि कऽ हुनकर धन्‍यवाद करऽ लगलनि। ओ यहूदी नहि, सामरी जातिक छल। 17 तखन यीशु बजलाह, “की दसो गोटे नीक नहि भेल? आरो नौ आदमी कतऽ अछि? 18 की एहि आन जातिक लोक केँ छोड़ि कऽ आओर केओ एहन नहि बहरायल जे घूमि कऽ परमेश्‍वरक धन्‍यवाद करितनि?” 19 तखन ओ ओकरा कहलथिन, “आब उठि कऽ जाह। तोहर विश्‍वास तोरा नीक कऽ देलकह।” 20 फरिसी सभक ई पुछला पर जे परमेश्‍वरक राज्‍य कहिया आओत, यीशु उत्तर देलथिन, “परमेश्‍वरक राज्‍य ओहि तरहेँ नहि अबैत अछि जे आँखि सँ देखल जा सकय। 21 केओ कहऽ वला नहि होयत जे, ‘देखू, एतऽ अछि,’ वा ‘ओतऽ अछि,’ कारण, परमेश्‍वरक राज्‍य अहाँ सभक बीच मे अछि ।” 22 तखन ओ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “ओ समय आबि रहल अछि जखन अहाँ सभ केँ मनुष्‍य-पुत्रक युगक एको दिन देखबाक लेल बड़का इच्‍छा होयत, मुदा देखि नहि सकब। 23 लोक अहाँ सभ केँ कहत जे, ‘ओतऽ छथि!’ वा ‘एतऽ छथि।’ मुदा नहि जाउ! ओकरा सभक पाछाँ नहि दौड़ू! 24 कारण, मनुष्‍य-पुत्रक दिन जखन औतनि, तँ ओ बिजलोका जकाँ होयताह, जे चमकि कऽ आकाश केँ एक कात सँ दोसर कात तक इजोत कऽ दैत अछि। 25 मुदा ओहि सँ पहिने ई आवश्‍यक अछि जे ओ बहुत दुःख भोगथि और एहि पीढ़ीक लोक द्वारा अस्‍वीकार कयल जाथि। 26 “जहिना नूहक समय मे भेल, तहिना मनुष्‍य-पुत्रक अयबाक समय मे सेहो होयत। 27 जाहि दिन नूह जहाज मे चढ़ि गेलाह, ताहि दिन धरि लोक सभ खाय-पिबऽ मे और विवाह करऽ-कराबऽ मे मस्‍त रहल आ तखन जल-प्रलय भेल और सभ केओ नष्‍ट भऽ गेल। 28 “तहिना लूतक समय मे सेहो भेल। लोक सभ खाइत-पिबैत रहल, चीज-वस्‍तु बेचैत-किनैत रहल, बीया बाउग करैत रहल आ घर बनबैत रहल। 29 मुदा जाहि दिन लूत सदोम नगर सँ बहरयलाह, ताही दिन आकाश सँ आगि और गन्‍धकक वर्षा भेल और सभ केओ नष्‍ट भऽ गेल। 30 “जाहि दिन मनुष्‍य-पुत्र फेर प्रगट होयताह, ताहू दिन ठीक ओहिना होयत। 31 ताहि दिन जँ केओ छत पर होअय और ओकर सामान घर मे, तँ ओ ओकरा लेबाक लेल नहि उतरओ। तहिना जे केओ खेत मे होअय, से घूमि कऽ नहि आबओ। 32 लूतक घरवाली केँ मोन राखू। 33 जे केओ अपन प्राण बचयबाक प्रयत्‍न करैत अछि, से ओकरा गमाओत, और जे केओ अपन प्राण गमबैत अछि से ओकरा सुरक्षित राखत। 34 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, ओहि राति दू आदमी एक ओछायन पर सुतल रहत, एक लऽ लेल जायत, आ दोसर छोड़ि देल जायत। 35 दूटा स्‍त्रीगण एक संग जाँत पिसैत रहत, एकटा लऽ लेल जायत, आ दोसर छोड़ि देल जायत। 36 [दू आदमी खेत मे रहत, एक लऽ लेल जायत, आ दोसर छोड़ि देल जायत।] “ 37 शिष्‍य सभ पुछलथिन, “प्रभु, ई कतऽ होयत?” ओ उत्तर देलथिन, “जतऽ लास पड़ल रहत, ततहि गिद्ध सभ जुटत।”

Luke 18

1 तखन यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ ई बुझयबाक लेल जे निराश नहि भऽ कऽ प्रार्थना करैत रहबाक अछि, एक दृष्‍टान्‍त देलथिन। 2 ओ कहलथिन, “कोनो शहर मे एक न्‍यायाधीश रहैत छल जे ने परमेश्‍वरक डर मानैत छल आ ने कोनो मनुष्‍य केँ मोजर दैत छल। 3 ओहि शहर मे एक विधवा सेहो रहैत छलि जे बेर-बेर ओकरा लग आबि कऽ कहैत छलैक जे, ‘हमर उचित न्‍याय कऽ दिअ और हमरा संग जे अपराध कऽ रहल अछि, तकरा सँ हमरा बचाउ।’ 4 “किछु दिन धरि ओ नहि मानलक, मुदा बाद मे ओ मोने-मोन सोचऽ लागल जे, ‘ओना तँ हम ने परमेश्‍वरक डर मानैत छी आ ने मनुष्‍य केँ मोजर दैत छी, 5 तैयो ई विधवा हमरा ततेक तंग कऽ देने अछि जे हम एकर उचित न्‍याय अवश्‍य कऽ देबैक। नहि तँ ई बेर-बेर आबि कऽ हमरा अकछ कऽ देत!’” 6 तखन प्रभु कहलथिन, “ओ अधर्मी न्‍यायाधीश की कहलक, से सुनलहुँ? 7 तँ की परमेश्‍वर अपन चुनल लोक, जे हुनका सँ दिन-राति विनती करैत छनि, तकरा सभक लेल उचित न्‍याय नहि करथिन? की ओकरा सभक लेल न्‍याय करऽ मे देरी करताह? 8 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, ओ ओकरा सभक लेल उचित न्‍याय करथिन, और शीघ्र करथिन। मुदा मनुष्‍य-पुत्र जहिया औताह, तँ की एहन विश्‍वास हुनका ककरो लग भेटतनि?” 9 तखन यीशु एहन लोक सभक लेल जे अपना केँ धर्मी मानि कऽ अपना धार्मिकता पर भरोसा रखैत छल और आन लोक सभ केँ हेय दृष्‍टि सँ देखैत छल, तकरा सभक लेल ई दृष्‍टान्‍त सुनौलनि, 10 “दू आदमी मन्‍दिर मे प्रार्थना करऽ गेल। एक गोटे फरिसी रहय और दोसर कर असूल करऽ वला। 11 फरिसी ठाढ़ भऽ कऽ एहि तरहेँ अपना विषय मे प्रार्थना कऽ कऽ कहऽ लागल, ‘हे परमेश्‍वर, हम अहाँ केँ धन्‍यवाद दैत छी जे हम आन लोक सभ जकाँ ठकहारा, दुष्‍कर्मी, वा परस्‍त्रीगमन करऽ वला नहि छी, आ ने एहि कर असूल करऽ वला सन छी। 12 हम सप्‍ताह मे दू दिन उपास करैत छी, और जे किछु हमरा भेटैत अछि, ताहि मे सँ हम दसम अंश अहाँ केँ चढ़बैत छी।’ 13 “मुदा कर असूल करऽ वला फराके सँ ठाढ़ भऽ कऽ स्‍वर्ग दिस अपन आँखि उठयबाक साहसो नहि कयलक, बल्‍कि छाती पिटैत बाजल, ‘हे परमेश्‍वर, हम पापी छी, हमरा पर दया करू।’ 14 “हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ओ पहिल आदमी नहि, बल्‍कि ई दोसर आदमी परमेश्‍वरक नजरि मे धर्मी ठहरि कऽ अपना घर गेल। कारण, जे केओ अपना केँ पैघ बुझैत अछि, से तुच्‍छ कयल जायत, और जे अपना केँ तुच्‍छ मानैत अछि से पैघ कयल जायत।” 15 लोक सभ यीशु लग अपन छोट-छोट धिआ-पुता सभ केँ सेहो अनैत छलनि जे ओ ओकरा सभ पर हाथ राखि आशीर्वाद देथिन। शिष्‍य सभ ई देखि कऽ लोक सभ केँ डाँटऽ लगलनि। 16 मुदा यीशु धिआ-पुता सभ केँ अपना लग बजौलनि, और शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “बच्‍चा सभ केँ हमरा लग आबऽ दिऔक, ओकरा सभ केँ नहि रोकिऔक। किएक तँ, परमेश्‍वरक राज्‍य एहने सभक अछि। 17 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जे केओ बच्‍चा जकाँ परमेश्‍वरक राज्‍य ग्रहण नहि करत, से ओहि मे कहियो नहि प्रवेश करत।” 18 एकटा ऊँच अधिकारी यीशु सँ पुछलथिन, “यौ उत्तम गुरुजी! अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करबाक लेल हम की करू?” 19 यीशु कहलथिन, “अहाँ हमरा ‘उत्तम’ किएक कहैत छी? परमेश्‍वर केँ छोड़ि आरो केओ उत्तम नहि अछि। 20 अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनैत छी—’परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’” 21 ओ उत्तर देलथिन, “एहि सभ आज्ञाक पालन हम बचपने सँ करैत छी।” 22 यीशु ई सुनि हुनका कहलथिन, “एक बातक कमी अहाँ मे एखनो अछि। अहाँ अपन सभ किछु बेचि कऽ ओकरा गरीब सभ मे बाँटि दिअ, अहाँ केँ स्‍वर्ग मे धन भेटत। तकरबाद आउ आ हमरा पाछाँ चलू।” 23 ई बात सुनि ओ बहुत उदास भेलाह, किएक तँ हुनका बहुत धन-सम्‍पत्ति छलनि। 24 यीशु हुनका दिस तकैत बजलाह, “धनिक सभक लेल परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ कतेक कठिन अछि! 25 धनिक केँ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ सँ ऊँट केँ सुइक भूर दऽ कऽ निकलनाइ आसान अछि।” 26 एहि पर सुनऽ वला लोक सभ पुछलकनि, “तखन उद्धार ककर भऽ सकैत छैक?!” 27 यीशु उत्तर देलथिन, “जे बात मनुष्‍यक लेल असम्‍भव अछि, से परमेश्‍वरक लेल सम्‍भव अछि।” 28 पत्रुस हुनका कहलथिन, “देखू, हम सभ अपन सभ किछु त्‍यागि कऽ अहाँक पाछाँ आयल छी।” 29 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जे घर, घरवाली, भाय, माय-बाबू वा धिआ-पुता केँ परमेश्‍वरक राज्‍यक लेल त्‍याग करैत अछि, 30 तकरा एहि युग मे ओकर कतेको गुना भेटतैक, और आबऽ वला युग मे अनन्‍त जीवन।” 31 यीशु बारहो शिष्‍य केँ एक कात लऽ जा कऽ कहलथिन, “सुनू, अपना सभ यरूशलेम जा रहल छी। ओतऽ जा कऽ जे किछु प्रभुक प्रवक्‍ता सभक द्वारा मनुष्‍य-पुत्रक विषय मे लिखल गेल अछि, से सभ बात पूरा होयत। 32 ओ गैर-यहूदी सभक हाथ मे सौंपल जायत, लोक ओकर हँसी उड़ौतैक, बेइज्‍जति करतैक, ओकरा पर थुकतैक, कोड़ा लगौतैक, और जान सँ मारि देतैक। 33 मुदा तेसर दिन ओ फेर जीबि उठत।” 34 मुदा शिष्‍य सभ एहि बात सभ सँ किछु नहि बुझि सकलाह। हुनकर सम्‍पूर्ण कथन हुनका सभक लेल रहस्‍ये बनल रहल। बुझऽ मे नहि अयलनि जे हुनकर कहबाक तात्‍पर्य की छनि। 35 यीशु जखन यरीहो नगर लग पहुँचलाह, तँ एकटा आन्‍हर आदमी रस्‍ताक कात मे भीख मँगैत बैसल छल। 36 लोकक भीड़ ओहि दने जाइत सुनि ओ पुछऽ लागल जे, की भऽ रहल अछि? 37 लोक ओकरा कहलकैक, “नासरत निवासी यीशु एहि दऽ कऽ जा रहल छथि।” 38 तखन ओ सोर पारऽ लागल, “यौ दाऊदक पुत्र यीशु, हमरा पर दया करू!” 39 आगाँ-आगाँ चलऽ वला लोक सभ ओकरा डँटैत चुप रहबाक लेल कहलकैक, मुदा ओ आओर जोर सँ हल्‍ला कऽ कऽ कहऽ लागल, “यौ दाऊदक पुत्र, हमरा पर दया करू!” 40 यीशु ठाढ़ भऽ गेलाह आ अपना लग ओकरा अनबाक आदेश देलथिन। आन्‍हर आदमी जखन हुनका लग आयल तँ ओ पुछलथिन, 41 “तोँ की चाहैत छह, हम तोरा लेल की करिअह?” ओ उत्तर देलकनि, “प्रभु, हम देखऽ चाहैत छी।” 42 यीशु ओकरा कहलथिन, “आब तोँ देखि सकैत छह! तोहर विश्‍वास तोरा नीक कऽ देलकह।” 43 ओ तुरत देखऽ लागल और परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा करैत यीशुक पाछाँ चलऽ लागल। ई देखि सभ लोक सेहो परमेश्‍वरक स्‍तुति करऽ लागल।

Luke 19

1 यीशु यरीहो नगर दऽ कऽ जा रहल छलाह। 2 यरीहो मे एक जक्‍कइ नामक आदमी छलाह जे कर असूल करऽ वला सभक हाकिम छलाह, और ओ धनिक छलाह। 3 ओ देखऽ चाहैत छलाह जे यीशु के छथि, मुदा ओ भीड़क कारणेँ नहि देखि पबैत छलाह किएक तँ ओ छोट खुट्टीक लोक छलाह। 4 तेँ ओ ई जानि जे यीशु एहि बाटे जा रहल छथि, आगाँ दौड़ि कऽ एक गुल्‍लड़िक गाछ पर चढ़ि गेलाह। 5 जखन यीशु ओहि स्‍थान पर पहुँचलाह तँ ऊपर ताकि कऽ कहलथिन, “यौ जक्‍कइ, जल्‍दी सँ उतरि आउ। आइ हमरा अहींक ओहिठाम रहबाक अछि।” 6 तँ जक्‍कइ जल्‍दी सँ उतरलाह और यीशु केँ बहुत खुशीपूर्बक अपना ओहिठाम लऽ जा कऽ स्‍वागत कयलथिन। 7 सभ लोक ई देखि कुड़बुड़ाय लागल जे, “ओ पापीक ओहिठाम पाहुन किएक बनऽ गेलाह!” 8 मुदा जक्‍कइ ठाढ़ भऽ कऽ प्रभु केँ कहलथिन, “प्रभु, हम अपन आधा सम्‍पत्ति गरीब सभ केँ दऽ दैत छी, और जँ हम ककरो सँ बइमानी कऽ कऽ किछु लेने छिऐक तँ ओकर चारि गुना फिरता कऽ देबैक।” 9 यीशु कहलथिन, “आइ एहि घर मे उद्धार आयल अछि, किएक तँ इहो मनुष्‍य अब्राहमक सन्‍तान अछि। 10 मनुष्‍य-पुत्र तँ हेरायल सभ केँ तकबाक लेल और ओकरा सभक उद्धार करबाक लेल आयल अछि।” 11 लोक सभ ई बात सुनि रहल छल। तखन यीशु ओकरा सभ केँ एक दृष्‍टान्‍त सुनौलथिन, किएक तँ ओ यरूशलेमक लग मे पहुँचि गेल छलाह, और लोक ई बुझैत छल जे परमेश्‍वरक राज्‍य तुरत्ते प्रगट होमऽ वला अछि। 12 ओ कहलथिन, “एक ऊँच घरानाक लोक दूर परदेश गेलाह जतऽ सँ हुनका अपन राज-अधिकार प्राप्‍त कऽ कऽ घूमि अयबाक छलनि। 13 जाय सँ पहिने ओ अपन दसटा नोकर केँ बजबा कऽ ओकरा सभ केँ एक-एकटा सोनक रुपैया देलथिन आ कहलथिन, ‘जाबत तक हम नहि आयब, ताबत तक एहि पाइ सँ व्‍यापार करह।’ 14 “मुदा प्रजा हुनका सँ घृणा करैत छलनि, और हुनका पाछाँ अपन आदमी सभ केँ ई सम्‍बाद लऽ कऽ पठौलक जे, ‘हम सभ नहि चाहैत छी जे ई हमरा सभ पर राज्‍य करय।’ 15 “मुदा ओ राजा बनलाह, और अपन देश मे घूमि अयलाह। तखन ई बुझबाक लेल जे, हमर नोकर सभ जकरा सभ केँ हम पाइ देने छलिऐक, से सभ हमर पाइ सँ कतेक कमायल, ओकरा सभ केँ बजबौलथिन। 16 “पहिल नोकर आबि कऽ कहलकनि, ‘मालिक, अपनेक देल एक सोनक रुपैया दस गुना भऽ गेल।’ 17 “मालिक उत्तर देलथिन, ‘चाबस! तोँ नीक नोकर छह! तोँ नान्‍हिटा बात मे विश्‍वासपात्र भेलह, तोरा दसटा नगर पर अधिकार होयतह।’ 18 “तखन दोसर नोकर आबि कऽ कहलकनि, ‘मालिक, अपनेक देल एक सोनक रुपैया पाँच गुना भऽ गेल।’ 19 “मालिक उत्तर देलथिन, ‘तोँ पाँच नगर पर अधिकारी बनबह।’ 20 “एकटा तेसर नोकर आयल और कहऽ लागल, ‘मालिक, लेल जाओ अपन सोनक रुपैया। हम एकरा कपड़ा मे बान्‍हि कऽ रखने छलहुँ। 21 हम अपने सँ डेराइत छलहुँ, कारण, अपने कठोर आदमी छी। जे अहाँ रखलहुँ नहि, से निकालैत छी, आ जे रोपलहुँ नहि, से कटैत छी।’ 22 “मालिक उत्तर देलथिन, ‘है दुष्‍ट नोकर! हम तोरे शब्‍द सँ तोरा दोषी ठहरयबौ! तोँ जँ जनैत छलेँ जे हम कठोर आदमी छी, जे रखलहुँ नहि, से निकालैत छी, आ जे रोपलहुँ नहि, से कटैत छी, 23 तँ तोँ हमर पाइ केँ व्‍याज पर किएक नहि लगा देलेँ जाहि सँ हम आबि कऽ ओकरा व्‍याजक संग लऽ लितहुँ?’ 24 “तखन मालिक अपना लग मे ठाढ़ भेल लोक केँ कहलथिन, ‘एकरा सँ ओ सोनक रुपैया लऽ लैह, और तकरा दऽ दहक जकरा दसटा छैक।’ 25 “ओ सभ कहलकनि, ‘मालिक, ओकरा तँ दसटा छैके!’ 26 “मालिक उत्तर देलथिन, ‘हम तोरा सभ केँ कहैत छिअह, जकरा लग छैक, तकरा आरो देल जयतैक, मुदा जकरा लग नहि छैक, तकरा सँ जेहो छैक सेहो लऽ लेल जयतैक। 27 मुदा हमर ओ दुश्‍मन सभ, जे नहि चाहैत छल जे हम ओकरा सभ पर राज्‍य करी, तकरा सभ केँ आनू, और हमरा सामने मे मारि दिऔक।’” 28 ई सभ बात कहि कऽ यीशु यरूशलेम दिस आगाँ बढ़ैत गेलाह। 29 जखन ओ ओहि पहाड़ पर जे “जैतून पहाड़” कहबैत अछि, ताहि परक बेतफगे और बेतनिया गाम सभ लग पहुँचलाह, तँ ओ दूटा शिष्‍य केँ ई कहि कऽ पठौलथिन जे, 30 “सामने मे जे गाम अछि, ताहि मे जाउ। जखने गाम मे प्रवेश करब, तखन गदहीक एक बच्‍चा बान्‍हल भेटत, जाहि पर केओ कहियो नहि चढ़ल अछि। ओकरा खोलि कऽ आनू। 31 केओ जँ पुछत जे, ‘एकरा किएक खोलैत छी?’ तँ कहबैक जे, ‘प्रभु केँ एकर आवश्‍यकता छनि।’” 32 शिष्‍य सभ ओतऽ गेलाह, और जहिना यीशु कहने छलथिन, ठीक ओहिना हुनका सभ केँ भेटलनि। 33 ओ सभ जखन गदहीक बच्‍चा खोलैत छलाह तँ ओकर मालिक सभ पुछऽ लगलनि जे, “अहाँ सभ ई गदहा किएक खोलि रहल छी?” 34 ओ सभ उत्तर देलथिन, “प्रभु केँ एकर आवश्‍यकता छनि।” 35 ओ सभ ओकरा यीशु लग अनलनि, और ओकरा पीठ पर अपन कपड़ा राखि कऽ हुनका बैसा देलथिन। 36 ओ जहिना जहिना आगाँ बढ़ैत जाइत छलाह, लोक सभ तहिना तहिना सड़क पर अपन कपड़ा ओछौने जाइत छलनि। 37 जखन ओ यरूशलेमक लग ताहिठाम पहुँचलाह जतऽ जैतून पहाड़ पर सँ सड़क नीचाँ मुँहें ढलान अछि, तँ शिष्‍यक विशाल भीड़ बहुत आनन्‍दित भऽ कऽ ओहि चमत्‍कार सभक लेल जे ओ सभ देखने छल, तकरा लेल जोर-जोर सँ एहि तरहेँ परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा करऽ लागल जे, 38 “धन्‍य छथि ओ राजा जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि! स्‍वर्ग मे शान्‍ति, सर्वोच्‍च स्‍वर्ग मे प्रभुक जयजयकार!” 39 एहि पर भीड़ मेहक किछु फरिसी यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, अपना शिष्‍य सभ केँ चुप होयबाक लेल कहिऔक!” 40 यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ई सभ जँ चुप भऽ जायत तँ पाथरे सभ आवाज देबऽ लागत।” 41 यीशु यरूशलेम शहर लग जखन पहुँचलाह तँ शहर केँ देखि कऽ कानऽ लगलाह। 42 ओ कनैत-कनैत बजलाह, “तोँ, हँ तोँही, जँ आजुक दिन जनितह जे कोन बात सभ सँ शान्‍ति अबैत अछि...! मुदा से नहि! ई सभ बात तोरा देखाइ नहि दऽ रहल छह। 43 हँ, तोरा पर तेहन समय औतह जहिया तोहर शत्रु सभ तोरा चारू कात मोर्चा बान्‍हि कऽ घेरि लेतह, तोरा पर चारू कात सँ आक्रमण करतह। 44 ओ सभ तोरा और तोरा बालक सभ केँ माटि मे मिला देतह, और एको पाथर दोसर पाथर पर टिकल नहि रहतह, कारण, परमेश्‍वर जाहि समय मे तोरा ओहिठाम अयलथुन, ताहि समय केँ तोँ नहि चिन्‍हलह।” 45 यीशु मन्‍दिर मे गेलाह और बेचऽ वला सभ केँ ई कहि कऽ ओतऽ सँ भगाबऽ लगलाह जे, 46 “धर्मशास्‍त्रक लेख अछि, ‘हमर घर प्रार्थनाक घर होयत,’ मुदा तोँ सभ एकरा ‘चोर-डाकूक अड्डा’ बना देने छह।” 47 यीशु मन्‍दिर मे सभ दिन उपदेश दैत छलाह। मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ, और यहूदी सभक नेता सभ हुनका जान सँ मारि देबाक प्रयत्‍न कऽ रहल छलाह, 48 मुदा किछु कऽ नहि सकलाह, एहि लेल जे सम्‍पूर्ण जनता हुनकर बात सभ ध्‍यानपूर्बक सुनैत रहैत छल।

Luke 20

1 एक दिन यीशु मन्‍दिर मे लोक सभ केँ शिक्षा दैत छलाह और शुभ समाचार सुनबैत छलाह, तँ मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ बूढ़-प्रतिष्‍ठित लोकनिक संग हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, 2 “कहू! अहाँ ई सभ बात जे करैत छी, से कोन अधिकार सँ? ई अधिकार अहाँ केँ के देलनि?” 3 ओ उत्तर देलथिन, “हमहूँ अहाँ सभ सँ एकटा बात पुछैत छी— 4 यूहन्‍ना केँ बपतिस्‍मा देबाक अधिकार परमेश्‍वर सँ भेटल छलनि वा मनुष्‍य सँ? कहू!” 5 ई सुनि ओ सभ अपना मे तर्क-वितर्क करऽ लगलाह जे, जँ अपना सभ कहबैक जे परमेश्‍वर सँ, तँ ओ कहत जे, तखन हुनकर बातक विश्‍वास किएक नहि कयलहुँ? 6 मुदा जँ ई कहबैक जे, मनुष्‍य सँ, तँ समस्‍त जनता हमरा सभ पर पथरबाहि करत, कारण ओकरा सभ केँ पूरा विश्‍वास छैक जे यूहन्‍ना परमेश्‍वरक एकटा प्रवक्‍ता छलाह। 7 तेँ ओ सभ उत्तर देलथिन जे, “हम सभ नहि जनैत छी जे कतऽ सँ भेटल छलनि।” 8 एहि पर यीशु कहलथिन, “तँ हमहूँ अहाँ सभ केँ नहि कहब जे हम कोन अधिकार सँ ई काज करैत छी।” 9 तखन ओ लोक सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त सुनाबऽ लगलथिन, “एक आदमी अंगूरक बगान लगौलनि। तकरबाद किसान सभ केँ बटाइ पर दऽ कऽ बहुत दिनक लेल परदेश चल गेलाह। 10 फलक समय अयला पर ओ अपन हिस्‍सा लेबाक लेल बटाइदार सभ लग एक नोकर केँ पठौलथिन। मुदा ओ सभ ओकरा पिटलकैक आ खाली हाथ लौटा देलकैक। 11 मालिक फेर दोसर नोकर केँ पठौलथिन, मुदा ओकरो ओ सभ मारि-पिटि कऽ और अपमानित कऽ कऽ खाली हाथ लौटा देलकैक। 12 मालिक तेसरो नोकर केँ पठौलथिन, और ओकरो ओ सभ घायल कऽ कऽ भगा देलकैक। 13 तखन मालिक विचारलनि, ‘हम की करू? हम अपन प्रिय बेटा केँ पठयबैक, एकरा ओ सभ शायद मानतैक।’ 14 मुदा बटाइदार सभ हुनका अबैत देखि एक-दोसराक संग विचारऽ लागल जे, ‘ई तँ अपन बापक उत्तराधिकारी अछि! चलू, एकरा मारि दिऐक, तखन ई सम्‍पत्ति अपने सभक भऽ जायत!’ 15 एना सोचि ओ सभ हुनका बगान सँ बाहर लऽ जा कऽ हुनका जान सँ मारि देलकनि। “आब मालिक ओकरा सभ केँ की करथिन? 16 ओ आबि कऽ ओहि बटाइदार सभक सर्वनाश करथिन, और बगान दोसर बटाइदार सभ केँ दऽ देथिन।” ई सुनि लोक सभ बाजि उठल, “एना कहियो नहि होअय!” 17 यीशु ओकरा सभक दिस एकटक लगा कऽ देखैत कहलथिन, “तखन धर्मशास्‍त्र मे लिखल एहि बातक की अर्थ अछि जे, ‘जाहि पाथर केँ राजमिस्‍तिरी सभ बेकार बुझि फेकि देलक, वैह पाथर मकानक प्रमुख पाथर भऽ गेल।’ ? 18 जे केओ ओहि पाथर पर खसत, से चकना-चूर भऽ जायत, और जकरा पर ई पाथर खसतैक से थकुचा-थकुचा भऽ जायत।” 19 धर्मशिक्षक और मुख्‍यपुरोहित सभ हुनका तुरत पकड़ऽ चाहैत छलाह, कारण ओ सभ बुझि गेलाह जे ई हमरे सभक बारे मे ई कथा कहलक अछि। मुदा जनता सँ डेराइत छलाह। 20 धर्मशिक्षक आ मुख्‍यपुरोहित सभ अवसरक ताक मे छलाह। ओ सभ हुनका लग किछु भेदिया सभ केँ सोझिया आदमीक रूप मे पठा देलनि, एहि आशा मे जे यीशुक कोनो ने कोनो कहल बातक द्वारा हुनका पकड़ि सकी आ राज्‍यपाल-शासनक अधिकार मे रखबा दी। 21 भेदिया सभ हुनका सँ प्रश्‍न कयलकनि, “गुरुजी, हम सभ जनैत छी जे अपने ठीक-ठीक बात सभ बजैत आ सिखबैत छी, अपने ककरो मुँह देखि कऽ किछु नहि कहैत छिऐक, बल्‍कि सत्‍यक अनुसार परमेश्‍वरक बाटक शिक्षा दैत छी। 22 आब हमरा सभ केँ एकटा बात कहल जाओ—धर्म-नियमक अनुसार अपना सभक लेल रोमी सम्राट-कैसर केँ कर देनाइ उचित अछि वा नहि?” 23 मुदा ओ ओकर सभक कपट बुझि गेलथिन आ कहलथिन, 24 “हमरा एकटा सिक्‍का देखाउ। एहि पर किनकर चित्र छनि आ किनकर नाम लिखल छनि?” 25 ओ सभ उत्तर देलकनि, “सम्राट-कैसरक।” तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “तँ जे सम्राटक छनि से सम्राट केँ दिऔन, और जे परमेश्‍वरक छनि, से परमेश्‍वर केँ दिऔन।” 26 एहि तरहेँ ओ सभ जनताक सामने हुनकर कहल कोनो बात मे हुनका नहि पकड़ि सकल। हुनकर उत्तर सँ चकित भऽ गुम्‍म रहि गेल। 27 सदुकी पंथक लोक, जे सभ एहि बात केँ नहि मानैत अछि जे मृत्‍यु मे सँ मनुष्‍य फेर जिआओल जायत, से सभ एकटा प्रश्‍न लऽ कऽ यीशु लग आयल। 28 ओ सभ कहलकनि, “गुरुजी, मूसा हमरा सभक लेल लिखलनि जे, जँ ककरो भाय निःसन्‍तान मरि जाइक आ ओकर स्‍त्री जीविते होइक तँ ओकरा ओहि स्‍त्री सँ विवाह कऽ अपना भायक लेल सन्‍तान उत्‍पन्‍न करबाक चाही। 29 आब, केओ सात भाय रहय। जेठका विवाह कयलक आ निःसन्‍तान मरि गेल। 30 तँ दोसर भाय आ फेर तेसर भाय ओकरा सँ विवाह कयलक, और तहिना सातो भाय निःसन्‍तान मरि गेल। 32 अन्‍त मे स्‍त्रिओ मरि गेलि। 33 आब कहल जाओ, ओहि समय मे जहिया मुइल सभ केँ जिआओल जयतैक, तँ ओ स्‍त्री एहि भाय सभ मे सँ ककर स्‍त्री होयतैक? ओकरा सँ तँ सातो विवाह कयने छलैक।” 34 यीशु उत्तर देलथिन, “एही दुनियाक लोक विवाह करैत अछि आ विवाह मे देल जाइत अछि। 35 मुदा जे लोक सभ ओहि दुनिया मे जाय जोगरक ठहरि कऽ जीबि उठत, से ओहि दुनिया मे जा कऽ विवाह नहि करत। 36 ओ सभ फेर मरि नहि सकैत अछि, ओ सभ तँ एहि विषय मे स्‍वर्गदूत सभ जकाँ अछि, और जीबि उठलाक कारणेँ ओ सभ परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि। 37 मुदा मुइल सभ जीबि उठैत अछि वा नहि, ताहि प्रश्‍नक सम्‍बन्‍ध मे मूसा जरैत झाड़ीक विवरण मे स्‍पष्‍ट कयलनि जे अवश्‍य जीबि उठैत अछि, कारण ओ प्रभु केँ ‘अब्राहमक परमेश्‍वर, इसहाकक परमेश्‍वर और याकूबक परमेश्‍वर’ कहने छथि। 38 ओ मुइल सभक नहि, बल्‍कि जीवित सभक परमेश्‍वर छथि। परमेश्‍वरक नजरि मे सभ केओ जीवित अछि।” 39 एहि पर धर्मशिक्षक सभ मे सँ किछु गोटे कहलथिन, “गुरुजी, अपने बड्ड नीक उत्तर देलहुँ।” 40 और ककरो हुनका सँ आरो बात पुछबाक साहस नहि भेलैक। 41 तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे ई कोना कहल जाइत अछि जे उद्धारकर्ता-मसीह दाऊदक पुत्र छथि? 42 जखन कि दाऊद अपने भजन-संग्रहक पुस्‍तक मे कहैत छथि, ‘प्रभु-परमेश्‍वर हमरा प्रभु केँ कहलथिन, अहाँ हमर दहिना कात बैसू 43 और हम अहाँक शत्रु सभ केँ अहाँक पयरक तर मे कऽ देब।’ 44 दाऊद ‘उद्धारकर्ता-मसीह’ केँ ‘प्रभु’ कहैत छथिन। तँ ओ फेर हुनकर पुत्र कोना भेलाह?” 45 सभ लोक हुनकर बात सभ सुनि रहल छलनि तखन ओ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, 46 “धर्मशिक्षक सभ सँ सावधान रहू। धर्मगुरु वला लम्‍बा-लम्‍बा कपड़ा पहिरि कऽ घुमब, हाट-बजार मे लोक हुनका सभ केँ प्रणाम करनि, सभाघर सभ मे प्रमुख आसन पर बैसब और भोज-काज मे सम्‍मानित स्‍थान भेटय हुनका सभ केँ बहुत नीक लगैत छनि। 47 विधवा सभक घर-द्वारि हड़पि लैत छथि, और लोक सभ केँ देखयबाक लेल लम्‍बा-लम्‍बा प्रार्थना करैत छथि। ओहन लोक केँ बेसी दण्‍ड भेटतैक।”

Luke 21

1 यीशु नजरि उठा कऽ देखलनि जे धनिक सभ मन्‍दिरक दान-पात्र मे अपन दान चढ़ा रहल अछि। 2 एकटा गरीब विधवा केँ सेहो तामक दूटा पाइ दान-पात्र मे दैत देखलनि। 3 ई देखि ओ बजलाह, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, ई गरीब विधवा ओहि सभ आदमी सँ बेसी चढ़ौलक। 4 ओ सभ तँ अपना फाजिल धन मे सँ दान चढ़ौलक, मुदा ई अपन गरीबी मे सँ अपन पूरा जीविके चढ़ा देलक।” 5 किछु शिष्‍य सभ मन्‍दिरक बारे मे बाजि रहल छलाह जे कतेक नीक सँ सुन्‍दर-सुन्‍दर पाथर और परमेश्‍वर केँ अर्पित कयल वस्‍तु सभ सँ बनाओल अछि। एहि पर यीशु कहलथिन, 6 “ई सभ वस्‍तु जे एतऽ देखैत छी—तेहन समय आओत जहिया एतऽ एकोटा पाथर एक-दोसर पर नहि रहत। सभ ढाहल जायत।” 7 ओ सभ हुनका सँ पुछलथिन, “गुरुजी, ई घटना कहिया होयत? और कोन चिन्‍ह होयतैक जाहि सँ बुझि सकी जे ई बात सभ आब होयत?” 8 ओ उत्तर देलथिन, “होसियार रहू जाहि सँ बहकाओल नहि जायब। कारण, बहुतो लोक हमर नाम लऽ कऽ आओत आ कहत जे, ‘हम वैह छी,’ आ ‘समय लगचिआ गेल अछि।’ ओकरा सभक पाछाँ नहि जाउ! 9 जखन अनेक लड़ाइ और अन्‍दोलनक खबरि सुनब, तँ भयभीत नहि होउ। ई सभ तँ पहिने होयब आवश्‍यक अछि, मुदा संसारक अन्‍त तुरत नहि होयत।” 10 आगाँ ओ कहलथिन, “एक देश दोसर देश सँ लड़ाइ करत, और एक राज्‍य दोसर राज्‍य सँ। 11 बड़का-बड़का भूकम्‍‍प होयत, विभिन्‍न ठाम अकाल पड़त और अनेक स्‍थान मे महामारी होयत। आकाश मे भयंकर घटना सभ होयत और आश्‍चर्यजनक चिन्‍ह सभ देखाइ देत। 12 “मुदा एहि सभ बात सँ पहिने हमरा कारणेँ लोक सभ अहाँ सभ केँ पकड़ि कऽ अहाँ सभ पर अत्‍याचार करत। अहाँ सभ केँ सभाघर सभ मे सौंपि देत, जहल मे बन्‍द कऽ देत, और राजा आ राज्‍यपाल सभक समक्ष लऽ जायत। 13 ई बात सभ अहाँ सभक लेल गवाही देबाक अवसर होयत। 14 मुदा अहाँ सभ अपना मोन मे ई निश्‍चय कऽ लिअ जे हमरा पर लगाओल अभियोगक उत्तर मे हम की बाजू तकर चिन्‍ता पहिने सँ हम नहि करब। 15 कारण, अहाँ सभ केँ बजबाक लेल हम तेहन शब्‍द और बुद्धि देब जे कोनो विरोधी ने तकरा सामने मे टिकि सकत आ ने तकरा काटि सकत। 16 माय-बाबू, भाय, कुटुम्‍ब-परिवार और साथी-संगी सभ अहाँ सभक संग विश्‍वासघात कऽ कऽ पकड़बाओत, और अहाँ सभ मे सँ कतेको केँ मारिओ देत। 17 अहाँ सभ सँ सभ केओ एहि लेल घृणा करत जे अहाँ सभ हमर लोक छी। 18 मुदा अहाँ सभक माथक एकटा केशो नहि टुटत। 19 विश्‍वास मे दृढ़ रहला सँ अहाँ सभ जीवन प्राप्‍त करब। 20 “जखन यरूशलेम केँ सेना सभ सँ घेराइत देखब, तँ ई बुझि लिअ जे ओकर विनाश लग आबि गेल। 21 ओहि समय मे जे सभ यहूदिया प्रदेश मे होअय, से सभ पहाड़ पर भागि जाय। जे यरूशलेम मे होअय, से बाहर निकलि जाय, और जे लग-पासक देहात मे होअय, से शहर मे नहि जाय। 22 कारण ओ महादण्‍डक समय होयत जाहि समय मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल सभ बात पूरा होयत। 23 ओहि समय मे जे स्‍त्रीगण सभ गर्भवती होयत वा जकरा दूधपीबा बच्‍चा होयतैक, तकरा सभ केँ कतेक कष्‍ट होयतैक! किएक तँ एहि देश मे भयंकर संकट औतैक, और एहि लोक सभ पर परमेश्‍वरक प्रकोप पड़तैक। 24 ओ सभ तरुआरि सँ मारल जायत, और बन्‍दी बनि कऽ विश्‍वक प्रत्‍येक राष्‍ट्र मे लऽ गेल जायत। यरूशलेम गैर-यहूदी सभ द्वारा तहिया धरि लतखुर्दन भऽ पिचाइत रहत जहिया धरि गैर-यहूदी सभ केँ देल गेल समय पूरा बिति नहि जायत। 25 “सूर्य, चन्‍द्रमा और तारा सभ मे आश्‍चर्यजनक चिन्‍ह सभ देखाइ देत। पृथ्‍वी पर सभ जातिक लोक समुद्रक लहरि देखि आ ओकर गर्जन सुनि घबड़ा जायत और व्‍याकुल भऽ उठत। 26 पृथ्‍वी पर जे बात सभ घटऽ वला अछि, तकर डर-भय सँ लोक सभ बेहोस भऽ जायत। कारण, आकाशक शक्‍ति सभ हिलाओल जायत। 27 तकरबाद लोक मनुष्‍य-पुत्र केँ सामर्थ्‍य और अपार महिमाक संग मेघ मे अबैत देखत। 28 ई सभ बात जखन होमऽ लागत तँ अहाँ सभ ठाढ़ भऽ जाउ और मूड़ी उठाउ, किएक तँ अहाँ सभक छुटकारा लगचिआ गेल रहत।” 29 तखन ओ हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त देलथिन, “अंजीरक गाछ वा कोनो गाछ केँ लिअ। 30 जखने नव पात निकलऽ लगैत छैक तँ अपने सँ जानि लैत छी जे गर्मीक समय आबि रहल अछि। 31 तहिना, जखन अहाँ सभ ई बात सभ होइत देखब तँ बुझू जे परमेश्‍वरक राज्‍य लग आबि गेल अछि। 32 “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे एहि पीढ़ी केँ समाप्‍त होमऽ सँ पहिने ई सभ घटना निश्‍चित घटत। 33 आकाश और पृथ्‍वी समाप्‍त भऽ जायत, मुदा हमर वचन अनन्‍त काल तक रहत। 34 “सावधान रहू! नहि तँ अहाँ सभक मोन भोग-विलास, नशा और जीवनक चिन्‍ता मे ओझरायल रहत, और ओ दिन अहाँ सभ पर अचानक आबि कऽ फन्‍दा जकाँ पकड़ि लेत। 35 कारण ओ दिन सम्‍पूर्ण पृथ्‍वी पर रहऽ वला सभ लोक पर अचानक आबि जायत। 36 एहि लेल सदिखन सचेत रहू, और प्रार्थना करू जे, जे घटना सभ होमऽ वला अछि ताहि मे बाँचि सकी और मनुष्‍य-पुत्रक सम्‍मुख ठाढ़ रहि सकी।” 37 यीशु दिन कऽ मन्‍दिर मे उपदेश दैत छलाह, और जैतून पहाड़ नामक परवत पर जा कऽ राति बितबैत छलाह। 38 लोक सभ हुनकर उपदेश सुनबाक लेल सभ दिन भोरे-भोर मन्‍दिर अबैत छल।

Luke 22

1 “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि”, जे “फसह-पाबनि” कहबैत अछि, लगचिआ गेल छल। 2 मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ यीशु केँ कोन प्रकारेँ मारि देल जाय तकर ठीक उपायक ताक मे लागल छलाह, कारण ओ सभ जनता सँ डेराइत छलाह। 3 तखन यहूदा इस्‍करियोती, जे बारह शिष्‍य मे सँ एक छल, तकरा मोन मे शैतान पैसि गेलैक। 4 ओ जा कऽ मुख्‍यपुरोहित सभ और मन्‍दिरक सिपाही सभक कप्‍तान सभक संग बात-चीत कयलक जे ओ यीशु केँ कोना हुनका सभक हाथ मे पकड़बा देत। 5 ओ सभ बड्ड प्रसन्‍न भेलाह, और ओकरा एहि काजक लेल पाइ देबाक लेल सहमत भेलाह। 6 यहूदा सेहो मानि लेलक, और जाहि समय मे लोकक भीड़ नहि रहत, ताहि समय मे यीशु केँ पकड़बा कऽ हुनका सभक हाथ मे देबाक अवसरक ताक मे रहऽ लागल। 7 तखन बिनु खमीरक रोटी वला पाबनिक ओ दिन आबि गेल, जाहि दिन फसह-भोजक भेँड़ा बलिदान करबाक छल। 8 पत्रुस और यूहन्‍ना केँ यीशु ई कहि कऽ पठौलथिन जे, “जाउ, अपना सभक लेल फसह-भोजक व्‍यवस्‍था करू।” 9 ओ सभ पुछलथिन, “अहाँ कतऽ चाहैत छी जे हम सभ व्‍यवस्‍था करी?” 10 ओ कहलथिन, “शहर मे प्रवेश करिते घैल मे पानि लऽ जाइत एक पुरुष अहाँ सभ केँ भेटत। जाहि घर मे ओ प्रवेश करत, ताहि मे अहाँ सभ ओकरा पाछाँ-पाछाँ जायब, 11 और घरक मालिक केँ कहबनि जे, ‘गुरुजी पुछैत छथि जे, ओ अतिथि-घर कतऽ अछि जतऽ हम अपना शिष्‍य सभक संग फसह-भोज खायब?’ 12 ओ अहाँ सभ केँ उपरका तल्‍ला पर एक नमहर कोठली देखौताह जाहि मे सभ किछु तैयार रहत। ओतहि अहाँ सभ भोजक व्‍यवस्‍था करू।” 13 ओ सभ गेलाह, और जहिना यीशु हुनका सभ केँ कहने छलथिन, ठीक ओहिना सभ किछु भेटलनि, और ओ सभ ओतऽ फसह-भोजक व्‍यवस्‍था कयलनि। 14 जखन भोज खयबाक समय भेल तँ यीशु अपन बारहो दूतक संग भोजन करबाक लेल बैसलाह। 15 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमरा बड्ड इच्‍छा छल जे अपन दुःख भोगनाइ सँ पहिने अहाँ सभक संग हम ई फसह-भोज खाइ। 16 कारण, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जा धरि एहि भोजक अभिप्राय परमेश्‍वरक राज्‍य मे पूरा नहि होयत, ता धरि हम एकरा फेर नहि खायब।” 17 ओ बाटी लेलनि, आ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दऽ कऽ शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “ई लिअ, अपना सभ मे बाँटि लिअ। 18 हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जाबत तक परमेश्‍वरक राज्‍य नहि आओत ताबत तक हम अंगूरक रस फेर नहि पीब।” 19 ओ रोटी लेलनि आ परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देलनि। रोटी केँ तोड़ि कऽ शिष्‍य सभ केँ देलथिन आ कहलथिन, “ई हमर देह अछि जे अहाँ सभक लेल देल जा रहल अछि। ई हमर यादगारी मे करू।” 20 तहिना भोजनक बाद ओ बाटी लेलनि आ कहलथिन, “एहि बाटी मे परमेश्‍वर आ मनुष्‍यक बीच नव सम्‍बन्‍ध स्‍थापित करऽ वला हमर खून अछि, जे अहाँ सभक लेल बहाओल जा रहल अछि। 21 मुदा हमरा पकड़बाबऽ वला एतऽ हमरा संग भोजन पर बैसल अछि! 22 मनुष्‍य-पुत्र तँ, जहिना ओकरा लेल निश्‍चित कयल गेल छैक, तहिना चल जायत, मुदा धिक्‍कार अछि ओहि मनुष्‍य केँ जे ओकरा पकड़बा रहल अछि।” 23 एहि पर शिष्‍य सभ एक-दोसर सँ पुछऽ लागल जे, ओ के भऽ सकैत अछि, जे एहन काज करत? 24 शिष्‍य सभक बीच एहि विषय मे विवाद उठि गेल जे, हमरा सभ मे पैघ के मानल जाय। 25 यीशु कहलथिन, “एहि संसारक राज्‍य सभ मे राजा सभ अपना प्रजा पर हुकुम चलबैत रहैत छथि, और प्रजा पर अधिकार जमाबऽ वला सभ अपना केँ ‘उपकारी’ कहैत अछि। 26 मुदा अहाँ सभ मे एना नहि होअय। बल्‍कि, जे अहाँ सभ मे पैघ होअय, से सभ सँ छोट बनय, और जकरा अधिकार होइक, से दास बनय। 27 पैघ के अछि, ओ जे भोजन करबाक लेल बैसल अछि, वा ओ जे सेवा करैत अछि? की भोजन करऽ वला पैघ नहि अछि? मुदा हम अहाँ सभक बीच सेवकक रूप मे छी। 28 “अहीं सभ छी जे हमर बेर-विपत्ति मे हमरा संग दैत रहलहुँ। 29 और जहिना हमर पिता हमरा राज्‍य करबाक अधिकार देने छथि, तहिना हमहूँ अहाँ सभ केँ राज्‍य करबाक अधिकार दैत छी, 30 जाहि सँ अहाँ सभ हमर राज्‍य मे हमरा संग खायब-पीब, और सिंहासन पर बैसि कऽ इस्राएलक बारहो कुलक न्‍याय करब। 31 “सिमोन, यौ सिमोन! सुनू! शैतान अहाँ सभक माँग कयने अछि, जे ओ अहाँ सभ केँ गहुम जकाँ फटकय। 32 मुदा हम अहाँक लेल पिता सँ प्रार्थना कयने छी जे अहाँक विश्‍वास टुटय नहि। अहाँ जखन हमरा दिस फेर घूमि आयब, तँ विश्‍वास मे स्‍थिर रहऽ मे अपना भाय सभक मदति करब।” 33 मुदा पत्रुस उत्तर देलथिन, “प्रभु! हम अहाँक संग जहल मे जयबाक लेल आ मरबाक लेल सेहो तैयार छी!” 34 यीशु कहलथिन, “यौ पत्रुस, हम अहाँ केँ कहैत छी जे, आइए मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर हमरा अस्‍वीकार कऽ कऽ लोक केँ कहबैक जे, हम ओकरा चिन्‍हबो नहि करैत छिऐक।” 35 तखन ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ जखन बटुआ, झोरा और जुत्ताक बिना बाहर पठौने रही, तँ की कोनो वस्‍तुक अभाव भेल?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “नहि।” 36 तखन यीशु कहलथिन, “मुदा आब, जकरा बटुआ छैक वा झोरा छैक से लऽ लिअय। आ जकरा तरुआरि नहि छैक, से अपन कोनो वस्‍त्र बेचि कऽ किनि लिअय। 37 किएक तँ हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, धर्मशास्‍त्र मे लिखल ई बात हमरा मे पूरा होयबाक अछि जे, ‘ओ अपराधी सभ मे गनल गेलाह।’ हँ, जे बात हमरा विषय मे लिखल अछि, से एखनो पूरा भऽ रहल अछि।” 38 शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन, “प्रभु, देखू, एतऽ दूटा तरुआरि अछि।” ओ उत्तर देलथिन, “बस, भऽ गेल।” 39 तखन यीशु शहर सँ बहरा कऽ जैतून पहाड़ पर गेलाह, जतऽ ओ बेसी काल जाइत छलाह। हुनका संग हुनकर शिष्‍य सभ सेहो छलथिन। 40 ओतऽ पहुँचि कऽ ओ शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “प्रार्थना करैत रहू जे परीक्षा मे नहि पड़ी।” 41 तखन ओ शिष्‍य सभ सँ किछु दूर हटि ठेहुनिया दऽ कऽ एहि तरहेँ प्रार्थना करऽ लगलाह जे, 42 “हे पिता, अहाँ जँ चाहैत छी, तँ ई दुःखक बाटी हमरा लग सँ हटा लिअ। मुदा तैयो हमर इच्‍छा नहि, अहींक इच्‍छा पूरा होअय।” 43 तखन हुनका साहस देबाक लेल एक स्‍वर्गदूत हुनका लग अयलथिन। 44 ओ व्‍याकुल भऽ कऽ प्रार्थना मे एतेक लीन भऽ गेलाह जे हुनका शरीर सँ खूनक बुन्‍द सनक पसेना ठोपे-ठोप जमीन पर खसि रहल छलनि। 45 प्रार्थना सँ उठि कऽ ओ शिष्‍य सभ लग अयलाह। शिष्‍य सभ शोकित भऽ थाकि कऽ सुतल छलाह। 46 यीशु कहलथिन, “अहाँ सभ सुतल किएक छी? उठू, आ प्रार्थना करैत रहू जे परीक्षा मे नहि पड़ी।” 47 यीशु बाजिए रहल छलाह कि लोकक भीड़ ओतऽ पहुँचल। हुनकर बारह शिष्‍य मे सँ एक, जकर नाम यहूदा छलैक, से ओकरा सभक आगाँ छल। ओ चुम्‍मा लेबाक लेल यीशुक लग मे अयलनि, 48 मुदा यीशु ओकरा कहलथिन, “हौ यहूदा, की तोँ मनुष्‍य-पुत्र केँ चुम्‍मा लऽ कऽ धोखा दऽ रहल छह?” 49 यीशुक शिष्‍य सभ जखन देखलनि जे आब की होयत तँ पुछलथिन, “प्रभु, की हम सभ तरुआरि चलाउ?” 50 हुनका सभ मे सँ एक गोटे महापुरोहितक टहलू पर तरुआरि चला कऽ ओकर दहिना कान काटि देलनि। 51 मुदा यीशु कहलथिन, “रूकू, रूकू!” और ओहि आदमीक कान छुबि कऽ ठीक कऽ देलथिन। 52 तखन यीशु मुख्‍यपुरोहित, मन्‍दिरक सिपाही और बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ जे हुनका पकड़ऽ आयल छल, तकरा सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ हमरा विद्रोह मचाबऽ वला बुझि कऽ लाठी और तरुआरि लऽ कऽ पकड़ऽ अयलहुँ? 53 हम अहाँ सभक संग सभ दिन मन्‍दिर मे छलहुँ तँ हमरा पकड़बाक कोशिश नहि कयलहुँ। मुदा एखन ई अहाँ सभक समय अछि, एखन अन्‍हार केँ अधिकार छैक।” 54 तखन ओ सभ यीशु केँ पकड़ि लेलकनि आ ओहिठाम सँ महापुरोहितक भवन मे लऽ गेलनि। पत्रुस सेहो किछु दूर रहि कऽ पाछाँ-पाछाँ गेलाह। 55 लोक सभ आङनक बीच मे घूर लगा कऽ आगि तापऽ बैसल तँ पत्रुसो आबि कऽ बैसि रहलाह। 56 एक नोकरनी आगिक इजोत मे हुनका बैसल देखलकनि आ हुनकर मुँह ठिकिअबैत बाजल, “इहो ओकरे संग छलैक।” 57 मुदा पत्रुस अस्‍वीकार कऽ कऽ कहलथिन, “गे! हम ओकरा चिन्‍हबो नहि करैत छिऐक।” 58 किछु कालक बाद केओ दोसर गोटे हुनका देखि कहलकनि, “अहूँ तँ ओकरे सभ मे सँ छी।” पत्रुस उत्तर देलथिन, “यौ भाइ, हम नहि छी!” 59 करीब एक घण्‍टाक बाद फेर तेसर गोटे जोर दैत बाजल, “ई आदमी पक्‍का ओकरा संग छलैक, इहो तँ गलीले निवासी अछि।” 60 मुदा पत्रुस उत्तर देलथिन, “भाइ, अहाँ की कहैत छी से हम बुझबे नहि करैत छी!” ओ ई बात कहिए रहल छलाह कि तुरत्ते मुर्गा बाजि उठल। 61 प्रभु घूमि कऽ पत्रुसक दिस तकलथिन। तखने हिनका प्रभुक कहल बात मोन पड़ि गेलनि जे, “आइ मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर हमरा अस्‍वीकार करब।” 62 ओ ओहिठाम सँ बाहर भऽ भोकासी पाड़ि कऽ कानऽ लगलाह। 63 जे सिपाही सभ यीशु पर पहरा दऽ रहल छलनि से सभ हुनकर हँसी उड़ाबऽ लगलनि और मारऽ-पिटऽ लगलनि। 64 हुनका आँखि पर पट्टी बान्‍हि कऽ कहलकनि, “यौ अन्‍तर्यामी! कहल जाओ, अपने केँ के मारलक?” 65 एहि तरहक आरो-आरो बहुत बात सभ कहि कऽ हुनकर अपमान कयलकनि। 66 भोर भेला पर यहूदी सभक बूढ़-प्रतिष्‍ठित सभ, मुख्‍यपुरोहित सभ और धर्मशिक्षक सभ महासभा मे जमा भेलाह, और यीशु केँ हुनका सभक सामने आनल गेलनि। 67 ओ सभ कहलथिन, “अहाँ जँ उद्धारकर्ता-मसीह छी, तँ हमरा सभ केँ स्‍पष्‍ट कहू।” ओ उत्तर देलथिन, “हम जँ कहब, तँ अहाँ सभ विश्‍वास करब नहि, 68 और हम जँ अहाँ सभ सँ पुछब, तँ अहाँ सभ उत्तर देब नहि। 69 मुदा आब मनुष्‍य-पुत्र सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वरक दहिना कात बैसत।” 70 ओ सभ केओ एके संग पुछलथिन, “तखन की अहाँ परमेश्‍वरक पुत्र छी?” ओ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ ठीक कहैत छी। हँ, हम वैह छी।” 71 एहि पर ओ सभ बजलाह, “आब आरो गवाहीक की आवश्‍यकता? अपना सभ स्‍वयं एकरे मुँह सँ सभटा सुनि लेलहुँ।”

Luke 23

1 तखन पूरा सभा उठि कऽ यीशु केँ राज्‍यपाल पिलातुसक सामने लऽ गेलनि। 2 ओ सभ हुनका पर अभियोग लगाबऽ लागल जे, “एकरा हम सभ जनता केँ भड़कबैत पौलिऐक। ओ सम्राट-कैसर केँ कर देनाइ मना करैत अछि, और अपना केँ मसीह, अर्थात् राजा, कहैत अछि।” 3 एहि पर पिलातुस हुनका सँ पुछलथिन, “की अहाँ यहूदी सभक राजा छी?” ओ उत्तर देलथिन, “अहाँ अपने कहि रहल छी।” 4 तखन पिलातुस मुख्‍यपुरोहित सभ और लोकक भीड़ केँ कहलथिन, “एहि आदमी मे हम कोनो दोष नहि देखैत छी।” 5 मुदा ओ सभ आओर जोर दऽ कऽ कहलकनि, “ओ अपन सिद्धान्‍तक द्वारा जनता केँ भड़कबैत अछि। गलील प्रदेश सँ शुरू कऽ कऽ एहिठाम तक आबि ओ समस्‍त यहूदिया प्रदेश मे अपन शिक्षा दैत आयल अछि।” 6 ई सुनि पिलातुस पुछलथिन, “की ई आदमी गलील प्रदेशक अछि?” 7 और ई बुझि जे यीशु हेरोदक अधिकार-क्षेत्रक छथि, ओ हुनका हेरोदक ओहिठाम पठा देलथिन। हेरोद ओहि समय मे यरूशलेमे मे छलाह। 8 हेरोद यीशु केँ देखि कऽ बहुत प्रसन्‍न भेलाह, किएक तँ ओ हुनका विषय मे बहुत किछु सुनने छलाह, और बहुत दिन सँ हुनका देखबाक इच्‍छा छलनि। ओ आशा रखने छलाह जे यीशु कोनो चमत्‍कार करताह, से हम देखब। 9 तेँ ओ यीशु सँ बहुत काल तक प्रश्‍न करैत रहलाह, मुदा ई हुनका कोनो उत्तर नहि देलथिन। 10 मुख्‍यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ ओतऽ ठाढ़ भऽ कऽ जोर-जोर सँ बाजि कऽ यीशु पर अभियोग लगा रहल छलाह। 11 तखन राजा हेरोद और हुनकर सैनिक सभ यीशुक अपमान कयलथिन और हँसी उड़ौलथिन। हुनका राजसी वस्‍त्र पहिरा कऽ पिलातुस लग घुमा देलथिन। 12 हेरोद और पिलातुस, जे पहिने एक-दोसराक कट्टर दुश्‍मन छलाह, से ओही दिन सँ मित्र बनि गेलाह। 13 तखन पिलातुस मुख्‍यपुरोहित सभ, नेता सभ और जनता केँ बजा कऽ कहलथिन, 14 “अहाँ सभ एहि आदमी केँ हमरा सामने पेश कऽ कऽ ई अभियोग लगौलिऐक जे, ई आदमी जनता केँ बहका कऽ आन्‍दोलन कराबऽ चाहैत अछि। हम अहाँ सभक सामने एकर जाँच कयलहुँ, और जाहि बातक अभियोग अहाँ सभ एकरा पर लगा रहल छिऐक, ताहि सम्‍बन्‍ध मे हम एकरा दोषी नहि पबैत छी। 15 और हेरोदो दोषी नहि पौलनि, कारण, ओ एकरा हमरा लग फेर घुमा देलनि। स्‍पष्‍ट अछि जे ई तेहन कोनो काज नहि कयने अछि जाहि सँ एकरा मृत्‍युदण्‍ड देल जाइक। 16 तेँ हम आब एकरा दण्‍ड दऽ कऽ छोड़ि दैत छिऐक।” 17 [फसह-पाबनिक अवसर पर हुनका कोनो कैदी केँ छोड़ि देबाक छलनि।] 18 मुदा ओ सभ एक संग जोर-जोर सँ हल्‍ला करैत कहलक जे, “एकरा खतम करू! हमरा सभक लेल बरब्‍बा केँ छोड़ि दिअ!” 19 बरब्‍बा एक कैदी छल जे नगर मे कोनो विद्रोहक कारणेँ आ हत्‍याक अपराध मे जहल मे राखि देल गेल छल। 20 पिलातुस यीशु केँ मुक्‍त करबाक इच्‍छा सँ लोक सभ केँ फेर मनयबाक प्रयत्‍न कयलनि, 21 मुदा ओ सभ नारा लगाबऽ लागल जे, “क्रूस पर चढ़ाउ! ओकरा क्रूस पर चढ़ाउ!” 22 तेसर बेर पिलातुस ओकरा सभ केँ कहलथिन, “किएक? ई कोन अपराध कयने अछि? हम एकरा मे एहन कोनो दोष नहि देखैत छी जाहि कारणेँ एकरा मृत्‍युदण्‍ड देल जाइक। तेँ हम एकरा दण्‍ड दऽ कऽ छोड़ि दैत छिऐक।” 23 मुदा ओ सभ जोर-जोर सँ हल्‍ला कऽ कऽ पिलातुस सँ जिद्द कयलक जे, “ओकरा क्रूसे पर चढ़ाउ।” ओकर सभक हल्‍लाक कारणेँ ओकरा सभक जीत भेलैक। 24 पिलातुस ओकर सभक माँग पूरा करबाक निर्णय कयलनि। 25 विद्रोह और हत्‍याक कारणेँ जहल मे बन्‍द कयल गेल अपराधी, जकरा छोड़ि देबाक माँग ओ सभ कयने छलैक, तकरा ओ छोड़ि देलथिन, आ यीशु केँ ओकरा सभक इच्‍छा पर दऽ देलथिन। 26 ओ सभ यीशु केँ जखन लऽ जा रहल छलनि, तँ कुरेन नगरक सिमोन नामक एक आदमी, जे गाम सँ शहर दिस आबि रहल छल, तकरा पकड़ि कऽ ओकरा पर यीशुक क्रूस लादि देलकैक, जाहि सँ ओ यीशुक पाछाँ-पाछाँ क्रूस केँ लऽ चलय। 27 यीशुक पाछाँ बड़का भीड़ जा रहल छल। ओहि मे बहुत स्‍त्रीगणो सभ छलीह, जे हुनका लेल शोक आ विलाप कऽ रहल छलीह। 28 यीशु घूमि कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हे यरूशलेमक बेटी सभ! हमरा लेल नहि कानू, बरु अपना लेल और अपना धिआ-पुता सभक लेल कानू। 29 कारण, तेहन समय आओत जहिया अहाँ सभ कहब जे, ‘कतेक धन्‍य ओ स्‍त्रीगण सभ अछि जकरा बाल-बच्‍चा नहि भेलैक, हँ, ओ सभ, जे धिआ-पुता केँ जन्‍म नहि देलक, जे कहियो दूध नहि पिऔलक!’ 30 तखन, ‘लोक पहाड़ सभ केँ कहतैक जे, हमरा सभ पर खसि पड़! हँ, कहतैक जे, हमरा सभ केँ झाँपि ले!’ 31 कारण, जँ हरियर गाछक संग ओ सभ एना करैत अछि, तँ सुखायलक संग की नहि करतैक?” 32 यीशुक संग आरो दू आदमी, जे अपराधी छल, तकरो मृत्‍युदण्‍डक लेल लऽ गेल गेलैक। 33 ओहि स्‍थान पर पहुँचि कऽ जे “खप्‍पड़” कहबैत अछि, सिपाही सभ यीशु केँ हाथ-पयर मे काँटी ठोकि कऽ क्रूस पर टाँगि देलकनि, ओहिना ओहि दूनू अपराधी केँ सेहो, एकटा केँ हुनकर दहिना कात आ दोसर केँ बामा कात। 34 क्रूस पर चढ़ाओल गेलाक बाद यीशु बजलाह, “यौ पिता, एकरा सभ केँ क्षमा करिऔक, किएक तँ ई सभ नहि जनैत अछि जे की कऽ रहल अछि।” तखन सैनिक सभ पुरजी खसा कऽ यीशुक वस्‍त्र अपना मे बाँटि लेलक। 35 लोक सभ ओतऽ ठाढ़ भऽ कऽ ई सभ देखि रहल छल। यहूदी अधिकारी सभ यीशुक हँसी उड़बैत कहैत छल, “ई आन लोक सभ केँ बचौलक। ई जँ परमेश्‍वरक पठाओल मसीह अछि, जँ परमेश्‍वरक चुनल व्‍यक्‍ति अछि, तँ अपना केँ बचाबओ!” 36 सैनिक सभ सेहो यीशु लग आबि कऽ हुनकर हँसी उड़ौलकनि। हुनका तिताह दारू पिबाक लेल देलकनि आ कहलकनि, 37 “तोँ जँ यहूदी सभक राजा छेँ तँ अपना केँ बचा!” 38 हुनका मूड़ीक उपर एकटा सूचना टाँगल छल, जाहि पर लिखल छलैक, “ई यहूदी सभक राजा अछि।” 39 यीशुक कात मे टाँगल एक अपराधी हुनकर निन्‍दा करैत कहलकनि, “की तोँ उद्धारकर्ता-मसीह नहि छेँ? अपना केँ बचा, आ हमरो सभ केँ बचा ले!” 40 मुदा दोसर अपराधी ओकरा डाँटि कऽ कहलकैक, “रौ! की तोरा परमेश्‍वरक डर नहि छौ? तोहूँ तँ वैह दण्‍ड भोगि रहल छेँ। 41 हमरा-तोरा तँ ठीक दण्‍ड भेटल अछि। किएक तँ अपना सभ अपना काजक फल भोगि रहल छी, मुदा ई तँ कोनो अपराध नहि कयने अछि।” 42 तखन ओ यीशु केँ कहलकनि, “यौ यीशु, अहाँ जखन अपना राज्‍य मे आयब तँ हमरा मोन राखब।” 43 यीशु उत्तर देलथिन, “हम तोरा सत्‍य कहैत छिअह जे, आइए तोँ हमरा संग स्‍वर्गधाम मे होयबह।” 44 लगभग दुपहरक समय छलैक, तखन सौंसे देश अन्‍हार-कुप्‍प भऽ गेल, कारण सूर्यक प्रकाश समाप्‍त भऽ गेल। करीब तीन बजे तक देश मे अन्‍हारे रहल। मन्‍दिर मे जे परदा छलैक, से फाटि कऽ दू भाग मे भऽ गेल। 46 तखन यीशु बहुत जोर सँ बजलाह, “हे पिता, हम अपन आत्‍मा अहाँक हाथ मे सौंपि रहल छी।” ई कहि कऽ ओ प्राण त्‍यागि देलनि। 47 रोमी कप्‍तान ई सभ बात देखि परमेश्‍वरक स्‍तुति करैत बाजल, “सत्‍ये ई आदमी निर्दोष छल।” 48 जे लोक सभ ई दृश्‍य देखबाक लेल जुटि गेल छल, से सभ जखन देखलक जे की सभ भेल, तँ सभ लोक छाती पिटैत घर जाय लागल। 49 मुदा हुनकर चिन्‍हल-जानल लोक सभ दूरे ठाढ़ भऽ कऽ ई सभ बात देखि रहल छलाह, जाहि मे हुनका संग गलील प्रदेश सँ आयल स्‍त्रीगण सभ सेहो छलीह। 50 यहूदिया प्रदेशक अरिमतिया नगरक निवासी यूसुफ नामक एक आदमी छलाह जे महासभाक सदस्‍य छलाह। ओ सज्‍जन और धार्मिक लोक छलाह आ परमेश्‍वरक राज्‍यक प्रतीक्षा कऽ रहल छलाह। यीशुक सम्‍बन्‍ध मे महासभा जे निर्णय आ काज कयने छल, ताहि सँ ओ सहमत नहि भेल रहथि। 52 तँ ओ आदमी पिलातुस लग जा कऽ यीशुक लास माँगि लेलनि। 53 ओ क्रूस सँ लास उतारि कऽ मलमलक कपड़ा मे लपेटलनि, और पाथर काटि कऽ बनाओल कबर मे राखि देलनि। ओहि मे कोनो लास कहियो नहि राखल गेल छल। 54 ई शुक्रदिन, विश्राम-दिनक तैयारीक दिन छल, और विश्राम-दिन शुरू भऽ रहल छल। 55 जे स्‍त्रीगण सभ यीशुक संग गलील प्रदेश सँ आयल छलीह, से सभ यूसुफक पाछाँ-पाछाँ जा कऽ कबर देखलनि और इहो देखलनि जे यीशुक लास ओहि मे कोना राखल गेलनि। 56 तखन ओ सभ घर जा कऽ यीशुक लास मे लगयबाक लेल सुगन्‍धित तेल और इत्र तैयार कयलनि। मुदा विश्राम-दिन मे ओ सभ धर्म-नियमक आज्ञा मानि कऽ विश्राम कयलनि।

Luke 24

1 विश्राम-दिनक प्रात भेने, अर्थात् सप्‍ताहक पहिल दिन, भोरे-भोर ओ स्‍त्रीगण सभ अपन तैयार कयल सुगन्‍धित तेल सभ लऽ कऽ कबर पर गेलीह। 2 ओतऽ पहुँचला पर ओ सभ देखलनि जे कबरक मुँह पर जे पाथर राखल छलैक, से एक कात हटाओल गेल अछि। 3 मुदा ओ सभ जखन कबरक भीतर गेलीह तँ प्रभु यीशुक लास नहि देखलनि। 4 एहि पर ओ सभ सोच मे पड़ि गेलीह जे, ई की भेल? ताबते मे चमकैत वस्‍त्र पहिरने दू पुरुष हुनका सभ लग आबि ठाढ़ भऽ गेलनि। 5 ओ सभ डरेँ मूड़ी झुका कऽ नीचाँ मुँहें देखऽ लगलीह। ओ दूनू पुरुष हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जीवित आदमी केँ मुइल सभ मे किएक ताकि रहल छियनि? 6 ओ एतऽ नहि छथि, जीबि उठल छथि! ओ गलील मे रहैत काल अहाँ सभ केँ की कहने रहथि, से मोन पाड़ू। 7 ई जे, मनुष्‍य-पुत्र केँ पापी सभक हाथ मे सौंपल जयनाइ, क्रूस पर चढ़ाओल जयनाइ और तेसर दिन जीबि उठनाइ आवश्‍यक छनि।” 8 तखन यीशुक ई कहल बात हुनका सभ केँ मोन पड़लनि। 9 कबर पर सँ घूमि आबि कऽ ओ सभ ई सभ बात एगारहो शिष्‍य केँ और आरो लोक सभ केँ सुनौलथिन। 10 जे स्‍त्रीगण सभ ई बात सभ मसीह-दूत लोकनि केँ सुनौलथिन, से ई सभ छलीह—मरियम मग्‍दलीनी, योअन्‍ना, याकूबक माय मरियम और हुनकर सभक आरो संगी सभ। 11 मुदा मसीह-दूत सभ केँ ई सभ बात बताहे वला बुझयलनि और ओ सभ विश्‍वास नहि कयलथिन। 12 तैयो पत्रुस उठि कऽ कबर पर दौड़ैत गेलाह। ओ निहुड़ि कऽ भीतर तकलनि तँ मात्र मलमल वला पट्टी सभ एक कात पड़ल देखलनि। एहि बात सँ आश्‍चर्यित होइत ओ घूमि अयलाह। 13 ओही दिन यीशुक संगी मे सँ दू व्‍यक्‍ति इम्‍माउस नामक गाम जा रहल छलाह, जे यरूशलेम सँ करीब चारि कोस दूर अछि। 14 ओ सभ बाट मे एहि बितल घटना सभक बारे मे अपना मे गप्‍प-सप्‍प कऽ रहल छलाह। 15 गप्‍प-सप्‍प और विचार-विमर्श करैत काल यीशु स्‍वयं हुनका सभक लग आबि संग-संग चलऽ लगलाह। 16 मुदा हुनका सभक नजरि तेना बन्‍द कयल गेल छलनि जे ओ सभ यीशु केँ नहि चिन्‍हि सकलथिन। 17 ओ हुनका सभ सँ पुछलथिन, “अहाँ सभ चलैत-चलैत अपना मे की गप्‍प-सप्‍प कऽ रहल छी?” ओ सभ उदास मोन सँ ठाढ़ भऽ गेलाह। 18 ओहि मेहक एक गोटे जिनकर नाम क्‍लियोपास छलनि, से यीशु केँ कहलथिन, “यरूशलेम मे अहींटा एहन प्रवासी होयब जकरा बुझल नहि छैक जे हाल मे की घटना सभ भेल!” 19 यीशु पुछलथिन, “कोन घटना सभ?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “नासरत-निवासी यीशुक सम्‍बन्‍ध मे। ओ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता छलाह, और परमेश्‍वरक आ समस्‍त जनताक नजरि मे हुनकर काज और वचन सामर्थ्‍यपूर्ण छलनि। 20 मुख्‍यपुरोहित सभ और हमरा सभक महासभाक अधिकारी सभ हुनका मृत्‍युदण्‍ड दिअयबाक लेल राज्‍यपालक हाथ मे सौंपि देलथिन, आ क्रूस पर चढ़ा कऽ मरबा देलथिन। 21 हमरा सभ केँ तँ आशा छल जे यैह इस्राएल केँ छुटकारा दिऔताह। और एतबे नहि, एक बात आओर अछि—आइ तीन दिन भेल ई घटना सभ भेला, 22 और आइ हमर सभक किछु स्‍त्रीगण सभ हमरा सभ केँ आश्‍चर्यित कऽ देलनि। ओ सभ आइ भोरे-भोर कबर पर गेलीह 23 मुदा हुनकर लास हुनका सभ केँ नहि भेटलनि। ओ सभ आबि कऽ हमरा सभ केँ कहलनि जे एना-एना स्‍वर्गदूतक दर्शन भेल आ स्‍वर्गदूत कहलनि जे ओ जीविते छथि। 24 एहि पर हमरा सभक किछु संगी सभ कबर पर गेलाह, आ जहिना स्‍त्रीगण सभ कहने छलीह, तहिना हुनका सभ केँ सभ किछु भेटलनि, मुदा यीशु केँ ओ सभ नहि देखलनि।” 25 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ कतेक निर्बुद्धि छी! प्रभुक प्रवक्‍ता लोकनिक सभ कथन पर अहाँ सभ विश्‍वास करबाक लेल किएक नहि तैयार भेलहुँ? 26 की मसीह केँ दुःख उठौलाक बादे अपना स्‍वर्गिक महिमा मे प्रवेश नहि करबाक छलनि?” 27 तखन यीशु मूसाक और अन्‍य प्रवक्‍ता सभक लेख सँ शुरू कऽ कऽ सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र मे अपना बारे मे लिखल बात सभ हुनका सभ केँ बुझाबऽ लगलथिन। 28 ताबते मे ओ सभ ओहि गाम लग पहुँचलाह जतऽ जयबाक छलनि, और यीशु एना देखौलथिन जेना ओ आगाँ जाय चाहैत होथि। 29 मुदा ओ सभ हुनका सँ बहुत आग्रह कयलनि जे, “देखू, साँझ पड़ऽ वला अछि, आब अन्‍हार होयत। हमरा सभक संग आइ रहि जाउ।” तखन यीशु हुनका सभक संग रहबाक लेल घरक भीतर गेलाह। 30 यीशु जखन हुनका सभक संग भोजन करबाक लेल बैसलाह तँ रोटी लेलनि, और परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दऽ कऽ रोटी तोड़ि हुनका सभ केँ देबऽ लगलथिन। 31 तखन हुनका सभक नजरि खुलि गेलनि और ओ सभ हुनका चिन्‍हि लेलथिन। तकरबाद तुरत्ते यीशु बिला गेलाह। 32 तखन ओ सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “बाट मे चलैत काल ओ जखन अपना सभ सँ बात-चीत कयलनि आ धर्मशास्‍त्रक अर्थ बुझा देलनि, तँ अपना सभक हृदय आनन्‍द सँ केहन धक-धक करैत छल!” 33 ओ सभ तुरत्ते उठि कऽ यरूशलेम घूमि गेलाह। ओतऽ हुनका सभ केँ एगारहो शिष्‍य और अन्‍य संगी-साथी सभ एक ठाम जमा भेल भेटलथिन। 34 शिष्‍य सभ कहि रहल छलाह जे, “सत्‍ये अछि! प्रभु जीबि उठल छथि! ओ सिमोन केँ दर्शन देलनि अछि।” 35 तखन इहो दूनू गोटे हुनका सभ केँ बाट मे भेल बात सभक विषय मे कहि सुनौलथिन, आ कहलथिन, “ओ जखन रोटी तोड़लनि तखन हम सभ हुनका चिन्‍हि लेलियनि।” 36 ओ सभ ई बात सभ सुनबिते छलथिन कि यीशु स्‍वयं हुनका सभक बीच मे प्रगट भेलथिन और कहलथिन, “अहाँ सभ केँ शान्‍ति भेटय।” 37 ओ सभ हुनका भूत बुझि अकचका कऽ भयभीत भऽ गेलाह। 38 यीशु कहलथिन, “अहाँ सभ किएक घबड़ायल छी? मोन मे शंका किएक उठैत अछि? 39 हमर हाथ-पयर देखू। हमहीं छी! हमरा छुबि कऽ देखू! भूत-प्रेत केँ तँ एना हाड़-माँसु सभ नहि होइत छैक जेना अहाँ सभ हमरा देखि रहल छी।” 40 ई कहि ओ हुनका सभ केँ अपन हाथ-पयर देखौलथिन। 41 हुनका सभ केँ ततेक ने आनन्‍द भेलनि जे तखनो विश्‍वास नहि भेलनि, आश्‍चर्य मे डुबल छलाह। तेँ यीशु पुछलथिन, “की अहाँ सभ लग किछु खयबाक वस्‍तु अछि?” 42 ओ सभ हुनका पकाओल माछक कुटिआ देलथिन। 43 ओ लऽ कऽ हुनका सभक सामने खयलनि। 44 यीशु कहलथिन, “हम जखन अहाँ सभक संग छलहुँ तँ अहाँ सभ केँ ई कहने छलहुँ जे, मूसाक धर्म-नियम, प्रभुक प्रवक्‍ता सभक लेख और भजन-संग्रहक पुस्‍तक मे हमरा विषय मे जे किछु लिखल अछि, से सभ बात पूरा होयब आवश्‍यक अछि।” 45 तखन ओ हुनका सभ केँ धर्मशास्‍त्रक बात बुझबाक लेल बुद्धि देलथिन। 46 ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे ई लिखल अछि जे, उद्धारकर्ता-मसीह दुःख उठौताह आ तेसर दिन मृत्‍यु सँ जीबि उठताह, 47 और यरूशलेम सँ शुरू कऽ पृथ्‍वीक सभ जातिक लोक मे हुनकर नाम सँ एहि बातक प्रचार कयल जायत जे, अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करू आ पापक क्षमा प्राप्‍त करू। 48 अहाँ सभ एहि बात सभक गवाह छी। 49 हमर पिता अहाँ सभ केँ जे किछु देबाक वचन देलनि, से हम अहाँ सभ केँ आब पठा देब। मुदा जा धरि अहाँ सभ केँ ऊपर सँ सामर्थ्‍य प्राप्‍त नहि होयत, ता धरि अहाँ सभ एहि शहर मे रूकल रहू।” 50 यीशु हुनका सभ केँ बेतनिया गाम दिस लऽ गेलथिन, और अपन हाथ उठा कऽ हुनका सभ केँ आशीर्वाद देलथिन। 51 आशीर्वाद दैत काल ओ हुनका सभ सँ अलग भऽ गेलाह, और स्‍वर्ग मे उठा लेल गेलाह। 52 शिष्‍य सभ हुनकर आराधना कयलनि और अत्‍यन्‍त आनन्‍दक संग यरूशलेम घूमि अयलाह। 53 ओ सभ परमेश्‍वरक स्‍तुति-प्रशंसा करैत अपन सम्‍पूर्ण समय मन्‍दिर मे व्‍यतीत करऽ लगलाह।


John 1

1 शुरू मे वचन रहथि। वचन परमेश्‍वरक संग छलाह, और अपने परमेश्‍वर छलाह। 2 तँ वैह शुरू मे परमेश्‍वरक संग छलाह। 3 वचने द्वारा सभ वस्‍तु उत्‍पन्‍न कयल गेल, और जे किछु उत्‍पन्‍न भेल ओहि मे सँ एकोटा वस्‍तु हुनका बिना उत्‍पन्‍न नहि भेल। 4 हुनका मे जीवन छल, और ई जीवन मनुष्‍यक लेल इजोत छल। 5 इजोत अन्‍हार मे प्रकाश दैत अछि, और अन्‍हार ओहि पर कहियो विजयी नहि भेल अछि। 6 परमेश्‍वर द्वारा पठाओल गेल एक आदमी अयलाह, जिनकर नाम यूहन्‍ना छलनि। 7 ओ गवाहीक लेल अयलाह, ओहि इजोतक विषय मे गवाही देबाक लेल, जाहि सँ हुनका द्वारा सभ लोक विश्‍वास करय। 8 ओ अपने ओ इजोत नहि छलाह, बल्‍कि ओहि इजोतक सम्‍बन्‍ध मे गवाही देबाक लेल आयल छलाह। 9 ओ इजोत वास्‍तविक इजोत छलाह, जे प्रत्‍येक मनुष्‍य केँ प्रकाशित करैत छथि। और ओ इजोत संसार मे आबि रहल छलाह। 10 ओ संसार मे छलाह, संसार हुनका द्वारा बनाओल गेल छल, तैयो संसार हुनका नहि चिन्‍हलकनि। 11 ओ अपना ओहिठाम अयलाह, मुदा हुनकर अपन लोक हुनका स्‍वीकार नहि कयलकनि। 12 तैयो जे सभ हुनका स्‍वीकार कयलक, अर्थात् जे सभ हुनका पर विश्‍वास कयलक, तकरा सभ केँ ओ परमेश्‍वरक सन्‍तान बनबाक अधिकार देलथिन। 13 ओ सभ ने मनुष्‍यक वंशज सँ जनमल, ने शारीरिक इच्‍छा सँ, और ने कोनो पुरुषक कल्‍पना सँ, बल्‍कि परमेश्‍वर द्वारा जनमल। 14 वचन मनुष्‍य बनि गेलाह, और कृपा आ सत्‍य सँ परिपूर्ण भऽ, हमरा सभक बीच मे निवास कयलनि। हम सभ हुनकर एहन महिमा देखलहुँ जेना पिताक एकलौता पुत्रक महिमा। 15 यूहन्‍ना हुनका विषय मे ई गवाही दऽ कऽ जोर सँ कहलनि, “यैह छथि जिनका बारे मे हम कहैत छलहुँ जे, ओ जे हमरा बाद अबैत छथि, से हमरा सँ श्रेष्‍ठ छथि, किएक तँ हमर जन्‍मो सँ पहिने ओ छलाह।” 16 हुनकर परिपूर्णता मे सँ हमरा सभ गोटे केँ कृपा भेटल अछि, हँ, आशिष पर आशिष। कारण, 17 धर्म-नियम मूसा द्वारा देल गेल, मुदा कृपा और सत्‍य यीशु मसीह द्वारा आयल। 18 परमेश्‍वर केँ केओ कहियो नहि देखने छनि। मुदा एकलौता पुत्र, जे अपने परमेश्‍वर छथि, और जे पिताक संगति मे रहैत छथि, वैह हुनका प्रगट कयने छथिन। 19 यूहन्‍नाक गवाही ई छनि। यरूशलेम शहर सँ यहूदी लोकनि पुरोहित आ मन्‍दिरक सेवक सभ केँ हुनका लग ई पुछबाक लेल पठा देलनि जे, “अहाँ के छी?” 20 तँ यूहन्‍ना अस्‍वीकार नहि कयलनि, ओ खुलि कऽ मानि लेलनि जे, “हम उद्धारकर्ता-मसीह नहि छी।” 21 ओ सभ हुनका सँ पुछलथिन, “तँ की, अहाँ एलियाह छी?” ओ उत्तर देलथिन, “हम से नहि छी।” “की अहाँ परमेश्‍वरक ओ प्रवक्‍ता छी जे आबऽ वला छथि?” ओ जबाब देलथिन, “नहि।” 22 तखन ओ सभ हुनका फेर पुछलथिन, “तखन अहाँ छी के? कहू ने जाहि सँ हमरा सभ केँ जे पठौलनि तिनका सभ केँ किछु उत्तर दऽ सकबनि। अपना विषय मे अहाँ की कहैत छी?” 23 ओ उत्तर देलथिन, “जहिना परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाह कहलनि, हम ‘एक स्‍वर’ छी जे ‘निर्जन क्षेत्र मे जोर सँ आवाज दऽ रहल अछि जे, प्रभुक आगमनक लेल बाट सोझ बनाउ।’” 24 तखन फरिसी सभ द्वारा पठाओल गेल लोक सभ मे सँ किछु गोटे 25 हुनका सँ पुछलकनि, “अहाँ जँ उद्धारकर्ता-मसीह नहि छी, आ ने एलियाह आ ने ओ प्रवक्‍ता, तँ अहाँ बपतिस्‍मा किएक दैत छी?” 26 यूहन्‍ना हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “हम पानि सँ बपतिस्‍मा दैत छी, मुदा अहाँ सभक बीच मे एक व्‍यक्‍ति ठाढ़ छथि जिनका अहाँ सभ नहि चिन्‍हैत छियनि। 27 ओ वैह छथि जे हमरा बाद अबैत छथि, और हम हुनकर जुत्तो खोलऽ जोगरक नहि छी।” 28 ई सभ बात यरदन नदीक ओहि पार बेतनिया गाम मे भेल, जाहिठाम यूहन्‍ना बपतिस्‍मा दैत रहथि। 29 दोसरे दिन यूहन्‍ना यीशु केँ अपना दिस अबैत देखि बजलाह, “देखू! ई परमेश्‍वरक बलि-भेँड़ा छथि जे संसारक पाप उठा कऽ लऽ जाइत छथि। 30 ई वैह छथि जिनका विषय मे हम कहलहुँ जे, हमरा बाद मे एक व्‍यक्‍ति अबैत छथि जे हमरा सँ श्रेष्‍ठ छथि किएक तँ हमर जन्‍मो सँ पहिनहि ओ छलाह। 31 हमहूँ हुनका नहि चिन्‍हैत छलहुँ, मुदा हम पानि सँ बपतिस्‍मा दैत एहि लेल अयलहुँ जे ओ अपन इस्राएली लोक पर प्रगट होथि।” 32 यूहन्‍ना ई गवाही देलनि, “हम परमेश्‍वरक आत्‍मा केँ आकाश सँ परबा जकाँ उतरैत आ हुनका पर टिकैत देखलहुँ। 33 हम अपने तँ हुनका नहिए चिन्‍हितहुँ, मुदा जे हमरा पानि सँ बपतिस्‍मा देबऽ लेल पठौलनि, से हमरा कहने छलाह जे, ‘जिनका पर तोँ आत्‍मा केँ उतरैत और टिकैत देखबह, वैह छथि जे पवित्र आत्‍मा सँ बपतिस्‍मा देताह।’ 34 हम ई बात देखने छी और गवाही दैत छी जे ई परमेश्‍वरक पुत्र छथि।” 35 फेर दोसरे दिन यूहन्‍ना अपन शिष्‍य मे सँ दू गोटेक संग ओहिठाम ठाढ़ छलाह। 36 यीशु केँ ओहि दऽ कऽ जाइत देखि ओ कहलनि, “देखू! परमेश्‍वरक बलि-भेँड़ा!” 37 ई बात सुनि दूनू शिष्‍य यीशुक पाछाँ लागि गेलनि। 38 यीशु घूमि कऽ हुनका सभ केँ पाछाँ अबैत देखि कहलथिन, “अहाँ सभ की चाहैत छी?” ओ सभ हुनका कहलथिन, “रब्‍बी,” (जकर अर्थ अछि “गुरुजी”), “अहाँ कतऽ ठहरल छी?” 39 ओ हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “चलू देखि लिअ।” तखन ओ सभ जा कऽ देखि लेलनि जे ओ कतऽ ठहरल छथि, आ ओहि दिन हुनका संग रहलाह। ओ समय लगभग चारि बजे साँझक छल। 40 ई दूनू जे यूहन्‍नाक बात सुनि कऽ यीशुक पाछाँ भऽ चलल रहथि, ओहि मे सँ एक अन्‍द्रेयास छलाह, सिमोन पत्रुसक भाय। 41 ओ तुरत अपन भाय सिमोन सँ भेँट कऽ हुनका कहलथिन, “हमरा सभ केँ उद्धारकर्ता-मसीह भेटलाह।” (⌞यूनानी भाषा मे⌟ “मसीह” केँ “ख्रिष्‍ट” कहल जाइत अछि।) 42 ओ हुनका यीशु लग अनलथिन। यीशु हुनका ध्‍यानपूर्बक देखि कहलथिन, “अहाँ सिमोन, यूहन्‍नाक बालक छी। अहाँक नाम ‘कैफा’ होयत” (अर्थात् “पत्रुस”) । 43 दोसरे दिन यीशु गलील प्रदेश जयबाक निश्‍चय कयलनि। तखन हुनका फिलिपुस भेँट भेलनि। ओ हुनका कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” 44 अन्‍द्रेयास और पत्रुस जकाँ, फिलिपुस सेहो बेतसैदा नगरक निवासी छलाह। 45 फिलिपुस नथनेल सँ भेँट कऽ कऽ कहलथिन, “हमरा सभ केँ ओ भेटलाह जिनका विषय मे मूसा धर्म-नियम मे लिखने छथि आ जिनका विषय मे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ सेहो लिखने छथि। ओ छथि यूसुफक बेटा, नासरतक निवासी यीशु।” 46 “नासरत?” नथनेल बाजि उठलाह। “की नासरत सँ किछुओ नीक आबि सकैत छैक?” फिलिपुस हुनका कहलथिन, “चलि कऽ देखि लिअ।” 47 यीशु नथनेल केँ अपना लग अबैत देखि कहलथिन, “देखू! ई एक सही इस्राएली छथि, जिनका मे कोनो छल-प्रपंच नहि!” 48 नथनेल हुनका कहलथिन, “अहाँ हमरा कोना चिन्‍हैत छी?” यीशु उत्तर देलथिन, “एहि सँ पहिनहि जे फिलिपुस अहाँ केँ बजौलनि, हम अहाँ केँ अंजीरक गाछ तर देखने छलहुँ।” 49 एहि पर नथनेल बजलाह, “गुरुजी! अहाँ परमेश्‍वरक पुत्र छी! अहाँ इस्राएलक राजा छी।” 50 यीशु हुनका कहलथिन, “की अहाँ एहि लेल ई बात विश्‍वास करैत छी जे हम अहाँ केँ कहलहुँ जे अंजीर गाछ तर अहाँ केँ देखने छलहुँ? अहाँ एहू सँ पैघ बात सभ देखब।” 51 तखन हुनका इहो कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे अहाँ सभ स्‍वर्ग केँ खुजल आ परमेश्‍वरक स्‍वर्गदूत सभ केँ मनुष्‍य-पुत्र पर ऊपर चढ़ैत आ नीचाँ उतरैत देखब।”

John 2

1 एहि बातक तेसरे दिन गलील प्रदेशक काना नामक गाम मे विवाह छल। ओहिठाम यीशुक माय छलीह, 2 और यीशु आ हुनकर शिष्‍य सभ सेहो विवाह मे निमन्‍त्रित छलाह। 3 अंगूरक मदिरा घटला पर माय यीशु केँ कहलथिन, “हिनका सभ केँ आब मदिरा नहि छनि।” 4 यीशु हुनका कहलथिन, “अहाँ हमरा ई किएक कहैत छी? हमर समय एखन नहि आयल अछि।” 5 तखन हुनकर माय बारिक सभ केँ कहलनि, “ई जे किछु तोरा सभ केँ कहथुन से करिहह!” 6 लग मे यहूदी सभक रीतिक अनुसार शुद्ध करबाक लेल छओटा पाथरक घैल राखल छल। प्रत्‍येक मे करीब सौ-सवासौ लीटर अँटैत छल। 7 यीशु बारिक सभ केँ कहलथिन, “घैल सभ मे पानि भरि दहक।” 8 ओ सभ घैल केँ कानो-कान भरि देलक। तखन ओकरा सभ केँ कहलथिन, “आब किछु निकालि कऽ भण्‍डारी केँ दऽ अबहुन।” ओ सभ दऽ आयल, 9 और भण्‍डारी ओहि पानि केँ चिखलनि जे आब मदिरा बनि गेल छल। हुनका नहि बुझल छलनि जे ई मदिरा कतऽ सँ आबि गेल (मुदा बारिक सभ जे पानि निकालने छल, तकरा सभ केँ बुझल छलैक), तेँ भण्‍डारी वर केँ बजा कऽ कहलथिन, 10 “सभ आदमी तँ बढ़ियाँ वला मदिरा पहिनहि परसैत अछि, और बाद मे जखन लोक सभ बहुते पिबि लेने रहैत अछि तखने साधारण वला परसैत अछि, मुदा अहाँ बढ़ियाँ वला एखनो धरि रखनहि छलहुँ!” 11 एहि तरहेँ गलीलक काना गाम मे यीशु अपन चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह सभ शुरू कऽ कऽ अपन महिमा प्रगट कयलनि और हुनकर शिष्‍य सभ हुनका पर विश्‍वास कयलनि। 12 एकरा बाद यीशु अपन माय, भाय और शिष्‍य सभक संग कफरनहूम नगर गेलाह और ओहिठाम किछु दिन रहलाह। 13 यहूदी सभक फसह-पाबनि लग अयला पर यीशु यरूशलेम चल गेलाह। 14 मन्‍दिर मे ओ लोक सभ केँ गाय-बड़द, भेँड़ा और परबा बेचैत और टेबुल पर बैसल पैसा भजबऽ वला सभ केँ पैसा भजबैत देखलनि। 15 ई देखि यीशु रस्‍साक कोड़ा बना कऽ सभ केँ मन्‍दिर मे सँ बाहर भगा देलथिन, भेँड़ा और माल-जाल केँ सेहो। पाइ भजबऽ वला सभक सिक्‍का छिड़िया कऽ ओकरा सभक टेबुल उनटा देलथिन। 16 परबा बेचऽ वला सभ केँ ओ कहलथिन, “एहि सभ केँ एतऽ सँ तुरत लऽ जाह! हमर पिताक घर केँ बजार नहि बनाबह!” 17 तखन हुनकर शिष्‍य सभ केँ धर्मशास्‍त्रक ई लेख मोन पड़लनि जे, “हे परमेश्‍वर, अहाँक घरक लेल हमर धुनि हमरा खा जायत।” 18 तखन यहूदी सभ हुनका कहलथिन, “ई सभ करबाक अधिकारक प्रमाण देबाक लेल अहाँ हमरा सभ केँ कोन चिन्‍ह देखायब?” 19 यीशु उत्तर देलथिन, “एहि मन्‍दिर केँ ढाहि दिअ और हम एकरा तीन दिन मे फेर ठाढ़ कऽ देब।” 20 एहि पर यहूदी सभ जबाब देलथिन, “एहि मन्‍दिर केँ बनाबऽ मे हमरा सभ केँ छियालिस वर्ष लागल, और की अहाँ एकरा तीन दिन मे फेर ठाढ़ कऽ देब!” 21 मुदा यीशु जाहि मन्‍दिरक बारे मे बाजल छलाह, से हुनकर देह छलनि। 22 तेँ बाद मे जखन ओ मरलाक बाद जीबि उठलाह तँ शिष्‍य सभ हुनकर एहि कथन केँ स्‍मरण कयलनि। तखन ओ सभ धर्मशास्‍त्रक लेख केँ और यीशुक बात केँ विश्‍वास कयलनि। 23 जखन यीशु फसह-भोजक समय मे यरूशलेम मे छलाह, तँ बहुत लोक हुनकर चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह सभ जे ओ देखबैत छलाह, तकरा देखि कऽ हुनका पर विश्‍वास कयलकनि, 24 मुदा यीशु अपना केँ ओकरा सभक भरोस पर नहि छोड़लनि, कारण सभ मनुष्‍य केँ ओ जनैत छलाह। 25 मनुष्‍यक बारे मे हुनका ककरो द्वारा कोनो साक्षीक आवश्‍यकता नहि छलनि, किएक तँ ओ अपने जनैत छलाह जे मनुष्‍यक मोन मे की बात होइत छैक।

John 3

1 फरिसी सभ मे सँ एक निकोदेमुस नामक आदमी छलाह, जे यहूदी सभक धर्मसभाक सदस्‍य छलाह। 2 एक राति ओ यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, हम सभ जनैत छी जे अपने परमेश्‍वर द्वारा पठाओल गेल गुरु छी, कारण जँ परमेश्‍वर संग नहि रहितथि तँ अपने जे चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह सभ देखा रहल छी, से केओ नहि देखा सकैत।” 3 यीशु हुनका उत्तर देलथिन, “हम अहाँ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जाबत तक केओ नव जन्‍म नहि लेत ताबत तक ओ परमेश्‍वरक राज्‍य नहि देखि सकत।” 4 निकोदेमुस हुनका कहलथिन, “केओ बूढ़ भऽ कऽ कोना जन्‍म लेत? की ओ मायक गर्भ मे दोसर बेर प्रवेश कऽ फेर जन्‍म लऽ सकत?!” 5 यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, जाबत तक केओ जल और आत्‍मा सँ जन्‍म नहि लेत ताबत तक ओ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश नहि कऽ सकत। 6 मनुष्‍य तँ खाली शारीरिक जन्‍म दैत अछि, मुदा पवित्र आत्‍मा आत्‍मिक जन्‍म दैत छथि। 7 तेँ एहि सँ आश्‍चर्य नहि मानू जे हम अहाँ केँ कहलहुँ जे अहाँ सभ केँ नव जन्‍म लेबऽ पड़त। 8 हवा जतऽ चाहैत अछि ततऽ बहैत अछि। ओकर आवाज सुनैत छी लेकिन कतऽ सँ आबि रहल अछि वा कतऽ जा रहल अछि से नहि जानि सकैत छी। जे आत्‍मा सँ जन्‍म लैत अछि, तकरो एहिना होइत छैक।” 9 निकोदेमुस हुनका कहलथिन, “ई सभ बात कोना भऽ सकैत अछि?” 10 यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ इस्राएलक गुरु छी, आ ई बात नहि बुझैत छी?! 11 हम अहाँ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जे बात हम जनैत छी, वैह बात बजैत छी, मुदा तैयो अहाँ सभ हमरा गवाही केँ स्‍वीकार नहि करैत छी। 12 जखन हम अहाँ केँ पृथ्‍वी परक बात कहैत छी और अहाँ विश्‍वास नहि करैत छी, तँ स्‍वर्गक बात जँ कहब तँ अहाँ केँ कोना विश्‍वास होयत? 13 केओ स्‍वर्ग मे उपर नहि चढ़ल अछि; वैहटा चढ़ल छथि जे स्‍वर्ग सँ उतरल छथि, अर्थात् मनुष्‍य-पुत्र। 14 जहिना मूसा निर्जन क्षेत्र मे पित्तरिक साँप केँ ऊपर लटका देलनि, तहिना मनुष्‍य-पुत्र केँ सेहो अवश्‍य ऊपर लटकाओल जयतनि 15 जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्‍वास करत से अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करत। 16 “हँ, परमेश्‍वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्‍वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्‍कि अनन्‍त जीवन पाबय। 17 परमेश्‍वर तँ अपना बेटा केँ संसार मे एहि लेल नहि पठौलनि जे ओ संसार केँ दोषी ठहरबथि, बल्‍कि एहि लेल जे हुनका द्वारा संसारक उद्धार होअय। 18 जे व्‍यक्‍ति हुनका पर विश्‍वास करैत अछि से दोषी नहि ठहराओल जाइत अछि, मुदा जे व्‍यक्‍ति हुनका पर विश्‍वास नहि करैत अछि, से दोषी ठहराओल जा चुकल अछि, किएक तँ ओ परमेश्‍वरक एकलौता बेटा पर विश्‍वास नहि कयने अछि। 19 दोष एहि मे भेल, जे संसार मे इजोत आबि गेल और लोक केँ इजोतक बदला अन्‍हारे नीक लगलैक, कारण ओकर काज अधलाहे होइत छलैक। 20 जे अधलाह काज करैत अछि से इजोत सँ घृणा करैत अछि और इजोत लग नहि अबैत अछि जाहि सँ ओकर काज कतौ प्रगट नहि भऽ जाइक। 21 मुदा जे सत्‍य पर चलैत अछि से इजोत लग अबैत अछि जाहि सँ ई प्रगट भऽ जाय जे ओ जे किछु कयने अछि से परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार कयने अछि।” 22 एकरबाद यीशु अपन शिष्‍य सभक संग यहूदियाक देहात जा कऽ हुनका सभक संग रहलाह और लोक केँ बपतिस्‍मा देबऽ लगलाह। 23 यूहन्‍ना सेहो शालीम लग एनोन गाम मे बपतिस्‍मा दैत छलाह, कारण ओतऽ पानि बहुत छल, और लोक सभ हुनका लग आबि कऽ बपतिस्‍मा लैत छल। 24 (ओहि समय मे यूहन्‍ना जहल मे नहि राखल गेल छलाह।) 25 तँ यूहन्‍नाक शिष्‍य कोनो एकटा यहूदीक संग शुद्ध करबाक रीतिक विषय मे वाद-विवाद करऽ लगलाह। 26 ओ सभ यूहन्‍ना लग आबि कऽ कहलनि, “गुरुजी, ओ जे यरदन नदीक ओहि पार अहाँक संग छलाह, जिनका बारे मे अहाँ गवाही देलहुँ, से आब बपतिस्‍मा दऽ रहल छथि और सभ लोक हुनके लग जा रहल अछि।” 27 एहि पर यूहन्‍ना उत्तर देलथिन, “मनुष्‍य किछुओ प्राप्‍त नहि कऽ सकैत जँ परमेश्‍वर सँ नहि देल जाइत। 28 अहाँ सभ अपने हमर गवाह छी जे हम कहलहुँ जे, उद्धारकर्ता-मसीह हम नहि छी, बल्‍कि हम हुनका सँ आगाँ पठाओल गेल छी। 29 कनियाँ वरे केँ छनि। वरक मित्र, जे वरक प्रतीक्षा मे ठाढ़ भऽ कऽ सुनैत अछि, से वरक आवाज सुनि बड्ड आनन्‍दित होइत अछि। तेँ हमर ई आनन्‍द आब पूर्ण भऽ गेल अछि। 30 ई जरूरी अछि जे ओ बढ़ैत रहथि आ हम घटैत रही। 31 “जे ऊपर सँ आयल छथि से आओर सभ सँ पैघ छथि। जे पृथ्‍वी सँ अछि से पृथ्‍विएक अछि और खाली पृथ्‍वी वला बात सभ कहैत अछि। जे स्‍वर्ग सँ अबैत छथि वैह आओर सभ सँ पैघ छथि, 32 और जे बात ओ देखने छथि और सुनने छथि, तकरे गवाही दैत छथि। मुदा केओ हुनका गवाही केँ स्‍वीकार नहि करैत अछि। 33 जे व्‍यक्‍ति हुनका गवाही केँ स्‍वीकार कयने अछि, से एहि बात पर अपन छाप लगा देने अछि जे परमेश्‍वर सत्‍य छथि, 34 कारण जिनका परमेश्‍वर पठौने छथिन, से वैह बात कहैत छथि जे परमेश्‍वर कहैत छथि। हुनका परमेश्‍वर अपन आत्‍मा, बिना नापि-जोखि कऽ दैत छथिन। 35 पिता पुत्र सँ प्रेम करैत छथि और हुनके हाथ मे सभ किछु दऽ देने छथिन। 36 जे पुत्र पर विश्‍वास करैत अछि, तकरा अनन्‍त जीवन छैक। जे पुत्र केँ नहि मानैत अछि, से ओहि जीवन केँ नहि देखत—ओकरा पर परमेश्‍वरक क्रोध रहैत अछि।”

John 4

1 जखन प्रभु केँ पता लगलनि जे फरिसी सभ सुनलनि अछि जे यीशु यूहन्‍ना सँ बेसी शिष्‍य केँ बनबैत छथि और बपतिस्‍मा दैत छथि 2 (ओना तँ यीशु अपने नहि, बल्‍कि हुनकर शिष्‍य सभ बपतिस्‍मा दैत छलाह), 3 तखन ओ यहूदिया प्रदेश छोड़ि कऽ फेर गलील प्रदेशक लेल विदा भऽ गेलाह। 4 रस्‍ता मे हुनका सामरिया प्रदेश भऽ कऽ जाय पड़लनि। 5 ओ सामरिया मे सुखार नगर पहुँचलाह। ई नगर ओहि खेत लग अछि जे याकूब अपना बेटा यूसुफ केँ देने छलाह। 6 ओतऽ याकूबक इनार छल, और यीशु यात्रा सँ थाकि कऽ इनार पर बैसि रहलाह। ई दुपहरियाक समय छल। 7 ताबते मे एक सामरी स्‍त्री पानि भरऽ आयल। यीशु ओकरा कहलथिन, “हमरा पानि पिबऽ लेल दैह।” 8 हुनकर शिष्‍य सभ भोजनक सामान किनबाक लेल नगर मे गेल छलाह। 9 सामरी स्‍त्री कहलकनि, “अपने यहूदी भऽ कऽ हमरा सामरी स्‍त्री सँ कोना पानि मँगैत छी?” (कारण, यहूदी सभ सामरी लोक सँ कोनो सम्‍पर्क नहि रखैत अछि।) 10 यीशु उत्तर देलथिन, “जँ तोँ परमेश्‍वरक वरदान केँ जनितह, और ई जनितह जे ओ के छथि जे तोरा कहैत छथुन जे पिबऽ लेल दैह, तँ तोँही हुनके सँ मँगितह और ओ तोरा जीवनक जल दितथुन।” 11 स्‍त्री बाजल, “मालिक, पानि भरऽ लेल अपने केँ डोलो तक नहि अछि, और इनार गहींर अछि। ई जीवनक जल अपने लग आओत कतऽ सँ? 12 की अपने हमरा सभक पुरखा याकूब सँ पैघ छी? ओ तँ हमरा सभ केँ ई इनार प्रदान कयलनि, जाहि मे सँ ओ अपने और हुनकर बालक सभ पिलनि और माल-जाल सभ सेहो पिलक।” 13 यीशु बजलाह, “जे ई पानि पीत, तकरा फेर पियास लगतैक, 14 मुदा जे ओ जल पीत जे हम देबैक, तकरा कहियो फेर पियास नहि लगतैक। कारण, हम ओकरा पिबाक लेल जे जल देबैक, से ओकरा मे सदिखन उमड़ैत रहतैक और अनन्‍त जीवन तक बहतैक।” 15 स्‍त्री कहलकनि, “यौ मालिक! हमरा ई जल दिअ जाहि सँ हमरा कहियो नहि पियास लागय और एहिठाम पानि भरऽ नहि आबऽ पड़य।” 16 ओ कहलथिन, “जा कऽ अपना घरवला केँ बजा लबहुन।” 17 स्‍त्री हुनका जबाब देलकनि, “हमरा घरवला नहि अछि।” यीशु ओकरा कहलथिन, “तोँ ठीके कहैत छह जे हमरा घरवला नहि अछि, 18 कारण तोरा पाँचटा घरवला भेल छलह, और जे तोरा लग एखन छह, सेहो तोहर घरवला नहि छह। ई बात तोँ एकदम सत्‍य कहलह।” 19 स्‍त्री बाजल, “मालिक, हम बुझि गेलहुँ जे अपने परमेश्‍वरक एक प्रवक्‍ता छी! आब कहू। 20 हमरा सभक पुरखा एहि पहाड़ पर आराधना कयलनि, लेकिन अपने यहूदी सभ कहैत छी जे आराधना करबाक स्‍थान मात्र यरूशलेम अछि।” 21 यीशु ओकरा कहलथिन, “हमर विश्‍वास करह। ओ समय आओत जहिया तोँ सभ ने एहि पहाड़ पर पिताक आराधना करबह, ने यरूशलेम मे। 22 तोँ सामरी लोक तकर आराधना करैत छह जकरा जनिते नहि छह। हम सभ जे यहूदी सभ छी तिनकर आराधना करैत छी जिनका जनैत छी, कारण उद्धार यहूदी वंश द्वारा अबैत अछि। 23 मुदा ओ समय आबि रहल अछि, हँ, आबिओ गेल, जे सत्‍य आराधक पिताक आराधना आत्‍मा और सत्‍य सँ करतनि, किएक तँ पिता एहने आराधक चाहैत छथि। 24 परमेश्‍वर आत्‍मा छथि, और ई आवश्‍यक अछि जे हुनकर आराधक आत्‍मा आओर सत्‍य सँ हुनकर आराधना करनि।” 25 स्‍त्री कहलकनि, “हम जनैत छी जे मसीह, जे ख्रिष्‍ट कहबैत छथि, से आबऽ वला छथि। ओ जखन औताह तखन हमरा सभ केँ सभ बात बुझा देताह।” 26 यीशु ओकरा कहलथिन, “हम, जे तोरा सँ बात कऽ रहल छिअह, वैह छी।” 27 ओहि क्षण हुनकर शिष्‍य सभ घूमि अयलाह। हुनका सभ केँ बहुत आश्‍चर्य भेलनि जे यीशु एक स्‍त्री सँ बात कऽ रहल छथि, मुदा केओ नहि पुछलथिन जे, अहाँ की चाहैत छी, वा ओकरा सँ किएक बात कऽ रहल छी? 28 तखन स्‍त्री अपन घैल छोड़ि नगर मे जा कऽ लोक सभ केँ कहऽ लागल जे, 29 “आउ, एक आदमी केँ देखू! जे किछु हम कहियो कयने छी, से सभ बात ओ हमरा कहलनि। की ई उद्धारकर्ता-मसीह तँ नहि छथि?” 30 लोक सभ नगर सँ बहरायल और यीशु लग आबऽ लागल। 31 एहि बीच मे शिष्‍य सभ यीशु केँ आग्रह कयलथिन जे, “गुरुजी, किछु खा लिअ।” 32 मुदा ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमरा लग एहन भोजन अछि जकरा बारे मे अहाँ सभ नहि किछु जनैत छी।” 33 शिष्‍य सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “केओ हिनका लेल भोजन तँ नहि आनि देने छनि?” 34 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर भोजन ई अछि जे हम अपन पठाबऽ वलाक इच्‍छाक अनुसार चली और जे काज हमरा देने छथि तकरा पूरा करी। 35 की अहाँ सभ नहि कहैत छी जे, एखन चारि मास बाँकी अछि तखन फसिलक कटनी करबाक समय आओत? लेकिन हम कहैत छी जे आँखि खोलि कऽ खेत दिस देखू! फसिल एखनो कटनीक लेल पाकि गेल अछि! 36 एखनो काटऽ वला केँ बोनि भेटैत छैक, एखनो ओ फसिल काटि कऽ अनन्‍त जीवनक लेल लबैत अछि, जाहि सँ बाउग करऽ वला और काटऽ वला दूनू एक संग खुशी मनाओत। 37 एहि प्रकारेँ ओ कहबी सिद्ध होइत अछि जे बाउग करत केओ और काटत केओ। 38 हम अहाँ सभ केँ ओकरा काटऽ लेल पठौलहुँ जकरा लेल अहाँ सभ परिश्रम नहि कयने छलहुँ। परिश्रम कयलक दोसर, और अहाँ सभ ओकर परिश्रमक फल मे सहभागी भेलहुँ।” 39 ओहि नगरक बहुत सामरी लोक ओहि स्‍त्रीक ई गवाही जे, जे किछु हम कहियो कयने छी से सभ बात ओ हमरा कहलनि, से सुनि यीशु पर विश्‍वास कयलक। 40 तेँ ओ सभ यीशु लग पहुँचि कऽ आग्रह कयलकनि जे, अपने हमरा सभक संग रहल जाओ। और यीशु ओतऽ दू दिन रहलाह। 41 हुनकर बात सुनि आओर बहुत लोक हुनका पर विश्‍वास कयलक। 42 ओ सभ ओहि स्‍त्री केँ कहलक, “आब तोरे कहबाक कारणेँ विश्‍वास नहि करैत छी, बल्‍कि हम सभ अपने कान सँ हुनकर बात सुनने छी और जनैत छी जे ई वास्‍तव मे संसारक उद्धारकर्ता छथि।” 43 ओहिठाम दू दिन रहलाक बाद यीशु गलीलक लेल विदा भऽ गेलाह। 44 (यीशु अपने गवाही देने छलाह जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता केँ अपना क्षेत्र मे आदर नहि होइत छनि।) 45 ओ जखन गलील प्रदेश पहुँचलाह तँ गलील निवासी सभ हुनका स्‍वागत कयलकनि, किएक तँ ओ सभ हुनकर सभ काज जे ओ यरूशलेम मे फसह-भोजक अवसर पर कयने रहथि, से देखने छल, कारण ओहो सभ पाबनिक लेल गेल छल। 46 तँ यीशु फेर गलीलक काना गाम मे अयलाह, जाहिठाम ओ पानि केँ अंगूरक मदिरा बना देने रहथि। कफरनहूम नगर मे राजाक एक हाकिम छलाह जिनकर बालक अस्‍वस्‍थ छलनि। 47 ओ ई खबरि सुनि जे यीशु यहूदिया प्रदेश सँ गलील मे पहुँचि गेल छथि, तँ जा कऽ हुनका सँ निवेदन कयलथिन जे, “चलि कऽ हमरा बेटा केँ नीक कऽ दिअ।” कारण ओ मरऽ पर छल। 48 यीशु हुनका कहलथिन, “अहाँ सभ जाबत तक चिन्‍ह और चमत्‍कार नहि देखब ताबत विश्‍वास कहियो नहि करब।” 49 हाकिम हुनका कहलथिन, “यौ सरकार, एखन चलू। नहि तँ हमर बौआ मरि जायत।” 50 यीशु उत्तर देलथिन, “जाउ अहाँ, अहाँक बेटा बाँचि गेल।” ओ आदमी यीशुक कथन पर विश्‍वास कयलनि और चल गेलाह। 51 ओ रस्‍ते मे छलाह कि हुनकर नोकर सभ भेँट कऽ हुनका कहलकनि, “अपनेक बच्‍चा ठीक भऽ गेल अछि!” 52 ओ ओकरा सभ सँ पुछलथिन जे कतेक बजे सँ बच्‍चा ठीक होमऽ लागल, तँ ओ सभ कहलकनि, “काल्‍हिखन लगभग एक बजे दिन मे ओकर बोखार उतरि गेल।” 53 तखन ओ बुझलनि जे ठीक ओही घड़ी यीशु हुनका कहने छलथिन जे, अहाँक बेटा बाँचि गेल। और ओ अपन पूरा परिवार यीशु पर विश्‍वास कयलनि। 54 ई आब दोसर चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह छल जे यीशु यहूदिया प्रदेश सँ गलील प्रदेश मे आबि कऽ देखौलनि।

John 5

1 बाद मे यहूदी सभक एक पाबनिक अवसर पर यीशु फेर यरूशलेम गेलाह। 2 यरूशलेम मे, भेँड़-द्वारि लग एक कुण्‍ड अछि जे इब्रानी भाषा मे बेतहसदा कहबैत अछि, जकरा चारू कात पाँचटा असोरा छैक। 3 एहि असोरा सभ पर बहुत रोगी पड़ल रहैत छल—आन्‍हर, नाङड़ आ लकवा मारल लोक सभ। [ई सभ पानिक हिलबाक समयक प्रतीक्षा मे रहैत छल, 4 कारण समय-समय पर परमेश्‍वरक एक स्‍वर्गदूत उतरि कऽ पानि केँ हिला दैत छलाह, और एहि हिलयनाइक बाद, जे रोगी सभ सँ पहिने पानि मे पैसैत छल से अपन रोग सँ मुक्‍त भऽ जाइत छल, चाहे जे कोनो रोग होइक।] 5 एक आदमी ओतऽ छल जे अड़तीस वर्ष सँ रोग सँ पीड़ित छल। 6 यीशु जखन ओकरा देखलथिन, ई बुझि कऽ जे ओ बहुत दिन सँ ओना पड़ल अछि, तँ ओकरा कहलथिन, “की तोँ स्‍वस्‍थ होमऽ चाहैत छह?” 7 ओ रोगी हुनका उत्तर देलकनि, “मालिक, पानिक हिलला पर कुण्‍ड मे उतारऽ वला हमरा केओ नहि अछि। हम उतरबाक कोशिशे करैत छी, ततबे मे हमरा सँ पहिने केओ दोसर उतरि जाइत अछि।” 8 तखन यीशु ओकरा कहलथिन, “उठह! अपन पटिया उठा लैह, और चलह-फिरह!” 9 ओ आदमी तुरत स्‍वस्‍थ भऽ गेल और अपन पटिया उठा कऽ चलऽ-फिरऽ लागल। जाहि दिन ई बात भेलैक, से विश्राम-दिन छल। 10 तेँ यहूदी सभ ओहि स्‍वस्‍थ कयल गेल आदमी केँ कहऽ लगलाह, “आइ तँ विश्राम-दिन अछि। पटिया उठौनाइ मना छौ!” 11 मुदा ओ उत्तर देलकनि, “जे आदमी हमरा स्‍वस्‍थ कऽ देलनि, वैह हमरा कहलनि जे पटिया उठा कऽ चलह-फिरह।” 12 ओ सभ ओकरा पुछलथिन, “ओ के अछि जे तोरा कहलकौ जे उठा कऽ चलह-फिरह?” 13 ओ स्‍वस्‍थ भेल आदमी ई नहि जनैत छल जे ओ के छलाह, कारण यीशु ओहिठाम सँ भीड़ मे चल गेल छलाह। 14 किछु कालक बाद यीशु ओहि आदमी केँ मन्‍दिर मे भेँट कऽ कऽ कहलथिन, “देखह, तोँ स्‍वस्‍थ भऽ गेल छह, आब पाप केँ छोड़ह, नहि तँ एहू सँ भारी दशा मे पड़ि जयबह।” 15 ओ आदमी जा कऽ यहूदी सभ केँ कहि देलकनि जे, यीशुए छथि जे हमरा स्‍वस्‍थ कयलनि। 16 यीशु केँ विश्राम-दिन मे एहन काज करबाक कारणेँ यहूदी सभ हुनका सताबऽ लगलनि। 17 मुदा ताहि पर यीशु ओकरा सभ केँ ई उत्तर देलथिन, “हमर पिता एखनो तक काज करैत रहैत छथि, और हमहूँ काज करैत रहैत छी।” 18 एहि कारणेँ यहूदी सभ हुनका मारि देबाक आओर कोशिश करऽ लगलाह किएक तँ ओ खाली विश्रामेक दिनक नियम केँ उल्‍लंघन नहि करैत छलाह, बल्‍कि ओ परमेश्‍वर केँ अपन पिता कहि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक समतूल सेहो ठहरबैत छलाह। 19 यीशु हुनका सभ केँ ई उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, पुत्र स्‍वतन्‍त्र रूप सँ किछु नहि कऽ सकैत छथि। ओ मात्र वैह करैत छथि जे ओ अपन पिता केँ करैत देखैत छथि, किएक तँ जहिना पिता करैत छथि ठीक ओहिना पुत्रो करैत छथि, 20 कारण पिता पुत्र सँ प्रेम करैत छथिन और पिता जे किछु करैत छथि से सभ हुनका देखा दैत छथिन, और एहू सँ पैघ काज हुनका देखा देथिन, जाहि सँ अहाँ सभ केँ आश्‍चर्य होयत। 21 कारण जहिना पिता मुरदा केँ उठा कऽ ओकरा जीवन दैत छथि, तहिना पुत्रो जकरा चाहैत छथि तकरा जीवन दैत छथि। 22 और पिता ककरो न्‍याय करऽ वला नहि छथि। ओ न्‍याय करबाक सभ अधिकार सेहो पुत्रे केँ देने छथिन, 23 जाहि सँ सभ लोक जेना पिताक आदर करैत छनि तेना पुत्रोक आदर करनि। जे पुत्रक आदर नहि करैत अछि, से पिताक सेहो नहि करैत छनि, जे हुनका पठौने छथिन। 24 “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जे हमर बात सुनैत अछि और हमरा पठाबऽ वला केँ मानैत अछि तकरा अनन्‍त जीवन छैक। ओकरा न्‍यायक सामना नहि करऽ पड़तैक, कारण ओ एखने मृत्‍यु केँ पार भऽ कऽ जीवन मे प्रवेश कऽ लेने अछि। 25 हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे ओ समय आबि रहल अछि, हँ, आबिओ गेल जखन मुइल सभ परमेश्‍वरक पुत्रक आवाज सुनत, और जे सभ सुनत से सभ जीअत, 26 किएक तँ जहिना पिता अपने जीवनक स्रोत छथि तहिना ओ पुत्रो केँ स्‍वयं जीवनक स्रोत होयबाक अधिकार देने छथिन। 27 और ओ पुत्र केँ मनुष्‍य-पुत्र होयबाक कारणेँ न्‍याय करबाक अधिकार सेहो देने छथिन। 28 एहि बात सँ आश्‍चर्यित नहि होउ! कारण, ओ समय आबि रहल अछि जहिया मरलाहा लोक सभ अपन कबर मे सँ हुनकर आवाज सुनि कऽ 29 बाहर निकलि आओत। जे नीक कयने अछि से जीवनक लेल उठत, और जे अधलाह कयने अछि से दण्‍ड पयबाक लेल उठत। 30 हम अपने सँ किछु नहि कऽ सकैत छी। हमरा जहिना न्‍याय करबाक लेल कहल जाइत अछि तहिना हम न्‍याय करैत छी। और हमर न्‍याय उचित होइत अछि, कारण हमर उद्देश्‍य ई अछि जे हम अपन नहि, बल्‍कि हमरा जे पठौलनि, तिनकर इच्‍छा पूरा करियनि। 31 “जँ हम अपना बारे मे स्‍वयं गवाही देब तँ हमर गवाही पकिया नहि मानल जायत। 32 मुदा एक गोटे आओर छथि जे हमरा बारे मे गवाही दैत छथि, और हम जनैत छी जे ओ जे गवाही दैत छथि से एकदम सत्‍य अछि। 33 “अहाँ सभ अपने यूहन्‍ना केँ पुछबौलहुँ, और ओ सत्‍यक गवाही देलनि। 34 ई बात नहि अछि जे हम मनुष्‍यक गवाही पर निर्भर रहैत छी, मुदा हम एकर चर्चा एहि लेल करैत छी जे अहाँ सभक उद्धार होअय। 35 यूहन्‍ना तँ एक जरैत दीप छलाह जे इजोत दैत छलाह, और हुनकर इजोत मे आनन्‍द लेनाइ अहाँ सभ केँ किछु काल धरि नीक लागल। 36 मुदा हमरा एकटा गवाही अछि जे यूहन्‍नोक गवाही सँ पैघ अछि, किएक तँ जे काज हमर पिता हमरा पूर्ण करबाक लेल देने छथि, तथा जे काज हम कऽ सेहो रहल छी, से हमरा बारे मे गवाही दैत अछि जे पिता हमरा पठौने छथि। 37 और पिता, जे हमरा पठौलनि, से अपने हमरा बारे मे गवाही देने छथि। अहाँ सभ हुनकर आवाज कहियो नहि सुनने छी, आ ने हुनकर स्‍वरूप कहियो देखने छी, 38 और ने हुनकर वचन केँ अपना मोन मे रहऽ दैत छी। कारण, जिनका ओ पठौने छथि तिनकर अहाँ सभ विश्‍वास नहि करैत छी। 39 अहाँ सभ धर्मशास्‍त्रक अध्‍ययन करैत छी किएक तँ अहाँ सभ मानैत छी जे ओहि सँ अहाँ सभ केँ अनन्‍त जीवन भेटैत अछि। वैह शास्‍त्र हमरा बारे मे गवाही दैत अछि, 40 और तैयो जीवन प्राप्‍त करबाक लेल अहाँ सभ हमरा लग नहि आबऽ चाहैत छी। 41 “हमरा मनुष्‍यक प्रशंसा सँ कोनो मतलब नहि। 42 मुदा अहाँ सभ केँ हम जनैत छी। हम जनैत छी जे अहाँ सभक हृदय मे परमेश्‍वरक प्रेम नहि अछि। 43 हम अपन पिताक नाम पर आयल छी, तैयो हमरा स्‍वीकार नहि करैत छी। मुदा जँ कोनो दोसर व्‍यक्‍ति अपना नाम पर अबैत अछि तँ ओकरा अहाँ सभ स्‍वीकार करैत छिऐक। 44 तँ अहाँ सभ विश्‍वास कोना कऽ सकब जखन कि एक-दोसर सँ प्रशंसा चाहैत छी लेकिन जे प्रशंसा एकमात्र परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त होइत अछि से चाहिते नहि छी? 45 “मुदा ई नहि सोचू जे हम पिताक समक्ष अहाँ सभ पर दोष लगायब। अहाँ सभ केँ दोष लगाबऽ वला मूसा छथि, जिनका पर अहाँ सभ समस्‍त आशा रखने छी। 46 जँ मूसाक विश्‍वास करितहुँ तँ हमरो विश्‍वास करितहुँ, कारण ओ हमरे बारे मे लिखने छथि। 47 मुदा हुनकर लेख पर जँ विश्‍वास नहि करैत छी तँ हमर कथन पर कोना विश्‍वास करब?”

John 6

1 एकरा बाद यीशु गलील झील, अर्थात् तिबिरियास झीलक ओहि पार गेलाह। 2 बड़का भीड़ यीशुक चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह जे ओ रोगी सभ पर देखबैत छलाह, ताहि सँ प्रभावित भऽ हुनका पाछाँ-पाछाँ अबैत छल। 3 यीशु पहाड़ पर चढ़ि कऽ अपन शिष्‍य सभक संग बैसि रहलाह। 4 यहूदी सभक फसह-भोजक पाबनि लगचिआयल छल। 5 यीशु जखन नजरि उठा कऽ लोकक बड़का भीड़ केँ अपना लग अबैत देखलनि तखन फिलिपुस केँ पुछलथिन, “अपना सभ एकरा सभ केँ खुअयबाक लेल कतऽ सँ रोटी किनू?” 6 ई बात ओ फिलिपुस केँ जँचबाक लेल पुछलथिन, कारण ओ अपने तखनो जनैत छलाह जे ओ की करताह। 7 फिलिपुस हुनका उत्तर देलथिन, “एकरा सभ गोटेक लेल कनेको-कनेको जे रोटी किनब से दुओ सय दिनार सँ नहि होयत!” 8 हुनकर एक शिष्‍य, अन्‍द्रेयास, सिमोन पत्रुसक भाय, हुनका कहलथिन, 9 “एतऽ एक लड़का अछि जकरा संग मे जओक पाँचटा रोटी छैक आ दूटा माछ, लेकिन एतेक लोक मे एतबे सँ की होयतैक?” 10 यीशु आज्ञा देलथिन, “लोक सभ केँ बैसा दिऔक।” ओहि ठाम बहुत घास छल, और ओहि पर लोक सभ बैसैत गेल। पुरुषक संख्‍या लगभग पाँच हजार छल। 11 तखन यीशु रोटी लेलनि, और परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दऽ कऽ बैसलाहा लोक सभ मे बटबा देलथिन। तहिना माछो लऽ कऽ कयलनि, और सभ केँ ततेक भेटलैक जतेक-जतेक ओ सभ चाहैत छल। 12 सभ लोक केँ भरि इच्‍छा भोजन कऽ लेलाक बाद यीशु शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आब उबरल टुकड़ा सभ बिछि लिअ, जाहि सँ किछुओ बरबाद नहि होअय।” 13 ओ सभ ओहि पाँचटा जओक रोटीक टुकड़ा, जे भोजन करऽ वला लोक सभ सँ बाँचि गेल छल, तकरा बिछि कऽ ओहि सँ बारहटा पथिया भरलनि। 14 लोक सभ यीशु द्वारा कयल गेल ई चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह देखि कऽ कहऽ लागल, “ई तँ अवश्‍य परमेश्‍वरक ओ प्रवक्‍ता छथि जे संसार मे आबऽ वला छलाह।” 15 यीशु ई बुझलनि जे लोक सभ हुनका जबरदस्‍ती पकड़ि कऽ राजा बनाबऽ चाहैत छल, तेँ ओ फेर पहाड़ पर असगरे चल गेलाह। 16 साँझ पड़ला पर यीशुक शिष्‍य सभ झीलक किनार पर जा 17 नाव मे चढ़ि कऽ कफरनहूम नगर जयबाक लेल झील केँ पार करऽ लगलाह। ताबत अन्‍हार भऽ गेल छल और यीशु एखन तक हुनका सभ लग नहि आयल छलाह। 18 हवा बहुत जोर सँ बहि रहल छल, और झील मे बड़का लहरि उठि रहल छल। 19 जखन ओ सभ लगभग तीन-चारि मील नाव केँ खेबि लेने छलाह तखन यीशु केँ झीलक पानि पर चलैत और नाव दिस अबैत देखलनि, और भयभीत भऽ गेलाह। 20 मुदा ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम छी, नहि डेराउ!” 21 तखन ओ सभ खुशी भऽ हुनका नाव मे लऽ लेबाक लेल तैयार भेलाह, और नाव तुरत ओहि स्‍थान पर पहुँचल जाहिठाम ओ सभ जा रहल छलाह। 22 प्रात भेने झीलक ओहि पार रहि गेल लोक सभ बुझलक जे एतऽ एकेटा नाव छल, और ओ सभ जनैत छल जे यीशु अपन शिष्‍य सभक संग ओहि नाव मे नहि चढ़ल छलाह, मात्र शिष्‍ये सभ विदा भऽ गेल छलाह। 23 तखन तिबिरियास नगर सँ दोसर नाव सभ ओहि जगह लग पहुँचल जाहिठाम प्रभु यीशुक धन्‍यवादक प्रार्थनाक बाद लोक सभ रोटी खयने छल। 24 तँ लोक जखन देखलक जे ने यीशु आ ने हुनकर शिष्‍य सभ एतऽ छथि, तखन ओ सभ नाव सभ मे चढ़ि कऽ यीशुक खोज मे कफरनहूम नगर गेल। 25 झीलक ओहि पार जखन यीशु ओकरा सभ केँ भेटलथिन तखन ओ सभ पुछलकनि, “गुरुजी, अहाँ एतऽ कखन अयलहुँ?” 26 यीशु ओकरा सभ केँ उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे अहाँ सभ हमरा एहि लेल नहि तकैत छी जे हमर चमत्‍कार वला चिन्‍ह सभ देखि कऽ बुझलहुँ, बल्‍कि एहि लेल जे अहाँ सभ रोटी खा कऽ अघा गेलहुँ। 27 जे भोजन नहि टिकैत अछि, ताहि लेल परिश्रम नहि करू, बल्‍कि ओहि भोजनक लेल परिश्रम करू जे अनन्‍त जीवन तक टिकैत अछि और जे मनुष्‍य-पुत्र अहाँ सभ केँ प्रदान करताह, कारण हुनका पर पिता-परमेश्‍वर अपन छाप लगा देने छथिन।” 28 तखन ओ सभ हुनका पुछलकनि, “परमेश्‍वरक काज करबाक लेल, हम सभ की करू?” 29 यीशु बजलाह, “परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ जे काज चाहैत छथि, से ई अछि जे जकरा ओ पठौने छथि तकरा पर विश्‍वास करू।” 30 एहि पर ओ सभ हुनका कहलकनि, “तखन अहाँ कोन चिन्‍ह देखायब, जकरा देखि कऽ हम सभ अहाँ पर विश्‍वास कऽ सकी? अहाँ की काज करैत छी? 31 हमरा सभक पुरखा निर्जन क्षेत्र मे मन्‍ना वला रोटी खयने छल, जेना धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘ओ ओकरा सभ केँ खयबाक लेल स्‍वर्ग सँ रोटी देलथिन।’” 32 एहि पर यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, बात ई नहि जे अहाँ सभ केँ मूसा स्‍वर्ग सँ रोटी देलनि, बल्‍कि ई जे हमर पिता अहाँ सभ केँ स्‍वर्ग सँ वास्‍तविक रोटी दऽ रहल छथि। 33 हँ, परमेश्‍वर जे रोटी दैत छथि, से ओ अछि जे स्‍वर्ग सँ उतरि कऽ संसार केँ जीवन दैत अछि।” 34 ओ सभ हुनका कहलकनि, “यौ मालिक, हमरा सभ केँ ई रोटी एखनो आ सभ दिन दैत रहू!” 35 यीशु बजलाह, “जीवनक रोटी हमहीं छी। जे हमरा लग आओत से कहियो भूखल नहि रहत। जे हमरा पर विश्‍वास करत, तकरा कहियो पियास नहि लगतैक। 36 मुदा जेना अहाँ सभ केँ कहने छलहुँ, अहाँ सभ हमरा देखने छी और तैयो विश्‍वास नहि करैत छी। 37 जकरा पिता हमरा दैत छथि, से सभ हमरा लग आओत, और जे केओ हमरा लग आओत, तकरा हम कहियो नहि अस्‍वीकार करब। 38 कारण हम अपन इच्‍छा नहि, बल्‍कि हमरा पठाबऽ वलाक इच्‍छा पूरा करबाक लेल स्‍वर्ग सँ उतरल छी, 39 और हमरा पठाबऽ वलाक इच्‍छा ई छनि जे जकरा सभ केँ ओ हमरा देने छथि, तकरा सभ मे सँ हम एकोटा केँ नहि हेराबी, बल्‍कि अन्‍तिम दिन मे ओकरा सभ केँ जिआबी। 40 हँ, हमर पिताक इच्‍छा ई छनि जे, जे केओ पुत्र दिस ताकत और ओकरा पर विश्‍वास करत, तकरा अनन्‍त जीवन भेटतैक, और हम ओकरा अन्‍तिम दिन मे जिआ देब।” 41 एहि पर यहूदी सभ हुनका पर कुड़बुड़ाय लगलाह, कारण ओ कहने छलाह जे, स्‍वर्ग सँ उतरल रोटी हमहीं छी। 42 ओ सभ कहलनि, “ई तँ यूसुफक बेटा यीशुए अछि! और एकर माय-बाप केँ अपना सभ चिन्‍हिते छिऐक! तँ ई आब कोना कहैत अछि जे हम स्‍वर्ग सँ उतरल छी?” 43 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ अपना सभ मे एना नहि कुड़बुड़ाउ! 44 केओ हमरा लग ताबत तक नहि आबि सकैत अछि जाबत तक हमर पिता जे हमरा पठौलनि, से ओकरा हमरा लग नहि खीचि दैत छथि। और हम ओकरा अन्‍तिम दिन मे जिआ देब। 45 परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख छनि जे, ‘ओ सभ गोटे परमेश्‍वर द्वारा सिखाओल जायत।’ जे केओ पिताक सुनैत छनि और हुनका सँ सिखैत अछि, से हमरा लग अबैत अछि। 46 हमर कहबाक मतलब ई नहि जे, केओ पिता केँ देखने छनि। ओ जे पिताक ओहिठाम सँ आयल अछि, खाली वैहटा हुनका देखने छनि। 47 हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जे विश्‍वास करैत अछि, तकरा अनन्‍त जीवन छैक। 48 जीवनक रोटी हम छी। 49 अहाँ सभक पुरखा लोकनि निर्जन क्षेत्र मे मन्‍ना वला रोटी खयलनि, और तैयो मरलाह। 50 मुदा ई रोटी जकरा बारे मे हम बाजि रहल छी, से ओ अछि जे स्‍वर्ग सँ उतरल अछि, जाहि सँ जँ केओ एहि मे सँ खायत तँ नहि मरत। 51 ओ जीबैत रोटी जे स्‍वर्ग सँ उतरल अछि से हमहीं छी। जँ केओ ई रोटी खायत तँ ओ अनन्‍त काल तक जीबैत रहत। और ई रोटी जे हम संसारक जीवनक लेल देब, से हमर माँसु अछि।” 52 तखन यहूदी सभ अपना सभ मे वाद-विवाद करऽ लगलाह जे, “ई व्‍यक्‍ति हमरा सभ केँ खाय लेल अपन माँसु कोना दऽ सकत?” 53 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, जाबत तक अहाँ मनुष्‍य-पुत्रक माँसु नहि खयबैक और ओकर खून नहि पिबैक, ताबत तक अहाँ मे जीवन नहि अछि। 54 जे हमर माँसु खाइत अछि और हमर खून पिबैत अछि, तकरा अनन्‍त जीवन छैक, और हम ओकरा अन्‍तिम दिन मे जिआ देबैक। 55 कारण, हमर माँसु वास्‍तविक भोजन अछि और हमर खून वास्‍तविक पिबाक वस्‍तु अछि। 56 जे केओ हमर माँसु खाइत अछि और हमर खून पिबैत अछि, से हमरा मे बनल रहैत अछि और हम ओकरा मे बनल रहैत छी। 57 जहिना जीवित पिता हमरा पठौलनि आ हम हुनका कारण जीबैत छी, तहिना, जे हमरा मे सँ खायत, सैह हमरा कारण जीबैत रहत। 58 ई रोटी स्‍वर्ग सँ उतरल अछि। ई तेहन नहि अछि जेहन अहाँ सभक पुरखा लोकनि खयलनि। ओ सभ खयलनि आ मरलाह। मुदा जे ई रोटी खायत से सर्वदा जीबैत रहत।” 59 ई सभ बात यीशु कफरनहूमक सभाघर मे शिक्षा दैत काल बजलाह। 60 यीशुक बात सुनि कऽ हुनकर बहुतो शिष्‍य कहलनि, “ई शिक्षा बहुत कठोर अछि। एकरा के बरदास्‍त कऽ सकत?” 61 मुदा यीशु अपना मोन मे बुझि गेलाह जे हमर शिष्‍य सभ एहि सँ कुड़बुड़ाइत छथि, तेँ हुनका सभ केँ कहलथिन, “की एहि बात सँ अहाँ सभक मोन मे ठेस लागि गेल? 62 और मानि लिअ जे अहाँ सभ मनुष्‍य-पुत्र केँ ओहिठाम ऊपर जाइत देखबनि जाहिठाम ओ पहिने छलाह—तखन की? 63 आत्‍मे जीवन दैत अछि, शरीर सँ किछुओ लाभ नहि। जे किछु हम अहाँ सभ केँ कहलहुँ से आत्‍माक और जीवनक बात अछि। 64 तैयो अहाँ सभ मे अनेक एहन छी जे विश्‍वास नहि करैत छी।” यीशु तँ शुरुए सँ जनैत छलाह जे ओ के सभ अछि जे हमरा पर विश्‍वास नहि करैत अछि, और ओ के अछि जे हमरा पकड़बाओत। 65 ओ आगाँ कहऽ लगलाह, “एहि कारणेँ हम अहाँ सभ केँ कहने छलहुँ जे, केओ हमरा लग ताबत तक नहि आबि सकैत अछि जाबत तक पिता ओकरा अयबाक सामर्थ्‍य नहि दैत छथिन।” 66 एहि बात सभ सँ हुनकर बहुतो शिष्‍य ओहिठाम सँ घूमि गेल और फेर हुनका संग नहि चलल। 67 तखन यीशु अपना बारहो शिष्‍य केँ पुछलथिन, “की अहूँ सभ हमरा छोड़ऽ चाहैत छी?” 68 सिमोन पत्रुस हुनका उत्तर देलथिन, “प्रभु, हम सभ ककरा लग जाउ? अहाँ लग तँ अनन्‍त जीवनक वचन अछि। 69 हम सभ विश्‍वास कऽ कऽ जानि गेल छी जे अहाँ परमेश्‍वरक पवित्र दूत छी।” 70 यीशु उत्तर देलथिन, “की अहाँ बारहो गोटे केँ हम नहि चुनलहुँ? और तैयो अहाँ सभ मे सँ एक शैतान अछि।” 71 ओ ई बात सिमोन इस्‍करियोतीक पुत्र यहूदाक बारे मे कहलनि, किएक तँ ओ बारह शिष्‍य मे सँ एक होइतो हुनका पकड़बाबऽ वला छलाह।

John 7

1 एकरा बाद यीशु गलील प्रदेश मे जगह-जगह पर घुमऽ लगलाह। ओ यहूदिया प्रदेश मे नहि घुमऽ चाहैत छलाह, किएक तँ यहूदी सभक धर्मगुरु सभ हुनका मारि देबाक ताक मे छलनि। 2 मुदा यहूदी सभक झोपड़ीक पाबनि जखन लग आबि गेल, 3 तँ हुनकर भाय सभ हुनका कहलथिन, “ई जगह छोड़ू, और यहूदिया प्रदेश चल जाउ, जाहि सँ अहाँ जे चमत्‍कार कऽ रहल छी से अहाँक चेला सभ देखि सकत। 4 कारण एहन केओ नहि होइत अछि जे नामी होमऽ चाहय आ गुप्‍त रूप सँ काज करय। अहाँ ई सभ काज कऽ रहल छी, तँ अपना केँ दुनियाक सामने मे प्रगट करू।” 5 हुनकर अपन भाय सभ सेहो हुनका पर विश्‍वास नहि करैत छलाह। 6 तेँ यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर समय एखन तक नहि आयल अछि, लेकिन अहाँ सभक लेल कोनो समय उपयुक्‍त अछि। 7 अहाँ सभ सँ संसार घृणा नहि कऽ सकैत अछि, मुदा हमरा सँ तँ करैत अछि किएक तँ संसारक बारे मे हम गवाही दैत छी जे ओकर चालि-चलन खराब छैक। 8 अहीं सभ पाबनिक लेल जाउ। हम एखन एहि पाबनिक लेल नहि जायब, कारण हमर समय एखन तक नहि पूरल अछि।” 9 ई बात कहि कऽ ओ गलीले मे रहि गेलाह। 10 मुदा जखन हुनकर भाय सभ पाबनिक लेल चल गेलाह तखन ओहो गेलाह, खुलि कऽ नहि, बल्‍कि गुप्‍त रूप सँ। 11 पाबनिक समय यहूदी धर्मगुरु सभ ई कहैत यीशु केँ तकैत छलनि जे, “ओ कतऽ अछि?” 12 हुनका बारे मे लोक सभ बहुत फुसफुसाइत छल। किछु लोक कहैत छल, “ओ नीक आदमी छथि।” और दोसर कहैत छल, “नहि! ओ जनता केँ बहकबैत छैक।” 13 मुदा धर्मगुरु सभक डर सँ केओ हुनका बारे मे किछु खुलि कऽ नहि कहैत छल। 14 पाबनि करीब-करीब आधा समाप्‍त भऽ गेलाक बादे यीशु मन्‍दिर मे जा कऽ शिक्षा देबऽ लगलाह। 15 यहूदी सभ बहुत आश्‍चर्यित भऽ कऽ कहलनि, “एहि आदमी केँ बिनु पढ़नहि एतेक ज्ञान कतऽ सँ प्राप्‍त भेलैक?” 16 यीशु उत्तर देलथिन, “हम जे शिक्षा दैत छी से हमर नहि, बल्‍कि जे हमरा पठौलनि, तिनकर अछि। 17 जँ केओ हुनकर इच्‍छा पूरा करबाक निश्‍चय करत तँ ओ अवश्‍य ई जानि जायत जे हमर शिक्षा परमेश्‍वरक अछि वा हम अपने दिस सँ बाजि रहल छी। 18 जे अपना दिस सँ बजैत अछि, से एहि लेल, जे ओ अपना लेल आदर चाहैत अछि, मुदा जे अपन पठाबऽ वलाक आदर चाहैत अछि से सत्‍य पुरुष अछि और ओकरा मे कोनो छल-प्रपंच नहि छैक। 19 की मूसा अहाँ सभ केँ धर्म-नियम नहि देने छथि? तैयो अहाँ सभ मे सँ एको व्‍यक्‍ति ओहि नियमक पालन नहि करैत छी। अहाँ सभ हमरा किएक मारि देबऽ चाहैत छी?” 20 भीड़क लोक उत्तर देलकनि, “अहाँ मे तँ दुष्‍टात्‍मा अछि! अहाँ केँ के मारऽ चाहैत अछि?” 21 यीशु बजलाह, “हम एकटा काज कयलहुँ और ओहि सँ अहाँ सभ गोटे आश्‍चर्यित भेलहुँ। 22 मूसा अहाँ सभ केँ खतनाक विधि देलनि, ओना तँ ओ विधि वास्‍तव मे मूसा सँ नहि देल गेल, बल्‍कि हुनका सँ पहिने वला पुरखा सभ सँ, और ओहि अनुसार अहाँ सभ विश्राम-दिन मे बच्‍चाक खतना करैत छी। 23 जँ खतना करऽ वला दिन विश्रामोक दिन पड़ला पर अहाँ सभ ओ विधि करैत छी, जाहि सँ मूसाक नियम नहि तोड़ल जाय तँ हमरा पर किएक खिसिआइत छी जखन हम विश्राम-दिन मे ककरो शरीर पूर्ण रूप सँ स्‍वस्‍थ कऽ देलहुँ? 24 मुँह देखि न्‍याय कयनाइ छोड़ू और उचित न्‍याय करू।” 25 तखन यरूशलेमक किछु निवासी कहऽ लागल, “की ई आदमी ओ नहि अछि, जकरा ओ सभ मारि देबाक कोशिश कऽ रहल छैक? 26 मुदा देखू! ई एतऽ खुलि कऽ बाजि रहल अछि और एकरा केओ नहि किछु कहैत छैक! कतौ एहन तँ नहि भऽ गेल जे अपना सभक धर्मगुरु-नेता सभ वास्‍तव मे मानि लेने होथि जे ई परमेश्‍वरक पठाओल उद्धारकर्ता-मसीह अछि? 27 मुदा एकरा तँ अपना सभ जनिते छी जे ई कतऽ सँ आयल अछि। उद्धारकर्ता-मसीह जखन औताह तँ ककरो नहि बुझल होयतैक जे ओ कोन ठामक छथि।” 28 तखन यीशु मन्‍दिर मे शिक्षा दैत जोर सँ कहलनि, “हँ! हमरा चिन्‍हैत छी और जनैत छी जे हम कोन ठामक छी। मुदा हम अपने सँ नहि आयल छी। जे हमरा पठौलनि, वैह सत्‍य छथि। अहाँ सभ हुनका नहि चिन्‍हैत छियनि, 29 मुदा हम हुनका चिन्‍हैत छी, किएक तँ हम हुनका ओहिठाम सँ आयल छी, और वैह हमरा पठौलनि।” 30 एहि पर ओ सभ हुनका पकड़बाक कोशिश करऽ लगलाह, मुदा केओ हुनका हाथ नहि लगा सकलनि, कारण हुनकर समय एखन नहि आयल छल। 31 तैयो जनता मे सँ बहुत लोक हुनका पर विश्‍वास कयलकनि, आ बाजल, “मसीह जखन औताह तँ की एहि व्‍यक्‍ति सँ बेसी चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह देखौताह?” 32 फरिसी सभ जखन भीड़ केँ यीशुक बारे मे एना फुसफुसाइत सुनलनि, तँ ओ सभ आ मुख्‍यपुरोहित सभ मन्‍दिरक सिपाही केँ हुनका पकड़ऽ लेल पठा देलनि। 33 तखन यीशु बजलाह, “कनेक कालक लेल आओर अहाँ सभक संग छी, तखन तिनका लग जायब जे हमरा पठौलनि। 34 अहाँ सभ हमरा ताकब, मुदा हम नहि भेटब, और हम जतऽ होयब ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकब।” 35 यहूदी सभक धर्मगुरु सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “ई कतऽ जाय चाहैत अछि जाहि सँ हमरा सभ केँ नहि भेटत? की ओहिठाम जायत जाहिठाम अपना सभक लोक यूनानी सभ मे प्रवासी भऽ कऽ रहैत अछि, और की यूनानी सभ केँ सेहो सिखाओत? 36 एकर की कहबाक मतलब छैक जे, अहाँ सभ हमरा ताकब मुदा हम नहि भेटब, और, हम जतऽ होयब ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकब?” 37 पाबनिक अन्‍तिम दिन, जे पाबनिक सभ सँ पैघ दिन मानल जाइत छल, ओहि दिन यीशु ठाढ़ भऽ गेलाह और जोर सँ कहलनि, “जँ ककरो पियास लागल छैक तँ ओ हमरा लग आबय और पिबय। 38 जे हमरा पर विश्‍वास करैत अछि, जेना धर्मशास्‍त्रक कथन अछि, ओकरा हृदय सँ जीवन-जलक झरना फूटि जायत।” 39 ई बात ओ पवित्र आत्‍माक सम्‍बन्‍ध मे कहलनि, जिनका विश्‍वास कयनिहार सभ प्राप्‍त करऽ वला छल। एखन तक पवित्र आत्‍मा तँ प्रदान नहि कयल गेल छलाह, कारण यीशु एखन तक अपन स्‍वर्गक महिमा मे फिरि कऽ नहि गेल छलाह। 40 ई बात सुनि बहुत लोक कहऽ लागल, “ई सत्‍ये परमेश्‍वरक ओ प्रवक्‍ता छथि।” 41 दोसर लोक कहलक, “ओ उद्धारकर्ता-मसीह छथि।” मुदा फेर आरो दोसर लोक सभ कहलक, “कोना?! की उद्धारकर्ता-मसीह गलील प्रदेश सँ औताह? 42 की धर्मशास्‍त्रक कथन नहि अछि जे मसीह दाऊद राजाक वंशज होयताह, और दाऊदक गाम, बेतलेहम सँ औताह?” 43 एहि तरहेँ यीशुक विषय मे लोक सभ केँ अपना मे मतभेद भऽ गेलैक। 44 किछु लोक हुनका पकड़ऽ चाहैत छल, मुदा केओ हुनका हाथ नहि लगौलकनि। 45 तखन मन्‍दिरक सिपाही सभ मुख्‍यपुरोहित आ फरिसी सभ लग घूमि कऽ आयल। ई सभ ओकरा सभ केँ पुछलथिन, “अहाँ सभ ओकरा किएक नहि पकड़ि कऽ अनलहुँ?” 46 सिपाही सभ उत्तर देलकनि, “ओ आदमी जेना बजैत छथि, तेना आइ तक केओ कहियो नहि बाजल अछि!” 47 फरिसी सभ ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अरे! तोरो सभ केँ ओ ठकि लेलकौ की? 48 धर्मगुरु सभ मे सँ वा फरिसी मे सँ की एको गोटे ओकरा पर विश्‍वास कयने अछि? नहि! 49 मुदा ई भीड़, जे धर्म-नियमक बारे मे किछु नहि जनैत अछि—ओ सभ सरापित अछि!” 50 तखन ओहि फरिसी मे सँ एक आदमी, निकोदेमुस, जे पहिने एक बेर यीशु लग आयल छलाह, से कहलनि, 51 “अपना सभक नियमक अनुसार जाबत तक ककरो बात नहि सुनल जायत और पता नहि लगाओल जायत जे ओ की कऽ रहल अछि की ताबत तक दोषी ठहराओल जायत?” 52 ओ सभ उत्तर देलथिन, “अहूँ गलीलेक छी की? धर्मशास्‍त्रक अध्‍ययन करू—अहाँ केँ पता लागत जे परमेश्‍वरक कोनो प्रवक्‍ता गलील सँ नहि अबैत छथि!” 53 [तखन ओ सभ अपन-अपन घर चल गेलाह।

John 8

1 मुदा यीशु जैतून पहाड़ पर गेलाह। 2 भोरे भोर यीशु फेर मन्‍दिर मे अयलाह। लोक सभ हुनका लग आयल और ओ बैसि कऽ ओकरा सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह। 3 धर्मशिक्षक और फरिसी सभ एक स्‍त्रीगण केँ अनलनि, जे पुरुषक संग कुकर्म करैत पकड़ा गेल छल, और लोकक बीच मे ओकरा ठाढ़ कऽ कऽ 4 यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, ई स्‍त्रीगण पुरुषक संग कुकर्म करिते मे पकड़ा गेल। 5 धर्म-नियम मे मूसा हमरा सभ केँ आज्ञा देलनि जे एहन स्‍त्रीगण केँ पाथर मारि कऽ मारि देबाक चाही। आब अहाँ की कहैत छी?” 6 ई बात ओ सभ हुनका फँसाबऽ लेल पुछलनि, जाहि सँ हुनका पर दोष लगयबाक आधार भेटनि। यीशु नीचाँ झुकि कऽ अपन आङुर सँ जमीन पर लिखऽ लगलाह। 7 ओ सभ जखन हुनका सँ पुछिते रहलाह, तखन ओ मूड़ी उठा कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ मे सँ जे निष्‍पाप होथि, वैह सभ सँ पहिने पाथर मारथि।” 8 और फेर झुकि कऽ जमीन पर लिखऽ लगलाह। 9 ई बात जखन ओ सभ सुनलनि तँ पहिने बूढ़ सभ आ तखन एक-एक कऽ सभ केओ चल गेलाह। आब मात्र यीशु रहि गेलाह, और ओ स्‍त्रीगण जे ओहिठाम ठाढ़ छलि। 10 यीशु मूड़ी उठा कऽ ओकरा कहलथिन, “बहिन, ओ सभ कतऽ अछि? की तोरा केओ नहि दण्‍ड देलकह?” 11 ओ बाजल, “नहि, मालिक, केओ नहि।” यीशु बजलाह, “हमहूँ तोरा दण्‍ड नहि दैत छिअह। आब जाह, आ फेर पाप नहि करह।”] 12 बाद मे यीशु फेर लोक सभ केँ कहलनि, “हम संसारक इजोत छी। जे केओ हमरा पाछाँ आओत, से अन्‍हार मे कहियो नहि चलत, बल्‍कि जीवनक इजोत प्राप्‍त करत।” 13 एहि पर फरिसी सभ हुनका कहलथिन, “आब अहाँ अपना बारे मे अपने गवाही दऽ रहल छी! अहाँक गवाही पकिया नहि मानल जायत।” 14 यीशु उत्तर देलथिन, “जँ हम अपना बारे मे गवाही दैतो छी तँ हमर गवाही पकिया होइत अछि, कारण हम जनैत छी जे हम कतऽ सँ आयल छी और कतऽ जा रहल छी, मुदा अहाँ सभ नहि जनैत छी जे हम कतऽ सँ अयलहुँ वा कतऽ जाय वला छी। 15 अहाँ सभ सांसारिक दृष्‍टि सँ न्‍याय करैत छी। हम ककरो न्‍याय नहि करैत छी। 16 तैयो जँ हम न्‍याय करितो छी तँ हमर न्‍याय उचित होइत अछि कारण निर्णय हम असगरे नहि, बल्‍कि हमर पिता, जे हमरा पठौलनि, से और हम दूनू गोटे करैत छी। 17 अहीं सभक धर्म-नियम मे लिखल अछि जे दू आदमीक गवाही पकिया होइत अछि। 18 हम अपना बारे मे अपने एक गवाह छी और हमर दोसर गवाह ओ छथि जे हमरा पठौलनि—हमर पिता।” 19 ओ सभ तखन हुनका कहलथिन, “अहाँक पिता कतऽ छथि?” यीशु बजलाह, “अहाँ सभ ने हमरा चिन्‍हैत छी, आ ने हमरा पिता केँ। जँ हमरा चिन्‍हितहुँ तँ हमरा पितो केँ चिन्‍हितिऐन।” 20 ई सभ बात ओ शिक्षा दैत काल मन्‍दिरक ओहि भाग मे कहलनि जाहिठाम दान-पात्र राखल रहैत छल। तैयो हुनका केओ नहि पकड़लकनि, किएक तँ हुनकर समय एखन तक नहि आयल छल। 21 यीशु हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हम तँ जा रहल छी। अहाँ सभ हमरा ताकब, और अपना पाप मे मरब। हम जतऽ जाइत छी ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकैत छी।” 22 एहि पर यहूदी सभ एक-दोसर केँ कहऽ लागल, “तँ की ओ आत्‍महत्‍या कऽ लेत? की एहि कारणेँ ओ कहैत अछि जे, हम जतऽ जाइत छी ततऽ अहाँ सभ नहि आबि सकैत छी?” 23 ओ ओकरा सभ केँ आगाँ कहलथिन, “अहाँ सभ नीचाँक छी, हम ऊपरक छी। अहाँ सभ एही दुनियाक छी, हम एहि दुनियाक नहि छी। 24 एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहलहुँ जे, अहाँ सभ अपना पाप मे मरब। कारण, जँ अहाँ सभ विश्‍वास नहि करब जे हम वैह छी जे छी, तँ अहाँ सभ अपना पाप मे अवश्‍य मरब।” 25 ओ सभ हुनका कहलकनि, “तखन अहाँ के छी?” यीशु बजलाह, “वैह, जे हम शुरुए सँ अहाँ सभ केँ कहैत आबि रहल छी। 26 अहाँ सभक सम्‍बन्‍ध मे हमरा बहुत किछु कहबाक और न्‍याय करबाक अछि। मुदा जे हमरा पठौलनि, से सत्‍य छथि, और जे बात हम हुनका सँ सुनने छी, वैह बात हम संसार केँ कहैत छी।” 27 ओ सभ नहि बुझलक जे यीशु पिताक बारे मे ओकरा सभ केँ कहैत छथि। 28 तेँ यीशु कहलनि, “जखन अहाँ सभ मनुष्‍य-पुत्र केँ ऊपर लटका देब तखन अहाँ सभ जानि जायब जे हम वैह छी जे छी, और जानब जे हम अपने सँ किछु नहि करैत छी, बल्‍कि वैह करैत आ कहैत छी जे पिता हमरा सिखौने छथि। 29 जे हमरा पठौलनि, से हमरा संग छथि। ओ हमरा असगरे नहि छोड़ने छथि, कारण हम सदिखन वैह काज करैत छी जाहि काज सँ ओ प्रसन्‍न होइत छथि।” 30 जखन ई बात ओ कहि रहल छलाह तखने बहुतो लोक हुनका पर विश्‍वास कयलकनि। 31 जे यहूदी सभ हुनका पर विश्‍वास कयलनि, तिनका सभ केँ यीशु कहलथिन, “जँ अहाँ सभ हमरा सिद्धान्‍तक पालन करब तँ अहाँ सभ वास्‍तव मे हमर शिष्‍य होयब। 32 तखन अहाँ सभ सत्‍य केँ जानब, और सत्‍य अहाँ सभ केँ स्‍वतन्‍त्र कऽ देत।” 33 ओ सभ हुनका उत्तर देलथिन, “हम सभ तँ अब्राहमक वंशज छी और कहियो ककरो गुलाम नहि भेलहुँ। अहाँ कोना कहैत छी जे हम सभ स्‍वतन्‍त्र कऽ देल जायब?” 34 यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, जे केओ पाप करैत अछि, से दास अछि। 35 दास घर मे सभ दिन तक नहि रहैत अछि, मुदा पुत्र सभ दिन तक रहैत अछि। 36 तेँ जँ पुत्र अहाँ केँ स्‍वतन्‍त्र कऽ देताह तँ वास्‍तव मे अहाँ स्‍वतन्‍त्र भऽ जायब। 37 हमरा बुझल अछि जे अहाँ सभ अब्राहमक वंशज छी, तैयो अहाँ सभ हमरा मारि देबऽ चाहैत छी। तकर कारण ई अछि जे, अहाँ सभक मोन मे हमरा वचनक लेल कोनो स्‍थान नहि अछि। 38 हम जे किछु अपना पिताक ओहिठाम देखने छी, वैह कहैत छी, और अहाँ सभ से कहैत छी जे अपने पिता सँ सुनने छी।” 39 ओ सभ उत्तर देलथिन, “हमरा सभक पिता अब्राहम छथि।” यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जँ अब्राहमक सन्‍तान रहितहुँ तँ जे काज अब्राहम कयलनि सैह करितहुँ। 40 मुदा देखू! अहाँ सभ हमरा खून कऽ देबाक कोशिश मे छी, खाली एहि लेल, जे हम परमेश्‍वर सँ सुनल सत्‍य केँ अहाँ सभ केँ कहलहुँ। अब्राहम एहन काज तँ नहि कयलनि! 41 जे अहाँ सभक पिता अछि, तकरे जकाँ अहाँ सभ करैत छी।” ओ सभ उत्तर देलथिन, “हम सभ अनजनुआ-जन्‍मल नहि छी! हमरा सभक एकेटा पिता छथि, अर्थात् परमेश्‍वर।” 42 यीशु बजलाह, “जँ अहाँ सभक पिता परमेश्‍वर रहितथि तँ अहाँ सभ हमरा सँ प्रेम करितहुँ किएक तँ हम हुनके ओहिठाम सँ अयलहुँ और आब एतऽ छी। हम अपना इच्‍छा सँ नहि अयलहुँ, वैह हमरा पठौलनि। 43 हम जे कहैत छी से अहाँ सभ किएक नहि बुझैत छी? एहि लेल जे अहाँ सभ हमर बात नहि सुनि सकैत छी! 44 अहाँ सभ अपन पिता, जे शैतान अछि, तकर छी, और अहाँ सभ अपन पिताक इच्‍छा पूरा करबाक निश्‍चय कयने छी। ओ शुरुए सँ हत्‍यारा अछि और सत्‍य सँ कोनो सम्‍बन्‍ध नहि रखैत अछि, कारण ओकरा मे सत्‍य छैहे नहि। ओ जखन झूठ बजैत अछि तँ अपन स्‍वभावेक अनुसार बजैत अछि, किएक तँ ओ झुट्ठा अछि और झूठक पिता अछि। 45 मुदा हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी और तेँ अहाँ सभ हमर विश्‍वास नहि करैत छी। 46 की अहाँ सभ मे सँ केओ प्रमाणित कऽ सकैत अछि जे हम पापक दोषी छी? जँ हम सत्‍य बजैत छी तँ हमर विश्‍वास किएक नहि करैत छी? 47 जे परमेश्‍वरक अछि, से परमेश्‍वरक वचन सुनैत अछि। अहाँ सभ एहि द्वारे नहि सुनैत छी जे अहाँ सभ परमेश्‍वरक नहि छी।” 48 यहूदी सभ हुनका उत्तर देलथिन, “की हम सभ ठीके नहि कहैत आबि रहल छिऔ जे तोँ सामरी छैं और तोरा मे दुष्‍टात्‍मा छौ?” 49 यीशु उत्तर देलथिन, “हमरा मे दुष्‍टात्‍मा नहि अछि। हम अपना पिता केँ आदर करैत छी मुदा अहाँ सभ हमर निरादर करैत छी। 50 लेकिन हम अपना सम्‍मानक लेल चिन्‍ता नहि करैत छी। एक दोसर गोटे करैत छथि और वैह न्‍याय करैत छथि। 51 हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे जँ केओ हमर बात पर चलत तँ ओ कहियो नहि मरत।” 52 तखन यहूदी सभ हुनका कहलकनि, “आब तँ निश्‍चय जानि गेलहुँ जे तोरा मे दुष्‍टात्‍मा छौ! अब्राहम मरि गेलाह और परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभ सेहो, और तैयो तोँ कहैत छैं जे, कोनो व्‍यक्‍ति जँ तोरा वचन पर चलत तँ मृत्‍यु केँ कहियो नहि चिखत! 53 की तोँ हमरा सभक पुरखा अब्राहम सँ पैघ हयबेँ? ओ तँ मरि गेलाह आ परमेश्‍वरक आरो सभ प्रवक्‍ता सेहो मरलाह। तोँ अपना केँ की बुझैत छैं?” 54 यीशु उत्तर देलथिन, “जँ हमहीं अपन सम्‍मान करितहुँ तँ ओहि सम्‍मानक कोनो महत्‍व नहि होइत। हमर सम्‍मान करऽ वला हमर पिता छथि, वैह जिनका अहाँ सभ अपन परमेश्‍वर कहैत छियनि। 55 अहाँ सभ हुनका चिन्‍हबे नहि करैत छी, मुदा हम हुनका चिन्‍हैत छी। जँ हम कहितहुँ जे हम हुनका नहि चिन्‍हैत छी, तँ हम अहीं सभ जकाँ झुट्ठा होइतहुँ, मुदा हम हुनका चिन्‍हिते छियनि, और हुनका वचन पर चलैत छी। 56 अहाँ सभक पिता अब्राहम हमरा देखबाक आशा मे बहुत आनन्‍दित छलाह। ओ देखबो कयलनि और बड्ड खुश भेलाह।” 57 तखन यहूदी सभ कहलथिन, “तोँ एखन पचासो वर्षक नहि छैं और तोँ अब्राहम केँ देखने छैं!” 58 यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे अब्राहमक जन्‍मो सँ पहिने, हम छी!” 59 एहि पर ओ सभ हुनका मारबाक लेल पाथर उठाबऽ लगलाह, मुदा यीशु नुका कऽ मन्‍दिर सँ बाहर भऽ कऽ चल गेलाह।

John 9

1 यीशु चलैत-चलैत एक आदमी केँ देखलनि जे जन्‍म सँ आन्‍हर छल। 2 हुनकर शिष्‍य सभ पुछलथिन, “गुरुजी, ई आदमी अपने पापक कारणेँ आन्‍हर जनमल की माय-बाबूक पापक कारणेँ?” 3 यीशु उत्तर देलथिन, “ने अपना पापक कारणेँ आ ने माय-बाबूक। ई एहि लेल भेल जे ओकरा मे परमेश्‍वरक काज प्रगट भऽ जानि। 4 जे हमरा पठौलनि, तिनकर काज अपना सभ केँ दिने मे करऽ पड़त। राति आबि रहल अछि, जखन केओ नहि काज कऽ सकैत अछि। 5 जाबत धरि हम संसार मे छी, ताबत धरि हम संसारक इजोत छी।” 6 एतबा कहि ओ जमीन पर थुकलनि, आओर थूक मे माटि सानि कऽ, ओहि आदमीक आँखि पर लगा देलथिन। 7 तखन ओकरा कहलथिन, “जा कऽ शिलोह कुण्‍ड मे धो लैह।” (शिलोहक अर्थ अछि “पठाओल गेल”।) तँ ओ आदमी जा कऽ आँखि धो लेलक आओर देखैत घर चल आयल। 8 ओकर पड़ोसी सभ आ जे लोक सभ ओकरा पहिने भीख मँगैत देखने छलैक कहलक, “की ई वैह नहि अछि जे पहिने बैसले-बैसले भीख मँगैत छल?” 9 किछु लोक कहलक, “हँ, वैह अछि।” दोसर लोक कहलक, “नहि, नहि! ओकरा सनक लगैत छैक लेकिन ओ अछि नहि।” मुदा ओ आदमी अपने कहलक, “हम वैह छी।” 10 तँ ओ सभ ओकरा कहलकैक, “तखन तोहर आँखि कोना खुजि गेलौ?” 11 ओ बाजल, “ओ यीशु नामक आदमी माटि सानि कऽ हमरा आँखि पर लगा कऽ कहलनि जे, जाह, शिलोह मे धो लैह। हम गेलहुँ, धो लेलहुँ, आओर देखऽ लगलहुँ।” 12 ओ सभ ओकरा पुछलकैक, “ओ कतऽ छथि?” ओ उत्तर देलकैक, “हम नहि जनैत छी।” 13 ओ आदमी जे पहिने आन्‍हर छल तकरा फरिसी सभ लग आनल गेलैक। 14 जाहि दिन यीशु माटि सानि कऽ ओकर आँखि खोलने छलथिन, से विश्राम-दिन छल। 15 तेँ फरिसी सभ ओहि आदमी केँ फेर पुछलथिन, “ई कोना भेल जे तोँ आब देखि रहल छह?” ओ बाजल, “ओ माटि सानि कऽ हमरा आँखि पर लगा देलनि, हम धो लेलहुँ, आओर आब देखैत छी।” 16 किछु फरिसी कहऽ लगलाह, “ई व्‍यक्‍ति परमेश्‍वरक दिस सँ नहि आयल अछि, कारण ओ विश्राम-दिन केँ नहि मानैत अछि।” मुदा दोसर सभ कहऽ लगलाह, “जे पापी होयत, से एहन चमत्‍कार वला चिन्‍ह सभ कोना देखा सकत?” एहि तरहेँ हुनका सभ मे मतभेद भऽ गेलनि। 17 आखिर मे ओ सभ ओहि आन्‍हर केँ पुछलथिन, “तोँ ओकरा बारे मे की कहैत छह? तोरे ने आँखि खोलि देलकह।” ओ उत्तर देलकनि, “ओ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता छथि।” 18 मुदा यहूदी सभ तखनो तक नहि पतिअयलाह जे ओ पहिने आन्‍हर छल, और आब देखऽ लागल अछि जखन तक ओ सभ ओकर माय-बाबू केँ बजा कऽ पुछि नहि लेलनि। 19 ओ सभ ओकरा सभ सँ पुछलथिन, “की ई तोरे सभक बेटा छह? ई वैह अछि जे तोरा सभक कहबाक अनुसार आन्‍हर जनमल? तँ ई एखन कोना देखि रहल अछि?” 20 ओकर माय-बाबू उत्तर देलकनि, “हम सभ जनैत छी जे ई हमरा सभक बालक अछि, और इहो जनैत छी जे आन्‍हर जनमल। 21 मुदा ई एखन कोना देखि रहल अछि, वा एकरा के आँखि खोलि देलथिन, से नहि जनैत छी। ओकरे पुछिऔक। ओ तँ बच्‍चा नहि अछि। ओ अपने कहत।” 22 ओकर माय-बाबू ई बात एहि लेल कहलक जे ओ सभ यहूदीक धर्मगुरु सभ सँ डेराइत छल, कारण, यहूदी अधिकारी सभ एकमत भऽ गेल रहय जे, जँ केओ कहत जे यीशु उद्धारकर्ता-मसीह अछि तँ ओकरा सभाघर सँ बारि देल जयतैक। 23 एही कारणेँ ओकर माय-बाबू कहने छलैक जे ओ बच्‍चा नहि अछि, ओकरे पुछिऔक। 24 ओ सभ फेर दोसर बेर ओहि आदमी केँ बजौलनि जे आन्‍हर छल, आओर ओकरा कहलथिन, “परमेश्‍वरक समक्ष सत्‍ये बाजह! हम सभ जनैत छी जे ई व्‍यक्‍ति पापी अछि।” 25 ओ बाजल, “ओ पापी छथि वा नहि, से हम नहि जनैत छी। मुदा एकटा बात हम जनैत छी—हम पहिने आन्‍हर छलहुँ और एखन देखैत छी।” 26 ओ सभ ओकरा पुछलथिन, “ओ तोरा की कयलकह? तोहर आँखि ओ कोना खोललकह?” 27 ओ उत्तर देलकनि, “हम अहाँ सभ केँ कहि देने छी, मुदा अहाँ सभ सुनिते नहि छी। अहाँ सभ फेर किएक सुनऽ चाहैत छी? की अहूँ सभ हुनकर शिष्‍य बनऽ चाहैत छी?” 28 ओ सभ ओकरा गारि पढ़ैत कहलथिन, “तोँही ओकर शिष्‍य छैं। हम सभ तँ मूसाक शिष्‍य छी। 29 हम सभ जनैत छी जे परमेश्‍वर मूसा सँ बाजल छलथिन, मुदा ई व्‍यक्‍ति जे अछि, से कतऽ सँ आयल तकर कोनो पता नहि।” 30 एहि पर ओ आदमी बाजल, “अरे, ई तँ बड्ड अद्‌भुत बात अछि! अहाँ सभ नहि जनैत छी जे ओ कतऽ सँ आयल छथि, और तैयो ओ हमर आँखि खोलि देलनि। 31 अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वर पापी सभक नहि सुनैत छथिन। जे हुनका मानैत छनि और हुनकर इच्‍छा पूरा करैत छनि, तकर बात परमेश्‍वर सुनैत छथिन। 32 सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ आइ तक ई कहियो सुनबा मे नहि आयल अछि जे केओ कोनो जन्‍म सँ आन्‍हर आदमीक आँखि केँ खोलने होअय। 33 ई आदमी जँ परमेश्‍वरक दिस सँ नहि आयल रहितथि तँ ओ किछु नहि कऽ सकितथि।” 34 एहि पर ओ सभ उत्तर देलथिन, “तोँ तँ बिलकुल पापे मे जनमल छैं आ तोँ हमरा सभ केँ सिखाबऽ चाहैत छैं?!” ई कहि ओकरा बाहर भगा देलनि। 35 यीशु जखन सुनलनि जे ओ सभ ओकरा भगा देने छैक तँ ओकरा भेँट कऽ कऽ पुछलथिन, “की तोँ मनुष्‍य-पुत्र पर विश्‍वास करैत छह?” 36 ओ उत्तर देलकनि, “मालिक, ओ के छथि? हमरा कहल जाओ, जाहि सँ हम हुनका पर विश्‍वास करियनि।” 37 यीशु ओकरा कहलथिन, “तोँ हुनका देखने छहुन और ओ वैह छथि जे एखनो तोरा सँ बात कऽ रहल छथुन।” 38 ओ कहलकनि, “प्रभु, हम विश्‍वास करैत छी!” और हुनकर पयर पर खसि कऽ गोड़ लगलकनि। 39 यीशु बजलाह, “हम एहि संसार मे न्‍यायक लेल आयल छी, जाहि सँ जे सभ नहि देखैत अछि, से सभ देखय, और जे सभ देखैत अछि, से सभ आन्‍हर भऽ जाय।” 40 किछु फरिसी जे हुनका लग मे ठाढ़ छलाह, से ई बात सुनि कहलथिन, “तँ हमहूँ सभ आन्‍हर छी की?” 41 यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जँ आन्‍हर रहितहुँ, तँ दोषी नहि होइतहुँ, मुदा अहाँ सभ कहैत छी जे, हम सभ देखैत छी, आ तेँ अहाँ सभ दोषी रहलहुँ।”

John 10

1 “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, जे द्वारि बाटे भेँड़शाला मे प्रवेश नहि करैत अछि, बल्‍कि देवाल पर चढ़ि कऽ कोनो दोसर बाटे प्रवेश करैत अछि, से चोर और डाकू होइत अछि। 2 जे द्वारि बाटे प्रवेश करैत छथि, से भेँड़ाक चरबाह छथि। 3 हुनका लेल द्वारपाल द्वारिक फट्टक खोलि दैत छनि, और हुनकर आवाज भेँड़ा चिन्‍हैत छनि। ओ अपना भेँड़ा केँ नाम लऽ-लऽ कऽ बजबैत छथि, और ओकरा सभ केँ बाहर लऽ जाइत छथि। 4 अपन सभ भेँड़ा केँ निकालि लेला पर ओ ओकरा सभक आगाँ-आगाँ चलैत छथि और ओ सभ हुनका पाछाँ लागि जाइत छनि किएक तँ ओ सभ हुनकर आवाज केँ चिन्‍हैत छनि। 5 ओ सभ कोनो अपरिचित आदमीक पाछाँ कहियो नहि जायत, बल्‍कि ओकरा लग सँ भागत, किएक तँ अपरिचित लोकक आवाज ओ सभ नहि चिन्‍हैत छैक।” 6 यीशु हुनका सभ केँ ई उदाहरण देलनि, मुदा हुनकर की कहबाक अर्थ छलनि, से ओ सभ नहि बुझलनि। 7 तेँ ओ हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे, भेँड़ा सभक लेल हमहीं द्वारि छी। 8 आरो सभ जे हमरा सँ पहिने आयल, से चोर और डाकू सभ छल, मुदा भेँड़ा ओकरा सभक बात नहि मानलक। 9 द्वारि हम छी। हमरा बाटे जे प्रवेश करत से सुरक्षित राखल जायत। ओ भीतर-बाहर अबैत-जाइत रहत और चारा पाओत। 10 चोर खाली चोरी करबाक, जान मारबाक, और नष्‍ट करबाक उद्देश्‍य सँ अबैत अछि। मुदा हम एहि लेल आयल छी जे मनुष्‍य जीवन प्राप्‍त करय और परिपूर्णता सँ प्राप्‍त करय। 11 “नीक चरबाह हम छी। नीक चरबाह भेँड़ाक लेल अपन प्राण दैत अछि। 12 जऽन-बोनिहार, जे ने चरबाह अछि आ ने भेँड़ाक मालिक अछि से चितुआ केँ अबैत देखि कऽ भेँड़ा सभ केँ छोड़ि कऽ भागि जाइत अछि। तखन चितुआ भेँड़ा केँ पकड़ऽ लगैत छैक और ओकरा सभ केँ छिड़िया दैत छैक। 13 जऽन-बोनिहार एहि लेल भागि जाइत अछि जे ओ खाली जऽन अछि और ओकरा भेँड़ाक लेल कोनो चिन्‍ता नहि रहैत छैक। 14 “नीक चरबाह हम छी। जहिना पिता हमरा चिन्‍हैत छथि और हम पिता केँ चिन्‍हैत छियनि, 15 तहिना हम अपना भेँड़ा सभ केँ चिन्‍हैत छी और ओ सभ हमरा चिन्‍हैत अछि। और भेँड़ा सभक लेल हम अपन प्राण दैत छी। 16 हमरा आरो भेँड़ा अछि जे एहि भेँड़शालाक नहि अछि। ओकरो सभ केँ हमरा लयबाक अछि। ओहो सभ हमर आवाज सुनत। तखन एके झुण्‍ड और एके चरबाह होयत। 17 “पिता हमरा सँ एहि लेल प्रेम करैत छथि जे हम अपन प्राण दैत छी जाहि सँ हम ओकरा फेर लऽ ली। 18 केओ हमर प्राण केँ हमरा सँ नहि छिनि लैत अछि, बल्‍कि हम अपना इच्‍छा सँ दऽ रहल छी। हमरा अपन जान देबाक अधिकार अछि और ओकरा फेर लऽ लेबाक अधिकार सेहो अछि। ई आज्ञा हम अपना पिता सँ प्राप्‍त कयने छी।” 19 एहि बात सभक कारणेँ यहूदी सभ मे फेर मतभेद भऽ गेलनि। 20 बहुत लोक कहैत छलाह, “एकरा मे दुष्‍टात्‍मा छैक। ई बताह अछि! एकर बात किएक सुनबैक?” 21 मुदा दोसर सभ कहैत छलाह, “जकरा मे दुष्‍टात्‍मा छैक, से की एहन बात सभ कहत? की दुष्‍टात्‍मा कतौ आन्‍हरक आँखि खोलि सकैत अछि?” 22 तखन यरूशलेम मे “मन्‍दिरक समर्पण” नामक पाबनि आबि गेल। 23 जाड़क मास छल, और यीशु मन्‍दिर मे ओहि असोरा पर टहलैत छलाह जे “सुलेमानक असोरा” कहबैत अछि। 24 यहूदी सभ हुनका चारू कात सँ घेरि कऽ कहलथिन, “कहिया तक अहाँ हमरा सभ केँ दुबिधा मे रखने रहब? अहाँ जँ परमेश्‍वरक मसीह छी तँ हमरा सभ केँ स्‍पष्‍ट कहि दिअ।” 25 यीशु बजलाह, “हम अहाँ सभ केँ कहिए देने छी, मुदा अहाँ सभ विश्‍वास नहि करैत छी। जे काज हम अपना पिताक नाम सँ करैत छी, से हमर गवाही दैत अछि। 26 मुदा अहाँ सभ विश्‍वास नहि करैत छी किएक तँ अहाँ सभ हमर भेँड़ा नहि छी। 27 हमर भेँड़ा हमर आवाज सुनैत अछि। हम ओकरा सभ केँ चिन्‍हैत छी और ओ सभ हमरा पाछाँ लागि जाइत अछि। 28 हम ओकरा सभ केँ अनन्‍त जीवन दैत छी और ओ सभ कहियो नाश नहि होयत। हमरा हाथ सँ केओ ओकरा सभ केँ नहि छिनि लेत। 29 हमर पिता, जे ओकरा सभ केँ हमरा देने छथि, से आरो सभ सँ शक्‍तिशाली छथि, तेँ हमरा पिताक हाथ सँ ओकरा सभ केँ केओ नहि छिनि सकैत अछि। 30 हम और पिता एक छी।” 31 एहि पर यहूदी सभ फेर हुनका मारि देबाक लेल पाथर उठाबऽ लगलाह, 32 मुदा यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ पिताक तरफ सँ बहुत नीक-नीक काज कऽ कऽ देखा देलहुँ। एहि सभ मे सँ कोन काजक लेल हमरा मारि देबऽ चाहैत छी?” 33 यहूदी सभ हुनका उत्तर देलथिन, “कोनो नीक काजक लेल तोरा नहि मारऽ चाहैत छिऔ, बल्‍कि परमेश्‍वरक निन्‍दाक लेल, कारण तोँ मनुष्‍ये भऽ कऽ अपना केँ परमेश्‍वर कहैत छैं।” 34 यीशु बजलाह, “की अहाँ सभक धर्मशास्‍त्र मे नहि लिखल अछि जे, ‘हम कहलहुँ जे तोँ सभ ईश्‍वर छह’ ? 35 जँ तकरा सभ केँ ओ ‘ईश्‍वर’ कहलथिन जकरा सभ केँ परमेश्‍वरक वचन देल गेल—और धर्मशास्‍त्र कहियो गलत नहि ठहरि सकैत अछि— 36 तँ जकरा पिता अपना पवित्र काजक लेल चुनि कऽ संसार मे पठौलथिन, तकरा पर परमेश्‍वरक निन्‍दा करबाक दोष किएक लगबैत छी जखन ओ कहैत अछि जे, ‘हम परमेश्‍वरक पुत्र छी’? 37 जँ हम अपना पिताक काज नहि कऽ रहल छी, तँ हमरा पर विश्‍वास नहि करू। 38 मुदा जँ हम कऽ रहल छी, तँ हमरा पर जँ नहिओ विश्‍वास करब, तँ हमर काज पर विश्‍वास करू, जाहि सँ अहाँ सभ जानब और बुझब जे पिता हमरा मे छथि और हम पिता मे छी।” 39 ओ सभ हुनका फेर पकड़ऽ चाहैत छलनि, मुदा ओ हुनका सभक हाथ सँ बचि कऽ निकलि गेलाह। 40 तखन यीशु फेर यरदन नदीक ओहि पार गेलाह जाहिठाम यूहन्‍ना शुरू मे बपतिस्‍मा दैत छलाह। ओ ओहिठाम रहलाह 41 और बहुत लोक हुनका लग आयल। ओ सभ कहलक, “ओना तँ यूहन्‍ना कोनो चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह नहि देखौलनि, तैयो जतेक बात ओ एहि व्‍यक्‍तिक बारे मे कहलनि, से सभ सत्‍य छल।” 42 और ओहिठाम बहुत लोक यीशु पर विश्‍वास कयलकनि। #

John 11

1 एक लाजर नामक आदमी, जे बेतनिया गामक छलाह, बहुत बिमार भऽ गेल छलाह। बेतनिया गाम मरियम आओर हुनकर बहिन मार्थाक गाम छल। 2 ई मरियम वैह छथि जे यीशुक पयर पर सुगन्‍धित तेल ढारि कऽ हुनकर पयर अपना केश लऽ कऽ पोछि देलनि। तँ लाजर एहि मरियमक भाय छलाह। 3 दूनू बहिन यीशु केँ खबरि पठा देलनि जे, “प्रभु, अहाँक प्रिय मित्र बिमार अछि।” 4 यीशु ई सुनि कऽ बजलाह, “एहि बिमारीक अन्‍त मृत्‍यु नहि होयत। ई एहि लेल भेल जे परमेश्‍वरक महिमा प्रगट होयतनि, और जाहि सँ एहि द्वारा परमेश्‍वरक पुत्रक महिमा प्रगट होयत।” 5 यीशु मार्था, हुनकर बहिन मरियम, और लाजर सँ बहुत प्रेम करैत छलथिन, 6 मुदा तैयो ई खबरि जखन सुनलनि, जे लाजर बिमार छथि, तखन ओ जाहिठाम छलाह ताहिठाम दू दिन आओर रहि गेलाह। 7 तखन ओ अपन शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आब फेर यहूदिया प्रदेश चलू।” 8 ओ सभ कहलथिन, “गुरुजी, किछुए दिन पहिने यहूदी सभ पाथर मारि कऽ अहाँ केँ मारि देबऽ चाहैत छलाह, आ तैयो अहाँ ओतऽ फेर जाय चाहैत छी?” 9 यीशु बजलाह, “की दिन मे बारह घण्‍टा नहि होइत छैक? जँ केओ दिन मे चलैत अछि तँ ओकरा ठेस नहि लगैत छैक, कारण ओ एहि संसारक इजोत केँ देखैत अछि। 10 मुदा राति मे जँ चलैत अछि तँ ठेस लगैत छैक कारण ओकरा कोनो इजोत नहि छैक।” 11 ई कहि यीशु हुनका सभ केँ आगाँ कहलथिन, “अपना सभक मित्र लाजर सुति रहलाह, मुदा हम हुनका जगयबाक लेल जाइत छी।” 12 शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन, “प्रभु, जँ ओ सुति रहल छथि तँ ओ नीकैं भऽ जयताह।” 13 यीशु हुनकर मृत्‍युक सम्‍बन्‍ध मे ई कहने छलथिन मुदा शिष्‍य सभ बुझलनि जे ओ स्‍वभाविक निन्‍दक सम्‍बन्‍ध मे कहि रहल छथि। 14 तखन यीशु हुनका सभ केँ स्‍पष्‍ट कहलथिन, “लाजर मरि गेल छथि। 15 और अहाँ सभक कारणेँ हमरा खुशी अछि जे हम ओतऽ नहि छलहुँ, जाहि सँ अहाँ सभ विश्‍वास करी। मुदा आउ, अपना सभ आब हुनका लग चली।” 16 तखन थोमा, जे “जौंआ” कहबैत छथि, से आरो शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “आउ, अपनो सभ हिनका संग मरऽ लेल चली।” 17 ओतऽ पहुँचला पर यीशु केँ पता लगलनि जे लाजर केँ कबर मे रखला चारि दिन भऽ गेल अछि। 18 बेतनिया यरूशलेम सँ एक कोस सँ कनेक कम दूर छल, 19 और बहुत यहूदी लोक मार्था आओर मरियमक भायक मरला पर सान्‍त्‍वना देबाक लेल ह